19/09/2026
क्या कभी सोचा है कि अगर हमें पता चल जाए कि हमारे पास जीने के लिए बहुत कम दिन बचे हैं, तो हम क्या करेंगे?
कुछ दिन पहले मैंने डॉ. पॉल कलानिधि की एक सच्ची किताब पढ़ी, जिसका नाम है 'When Breath Becomes Air'. इसे पढ़ने के बाद मैं काफी देर तक सोचता रह गया.
पॉल एक बहुत बड़े न्यूरोसर्जन (दिमाग के डॉक्टर) थे, जो रोज़ दूसरों की जान बचाते थे. लेकिन जब वो सिर्फ 36 साल के थे और उनका करियर सबसे ऊंचाइयों पर था, तब उन्हें पता चला कि उन्हें फेफड़ों का कैंसर है, वो भी आखिरी स्टेज का. जो डॉक्टर कल तक दूसरों का इलाज करता था, वो खुद बिस्तर पर आ गया.
इस किताब से मुझे 3 सबसे ज़रूरी बातें सीखने को मिलीं:
✨ भविष्य के चक्कर में आज को मत खोओ: डॉक्टर पॉल ने लिखा कि वो आगे बढ़ने की चाहत में इतने बिजी थे कि आज को जीना ही भूल गए. हम सब भी यही गलती करते हैं—उस 'कल' के पीछे भागते हैं जिसका कोई भरोसा नहीं है.
✨ जिंदगी लंबी नहीं, गहरी होनी चाहिए: जब पॉल को पता चला कि उनके पास बहुत कम समय है, तो उन्होंने रोने-धोने के बजाय अपनी छोटी सी बेटी और पत्नी के साथ हर पल को खुशी से जिया. मायने यह नहीं रखता कि आप कितने साल जिए, मायने यह रखता है कि आप उन सालों में कितना खुश रहे.
✨ मुश्किलों को स्वीकार करना सीखो: जो चीज़ें हमारे हाथ में नहीं हैं, उन्हें मान लेने से मन शांत हो जाता है. पॉल ने आखिरी सांस तक हिम्मत नहीं हारी और अपनी कहानी से करोड़ों लोगों को प्रेरित किया.