29/06/2026
*फाइब्रॉएड (Fibroids), क्या बिना सर्जरी ठीक हो सकता है?*
*Dr S M Bhatt*
Ayurvedic consultant mayank Clinic Meerut
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Diabetes expert
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फाइबरोइड जिसे आम भाषा में बच्चेदानी या गर्भाशय की गांठ/रसौली भी कहा जाता है, महिलाओं के गर्भाशय की दीवारों पर पनपने वाले गैर-कैंसरयुक्त (Non-cancerous/Benign) ट्यूमर होते हैं. आयुर्वेद में इसे 'गर्भाशयगत ग्रंथि' (Garbhashayagata Granthi) कहा जाता है, जो मुख्य रूप से कफ (Kapha) और वात (Vata) दोष के असंतुलन तथा शरीर में टॉक्सिन्स (Ama) जमा होने के कारण होती है.नीचे फाइब्रॉएड के प्रमुख लक्षण, आयुर्वेदिक घरेलू उपाय और प्रमुख आयुर्वेदिक दवाओं की पूरी जानकारी दी गई है।
👉फाइब्रॉएड के लक्षण (Symptoms of Fibroids)फाइब्रॉएड का आकार बहुत छोटे दाने से लेकर बड़े ट्यूमर जैसा हो सकता है. इसके मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं:
✅भारी मासिक धर्म: पीरियड्स के दौरान बहुत अधिक ब्लीडिंग होना या लंबे समय तक पीरियड्स चलना.
✅पेट के निचले हिस्से में दर्द: पेल्विक एरिया (पेड़ू) और पीठ के निचले हिस्से में लगातार भारीपन या दर्द रहना.
✅बार-बार पेशाब आना: जब गांठ का आकार बढ़ता है, तो यह मूत्राशय (Bladder) पर दबाव डालती है, जिससे बार-बार यूरिन पास करना पड़ता है.
✅कब्ज की समस्या: मलाशय (Re**um) पर गांठ का दबाव पड़ने से पेट साफ होने में दिक्कत आती है.
👉गर्भधारण में परेशानी:
✅फाइब्रॉएड के कारण कुछ महिलाओं को इनफर्टिलिटी (बांझपन) या बार-बार गर्भपात की समस्या हो सकती है.
👉फाइब्रॉएड के लिए आयुर्वेदिक उपाय (Home Remedies)आयुर्वेदिक घरेलू उपचार शरीर को डिटॉक्स करने और हार्मोनल संतुलन को सुधारने में मदद करते हैं:
✅त्रिफला चूर्ण: रोज सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ त्रिफला चूर्ण (आँवला, हरड़, बहेड़ा) का सेवन करें। यह शरीर से हानिकारक टॉक्सिन्स (Ama) को बाहर निकालता है और फाइब्रॉएड की ग्रोथ रोकता है.
✅अशोक की छाल का काढ़ा: जिन महिलाओं को भारी ब्लीडिंग होती है, उनके लिए अशोक छाल का काढ़ा बेहद असरदार है। यह ब्लड फ्लो को नियंत्रित करता है और यूटरस की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है.
✅हल्दी वाला दूध: हल्दी में मौजूद 'करक्यूमिन' सूजन और गांठों को सिकोड़ने में मददगार है. रात को गुनगुने दूध में एक चुटकी हल्दी मिलाकर पिएं.
✅कैस्टर ऑयल पैक (अरंडी का तेल): एक सूती कपड़े को अरंडी के तेल में भिगोकर पेट के निचले हिस्से पर रखें और ऊपर से गर्म पानी की बोतल से 30-40 मिनट सिकाई करें. यह रक्त संचार बढ़ाकर गांठ को घोलने में मदद करता है.
✅अलसी के बीज (Flaxseeds): अलसी का पाउडर पानी या दही के साथ लें. यह शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर को संतुलित रखता है.आयुर्वेदिक दवाएं (Ayurvedic Medicines)
✅आयुर्वेद में 'लेखन' (Scraping/गांठ को सुखाने वाले) गुणों से भरपूर क्लासिकल दवाओं का उपयोग किया जाता है। किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक (डॉक्टर) की सलाह पर आप निम्नलिखित दवाएं ले सकती हैं:
✅कांचनार गुग्गुल (Kanchnar Guggulu): यह आयुर्वेद की सबसे मुख्य दवा है जो शरीर में किसी भी तरह की गांठ, सिस्ट या ट्यूमर के आकार को कम करने और उसे धीरे-धीरे पूरी तरह सुखाने के लिए जानी जाती है.
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