09/05/2026
*विद्या विनयोपेतो हरति*
*न चेतांसि कस्य मनुजस्य l*
*कांचन मणि संयोगो*
*न जनयति कस्य लोचनानन्दम् ll*
भावार्थ -- जिस प्रकार स्वर्ण और मणि का संयोग हर किसी की आंखों को सुख देता है, अर्थात् सुंदर लगता है। ठीक इसी प्रकार विद्या एवं विनयशील व्यक्ति हर किसी के मन को प्रभावित करता है।