11/09/2026
श्रीनाथ पीठाधीश्वर आचार्य स्वामी श्री जीतेंद्रनाथ महाराज का गोतीर्थ गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र देवलापार में शुभागमन
श्रीनाथ पीठाधीश्वर आचार्य स्वामी परमपूज्य श्री जीतेंद्रनाथ महाराज का कल गोतीर्थ गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र, देवलापार में शुभागमन हुआ। महाराज श्री के आगमन से केंद्र परिसर में आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायी वातावरण निर्मित हुआ। उनका पारंपरिक रीति से स्वागत कर सभी ने उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
महाराज श्री का आश्रम सुरजी अंजनीग्राम, जिला अमरावती में स्थित है। यह स्थान संत एकनाथ महाराज जी की शिष्य परंपरा का लगभग छह सौ वर्ष पुराना पवित्र पीठस्थान है। महाराजश्री के देश-विदेश में लाखों श्रद्धालु एवं शिष्य हैं। गोसेवा और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति उनकी गहरी आस्था एवं प्रतिबद्धता है।
गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र के माननीय अध्यक्ष श्री पद्मेश गुप्ता जी ने महाराज श्री को केंद्र में पधारने का विशेष निमंत्रण दिया था। इसी निमंत्रण को स्वीकार करते हुए महाराज श्री राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक माननीय श्री प्रशांत हरतालकर जी के साथ देवलापार पधारे।
इस अवसर पर माननीय अध्यक्ष श्री पद्मेश गुप्ता जी ने महाराज श्री को गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र की विभिन्न गतिविधियों, अनुसंधान कार्यों, नवाचारों तथा गोआधारित अर्थव्यवस्था के माध्यम से ग्रामीण एवं वनवासी समाज को जोड़ने के प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी। केंद्र में गोवंश संरक्षण एवं संवर्धन के साथ पंचगव्य चिकित्सा, जैविक एवं प्राकृतिक कृषि, गोमय आधारित उत्पाद, जैविक खाद, ऊर्जा तथा विभिन्न अनुसंधान एवं प्रशिक्षण उपक्रमों के बारे में भी उन्हें अवगत कराया गया।
महाराज श्री ने विशेष रुचि लेते हुए केंद्र स्थित पंचगव्य उत्पाद केंद्र का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न गोमय एवं पंचगव्य उत्पादों के निर्माण, उनकी गुणवत्ता तथा उपयोगिता की जानकारी स्वयं ली। विशेष रूप से ग्रामीण एवं वनवासी महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वावलंबन और रोजगार से जोड़ने के लिए चलाए जा रहे उपक्रमों की उन्होंने सराहना की। महाराज श्री ने कहा कि गोआधारित उत्पादों के माध्यम से परंपरा, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था—इन तीनों को एक साथ सशक्त करने का यह महत्वपूर्ण प्रयास है।
गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र में चल रहे विभिन्न नवाचार एवं अनुसंधान प्रकल्पों को भी महाराज श्री ने अत्यंत उत्सुकता से जाना। विशेष रूप से बैल-चालित ऊर्जा एवं ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों से संबंधित अनुसंधान ने उनका ध्यान आकर्षित किया। पारंपरिक भारतीय ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय से गोवंश को केवल संरक्षण का विषय न मानकर ऊर्जा, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दृष्टि से उपयोगी बनाने के प्रयासों को उन्होंने महत्वपूर्ण बताया।
इसी प्रकार जैविक खाद प्रकल्प की जानकारी लेते हुए महाराज श्री ने रासायनिक कृषि के दुष्परिणामों की पृष्ठभूमि में प्राकृतिक एवं जैविक विकल्पों की बढ़ती आवश्यकता को रेखांकित किया। गोवंश से प्राप्त संसाधनों का वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित उपयोग कर ऐसी जैविक खाद विकसित करना, जो भूमि की उर्वरता बनाए रखने के साथ किसानों को टिकाऊ कृषि की दिशा में आगे ले जाए, वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है—इस दृष्टि से उन्होंने इस प्रकल्प की प्रासंगिकता को सराहा।
महाराज श्री ने गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र में चल रहे कार्यों को गोसेवा, ग्राम विकास, पर्यावरण संरक्षण, स्वावलंबन और भारतीय ज्ञान परंपरा के वैज्ञानिक पुनर्स्थापन का समन्वित प्रयास बताते हुए केंद्र के कार्यकर्ताओं को आशीर्वाद प्रदान किया।
इस शुभ अवसर पर उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों ने महाराज श्री के मार्गदर्शन और आशीर्वाद को अपने लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। महाराज श्री का यह शुभागमन गोविज्ञान अनुसंधान केंद्र के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा, प्रेरणा और कार्य को नई दिशा प्रदान करने वाला रहा।