Integrated pathy system

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Integrated pathy system here i am trying to present dietary & lifestyle modifications according to various disease. but i recommend don't diagnosis & treat ur diseases.

purposes of this page are to make aware peoples about common illness & it's management with integrated pathy ( Ayurveda & allopathy)


May almighty give me strength to serve Sufferers. as most of the times this part get neglected while taking opd consultation. to bulid good immune system, control pain without taking any painkillers medicine, manage fatigue with natural ways are good for healthy status. once diagnosis is established by a qualified physician/ surgeon u may follow advice. in case of any doubt consult ur doctor. these advices are for educational purposes.

मेडिकल केस स्टडी (Medical Case Study)रोगी का सामान्य विवरण (Patient Demographics)* आयु / लिंग: 27 वर्ष / पुरुष (नवयुवक)*...
06/08/2026

मेडिकल केस स्टडी (Medical Case Study)
रोगी का सामान्य विवरण (Patient Demographics)

* आयु / लिंग: 27 वर्ष / पुरुष (नवयुवक)
* क्लीनिक में आने की तिथि: 04 अगस्त, 2026
* रोग निदान की पुष्टि की तिथि-05 अगस्त 2026
चिकित्सक- डॉ अंकुर शर्मा
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मुख्य शिकायतें (Chief Complaints)

* विगत 1 माह से लगातार तेज बुखार (104°F से 105°F)
* 1 माह से खांसी और जुकाम की समस्या
* अचानक वजन में अत्यधिक गिरावट (कमजोरी के साथ)
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बीमारी का इतिहास (History of Present Illness)
27 वर्षीय पुरुष मरीज को पिछले एक महीने से 104°F से 105°F का तीव्र बुखार आ रहा था। इसके साथ ही उसे खांसी और जुकाम की भी शिकायत थी। इन लक्षणों के कारण उसने शुरुआत में गाजियाबाद के स्थानीय चिकित्सकों से परामर्श लिया। वहां डॉक्टरों ने उसे टाइफाइड बुखार (Typhoid fever) से ग्रसित बताया और उसी का उपचार शुरू किया।
उपचार के बावजूद रोगी के स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ। बुखार एक महीने तक लगातार बना रहा, जिसके कारण मरीज का वजन तेजी से घटने लगा और वह अत्यंत कमजोर हो गया। गाजियाबाद में कोई आराम न मिलने पर, उसकी दादी जी उसे 04.08.2026 को हमारे क्लीनिक लेकर आईं।
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शारीरिक परीक्षण (Clinical Examination)

* शारीरिक तापमान: जांच के दौरान शरीर का तापमान 105°F पाया गया (अत्यधिक तेज बुखार)।
* वजन: पिछले एक माह में मरीज के शरीर का 10% वजन कम हो चुका था।
* छाती का परीक्षण (Chest Exam): स्टेथस्कोप से जांच करने पर मरीज की छाती में इंफेक्शन (संक्रमण) के स्पष्ट संकेत मिले।

क्लिनिकल निष्कर्ष (Clinical Impression): टाइफाइड के उपचार की विफलता, एक महीने से निरंतर 105°F बुखार और छाती के संक्रमण को देखते हुए तपेदिक (Tuberculosis/टीबी) होने की अत्यधिक संभावना व्यक्त की गई।
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निदानात्मक जांच रिपोर्ट (Diagnostic Investigations)
1. बलगम की जांच (Sputum Examination)
* परिणाम: बलगम में टीबी के बैक्टीरिया (Mycobacterium tuberculosis) की पुष्टि हुई।

2. छाती का एक्स-रे (Chest X-Ray)

* परिणाम: फेफड़ों के दाहिने ऊपरी और मध्य हिस्से (Right Upper & Mid Zone) में टीबी के घाव/कैविटी (Cavities) पाए गए।

3. पेट का अल्ट्रासाउंड (USG Abdomen)

* परिणाम:
* नेक्रोटिक मेसेन्टेरिक लिम्फैडेनाइटिस (Necrotic Mesenteric Lymphadenitis) की पुष्टि हुई, जिसका अर्थ है पेट की ग्रंथियों में सूजन और सड़न।
* इलियोसेकल जंक्शन में थिकनिंग (Thickening at Ileocecal Junction) मिली, यानी आंतों का वह हिस्सा जहां छोटी और बड़ी आंत मिलती हैं, वहां सूजन और मोटाई पाई गई।
* निष्कर्ष: यह रिपोर्ट स्पष्ट रूप से पेट की तपेदिक (Abdominal TB) की ओर इशारा करती है।

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अंतिम निदान (Final Diagnosis)
यह डिसैमिनेटेड ट्यूबरकुलोसिस (Disseminated Tuberculosis) का मामला है, जिसमें शरीर के एक से अधिक अंग प्रभावित हैं:

1. पल्मोनरी ट्यूबरकुलोसिस (Pulmonary TB - फेफड़ों की टीबी, कैविटी के साथ)
2. एब्डोमिनल ट्यूबरकुलोसिस (Abdominal TB - पेट और आंतों की टीबी)

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--डॉक्टर अंकुर शर्मा
*शर्मा मेडिकल सेटंर*
*(दिल्ली सरकार द्वारा अधिकृत
DBCP पंजीकरण संख्या ~A5978)*
*C1/100,मधु विहार* *द्वारका सेक्टर 3 नई दिल्ली मोबाइल नंबर* *- whatsapp* *9968025608*

चिकित्सा क्षेत्र में वर्ष 2006 से कार्यरत (दीघ् अनुभवी कुशल चिकित्सक-20 वर्षों का विशाल चिकित्सीय अनुभव )

(🌟🌟🌟🌟🌟5star rating clinic ~google review https://maps.app.goo.gl/t1kE5rDDLCmdbijVA )

क्लीनिक तक पहुंचने के लिए नीचे दिए गए गूगल मैप लिंक पर क्लिक करें।
इसमें आपकी लोकेशन से क्लिनिक तक का रास्ता आ जाएगा।
C-1/100, street number 4, Solanki market, Madhu vihar, dwarka sector 3, New Delhi.-110059
https://maps.app.goo.gl/t1kE5rDDLCmdbijVA

क्लीनिक में परामर्श उपचार का सामान्य समय--
सुबह 10:00 से 1: 30 तक
सायं काल 6:00 से 9:30 तक
रविवार सायंकाल अवकाश होता है।
आकस्मिक अवकाश होने पर व्हाट्सएप स्टेटस पर अपडेट किया जाता है।
रिपोर्ट्स प्राप्त करने का समय
सायंकाल 8pm (सोमवार से शनिवार)

सुविधाएं 👉 –

विभिन्न रोगों का सटीक निदान एवं प्रबंधन:

काय चिकित्सा-
🫁 श्वसन संस्थान रोग (Respiratory)
👂 कर्ण, नासा एवं कंठ रोग (ENT)
🫀 हृदय एवं परिसंचरण तंत्र रोग (Cardiovascular)
🧫 मूत्र-जनन अंग विकार (Genitourinary)
🧬पुरुष एवं महिला बांझपन (Infertility) एवं यौन रोग चिकित्सा(Male Sexual Dysfunction)
🦴 पेशी-कंकाल प्रणाली रोग (Musculoskeletal
)🧠 तंत्रिका तंत्र रोग (Neurological)
🪵 जठरांत्र एवं पाचन रोग (Gastrointestinal)
👩 स्त्री रोग (Gynecological)
🧴 त्वचा एवं चर्म रोग (Dermatological)
🩸 अंतःस्रावी ग्रंथि विकार (Endocrinology)
🛡️ स्वप्रतिरक्षित रोग (Autoimmune)
👶 बाल रोग (Pediatrics)
👵 बुजुर्गों के रोग (Geriatrics)

—------------------------------------------------------
⚡ त्वरित जांच सुविधाएं (Instant Tests)
🩸 त्वरित ब्लड शुगर जांच
🫀 हृदय की ईसीजी (ECG) एवं कार्डियक मार्कर जांच
🫁 पल्स ऑक्सीमीटरी (ऑक्सीजन जांच)

🧪 लैब एवं थेरेपी सेवाएं
🔬 पंच बायोप्सी (पुराने चर्म रोग की सटीक पहचान हेतु)
💉 सैंपल कलेक्शन (रक्त, मूत्र, मल, बलगम जांच के लिए)
🌬️ नेबुलाइजेशन एवं कान की डिजिटल ऑटोस्कोपी जांच
☀️ अल्ट्रावायलेट (UV) एवं इंफ्रारेड रे थेरेपी

✂️ सर्जिकल केयर🩹 माइनर सर्जिकल प्रोसीजर (घाव एवं अग्नि दग्ध/बर्न चिकित्सा)

✴️प्रतिदिन ओपीडी परामर्श
✴️त्वरित रक्त शुगर जांच,
✴️हार्ट अटैक के निदान हेतु हृदय की ईसीजी, त्वरित कार्डियक मार्कर जांच, ✴️पल्स ऑक्सीमीटरी,
✴️नेबुलाइजेशन,
✴️कान की डिजिटल ऑटोस्कोपी जांच,
✴️अल्ट्रावायलेट किरण एवं इंफ्रारेड रेड थेरेपी ,
✴️रक्त मल मूत्र बलगम इत्यादि की पैथोलॉजिकल जांच हेतु सैंपल कलेक्शन
✴️माइनर सर्जिकल प्रोसीजर क्षति ग्रस्त ऊतकों एवं अग्नि दग्ध चिकित्सा।
✴️ पुराने चर्म रोग की वास्तविक पहचान हेतु clinic पर पंच बायोप्सी जांच की सुविधा उपलब्ध है

नोट 👉-

केवल जाँच रिपोर्टों के आधार पर, बिना उचित नैदानिक परीक्षण (क्लिनिकल परीक्षण) के किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुँचना संभव नहीं है। कृपया आगे की जाँच एवं मूल्यांकन हेतु निर्धारित समय पर क्लिनिक में अवश्य पधारें।कृपया परामर्श के समय क्लिनिक में अपने सभी पूर्व चिकित्सा अभिलेख साथ लेकर आएँ, जिनमें पुराने प्रिस्क्रिप्शन, पैथोलॉजिकल एवं रेडियोलॉजिकल जाँच रिपोर्ट्स तथा ली जा रही/ली गई दवाइयों का विवरण शामिल हो।

क्लीनिक में परामर्श एवं उपचार लेने के उपरांत रोग अवस्था में होने वाले सुधार/परिवर्तन/यथा स्थिति इत्यादि व्हाट्सएप पर अवगत करा सकते हैं जिससे चिकित्सा सम्बन्धित मार्गदर्शन किया जा सके । हम कामना करते हैं कि आप शीघ्र ही निरोगी हो एवम उत्तम स्वास्थ्य को प्राप्त करें ।
धन्यवाद

नीचे रोगी (Patient) के लिए Do’s & Don’ts दिए जा रहे हैं, जिनका पालन करने से डॉक्टर को सही समय पर सही जाँच (Diagnosis) और उपचार (Treatment) करने में देरी नहीं होती।

✅ रोगी के लिए Do’s (क्या करें)
1️⃣ पूरी जानकारी सही दें
अपने लक्षण कब कितने मिनट/ घंटे / दिन/ महीनों/ वर्षों पूर्व शुरू हुए, कैसे बढ़े, कितनी तीव्रता है – स्पष्ट रूप से बताएं । कौनसे लक्षण किस लक्षण के बाद हुए यह भी बताना जरूरी होता है। किन दवाओं परहेज मौसम,वातावरण से लक्षण कम होते हैं या उनमें वृद्धि होती हैं यह भी बताना चाहिए
पहले से हो रही बीमारियाँ (डायबिटीज, BP, थायरॉइड, TB, अस्थमा आदि) जरूर बताएं
2️⃣ सभी रिपोर्ट साथ लाएँ
पुराने ब्लड टेस्ट, X-ray, USG, CT/MRI, ECG, बायोप्सी रिपोर्ट
पिछले डॉक्टरों की प्रिस्क्रिप्शन स्लिप
3️⃣ पहले से सेवन की जा रही दवाओं की पूरी सूची दें
एलोपैथिक, आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक, देसी दवा
सप्लीमेंट्स, दर्दनाशक, स्टेरॉयड की जानकारी
दवा की डोज़ और अवधि
4️⃣ एलर्जी और साइड इफेक्ट बताएं
किसी दवा, इंजेक्शन, खाने से एलर्जी
पहले किसी दवा से खराब अनुभव हुआ हो
5️⃣ एडिक्शन मादक पदार्थों के सेवन संबंधित प्रश्न का सही उत्तर दें
धूम्रपान, शराब, तंबाकू, नशे की आदत
गर्भावस्था / स्तनपान की स्थिति (महिलाओं में)
6️⃣ जांच से पहले निर्देशों का पालन करें
फास्टिंग ब्लड टेस्ट हो तो खाली पेट आएं। पीपी ब्लड ग्लूकोज जांच हेतु खाने के शुरु करने के समय से 120मिनट पश्चात जांच करवाए। अतः इस समय से थोड़ा पूर्व ही क्लीनिक पर उपस्थित हो जाये।
यूरिन/स्टूल सैंपल 20-30ml की मात्रा में अच्छी प्रकार से कंटेनर बंद करके दें।यह सुनिश्चित करे कि पैथोलॉजिकल रेडियोलॉजिकल रिपोर्ट्स उच्चतम गुणवत्ता की ही हो क्योंकि क्लिनिकल एग्जामिनेशन एवं पैथोलॉजिकल रेडियोलॉजिकल रिपोर्ट्स इन सबका निचोड़ रोग की पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं और उसी के अनुरूप उपचार होता हैं।

❌ रोगी के लिए Don’ts (क्या न करें)
1️⃣ लक्षण छुपाएँ नहीं
दर्द, बुखार, वजन घटना, खून आना, सूजन को नजरअंदाज न करें
“शर्म” या “डर” की वजह से जानकारी न छुपाएँ
2️⃣ खुद से दवा न बदलें
डॉक्टर से पूछे बिना दवा बंद या शुरू न करें
इंटरनेट, जानकार दोस्त या पड़ोसी की सलाह से दवा न लें
3️⃣ रिपोर्ट छुपाएँ नहीं
नॉर्मल या एबनॉर्मल कोई भी रिपोर्ट छुपाना गलत है
पुरानी बीमारी का इतिहास न छुपाएँ
4️⃣ डॉक्टर को जल्दबाजी में न रोकें
पूरी बात सुने बिना, निर्णय न करें
जांच कराने में, बिना सटीक कारण के ,बिना सोचे समझे मना न करें
5️⃣ गलत या अस्पष्ट जानकारी न दें
उम्र, वजन, बीमारी की अवधि की सही सूचना दे।
शराब/तंबाकू सेवन से इनकार करना जबकि लेते हों

🩺 रोगी को समझना चाहिए
✔ सही जानकारी = सही जांच
✔ सही जांच = सही इलाज
✔ देर या गलत जानकारी = बीमारी बढ़ने का खतरा

📌 मरीजों के लिए संदेश
“डॉक्टर आपका इलाज तभी सही कर सकता है, जब आप अपनी स्वास्थ्य समस्याओं को स्पष्ट रूप से बताने में सहयोग करेंगे।
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विभिन्न प्रकार के रोगों के निदान एवं उनके सफल उपचार संबंधित फीडबैक वीडियो देखने के लिए तथा विभिन्न रोगों के लक्षण कॉम्प्लिकेशंस परहेज लाइफस्टाइल में बदलाव जानने हेतु निम्नलिखित यूट्यूब लिंक पर क्लिक करें।

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क्लीनिक में उपचार लेने के उपरांत ठीक हुए मरीजों के अनुभव ~
👉🤒

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बिना ऑपरेशन के दवा द्वारा गुर्दे के पथरी के रोगियों का सफल उपचार ।

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त्वचा संबंधित विभिन्न रोगों जैसे एलर्जी एग्जिमा अटोपिक डर्मेटाइटिस अर्टिक एरिया फंगल इन्फेक्शन स्केबीज विटिलिगो सफेद दाग इत्यादि रोगियों के सफल उपचार संबंधित फीडबैक वीडियो देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।
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शल्य चिकित्सा-चोट लगना जलना पैरों के गोखरू विभिन्न प्रकार की गांठ, मस्से के सफल उपचार संबंधित वीडियो
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खांसी निमोनिया दमा- अस्थमा, सीओपीडी के सफल उपचार के पश्चात रोगियों के फीडबैक वीडियो देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

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निम्नलिखित खतरनाक लक्षण होने पर अथवा उपचार से संतुष्ट नहीं होने पर अस्पताल में भर्ती होना आवश्यक हो जाता है-

सांस फूलना, गले में खड़खड़ या सीटी की आवाज आना , मिर्गी के दौरे होना, भ्रम होना ,बेहोश होना, तेज घबराहट, मुंह से झाग आना ,शरीर पीला या नीला होना ,बहुत तेज सिर दर्द होना /पेट दर्द/ छाती दर्द, लंबे समय तक पेशाब नहीं आना ,हरे लाल कॉफी काले रंग की उल्टी /दस्त होना, शरीर से रक्त स्राव होना।

Patient's history sheet

एक चिकित्सक आमतौर पर रोगी के बारे में निम्नलिखित जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रश्न पूछता है:
उसका आपको सही उत्तर देना है
निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर दे जिससे रोग का सही निदान /पहचान हो एवम् उपचार में सहायता मिले

रोगी की पहचान और जनसांख्यिकी:
नाम……….. उम्र, age ……Marital status वैवाहिक स्थिति….. ऊंचाई, height cm……..वजन body weight ……
कार्य/ व्यवसाय occupation…..व्यसन addiction …….

Chief complaint - (CC)
" मुख्य शिकायत " - प्रमुख स्वास्थ्य समस्या या चिंता, और इसकी समयावधि…………….
History of present illness -
वर्तमान बीमारी का इतिहास (HPI)
Past medical history (PMH)
पिछला चिकित्सा इतिहास (पीएमएच) (प्रमुख बीमारियों ……………
अपने चिकित्सक को बताए कि पहले से कोई रोग तो नही जैसे
श्वसन तंत्र संबन्धित 👉दमा अस्थमा asthma तपेदिक टीबी (tuberculosis)न्यूमोनिया pneumonia सीओपीडी copd सिन्युसाइटिस sinusitis
हृदय रक्त वाहिका तंत्र 👉हाइपरटेंशन उच्च रक्तचाप,हार्ट अटैक heart attack,हार्ट फेल्योर heart failure
वृक्क् तंत्र 👉
किडनी फेल्योर kidney failure ,किडनी स्टोन kidney stones Bph, prostate carcinoma
उदर तंत्र 👉
गाल ब्लैडर स्टोन ,लीवर रोग हेपेटाइटिस,फैटी लीवर,लीवर सिरोसिस/ लीवर फेल्योर,Pancreatitis,अल्सरेटिव कोलाइटिस ,क्रॉन्स डिजीज,बवासीर ,भगंदर,एनल फिशर,अपेंडिसाइटिस
तंत्रिका तंत्र 👉
दिमागी दौरे होना, एपिलेप्टिक फिट्स,मेनिनजाइटिस,Encephalitis दिमागी बुखार,माइग्रेन,Trigeminal neuralgia
हड्डी एवम मांस पेशी तंत्र 👉
सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस ,फ्रोजन शोल्डर,रूमेटॉयड अर्थराइटिस,Ankylosing spondylitis ,Osteoarthritis
Gout high uric acid level,फ्रैक्चर

त्वचा रोग 👉
एक्जिमा/एलर्जिक डर्मेटाइटिस,दाद फंगल इन्फेक्शन,Urticaria ,Psoriasis ,Lichan planus,Vitiligo
नेत्र रोग 👉
काला मोतिया glaucoma ,सफेद मोतिया cataract ,रेटीनोपैथी ,Refractive errors
कर्ण रोग 👉
कान का पर्दा फटा होना tymapnic membrane perforation
Asom,csom,BPPV,Menniers disease etc
हार्मोनल रोग Hormonal /endocrinological disorders
मधुमेह diabetes ,थायराइड विकृति hypothyroidism,hyperthyroidism,Cushing syndrome
Any Other disease

कोई पिछली सर्जरी/ऑपरेशन surgery...............
आनुवंशिक रोग Genetic disorders
पारिवारिक बीमारियाँ - विशेष रूप से वे बीमारियाँ जो रोगी की मुख्य शिकायत से संबंधित हों। ...............
बचपन के रोग - बाल चिकित्सा में यह बहुत महत्वपूर्ण है।
जन्म के तुरन्त बाद Neonatal jaundice पीलिया ,Hypoxia episodes ऑक्सीजन की कमी,Hypoglycemia episodes शुगर लेवल कम होना,मिर्गी के दौरे होना।
सामाजिक इतिहास (चिकित्सा) -
जिसमें रहने की व्यवस्था ...............व्यवसाय................
वैवाहिक स्थिति, बच्चों की संख्या ...............
मादक पदार्थों का सेवन नशीली दवाओं का उपयोग (तंबाकू, शराब, अन्य मनोरंजक नशीली दवाओं के उपयोग सहित )...............
Travel history हाल की यात्रा-...............
और मनोरंजक गतिविधियों या पालतू जानवरों के माध्यम से पर्यावरणीय रोगजनकों के संपर्क में आना शामिल है।
Poisoning जहर विष संबंधित
नियमित दवाएं (डॉक्टरों द्वारा निर्धारित दवाओं और ओवर-द-काउंटर या वैकल्पिक चिकित्सा से प्राप्त अन्य दवाओं सहित )................
एलर्जी - दवाओं, भोजन, लेटेक्स और अन्य पर्यावरणीय कारकों से………
यौन इतिहास………प्रसूति / स्त्री रोग संबंधी इतिहास……
इत्यादि
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05/08/2026

एक 25 वर्षीय नवयुवक मेरी क्लीनिक पर दिनांक 02.08.2026 को आया था, जिसे पिछले 7 दिनों से पेट दर्द की शिकायत थी। इसके लिए हमने उसका शारीरिक परीक्षण (physical examination) किया।
शारीरिक परीक्षण के दौरान, हमें अपेंडिसाइटिस (appendicitis) के पक्ष में मिलने वाले लक्षण जैसे कि
(Rovsing's sign), ऑब्ट्यूरेटर साइन (Obturator sign) और सोआस साइन (Psoas sign) सभी नकारात्मक (negative) मिले। पर right iliac fossa में tenderness मिली
परंतु, हमने यह आशंका जताई कि उसे कहीं किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी) आदि की समस्या न हो, इसलिए हमने उसे अल्ट्रासाउंड (USG Whole Abdomen) कराने की सलाह दी।"
"पेट के अल्ट्रासाउंड (Ultrasound Abdomen) में उसकी दाहिनी किडनी (Right Kidney) में 5.5 mm का कैलकुलस (calculus/पथरी) पाया गया, और बाईं किडनी (Left Kidney) में भी पथरी थी।
इसके साथ ही, दायां गुर्दे की नली (Left Ureter) में 10 mm का किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी) था, जिसकी वजह से यूरिन (मूत्र) का बैकफ्लो (backflow/उल्टा बहाव) हो रहा था। यह यूरिन बैकफ्लो होकर किडनी की राजधानी (Renal Pelvis) के अंदर इकट्ठा हो रहा था और सूजन पैदा कर रहा था, जिसे हाइड्रोयूरेटेरोनेफ्रोसिस (Hydroureteronephrosis) कहते हैं।
इसी वजह से मरीज को कमर में दर्द हो रहा था। जब हमने उससे विस्तार (detail) में पूछा, तो उसने माना कि उसको कमर में पिछले 4 महीनों से दर्द हो रहा था।
इस चार महीनों से हो रहे कमर दर्द के लिए उसने सोचा कि यह मांसपेशियों में दर्द या खिंचाव (muscular strain) की वजह से हो रहा है, और उसने किसी डॉक्टर से सलाह नहीं ली।
इसीलिए कहते हैं कि खुद से चिकित्सा (self-medication) नहीं करनी चाहिए और खुद से रोग का निदान (self-diagnosis) नहीं करना चाहिए।
अगर कमर दर्द के लिए उन्होंने पहले क्लीनिक पर संपर्क किया होता, तो यह 4 महीने पहले ही किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी) के बारे में उनको पता चल जाता और सही समय पर सही उपचार (timely treatment) हो जाता।"

डॉ अंकुर शर्मा

एक 25 वर्षीय नवयुवक मेरी क्लीनिक पर दिनांक 02.08.2026 को आया था, जिसे पिछले 7 दिनों से पेट दर्द की शिकायत थी। इसके लिए ह...
05/08/2026

एक 25 वर्षीय नवयुवक मेरी क्लीनिक पर दिनांक 02.08.2026 को आया था, जिसे पिछले 7 दिनों से पेट दर्द की शिकायत थी। इसके लिए हमने उसका शारीरिक परीक्षण (physical examination) किया।
शारीरिक परीक्षण के दौरान, हमें अपेंडिसाइटिस (appendicitis) के पक्ष में मिलने वाले लक्षण जैसे कि
(Rovsing's sign), ऑब्ट्यूरेटर साइन (Obturator sign) और सोआस साइन (Psoas sign) सभी नकारात्मक (negative) मिले। पर right iliac fossa में tenderness मिली
परंतु, हमने यह आशंका जताई कि उसे कहीं किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी) आदि की समस्या न हो, इसलिए हमने उसे अल्ट्रासाउंड (USG Whole Abdomen) कराने की सलाह दी।"
"पेट के अल्ट्रासाउंड (Ultrasound Abdomen) में उसकी दाहिनी किडनी (Right Kidney) में 5.5 mm का कैलकुलस (calculus/पथरी) पाया गया, और बाईं किडनी (Left Kidney) में भी पथरी थी।
इसके साथ ही, दायां गुर्दे की नली (Left Ureter) में 10 mm का किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी) था, जिसकी वजह से यूरिन (मूत्र) का बैकफ्लो (backflow/उल्टा बहाव) हो रहा था। यह यूरिन बैकफ्लो होकर किडनी की राजधानी (Renal Pelvis) के अंदर इकट्ठा हो रहा था और सूजन पैदा कर रहा था, जिसे हाइड्रोयूरेटेरोनेफ्रोसिस (Hydroureteronephrosis) कहते हैं।
इसी वजह से मरीज को कमर में दर्द हो रहा था। जब हमने उससे विस्तार (detail) में पूछा, तो उसने माना कि उसको कमर में पिछले 4 महीनों से दर्द हो रहा था।
इस चार महीनों से हो रहे कमर दर्द के लिए उसने सोचा कि यह मांसपेशियों में दर्द या खिंचाव (muscular strain) की वजह से हो रहा है, और उसने किसी डॉक्टर से सलाह नहीं ली।
इसीलिए कहते हैं कि खुद से चिकित्सा (self-medication) नहीं करनी चाहिए और खुद से रोग का निदान (self-diagnosis) नहीं करना चाहिए।
अगर कमर दर्द के लिए उन्होंने पहले क्लीनिक पर संपर्क किया होता, तो यह 4 महीने पहले ही किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी) के बारे में उनको पता चल जाता और सही समय पर सही उपचार (timely treatment) हो जाता।"

डॉ अंकुर शर्मा

एक 27 वर्ष रोगी को बहुत तेज बुखार हो रहा था और उसको  लगातार खांसी हो रही थी  जिसके कारण उसकी पसलियों में  दर्द  हो  रहा ...
02/08/2026

एक 27 वर्ष रोगी को बहुत तेज बुखार हो रहा था और उसको लगातार खांसी हो रही थी जिसके कारण उसकी पसलियों में दर्द हो रहा था इसके लिए उसने एक चिकित्सक एमबीबीएस फिजिशियन से संपर्क किया उन्होंने रोगी को कुछ दवाइयाँ लिखी परन्तु रोगी को लाभ नहीं हुआ और रोगी ने मेरे क्लिनिक पर दिनांक 20.06.2026 को संपर्क करा उसे फीवर 103 f था जो उतर नहीं रहा था खांसी बहुत तेज हो रही थी मैंने हां पाया कि उसकी छाती को stethoscope से चेक किया चेक करने के दौरान यह पाया गया कि उसकी लेफ्ट lungs me फेफडे में हवा का आवागमन कम था
जिसके कारण मुझे Excessive pleural fluid भरे होने का संदेह हो रहा था फिर मैने रोगी को x ray चेस्ट करवाने की सलाह दी
x ray chest मे भी मेरी क्लिनिकल finding की पुष्टि हुई blunted left cp angle
loculated effusion
फिर इस fluid को टैप करके हमने जांच करवायी गई और रोग की सटीक पहचान हुई

इसलिए जब भी कोई रोगी clinic पर आए
उसका aachi प्रकार से शारीरिक परीक्षण clinical history sheet बनाना बहुत जरूरी होता है
एक stethoscope से सिर्फ Respiratory sounds सुनना पूरी clinical picture बदल देता है
Pulse examination बहुत important clue देती है
आंखे बहुत कुछ ब्या कर देती हैं

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02/08/2026

एक 27 वर्ष रोगी को बहुत तेज बुखार हो रहा था और उसको लगातार खांसी हो रही थी जिसके कारण उसकी पसलियों में दर्द हो रहा था इसके लिए उसने एक चिकित्सक एमबीबीएस फिजिशियन से संपर्क किया उन्होंने रोगी को कुछ दवाइयाँ लिखी परन्तु रोगी को लाभ नहीं हुआ और रोगी ने मेरे क्लिनिक पर दिनांक 20.06.2026 को संपर्क करा उसे फीवर 103 f था जो उतर नहीं रहा था खांसी बहुत तेज हो रही थी मैंने हां पाया कि उसकी छाती को stethoscope से चेक किया चेक करने के दौरान यह पाया गया कि उसकी लेफ्ट lungs me फेफडे में हवा का आवागमन कम था
जिसके कारण मुझे Excessive pleural fluid भरे होने का संदेह हो रहा था फिर मैने रोगी को x ray चेस्ट करवाने की सलाह दी
x ray chest मे भी मेरी क्लिनिकल finding की पुष्टि हुई blunted left cp angle
loculated effusion
फिर इस fluid को टैप करके हमने जांच करवायी गई और रोग की सटीक पहचान हुई

इसलिए जब भी कोई रोगी clinic पर आए
उसका aachi प्रकार से शारीरिक परीक्षण clinical history sheet बनाना बहुत जरूरी होता है
एक stethoscope से सिर्फ Respiratory sounds सुनना पूरी clinical picture बदल देता है
Pulse examination बहुत important clue देती है
आंखे बहुत कुछ ब्या कर देती हैं

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एक नवयुवक, जिसकी आयु 20 वर्ष थी, उसे 1 जुलाई 2026 से बुखार, खाँसी और जुखाम था। इसके लिए उसने 12 जुलाई 2026 को क्लिनिक पर...
02/08/2026

एक नवयुवक, जिसकी आयु 20 वर्ष थी, उसे 1 जुलाई 2026 से बुखार, खाँसी और जुखाम था। इसके लिए उसने 12 जुलाई 2026 को क्लिनिक पर डॉक्टर अंकुर शर्मा से संपर्क किया। इससे पूर्व वह एक अयोग्य (बिना डिग्री वाले) तथाकथित डॉक्टर (झोलाछाप चिकित्सक) से उपचार करवा रहा था, जिसने उसकी रक्त (ब्लड) जाँच करने के बाद उसे वायरल फीवर बताया था। जबकि वायरल फीवर बताए जाने के बाद भी उसे दर्द, खाँसी और बुखार में कोई आराम नहीं मिल रहा था और उसे लगातार 101–102 डिग्री बुखार बना हुआ था। साथ ही, उसके सीने (छाती) में दाईं ओर (Right side) दर्द था, जिसके कारण उसने 12 जुलाई 2026 को डॉक्टर अंकुर शर्मा के क्लिनिक पर संपर्क किया।
डॉक्टर अंकुर शर्मा ने उसका भली-भांति शारीरिक परीक्षण किया और उसकी क्लीनिकल हिस्ट्री (बीमारी का इतिहास) एकत्र की। इसके बाद उन्होंने निर्णय लिया कि इसका ब्लड टेस्ट करते हैं। ब्लड टेस्ट में टीएलसी (TLC) 18,000 थी और न्यूट्रोफिल (Neutrophils) 87% से अधिक था। डॉक्टर अंकुर शर्मा ने तुरंत बीमारी की पहचान के लिए छाती का एक्स-रे (Chest X-ray PA view) और तीन दिनों तक बलगम की जाँच कराने का निर्णय लिया। डॉक्टर अंकुर शर्मा का क्लीनिकल निदान (Clinical Diagnosis) बिल्कुल सही निकला। मरीज के बलगम में टीबी (TB) के कीटाणु पाए गए और दाईं ओर के फेफड़े (Right lung) के अपर ज़ोन (Upper zone) और मिड ज़ोन (Mid zone) के अंदर इनफिल्ट्रेशन (Infiltration/संक्रमण का फैलाव) पाया गया। इस प्रकार मरीज को टीबी होने की पुष्टि हुई।
परंतु इसमें खास बात यह है कि जब चिकित्सक डॉक्टर अंकुर शर्मा ने 12 जुलाई 2026 को मरीज से यह पूछा था कि क्या उनके परिवार में किसी को टीबी की शिकायत है या क्या उन्होंने पहले कभी टीबी की दवाई खाई है, तब मरीज ने कुछ नहीं बताया था। जैसे ही छाती के एक्स-रे और बलगम की जाँच से टीबी की पुष्टि हुई, तो मरीज ने 13 जुलाई 2026 को यह स्वीकार किया कि उसे पहले भी टीबी हुई थी। यह बीमारी उसे वर्ष 2021 में हुई थी, जिसके लिए उसने सेक्टर-2 की डिस्पेंसरी से 6 महीने तक टीबी की दवाइयाँ खाई थीं। इस प्रकार मरीज कई बार चिकित्सकों को गुमराह (भ्रमित) भी करते हैं, परंतु इसमें उनका स्वयं का ही नुकसान होता है।
अब इस मामले के अंतर्गत यह बात सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है कि यदि यह टीबी दोबारा हुई है, तो कहीं यह ड्रग रेजिस्टेंट (Drug-Resistant / दवाओं के प्रति प्रतिरोधी) न हो। यह बात पता होनी चाहिए, इसीलिए उसे टीबी की एक विशेष जाँच (जैसे CBNAAT / Truenat) के लिए सलाह दी गई है; क्योंकि ड्रग रेजिस्टेंट होने की स्थिति में सामान्य टीबी की दवाइयाँ काम नहीं करती हैं और अन्य लोगों में भी टीबी फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

डॉक्टर अंकुर शर्मा
द्वारका ,नई दिल्ली
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02/08/2026

एक नवयुवक, जिसकी आयु 20 वर्ष थी, उसे 1 जुलाई 2026 से बुखार, खाँसी और जुखाम था। इसके लिए उसने 12 जुलाई 2026 को क्लिनिक पर डॉक्टर अंकुर शर्मा से संपर्क किया। इससे पूर्व वह एक अयोग्य (बिना डिग्री वाले) तथाकथित डॉक्टर (झोलाछाप चिकित्सक) से उपचार करवा रहा था, जिसने उसकी रक्त (ब्लड) जाँच करने के बाद उसे वायरल फीवर बताया था। जबकि वायरल फीवर बताए जाने के बाद भी उसे दर्द, खाँसी और बुखार में कोई आराम नहीं मिल रहा था और उसे लगातार 101–102 डिग्री बुखार बना हुआ था। साथ ही, उसके सीने (छाती) में दाईं ओर (Right side) दर्द था, जिसके कारण उसने 12 जुलाई 2026 को डॉक्टर अंकुर शर्मा के क्लिनिक पर संपर्क किया।
डॉक्टर अंकुर शर्मा ने उसका भली-भांति शारीरिक परीक्षण किया और उसकी क्लीनिकल हिस्ट्री (बीमारी का इतिहास) एकत्र की। इसके बाद उन्होंने निर्णय लिया कि इसका ब्लड टेस्ट करते हैं। ब्लड टेस्ट में टीएलसी (TLC) 18,000 थी और न्यूट्रोफिल (Neutrophils) 87% से अधिक था। डॉक्टर अंकुर शर्मा ने तुरंत बीमारी की पहचान के लिए छाती का एक्स-रे (Chest X-ray PA view) और तीन दिनों तक बलगम की जाँच कराने का निर्णय लिया। डॉक्टर अंकुर शर्मा का क्लीनिकल निदान (Clinical Diagnosis) बिल्कुल सही निकला। मरीज के बलगम में टीबी (TB) के कीटाणु पाए गए और दाईं ओर के फेफड़े (Right lung) के अपर ज़ोन (Upper zone) और मिड ज़ोन (Mid zone) के अंदर इनफिल्ट्रेशन (Infiltration/संक्रमण का फैलाव) पाया गया। इस प्रकार मरीज को टीबी होने की पुष्टि हुई।
परंतु इसमें खास बात यह है कि जब चिकित्सक डॉक्टर अंकुर शर्मा ने 12 जुलाई 2026 को मरीज से यह पूछा था कि क्या उनके परिवार में किसी को टीबी की शिकायत है या क्या उन्होंने पहले कभी टीबी की दवाई खाई है, तब मरीज ने कुछ नहीं बताया था। जैसे ही छाती के एक्स-रे और बलगम की जाँच से टीबी की पुष्टि हुई, तो मरीज ने 13 जुलाई 2026 को यह स्वीकार किया कि उसे पहले भी टीबी हुई थी। यह बीमारी उसे वर्ष 2021 में हुई थी, जिसके लिए उसने सेक्टर-2 की डिस्पेंसरी से 6 महीने तक टीबी की दवाइयाँ खाई थीं। इस प्रकार मरीज कई बार चिकित्सकों को गुमराह (भ्रमित) भी करते हैं, परंतु इसमें उनका स्वयं का ही नुकसान होता है।
अब इस मामले के अंतर्गत यह बात सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है कि यदि यह टीबी दोबारा हुई है, तो कहीं यह ड्रग रेजिस्टेंट (Drug-Resistant / दवाओं के प्रति प्रतिरोधी) न हो। यह बात पता होनी चाहिए, इसीलिए उसे टीबी की एक विशेष जाँच (जैसे CBNAAT / Truenat) के लिए सलाह दी गई है; क्योंकि ड्रग रेजिस्टेंट होने की स्थिति में सामान्य टीबी की दवाइयाँ काम नहीं करती हैं और अन्य लोगों में भी टीबी फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

डॉक्टर अंकुर शर्मा
द्वारका ,नई दिल्ली
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02/08/2026

"एक बच्चा 1 जुलाई 2026 को डॉक्टर अंकुर शर्मा की क्लीनिक पर आया था, उसे बहुत ज़्यादा खुजली होती थी। खुजली करते-करते खून आ जाता था। उसकी माता जी उसे लेकर आईं। इससे पहले वे 3 महीने तक कहीं और से इलाज (उपचार) करवा रहे थे, परंतु उन्हें कोई लाभ नहीं हो रहा था और खुजली लगातार बनी हुई थी। इस बीमारी की हमने जाँच की और पाया कि इसमें जो लक्षण हैं, वे स्कैबीज़ (Scabies / खाज) के हैं। उसके अनुसार उपचार किया।"

3 महीने से परेशान बच्चे को मात्र 11-12 दिनों में आराम मिल जाना
डॉक्टर अंकुर शर्मा
के सटीक निदान (Accurate Diagnosis) और सही उपचार का परिणाम है। माता जी की संतुष्टि एक डॉक्टर के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है।चूंकि बच्चा आज 12 जुलाई 2026 को दोबारा फॉलो-अप के लिए आया है, इसलिए पूरी तरह ठीक होने और बीमारी को दोबारा लौटने से रोकने के लिए माता जी को नीचे दी गई सलाह दी गई

Scabies के लक्षण दिखने में 4 से 6 हफ्ते का समय लगता है। अगर सबका इलाज नहीं हुआ, तो बच्चा ठीक होने के बाद परिवार के दूसरे सदस्य से दोबारा संक्रमित (Re-infected) हो जाएगा।

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स्कैबीज़ (Scabies / खाज) जागरूकता: सफल इलाज और सही देखभाल
1. सबसे जरूरी कदम: पूरे परिवार का एक साथ इलाज

* लक्षणों में देरी: स्कैबीज़ के बारीक कीड़ों (Mites) के संक्रमण के बाद लक्षण दिखने में 4 से 6 हफ्ते का समय लग सकता है।
* दोबारा संक्रमण (Re-infection) का खतरा: यदि घर के किसी एक सदस्य में खुजली नहीं भी दिख रही है, तब भी उनका इलाज जरूरी है। ऐसा न करने पर ठीक हुआ बच्चा परिवार के अन्य सदस्य से दोबारा संक्रमित हो जाएगा।

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2. कपड़ों और बिस्तरों की सफाई (Hygiene Protocol)

* 60°C गर्म पानी का नियम: बच्चे द्वारा पिछले 3 दिनों में इस्तेमाल किए गए सभी कपड़े, बेडशीट, तकिए के कवर और तौलिये को 60°C गर्म पानी में धोएं और तेज धूप में अच्छी तरह सुखाएं।
* प्लास्टिक बैग का तरीका: जिन भारी कपड़ों, कंबलों या खिलौनों को धोया नहीं जा सकता, उन्हें एक एयर-टाइट प्लास्टिक बैग में बंद करके 72 घंटे (3 दिन) के लिए अलग रख दें। मानव शरीर के संपर्क और हवा के बिना स्कैबीज़ के कीड़े खुद ही मर जाते हैं।

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3. खुजली और त्वचा का सही प्रबंधन (Symptom Management)

* इलाज के बाद खुजली का बने रहना: ध्यान रखें कि सही और सफल इलाज के बाद भी 2 से 4 हफ्तों तक खुजली बनी रह सकती है। यह मरे हुए परजीवियों के प्रति शरीर की सामान्य एलर्जी होती है, इसका मतलब इलाज का फेल होना बिल्कुल नहीं है।
* त्वचा की विशेष देखभाल: संक्रमण पूरी तरह खत्म होने के बाद भी बच्चे की त्वचा में रूखापन (Dryness) आ सकता है। त्वचा को हील करने के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार कोई अच्छा मॉइस्चराइज़र या शुद्ध नारियल तेल नियमित रूप से लगाएं।
* सफाई चक्र को दोहराएं: बच्चा पूरी तरह स्वस्थ दिखने पर भी घर में बिस्तरों और कपड़ों की गर्म पानी वाली सफाई की प्रक्रिया को एक बार और दोहरा लें, ताकि कोई भी जीवित अंश न बचे।

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🛡️ दोबारा संक्रमण से बचाव की प्रतिज्ञा

* सीधे शारीरिक संपर्क (Direct skin contact) से दूरी: माता-पिता इस बात का विशेष ध्यान रखें कि स्कूल, ट्यूशन, खेल के मैदान या पड़ोस में यदि किसी अन्य बच्चे को लगातार खुजली की शिकायत हो, तो अपने बच्चे को उसके सीधे शारीरिक संपर्क से दूर रखें।

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🏥 जनहित में जारी
डॉक्टर अंकुर शर्मा
क्लीनिक

Address

C-1/100, Hariom Apartments, Madhu Vihar, Dwarka Sector/3
New Delhi

Opening Hours

Monday 10am - 1pm
6pm - 9:30pm
Tuesday 10am - 1pm
6pm - 9:30pm
Wednesday 10am - 1pm
6pm - 9:30pm
Thursday 10am - 1pm
6pm - 9:30pm
Friday 10am - 1pm
6pm - 9:30pm
Saturday 10am - 1pm
6pm - 9:30pm
Sunday 10am - 1pm
6pm - 9:30pm

Telephone

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