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Product of Apical Pharmaceuticals Pvt Ltd
22/08/2026

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21/06/2026
  (Urinary Tract Infection) UTI यह मूत्र मार्ग में संक्रमण को कहते हैं ।यह तब होता है जब शरीर के मूत्र मार्ग (Urinary Sy...
10/05/2026

(Urinary Tract Infection)
UTI यह मूत्र मार्ग में संक्रमण को कहते हैं ।यह तब होता है जब शरीर के मूत्र मार्ग (Urinary System) में बैक्टीरिया प्रवेश कर जाते हैं और वहां बढ़ने लगते हैं।
यह संक्रमण किडनी, ब्लैडर (मूत्रशय) या पेशाब की नली में कहीं भी हो सकता है।
UTI के मुख्य लक्षण
अगर किसी को UTI है, तो आमतौर पर ये लक्षण दिखाई देते हैं:
🌟पेशाब में जलन: पेशाब करते समय तेज जलन या दर्द महसूस होना।
🌟बार-बार पेशाब आना: बार-बार बाथरूम जाने की इच्छा होना, लेकिन पेशाब बहुत कम मात्रा में आना।
🌟पेशाब का रंग: पेशाब का धुंधला (Cloudy), गहरा या लाल रंग का दिखना (जो खून की उपस्थिति का संकेत हो सकता है)।
🌟पेट के निचले हिस्से में दर्द: पेडू या पीठ के निचले हिस्से में दबाव और बेचैनी महसूस होना।
🌟तेज गंध: पेशाब से बहुत तीखी या अजीब गंध आना।

💥यह क्यों होता है?

* बैक्टीरिया: ज्यादातर मामलों में E. coli नाम का बैक्टीरिया इसके लिए जिम्मेदार होता है।
* साफ-सफाई: व्यक्तिगत स्वच्छता की कमी या गंदे टॉयलेट का उपयोग।
* रुकावट: किडनी स्टोन या प्रोस्टेट बढ़ने की वजह से पेशाब का पूरी तरह बाहर न निकल पाना।
* पानी कम मात्रा में पीना

🍀इससे बचाव के उपाय
1. खूब पानी पिएं: दिन भर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं ताकि बैक्टीरिया शरीर से बाहर निकल सकें।
2. हाइजीन का ध्यान रखें: टॉयलेट इस्तेमाल करने के बाद साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
3. पेशाब न रोकें: जब भी महसूस हो, तुरंत बाथरूम जाएं। पेशाब रोकने से बैक्टीरिया को पनपने का मौका मिलता है।
सलाह: अगर आपको तेज बुखार, कंपकंपी या पीठ में तेज दर्द महसूस हो, तो यह संक्रमण किडनी तक पहुँचने का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और एंटीबायोटिक्स का कोर्स पूरा करना चाहिए।

विटामिन B12 (जिसे कोबालामिन भी कहा जाता है) हमारे शरीर के लिए एक अत्यंत आवश्यक पोषक तत्व है। यह लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) ...
03/05/2026

विटामिन B12 (जिसे कोबालामिन भी कहा जाता है) हमारे शरीर के लिए एक अत्यंत आवश्यक पोषक तत्व है। यह लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) के निर्माण, तंत्रिका तंत्र (Nerve system) को स्वस्थ रखने और DNA बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इसकी कमी के लक्षण और शरीर पर होने वाले दुष्परिणाम निम्नलिखित हैं:
विटामिन B12 की कमी के प्रमुख लक्षण
कमी होने पर शरीर शुरुआत में ये संकेत दे सकता है:
• अत्यधिक थकान और कमजोरी: शरीर में पर्याप्त लाल रक्त कोशिकाएं न होने के कारण ऑक्सीजन का प्रवाह कम हो जाता है, जिससे हर वक्त सुस्ती महसूस होती है।
• हाथों और पैरों में झुनझुनी: नसों में कमजोरी के कारण हाथ-पैरों में "सुइयां चुभने" जैसा अहसास (Tingling) होना।
• त्वचा का पीलापन: खून की कमी (एनीमिया) की वजह से त्वचा पीली या हल्की पीली नजर आ सकती है।
• जीभ में सूजन या छाले: जीभ का लाल हो जाना, उसमें सूजन आना या बार-बार मुंह में छाले होना।
• याददाश्त में कमी: काम में ध्यान केंद्रित न कर पाना या छोटी-छोटी बातें भूल जाना (Brain fog)।
• सांस फूलना और चक्कर आना: थोड़ा चलने या मेहनत करने पर ही सांस फूलने लगना।
शरीर पर होने वाले गंभीर दुष्परिणाम
यदि समय रहते विटामिन B12 की कमी को ठीक न किया जाए, तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं:
1. मेगालोब्लास्टिक एनीमिया (Megaloblastic Anemia): इसमें शरीर असामान्य रूप से बड़ी लाल रक्त कोशिकाएं बनाने लगता है जो अपना काम ठीक से नहीं कर पातीं। इससे शरीर में गंभीर खून की कमी हो जाती है।
2. तंत्रिका तंत्र को स्थायी क्षति (Nerve Damage): विटामिन B12 की कमी नसों के सुरक्षा कवच (Myelin sheath) को नष्ट कर सकती है। इससे शरीर का संतुलन बिगड़ना, चलने में कठिनाई और मांसपेशियों में कमजोरी हो सकती है।
3. मानसिक स्वास्थ्य पर असर: इसकी लंबे समय तक कमी रहने से डिप्रेशन (अवसाद), अधिक घबराहट और कुछ मामलों में 'डिमेंशिया' (भूलने की बीमारी) जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
4. दृष्टि दोष (Vision Loss): दुर्लभ मामलों में, यह ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे आंखों की रोशनी धुंधली हो सकती है।
5. हृदय रोग का खतरा: B12 की कमी से शरीर में 'होमोसिस्टीन' का स्तर बढ़ जाता है, जो हृदय रोग और स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकता है।
विटामिन B12 के स्रोत
चूंकि हमारा शरीर इसे खुद नहीं बना सकता, इसलिए इसे आहार से लेना जरूरी है:
• शाकाहारी स्रोत: दूध, दही, पनीर, और फोर्टिफाइड अनाज (Fortified cereals)।
• मांसाहारी स्रोत: अंडा, मांस, मछली और चिकन।
नोट: यदि आपको ऊपर दिए गए लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो डॉक्टर की सलाह पर एक ब्लड टेस्ट (Vitamin B12 Test) जरूर करवाएं। कमी होने पर डॉक्टर सप्लीमेंट्स या इंजेक्शन की सलाह दे सकते हैं।

  wormआइवरमेक्टिन (Ivermectin) और एल्बेंडाजोल (Albendazole) दोनों ही शरीर से परजीवियों (parasites) यानी कीड़ों को खत्म क...
07/04/2026

worm
आइवरमेक्टिन (Ivermectin) और एल्बेंडाजोल (Albendazole) दोनों ही शरीर से परजीवियों (parasites) यानी कीड़ों को खत्म करने वाली दवाएं हैं, लेकिन इनके काम करने का तरीका अलग-अलग है:
1. आइवरमेक्टिन (Ivermectin) कैसे काम करता है?
यह दवा परजीवियों के तंत्रिका तंत्र (Nervous System) और मांसपेशियों पर हमला करती है।
• लकवा (Paralysis): यह परजीवियों की कोशिकाओं में क्लोराइड आयनों के प्रवाह को बढ़ा देती है। इससे उनकी नसें और मांसपेशियां सुन्न हो जाती हैं।
• मौत: जब परजीवी हिलने-डुलने या खाना खाने में असमर्थ हो जाते हैं, तो उन्हें लकवा मार जाता है और वे मर जाते हैं।
• इंसानों पर सुरक्षा: यह दवा इंसानों के दिमाग पर असर नहीं करती क्योंकि हमारे शरीर में 'ब्लड-ब्रेन बैरियर' होता है जो इस दवा को दिमाग के नर्वस सिस्टम तक पहुंचने से रोकता है।
2. एल्बेंडाजोल (Albendazole) कैसे काम करता है?
यह दवा परजीवियों की ऊर्जा (Energy) और संरचना को निशाना बनाती है।
• ग्लूकोज को रोकना: यह परजीवियों को ग्लूकोज (चीनी) सोखने से रोक देती है। ग्लूकोज उनका मुख्य भोजन होता है, जिसके बिना वे जीवित नहीं रह सकते।
• कोशिका का टूटना: यह कीड़ों की कोशिकाओं के अंदर 'माइक्रोट्यूबुल्स' (Microtubules) को बनने से रोकती है, जिससे उनकी कोशिका की बनावट बिगड़ जाती है।
• मौत: बिना ऊर्जा के कीड़े धीरे-धीरे कमजोर होकर मर जाते हैं और फिर मल के जरिए शरीर से बाहर निकल जाते हैं।

विशेष ध्यान दें: ये दवाएं अक्सर हाथीपांव (Lymphatic Filariasis) या पेट के कीड़ों के इलाज के लिए साथ में दी जाती हैं। लेकिन इनका उपयोग केवल डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए, क्योंकि सही खुराक (Dose) मरीज की उम्र और वजन पर निर्भर करती है।

Diclofenac Injection (Normal) और Diclofenac Aqua injection (जैसे Enogesic Aqua) के बीच का मुख्य अंतर उनकी बनावट (Formula...
05/04/2026

Diclofenac Injection (Normal) और Diclofenac Aqua injection (जैसे Enogesic Aqua) के बीच का मुख्य अंतर उनकी बनावट (Formulation) और चुभन (Pain on Injection) में होता है।
यहाँ इन दोनों के बीच के प्रमुख अंतर दिए गए हैं:
1. विलायक (Solvent/Base)
• Normal Diclofenac Inj: इसमें आमतौर पर 'Propylene Glycol' का इस्तेमाल किया जाता है। यह थोड़ा गाढ़ा (Viscous) होता है।
• Diclofenac Aqua: इसमें मुख्य रूप से पानी (Aqueous base) का इस्तेमाल किया जाता है। यह पतला होता है और शरीर में आसानी से घुल जाता है।
2. दर्द और चुभन (Pain & Irritation)
• Normal Injection: तेल या ग्लाइकोल बेस होने के कारण, जब यह मांसपेशियों (Intramuscular) में लगाया जाता है, तो मरीज को बहुत तेज जलन और दर्द महसूस होता है। कभी-कभी इंजेक्शन वाली जगह पर गांठ भी बन जाती है।
• Aqua Injection: चूंकि यह पानी के बेस पर बना है, इसलिए इसे लगाने पर दर्द बहुत कम होता है। इसे 'Painless Injection' की श्रेणी में रखा जाता है।
3. असर की गति (Speed of Action)
• Normal Injection: गाढ़ा होने के कारण इसे खून में सोखने (Absorption) में थोड़ा समय लग सकता है।
• Aqua Injection: एक्वा फॉर्मूला खून में बहुत तेजी से सोख लिया जाता है, जिससे दर्द से तुरंत राहत (Rapid Relief) मिलती है।
4. इस्तेमाल का तरीका
• Normal: इसे अक्सर गहराई से केवल कूल्हे (Gluteal muscle) पर लगाया जाता है।
• Aqua: इसे हाथ (Deltoid muscle) या कूल्हे दोनों जगह लगाया जा सकता है क्योंकि इसकी जलन कम होती है।

एज़िथ्रोमाइसिन (Azithromycin) एक एंटीबायोटिक दवा है जो मुख्य रूप से बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण (Infections) को रोकन...
05/04/2026

एज़िथ्रोमाइसिन (Azithromycin) एक एंटीबायोटिक दवा है जो मुख्य रूप से बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण (Infections) को रोकने के काम आती है। इसके काम करने का तरीका काफी वैज्ञानिक और सटीक है:
1. प्रोटीन बनने की प्रक्रिया को रोकना
बैक्टीरिया को जीवित रहने, बढ़ने और अपनी संख्या बढ़ाने के लिए विशेष प्रकार के प्रोटीन की जरूरत होती है। एज़िथ्रोमाइसिन बैक्टीरिया के अंदर जाकर उनके राइबोसोम (Ribosomes) से जुड़ जाती है। राइबोसोम बैक्टीरिया की वो 'मशीन' है जो प्रोटीन बनाती है।
2. बैक्टीरिया की वृद्धि पर रोक
जब एज़िथ्रोमाइसिन राइबोसोम को ब्लॉक कर देती है, तो बैक्टीरिया अपने लिए जरूरी प्रोटीन नहीं बना पाते। इसके कारण:
• बैक्टीरिया का विकास रुक जाता है।
• वे नए बैक्टीरिया पैदा नहीं कर पाते (यानी उनकी संख्या बढ़ना बंद हो जाती है)।
3. शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) की भूमिका
चूँकि बैक्टीरिया अब और बढ़ नहीं रहे हैं और कमजोर हो चुके हैं, इसलिए हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (White Blood Cells) बाकी बचे हुए बैक्टीरिया को आसानी से पहचान कर उन्हें पूरी तरह खत्म कर देती है।
ध्यान रखने योग्य बातें:
• बैक्टीरिया बनाम वायरस: यह दवा केवल बैक्टीरियल इन्फेक्शन (जैसे गले का संक्रमण, निमोनिया, या त्वचा के इन्फेक्शन) पर काम करती है। यह सर्दी-जुकाम या फ्लू जैसे वायरल इन्फेक्शन पर असर नहीं करती।
• लंबा असर: एज़िथ्रोमाइसिन की खासियत यह है कि यह शरीर के ऊतकों (Tissues) में लंबे समय तक टिकी रहती है, इसलिए इसे अक्सर 3 से 5 दिन के छोटे कोर्स के लिए ही दिया जाता है।
• पूरा कोर्स: दवा का कोर्स हमेशा पूरा करना चाहिए। बीच में छोड़ने से बैक्टीरिया फिर से शक्तिशाली हो सकते हैं, जिसे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस कहा जाता है।
सावधानी: बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी एंटीबायोटिक न लें, क्योंकि वह आपकी स्थिति के आधार पर सही खुराक (Dose) तय करते हैं।

शिशु और पाचन 1. . अल्फा एमाइलेज (Alpha Amylase)यह एक प्रमुख एंजाइम है जो कार्बोहाइड्रेट को पचाने में मदद करता है।• कार्य...
05/04/2026

शिशु और पाचन
1. . अल्फा एमाइलेज (Alpha Amylase)
यह एक प्रमुख एंजाइम है जो कार्बोहाइड्रेट को पचाने में मदद करता है।
• कार्य: यह भोजन में मौजूद जटिल स्टार्च (जैसे चावल, आलू, और रोटी) को छोटे ग्लूकोज और माल्टोज अणुओं में तोड़ देता है।
• लाभ: यदि स्टार्च सही से नहीं पचता, तो यह आंतों में फर्मेंट होने लगता है जिससे पेट फूलने की समस्या होती है। एमाइलेज इसे रोककर पाचन को तेज करता है।

2. पपेन (Papain)
यह पपीते के फल से निकलने वाला एक प्राकृतिक एंजाइम है, जो प्रोटीन को पचाने के लिए जाना जाता है।
• कार्य: यह मांस, दालों, अंडे और दूध के प्रोटीन को छोटे पेप्टाइड्स और अमीनो एसिड में तोड़ देता है।
• लाभ: भारी या प्रोटीन युक्त भोजन करने के बाद होने वाली पेट की भारीपन की समस्या को यह प्रभावी ढंग से कम करता है।

3. डिल ऑयल (Dil Oil)
इसे 'सोया का तेल' भी कहा जाता है और इसमें वायु-नाशक (carminative) गुण होते हैं।
• कार्य: यह पेट और आंतों की मांसपेशियों के खिंचाव (spasms) को शांत करता है और पाचन नली में फंसी हुई गैस को बाहर निकालने में मदद करता है।
• लाभ: यह पेट दर्द, मरोड़ और गैस के कारण होने वाली बेचैनी में तुरंत राहत देता है।

4. एनीस ऑयल (Anise Oil - सौंफ जैसा प्रभाव)
एनीस ऑयल में एनेथोल (Anethole) नाम का मुख्य तत्व होता है, जो पेट के लिए बहुत फायदेमंद है:
• पाचक रसों को बढ़ाना: यह पेट में एंजाइम्स और गैस्ट्रिक जूस के स्राव को उत्तेजित करता है, जिससे खाना जल्दी और आसानी से टूटता है।
• एंटी-स्पास्मोडिक गुण: यह पाचन तंत्र की मांसपेशियों को आराम देता है, जिससे भोजन नली में होने वाली ऐंठन और दर्द कम होता है।
• रोगाणुरोधी (Antimicrobial): यह आंतों में हानिकारक बैक्टीरिया को पनपने से रोकता है, जिससे संक्रमण का खतरा कम होता है।
5. कैरवे ऑयल (Caraway Oil - सियाह जीरा का तेल)
कैरवे ऑयल में कार्वोन (Carvone) और लिमोनीन (Limonene) होते हैं, जो सीधे तौर पर पेट की गैस पर काम करते हैं:
• गैस से राहत: यह पेट में बनी अतिरिक्त गैस को बाहर निकालने में मदद करता है और नई गैस बनने की प्रक्रिया को धीमा करता है।
• मांसपेशियों को रिलैक्स करना: यह आंतों की कोमल मांसपेशियों (smooth muscles) को शांत करता है, जिससे अपच की वजह से होने वाली मरोड़ में आराम मिलता है।
• भूख बढ़ाना: यह पाचन अग्नि को सक्रिय करता है, जिससे भूख न लगने की समस्या दूर होती है।

03/04/2026

पेट में गैस बनने के मुख्य कारण
पेट में गैस मुख्य रूप से दो कारणों से बनती है: हवा निगलना (Aerophagia) और पाचन प्रक्रिया।
• गलत खान-पान: बहुत जल्दी-जल्दी खाना, खाते समय बात करना, या कार्बोनेटेड ड्रिंक्स (सोडा) पीना।
• फाइबर युक्त भोजन: बीन्स, पत्तागोभी, प्याज और कुछ साबुत अनाज का अधिक सेवन।
• पाचन संबंधी समस्याएं: लैक्टोज इनटोलरेंस (दूध न पचना), कब्ज, या पेट में इंफेक्शन।
• लाइफस्टाइल: शारीरिक गतिविधि की कमी और लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना।

जीवनशैली में बदलाव
• धीरे खाएं: खाने को अच्छी तरह चबाकर खाएं ताकि कम हवा अंदर जाए।
• पैदल चलें: भोजन के बाद कम से कम 15-20 मिनट टहलना पाचन में मदद करता है।
• पर्याप्त पानी: दिन भर में पर्याप्त पानी पिएं ताकि कब्ज की समस्या न हो।
3. खान-पान में परहेज
• अत्यधिक तला-भुना और मसालेदार भोजन कम करें।
• रात का खाना हल्का रखें और सोने से कम से कम 2-3 घंटे पहले खा लें।

रबेप्रज़ोल(Rabeprazole) गैस की समस्या में सीधे तौर पर नहीं, बल्कि अप्रत्यक्ष (indirect) रूप से राहत देता है। कई बार लोग पेट फूलने और एसिडिटी को एक ही समझ लेते हैं, यहीं पर यह दवा काम आती है।
यहाँ विस्तार से बताया गया है कि यह गैस से पीड़ित व्यक्ति की मदद कैसे करता है:
1. एसिड के उत्पादन को रोकना
रबेप्रज़ोल एक प्रोटॉन पंप इनहिबिटर (PPI) है। इसका मुख्य काम पेट की दीवारों में मौजूद उन 'पंपों' को बंद करना है जो एसिड बनाते हैं। जब एसिड कम बनता है, तो पेट में होने वाली जलन और खट्टी डकारों में कमी आती है, जिसे अक्सर लोग "गैस का चढ़ना" कहते हैं।
2. अन्नप्रणाली (Food Pipe) की सुरक्षा
गैस के दबाव के कारण जब एसिड ऊपर की ओर (सीने की तरफ) आता है, तो जलन महसूस होती है। रबेप्रज़ोल एसिड के स्तर को कम करके इस जलन (Heartburn) को रोकता है, जिससे सीने में भारीपन और गैस से होने वाली बेचैनी कम हो जाती है।
3. पेट के घावों और सूजन में राहत
अक्सर गैस और पेट फूलने का कारण Gastritis (पेट की अंदरूनी परत में सूजन) या Alcer होता है। रबेप्रज़ोल एसिड को कम कर इन घावों को भरने का समय देता है। जब पेट की अंदरूनी परत स्वस्थ होती है, तो पाचन बेहतर होता है और अतिरिक्त गैस बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
4. अन्य दवाओं के साथ संयोजन
गैस के मामलों में अक्सर डॉक्टर रबेप्रज़ोल को डोमपेरिडोन (Domperidone) के साथ देते हैं।
• रबेप्रज़ोल एसिड कम करता है।
• डोमपेरिडोन पेट की गतिशीलता (motility) को बढ़ाता है, जिससे भोजन और गैस जल्दी नीचे की ओर खिसक जाते हैं और पेट फूलने की समस्या कम होती है।
कुछ महत्वपूर्ण बातें:
• सेवन का सही समय: यह दवा सबसे अच्छा काम तब करती है जब इसे सुबह खाली पेट (नाश्ते से 30-60 मिनट पहले) लिया जाए।
• क्या यह हर तरह की गैस मिटाता है? नहीं। अगर गैस का कारण गलत खान-पान (जैसे बीन्स या गोभी खाना) या पाचन एंजाइमों की कमी है, तो रबेप्रज़ोल से ज्यादा फायदा नहीं होगा। ऐसी स्थिति में एंजाइम सिरप या जीवनशैली में बदलाव अधिक प्रभावी होते हैं।

महत्वपूर्ण नोट: यदि आपको बार-बार गैस बनती है, पेट में तेज दर्द रहता है या वजन कम हो रहा है, तो किसी विशेषज्ञ (Gastroenterologist) से परामर्श जरूर लें। दवाओं का चुनाव खुद करने के बजाय डॉक्टर की सलाह पर करना बेहतर होता है।

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