Art of Living Bihar

Art of Living Bihar "Bringing joy, harmony, and inner peace to Bihar through meditation, yoga, and service. Join the movement!"

Inspired by Gurudev Sri Sri Ravi Shankar, we are committed to a stress-free, happy, and compassionate society.

बिहार के नए मुख्यमंत्री चुने जाने पर आदरणीय श्री मान सम्राट चौधरी जी को आर्ट ऑफ लिविंग परिवार की ओर से हार्दिक बधाई एवं ...
14/04/2026

बिहार के नए मुख्यमंत्री चुने जाने पर आदरणीय श्री मान सम्राट चौधरी जी को आर्ट ऑफ लिविंग परिवार की ओर से हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं..

✨ बिहार दिवस 2026 की गौरवमयी झलक – गांधी मैदान, पटना ✨गांधी मैदान, पटना में आयोजित बिहार दिवस के पावन अवसर पर Art of Liv...
23/03/2026

✨ बिहार दिवस 2026 की गौरवमयी झलक – गांधी मैदान, पटना ✨
गांधी मैदान, पटना में आयोजित बिहार दिवस के पावन अवसर पर Art of Living के स्टॉल का उद्घाटन माननीय उपमुख्यमंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा जी द्वारा विधिवत रूप से किया गया।
इस विशेष अवसर पर बिहार के लोकप्रिय कृषि मंत्री श्री राम कृपाल यादव जी ने भी स्टॉल का अवलोकन किया तथा उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए सकारात्मक जीवनशैली और कृषि के समग्र विकास पर अपने विचार साझा किए।
🌿 Art of Living के स्टॉल पर लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा है—योग, ध्यान, स्वास्थ्य और सकारात्मक जीवनशैली को लेकर लोगों में जबरदस्त रुचि देखने को मिल रही है।
यह स्टॉल न केवल लोगों को स्वस्थ और तनावमुक्त जीवन की दिशा में प्रेरित कर रहा है, बल्कि बिहार की समृद्ध संस्कृति और जागरूक समाज का भी सुंदर परिचय प्रस्तुत कर रहा है।
📍 गांधी मैदान, पटना
🎉 बिहार दिवस 2026

सफलता की चमक या संतोष का सुकून: क्या है जीवन की असली कमाई?​​आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम सभी एक ऐसी रेस में शामिल हैं...
18/01/2026

सफलता की चमक या संतोष का सुकून: क्या है जीवन की असली कमाई?

​आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम सभी एक ऐसी रेस में शामिल हैं जिसका कोई अंत नहीं है। हम बेहतर घर, बड़ी गाड़ी और ऊंचे पद के पीछे भाग रहे हैं। लेकिन क्या कभी हमने रुककर खुद से यह सवाल किया है कि "क्या मैं वाकई खुश हूँ?"
​हाल ही में मैंने एक बहुत ही गहरा विचार पढ़ा: "एक संतोषजनक जीवन एक सफल जीवन से बेहतर है।" यह बात सुनने में सरल लग सकती है, लेकिन इसमें जीवन का सबसे बड़ा सत्य छिपा है।
​सफलता और संतोष के बीच का अंतर
​अक्सर हम सफलता को दूसरों की नजरों से देखते हैं। समाज तय करता है कि आप कितने सफल हैं—आपके बैंक बैलेंस से, आपके पद से या आपकी प्रसिद्धि से। लेकिन संतोष (Satisfaction) पूरी तरह से आंतरिक है।
​सफलता दूसरों के द्वारा मापी जाती है।
​संतोष हमारी अपनी आत्मा, मन और हृदय द्वारा महसूस किया जाता है।
​आर्ट ऑफ लिविंग और आंतरिक संरेखण (Alignment)
​आर्ट ऑफ लिविंग में पूज्य गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी हमेशा कहते हैं कि प्रसन्नता हमारे स्वभाव में है, लेकिन हम उसे बाहर खोजते रहते हैं। जब हमारा मन, हृदय और आत्मा एक ही दिशा में होते हैं, तो जो शांति महसूस होती है, वही वास्तविक "धन" है।
​बाहरी दुनिया की सफलता आज है, कल शायद न रहे। लेकिन जो संतोष आपको अपनी साधना, सेवा और सुदर्शन क्रिया के माध्यम से मिलता है, उसे दुनिया की कोई भी ताकत आपसे छीन नहीं सकती।
​संतोषपूर्ण जीवन की ओर 3 छोटे कदम:
​कृतज्ञता (Gratitude): जो आपके पास है, उसके लिए धन्यवाद दें। जब हम अभाव के बजाय भाव (abundance) पर ध्यान देते हैं, तो संतोष अपने आप आने लगता है।
​सेवा (Service): दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाना ही आत्मा की सबसे बड़ी संतुष्टि है।
​वर्तमान में जीना: सफलता अक्सर भविष्य की चिंता या अतीत के अफसोस में खोई रहती है, जबकि संतोष केवल 'अभी' में मिलता है।
​निष्कर्ष
​याद रखें, जीवन कोई प्रतियोगिता नहीं है जिसे जीतना है, बल्कि एक उत्सव है जिसे जीना है। अपनी सफलता की परिभाषा दूसरों को मत लिखने दीजिए। अपनी खुशी का पैमाना खुद बनिए।
​बिहार के मेरे सभी भाइयों और बहनों को मेरा संदेश है—सफलता के लिए मेहनत जरूर करें, लेकिन अपनी शांति और संतोष की कीमत पर नहीं।
​जय गुरुदेव!

​@रमेश कुमार
एपेक्स सदस्य, आर्ट ऑफ लिविंग (बिहार)

29/08/2025

जीवन की चुनौतियों में आर्ट ऑफ लिविंग का प्रकाश: दुखद घटनाओं से सीख
लेखक: रमेश कुमार, एपेक्स, आर्ट ऑफ लिविंग बिहार
नमस्कार दोस्तों,
आज का दिन फिर से हमें जीवन की नश्वरता और उसकी चुनौतियों की याद दिलाता है। हाल ही में एक समाचार पत्र में छपी कुछ दुखद खबरें पढ़कर मेरा मन व्यथित हो गया। ये खबरें उन परिवारों की हैं जो कर्ज, पारिवारिक दबाव और मानसिक तनाव के बोझ तले दबकर जीवन से हार मान बैठे। एक कहानी है एक युवा जोड़े की, जिन्होंने साथ जीने की कसम खाई थी, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें मौत की ओर धकेल दिया। दूसरी खबर एक हंसते-खेलते परिवार की, जहां कर्ज ने सब कुछ मिटा दिया। और तीसरी, एक व्यक्ति की जो अपनी मां से माफी मांगकर कहता है कि अब कोई रास्ता नहीं बचा। ये घटनाएं सिर्फ खबरें नहीं हैं, बल्कि हमारे समाज की उस सच्चाई की झलक हैं जहां तनाव, निराशा और आर्थिक दबाव लोगों को चरम कदम उठाने पर मजबूर कर देते हैं।
आर्ट ऑफ लिविंग पिछले कई वर्षों से श्री श्री रविशंकर जी के मार्गदर्शन में हजारों लोगों को जीवन की इन चुनौतियों से लड़ने का तरीका सिखाता आ रहा है। इसके फलस्वरूप लाखों लोगों के जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन आया है। निराश एवं हताश लोगों के जीवन में फिर से खुशियां वापस आई है। आर्ट ऑफ लिविंग का मूल मंत्र है - सांस, ध्यान और सेवा के माध्यम से जीवन को संतुलित बनाना। इन दुखद घटनाओं को देखकर मुझे लगता है कि अगर इन परिवारों को समय पर सही मार्गदर्शन मिलता, तो शायद ये हादसे टल सकते थे। कर्ज और पारिवारिक समस्याएं हर किसी के जीवन में आती हैं, लेकिन इन्हें कैसे संभाला जाए, यही असली कला है।
आइए, इन खबरों से कुछ महत्वपूर्ण सीखें लें:
मानसिक स्वास्थ्य की अहमियत: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव एक आम समस्या है। लेकिन सुदर्शन क्रिया जैसी आर्ट ऑफ लिविंग की तकनीकें हमें गहरी शांति प्रदान करती हैं। मैंने खुद देखा है कि बिहार में हमारे सेंटरों में आने वाले लोग, जो कर्ज या पारिवारिक कलह से जूझ रहे थे, ध्यान और योग से कैसे नई ऊर्जा पाते हैं। एक बार एक युवक आया था, जो आर्थिक संकट से आत्महत्या की सोच रहा था। कुछ ही सत्रों के बाद, वह न केवल मजबूत हुआ बल्कि दूसरों की मदद करने लगा।
परिवारिक बंधन मजबूत बनाएं: इन खबरों में परिवारों का टूटना दिखता है। आर्ट ऑफ लिविंग के फैमिली प्रोग्राम्स में हम सिखाते हैं कि कैसे संवाद, क्षमा और प्यार से रिश्तों को मजबूत किया जाए। माफी मांगना अच्छा है, लेकिन माफी देने और आगे बढ़ने की शक्ति ध्यान से आती है। बिहार में हमारे कई शिविरों में परिवार एक साथ आते हैं और पुरानी कड़वाहटों को भुलाकर नई शुरुआत करते हैं।
आर्थिक दबाव से निपटना: कर्ज एक बोझ है, लेकिन निराशा नहीं। हमारे प्रोग्राम्स में हम सिखाते हैं कि कैसे सकारात्मक सोच और सेवा भाव से जीवन को पुनर्निर्मित किया जाए। श्री श्री जी कहते हैं, "सेवा से समस्याएं छोटी लगने लगती हैं।" बिहार के ग्रामीण इलाकों में हमने कई ऐसे प्रोजेक्ट चलाए हैं जहां लोग सामूहिक रूप से एक-दूसरे की मदद करते हैं, और परिणामस्वरूप आत्मविश्वास बढ़ता है।
दोस्तों, ये दुखद घटनाएं हमें चेतावनी देती हैं कि जीवन अनमोल है। अगर आप या आपके आसपास कोई तनाव से जूझ रहा है, तो आर्ट ऑफ लिविंग से जुड़ें। बिहार में हमारे सेंटर पटना, मुजफ्फरपुर,भागलपुर, पूर्णिया, गया, मुंगेर, बोधगया, भोजपुर, बक्सर और अन्य जिलों में खुले हैं। सुदर्शन क्रिया वर्कशॉप में शामिल होकर देखिए, कैसे जीवन की हर समस्या एक अवसर बन जाती है।
अंत में, श्री श्री जी के शब्दों में - "जीवन एक उत्सव है, इसे जियो।"
आइए, हम सब मिलकर एक ऐसा समाज बनाएं जहां कोई भी निराशा के आगे न झुके।
यदि आप जुड़ना चाहें, तो संपर्क करें: [email protected] या हमारे निकटतम सेंटर पर आएं।
धन्यवाद,
रमेश कुमार
एपेक्स, आर्ट ऑफ लिविंग बिहार

"Bringing joy, harmony, and inner peace to Bihar through meditation, yoga, and service. Inspired by Gurudev Sri Sri Ravi Shankar, we are committed to a stress-free, happy, and compassionate society. Join the movement!"

22/08/2025

जीवन का असली सच – आज 🌸

दोस्तों, ज़रा ठहरकर सोचिए…
हममें से ज़्यादातर लोग बीते कल में उलझे रहते हैं या आने वाले कल की चिंता में खोए रहते हैं। कभी पछतावा, कभी चिंता — और इसी में हमारा आज निकल जाता है।

लेकिन सच तो यह है कि हमारे हाथ में सिर्फ़ आज है।

हम इसी एक दिन में जन्म लेते हैं, इसी एक दिन में जीते हैं और इसी एक दिन में विदा हो जाते हैं।
कल निकल चुका है — उस पर सोचने का कोई फायदा नहीं।
कल अभी आया ही नहीं है — उसकी चिंता करना बेकार है।

👉 असली जीवन बस आज है।

क्यों ज़रूरी है आज को जीना?

✅ खुशी पुराने पन्नों में नहीं, बल्कि आज की मुस्कान में छुपी है।
✅ सफलता भविष्य की कल्पनाओं में नहीं, बल्कि आज की मेहनत में है।
✅ और जीवन का असली आनंद तभी मिलेगा, जब हम इस क्षण को पूरी तरह जिएँगे।

मेरा छोटा-सा मंत्र

🌿 हर सुबह उठते ही सोचें — यह दिन ईश्वर का तोहफ़ा है।
🌿 अपने अपनों के साथ हँसें, मुस्कुराएँ और समय बिताएँ।
🌿 आज का काम पूरे दिल से करें, क्योंकि यही आने वाले कल की नींव है।
🌿 और सबसे अहम — आज को कभी भी व्यर्थ मत जाने दें।

✨ सार संदेश

दोस्तों, याद रखिए – Life is One Day.
अगर आपने आज को अच्छे से जी लिया, तो मान लीजिए आपने पूरा जीवन जी लिया।

तो आइए, आज से ही ठान लें —
🌸 हर दिन को उत्सव बनाएँ
🌸 हर पल में मुस्कुराएँ
🌸 और दूसरों को भी मुस्कुराने का कारण दें।

क्योंकि सच यही है – जीवन आज है, और यही सबसे बड़ा सच है।

✍️ – By Ramesh Kumar

17/07/2025

जीवन का युद्ध: दिमाग की रणभूमि

नमस्ते दोस्तों,
क्या आपने कभी सोचा है कि जीवन की सबसे बड़ी जंग कहाँ लड़ी जाती है? हथियारों, ताकत, या भीड़-भाड़ वाले मैदानों में नहीं, बल्कि उस छोटे से, पर सबसे ताकतवर अंग में—हमारा दिमाग। जी हाँ, जीवन का सारा युद्ध दिमाग के स्तर पर ही लड़ा जाता है। आज मैं अपनी इस सोच को, अपनी उस देसी और दिल से दिल तक वाली शैली में, आपके साथ साझा करना चाहता हूँ। तो चलिए, इस रणभूमि में उतरते हैं और देखते हैं कि आखिर ये दिमागी जंग क्या बला है!
दिमाग: वो अनदेखा रणक्षेत्र
सुबह उठते ही हमारा दिमाग एक रेसट्रैक बन जाता है। विचारों की गाड़ियाँ दौड़ने लगती हैं—काम का प्रेशर, घर की जिम्मेदारियाँ, रिश्तों की उलझनें, और कभी-कभी तो बस वो पुरानी बातें जो कब की बीत चुकीं। ये सब क्या है? ये है दिमाग का युद्ध। यहाँ हर पल एक नई लड़ाई है—खुद से, अपनी आशंकाओं से, अपनी कमज़ोरियों से, और कई बार तो अपनी ताकत से भी।
मुझे याद है, जब मैं कॉलेज में था, एक बार एग्जाम से पहले इतना डर गया था कि रात भर नींद ही नहीं आई। पेपर में फेल होने का डर, दोस्तों के बीच मज़ाक बनने का डर, और न जाने क्या-क्या। लेकिन जब अगले दिन पेपर देने बैठा, तो अहसास हुआ कि सारी रात जो मैंने डर-डर के सोचा, वो तो बस मेरे दिमाग का खेल था। असल में पेपर तो आसान था! उस दिन समझ आया, जंग तो बाहर नहीं, मेरे दिमाग में ही चल रही थी।
विचार: हथियार और दुश्मन, दोनों
हमारा दिमाग एक साथ हमारा सबसे बड़ा दोस्त और सबसे बड़ा दुश्मन है। विचार ही वो तलवारें हैं, जो या तो हमें आगे ले जाती हैं या हमें काटकर रख देती हैं। नकारात्मक विचार जैसे—‘मैं ये नहीं कर सकता’, ‘मुझे कोई नहीं समझता’, या ‘सब कुछ बेकार है’—ये वो तीर हैं जो हमें अंदर ही अंदर घायल करते हैं। वहीं, सकारात्मक सोच जैसे—‘मैं कोशिश करूँगा’, ‘हर मुश्किल का हल है’—ये वो ढाल हैं जो हमें बचाते हैं।
लेकिन सच कहूँ, इन दोनों के बीच का बैलेंस बनाना आसान नहीं। कई बार हम अपने ही विचारों के जाल में फँस जाते हैं। मेरा एक दोस्त था, जिसे लगता था कि वो कभी अपनी ड्रीम जॉब नहीं पा सकता। वो इतना डरता था कि इंटरव्यू की तैयारी ही नहीं करता था। एक दिन मैंने उससे कहा, “भाई, तू पहले अपने दिमाग से ये जंग जीत, बाकी सब आसान हो जाएगा।” उसने मेरी बात मानी, अपने डर को किनारे रखा, और आज वो उसी कंपनी में है, जिसका वो सिर्फ़ सपना देखता था।
कैसे जीतें ये दिमागी युद्ध?
तो सवाल ये है कि इस रणभूमि में जीत कैसे हासिल करें? मेरे हिसाब से कुछ बातें हैं, जो हमें इस जंग में सिपाही से सेनापति बना सकती हैं:
अपने विचारों को पहचानो: सबसे पहले ये समझो कि तुम्हारे दिमाग में क्या चल रहा है। क्या वो डर है, चिंता है, या कुछ और? जब तक तुम अपने दुश्मन को जानोगे नहीं, उसे हरा कैसे पाओगे?
नकारात्मकता को चैलेंज करो: अगर तुम्हारा दिमाग कहता है, “तू ये नहीं कर सकता,” तो उससे पूछो, “क्यों नहीं?” हर नकारात्मक विचार के पीछे तर्क ढूँढो। ज्यादातर बार ये सिर्फ़ हमारा वहम होता है।
सकारात्मकता का हथियार उठाओ: रोज़ सुबह एक अच्छा विचार चुनो। जैसे, “आज मैं कुछ नया सीखूँगा” या “मैं अपनी पूरी कोशिश करूँगा।” ये छोटी-छोटी बातें तुम्हारे दिमाग को ताकत देती हैं।
ध्यान और मेडिटेशन: मैं जानता हूँ, ये सुनने में बड़ा फिलॉसफिकल लगता है, पर सच में, 10 मिनट का ध्यान तुम्हारे दिमाग को शांत कर सकता है। मैं खुद रोज़ सुबह 5 मिनट बस अपनी साँसों पर ध्यान देता हूँ, और यकीन मानो, दिन की शुरुआत ही अलग होती है।
अपने आप से बात करो: हाँ, ये थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन अपने आप से बात करना दिमाग को कंट्रोल करने का सबसे अच्छा तरीका है। मैं अक्सर खुद से कहता हूँ, “चल भाई, तू ये कर सकता है।” और मज़े की बात, मेरा दिमाग मान लेता है!
असल जीत क्या है?
जीवन का युद्ध जीतने का मतलब ये नहीं कि तुम कभी हारोगे नहीं या कभी डरोगे नहीं। असल जीत है अपने दिमाग को समझना, उसे कंट्रोल करना, और हर बार गिरकर फिर से उठना। ये जंग रोज़ की है, हर पल की है। हर बार जब तुम अपने डर को, अपनी शंका को, अपनी नकारात्मकता को हराते हो, तुम एक कदम और बड़ा योद्धा बन जाते हो।
तो दोस्तों, अगली बार जब तुम्हें लगे कि सब कुछ बिखर रहा है, रुकना, एक गहरी साँस लेना, और अपने दिमाग से कहना, “भाई, ये जंग तू नहीं, मैं जीतूँगा!” यकीन मानो, तुम्हारा दिमाग तुम्हारी सुनने लगेगा।
तुम्हें क्या लगता है? तुम अपने दिमागी युद्ध को कैसे लड़ते हो? कमेंट में बताओ, मुझे तुम्हारी कहानियाँ सुनने का इंतज़ार है!
प्यार और हिम्मत के साथ,
[रमेश कुमार]
नोट: मैंने इसे आपके लिए लिखा है। यदि आपको अच्छा लगे तो इसे लाइक और शेयर अवश्य करें।

विश्व प्रसिद्ध सुदर्शन क्रिया सीखने और आर्ट ऑफ लिविंग से जुड़ने का सुनहरा अवसर  - जुलाई & अगस्त 2025 में होने वाले हैप्प...
16/07/2025

विश्व प्रसिद्ध सुदर्शन क्रिया सीखने और आर्ट ऑफ लिविंग से जुड़ने का सुनहरा अवसर - जुलाई & अगस्त 2025 में होने वाले हैप्पीनेस शिविर का विवरण- नए जीवन की अनुभूति करें... जल्दी करें सीट लिमिटेड है।

Address

Vishwakarma House, East Boring Canal Road
Patna
800001

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Art of Living Bihar posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share

Category