30/07/2026
360 Brain Booster Whole Evaluation Test
न्यूरोकोग्निटिव और मस्तिष्क जांच फ्रेमवर्क (Whole 360 Brain Evaluation Test Profile)1. डिस्इन्क्रिमेंट एनालिसिस (मस्तिष्क की थकान की जांच)मस्तिष्क की कार्यक्षमता घटना (Functional Decrescendo): यह जांचती है कि लगातार दिमागी काम करने पर हमारे न्यूरॉन्स (मस्तिष्क की कोशिकाएं) कितनी जल्दी थक जाते हैं या उनकी काम करने की गति कम हो जाती है।क्लिनिकल उपयोग: यह जांच उस छिपी हुई दिमागी थकान, सिर की पुरानी चोट (Post-concussion) के असर और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के शुरुआती लक्षणों को पकड़ लेती है, जो सामान्य टेस्ट में सामने नहीं आ पाते।2. कॉग्निटिव एनालिसिस (संज्ञानात्मक या दिमागी क्षमता की जांच)एग्जीक्यूटिव क्षमता का नक्शा (Executive Mapping): यह दिमाग की मुख्य क्षमताओं को मापती है, जैसे कि वर्किंग मेमोरी (याददाश्त), ध्यान बनाए रखना, परिस्थितियों के अनुसार ढलना और सोचने-समझने की गति।क्लिनिकल उपयोग: यह दिमाग के उस खास हिस्से की पहचान करती है जहां कोई खराबी है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि दिमागी कमजोरी किसी बीमारी (जैसे डिमेंशिया) के कारण है या फिर मानसिक तनाव, डिप्रेशन या मेटाबॉलिज्म (पाचन/हार्मोनल) की गड़बड़ी की वजह से है।3. इमोशनल एनालिसिस (भावनाओं और स्वभाव की जांच)लिम्बिक-कॉर्टिकल तालमेल (Limbic-Cortical Dynamics): यह जांचती है कि हमारा भावुक दिमाग (Limbic System) कितनी जल्दी प्रतिक्रिया देता है, हम अपनी भावनाओं को कितना संभाल पाते हैं, और हमारा तार्किक दिमाग हमारी भावनाओं को कितना नियंत्रित रख पाता है।क्लिनिकल उपयोग: यह एंग्जायटी (घबराहट), डिप्रेशन (अवसाद) या किसी पुरानी मानसिक चोट (Trauma) के दिमागी लक्षणों को मापती है। इससे पता चलता है कि मानसिक तनाव आपके सोचने-समझने और फैसले लेने की क्षमता को कितना नुकसान पहुंचा रहा है।4. ब्रेन अराउजल स्टेट्स और qEEG टेस्ट की जरूरत (मस्तिष्क की सक्रियता की स्थिति)सक्रियता का दायरा (Arousal Spectrum): दिमाग का सही से काम करना एक संतुलन पर निर्भर करता है। यह कम सक्रियता (Hypo-arousal: जिसमें डेल्टा/थिटा जैसी सुस्त तरंगें ज्यादा होती हैं) से लेकर अत्यधिक सक्रियता (Hyper-arousal: जिसमें बीटा जैसी बहुत तेज तरंगें होती हैं) के बीच संतुलित होना चाहिए।जांच की जरूरत (qEEG): इसके लिए 'क्वांटिटेटिव ईईजी' (qEEG) टेस्ट जरूरी होता है। यह दिमाग की तरंगों (Brainwaves) को डिजिटल डेटा यानी 'Z-स्कोर्स' (Z-scores) में बदल देता है, जिसकी तुलना एक स्वस्थ व्यक्ति के दिमाग के डेटा से की जाती है।क्लिनिकल उपयोग: qEEG दिमाग की तरंगों में छिपी उन गड़बड़ियों को ठीक-ठीक पकड़ लेता है, जिनकी वजह से मरीज को सोचने, व्यवहार करने या भावनाओं को संभालने में परेशानी आ रही है।5. रोग का आकलन और थेरेपी प्रोटोकॉल तय करना (जांच और इलाज की प्रक्रिया)मल्टीमॉडल इनटेक (बहुआयामी जांच): इलाज शुरू करने से पहले qEEG की रिपोर्ट को मरीज के लक्षणों, साइकोलॉजिकल टेस्ट और उसके पुराने इतिहास (Medical History) के साथ मिलाकर देखा जाता है।प्रोटोकॉल तैयार करना: डॉक्टर qEEG रिपोर्ट में आई उन कमियों या गड़बड़ियों (Z-scores) को टारगेट करते हैं, जो सीधे तौर पर मरीज की दिक्कतों से मेल खाती हैं।इलाज का चुनाव: इसमें मुख्य रूप से न्यूरोफीडबैक (Neurofeedback) थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे दिमाग को सही तरंगें और सही तरीके से काम करना सिखाया (ट्रेन किया) जाता है।. For more info visit us at http://www.brainmappingindia.com/latest-update/360-brain-booster-whole-evaluation-test/255?utm_source=facebookpage