02/10/2026
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हम अक्सर सोचते हैं— “जब परिस्थितियाँ ठीक होंगी, तब मैं खुश रहूँगा।”
लेकिन क्या वास्तव में हमारी खुशी परिस्थितियों पर निर्भर है?
मान लीजिए, किसी ने आपसे कठोर शब्द कह दिए।
एक ही परिस्थिति में एक व्यक्ति पूरा दिन परेशान रह सकता है, जबकि दूसरा व्यक्ति कुछ क्षण रुककर स्वयं से कह सकता है—
“मैं आत्मा हूँ… शांत स्वरूप हूँ। सामने वाले के शब्द मेरी आंतरिक शांति को तय नहीं कर सकते।”
परिस्थिति वही थी, लेकिन स्थिति अलग थी।
और यही अंतर हमारे आने वाले अनुभवों को बदल देता है।
जब हम अपनी स्थिति को शांत, स्थिर, सकारात्मक और परमात्म-स्मृति में रखते हैं, तो परिस्थितियाँ हमारे भविष्य की दिशा तय नहीं करतीं—हमारी आंतरिक अवस्था करती है।
इसलिए हर परिस्थिति में एक प्रश्न स्वयं से पूछें:
“मैं परिस्थिति को देख रहा हूँ, या अपनी स्थिति को संभाल रहा हूँ?”
क्योंकि परिस्थितियाँ हमारे हाथ में हमेशा नहीं होतीं,
लेकिन अपनी स्थिति को चुनने की शक्ति हमेशा हमारे पास होती है।