Dr Thakkar's ENT & Dental Surgical Hospital

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Akila  News
31/08/2026

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Hattrick Of Records set in Limca Book of Records
23/08/2026

Hattrick Of Records set in Limca Book of Records

21/08/2026

Public Health Awareness Podcast

18/08/2026

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18/08/2026

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दैनिक मिरर
​रिकॉर्ड से सम्मान तक, सम्मान से सेवा तक: राजकोट, गुजरात के ENT सर्जन डॉ. हिमांशु ठक्कर की 25 साल की प्रेरक यात्रा.
​by Dainik Mirror — August 16, 2026
​किसी डॉक्टर की पहचान केवल उसकी डिग्री, अस्पताल या सफल ऑपरेशन से नहीं होती। असली पहचान तब बनती है, जब उसकी विशेषज्ञता किसी मुश्किल समय में किसी इंसान के लिए उम्मीद बन जाए। राजकोट के प्रख्यात ENT सर्जन डॉ. हिमांशु जगदीशचंद्र ठक्कर की लगभग 25 वर्षों की चिकित्सा यात्रा ऐसी ही कहानी है—जहाँ रिकॉर्ड हैं, दुर्लभ सर्जरी हैं, राष्ट्रीय सम्मान हैं, मेडिकल ज्ञान है और सामाजिक सेवा है; लेकिन इन सबसे ऊपर है मानव सेवा का भाव।
​साल 2001 में राजकोट से मेडिकल प्रैक्टिस शुरू करने वाले डॉ. हिमांशु ठक्कर ने कान, नाक, गला, एयरवे तथा हेड एंड नेक से जुड़ी जटिल समस्याओं के उपचार में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। एंडोस्कोपिक सर्जरी, साइनस एवं नाक की सर्जरी, ब्रोंकोस्कोपी, इसोफैगोस्कोपी तथा जटिल एयरवे फॉरेन बॉडी मामलों में उनका लंबा अनुभव उनकी चिकित्सा यात्रा की महत्वपूर्ण विशेषता रहा है।
​1 जुलाई 2007 को उन्होंने डॉ. ठक्कर’s ENT & Dental Surgical Hospital की स्थापना की। लगभग दो दशकों में यह संस्थान चिकित्सा उपचार के साथ-साथ मरीजों के विश्वास, संवेदनशीलता और व्यक्तिगत देखभाल के लिए भी अपनी पहचान बना चुका है।
​रिकॉर्ड जो चिकित्सा कौशल की कहानी कहते हैं
​डॉ. ठक्कर की उपलब्धियों में सबसे उल्लेखनीय अध्याय Limca Book of Records से जुड़ा है। उनके नाम तीन अलग-अलग Limca Book of Records उपलब्धियां दर्ज हैं।
​Limca Book of Records 2025 में लगभग 8 सेंटीमीटर लंबे और 2.5 सेंटीमीटर चौड़े एंट्रोकोअनल नेजल पॉलीप को एंडोस्कोपिक तकनीक से सफलतापूर्वक निकालने की उपलब्धि को मान्यता मिली।
​इसके बाद 2026 में Limca Book of Records में दो और उल्लेखनीय मेडिकल रिकॉर्ड जुड़े। एक मामले में लगभग 10 सेंटीमीटर × 3.5 सेंटीमीटर × 1 सेंटीमीटर आकार के विशाल नेजल पॉलीप को एंडोस्कोपिक तकनीक से सफलतापूर्वक निकाला गया। दूसरे मामले में लगभग 2 सेंटीमीटर × 1 सेंटीमीटर आकार का चीकू/सपोडिला बीज (Sapodilla seed) एयरवे से निकालने की चुनौतीपूर्ण उपलब्धि दर्ज हुई, जो एयरवे फॉरेन बॉडी मैनेजमेंट में उनकी विशेषज्ञता को दर्शाती है।
​ये रिकॉर्ड केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि कठिन और असामान्य मेडिकल परिस्थितियों में आधुनिक एंडोस्कोपिक तकनीक और चिकित्सकीय कौशल के उपयोग की मिसाल हैं।
​उनकी रिकॉर्ड यात्रा India Book of Records तक भी पहुंची। वर्ष 2023 में एक बच्चे की सांस की नली में लगभग सात वर्षों से फंसी प्लास्टिक की सीटी को एंडोस्कोपिक प्रक्रिया से सफलतापूर्वक निकाला गया। बच्चा जब इस समस्या के साथ उपचार के लिए आया, तब उसकी उम्र करीब दस वर्ष थी; यह फॉरेन बॉडी उसके बचपन में एयरवे में चली गई थी। इस असाधारण मामले को India Book of Records में मान्यता मिली।
​जब बीमारी भी बन गई मेडिकल पहेली
​डॉ. ठक्कर के करियर में कई ऐसे दुर्लभ मामले आए हैं, जिन्हें सामान्य मेडिकल केस कहना कठिन है।
​एक 38 वर्षीय महिला लंबे समय से नाक बंद रहने और सिरदर्द से परेशान थी। जांच में नाक के भीतर एक ectopic tooth यानी असामान्य स्थान पर विकसित दांत मिला, जिसे सर्जरी द्वारा सफलतापूर्वक निकाला गया। यह अत्यंत दुर्लभ स्थिति थी।
​नाक के सेप्टम में दुर्लभ anastomosing haemangioma जैसे vascular tumour का निदान और एंडोस्कोपिक उपचार भी उनके जटिल ENT मामलों के अनुभव को दर्शाता है। इस मामले की मेडिकल रिपोर्ट प्रकाशित हुई और इसे अत्यंत दुर्लभ स्थिति के रूप में वर्णित किया गया।
​इसके अलावा लंबे समय से फंसे airway foreign bodies, बच्चों की सांस की नली में अटकी वस्तुओं और अन्य असामान्य ENT परिस्थितियों का उपचार उनके क्लिनिकल अनुभव का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
​रिकॉर्ड से बड़ा था इंसानियत का रिकॉर्ड
​लेकिन डॉ. हिमांशु ठक्कर की कहानी को केवल रिकॉर्ड और पुरस्कारों से समझना अधूरा होगा।
​कोविड के बाद जब म्यूकोरमाइकोसिस ने अनेक परिवारों को संकट में डाल दिया था, तब उन्होंने जरूरतमंद मरीजों की सहायता के लिए राजकोट सिविल अस्पताल में निःशुल्क म्यूकोरमाइकोसिस सर्जरी सेवाएं प्रदान कीं। उस कठिन समय में आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए निःशुल्क सर्जिकल सेवा केवल चिकित्सा उपचार नहीं, बल्कि एक बड़ी मानवीय पहल थी।
​ग्रामीण सौराष्ट्र में निःशुल्क मेडिकल एवं डायग्नोस्टिक कैंप, स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम और समाज के विभिन्न वर्गों तक चिकित्सा जानकारी पहुंचाने के प्रयास भी उनके सेवा-भाव का हिस्सा रहे हैं।
​उन्होंने कान, नाक, गले और साइनस की बीमारियों के साथ-साथ बच्चों में airway foreign body aspiration, तंबाकू से होने वाली बीमारियों, समय पर उपचार और बीमारी की रोकथाम जैसे विषयों पर लगातार जन-जागरूकता का प्रयास किया है।
​उनका विश्वास स्पष्ट है—“Prevention is better than cure.”
​राष्ट्रीय सम्मान और पेशेवर उपलब्धियां
​चिकित्सा क्षेत्र में उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला है। उन्हें—
​IMA Dr. C. S. Thakar National Award
​IMA MedAchievers Award of Merit for Excellent Contribution towards Medical Profession
​IMA Dr. A. K. N. Sinha National Award for Outstanding and Distinguished Services
​जैसे प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए हैं।
​इसके अतिरिक्त उन्हें Shri Lohana Mahaparishad Best International Professional Personality Award, Special Felicitation International Award तथा अन्य सम्मान भी प्राप्त हुए हैं।
​उनकी उपलब्धियों में राष्ट्रीय स्तर पर Indian Medical Association द्वारा तीन अलग-अलग अवसरों पर प्राप्त मान्यताएं, तीन Limca Book of Records उपलब्धियां और India Book of Records में दर्ज मेडिकल उपलब्धि एक विशिष्ट स्थान रखती हैं।
​मेडिकल ज्ञान को सीमाओं से आगे ले जाने की कोशिश
​डॉ. ठक्कर का योगदान केवल ऑपरेशन थिएटर तक सीमित नहीं रहा। दुर्लभ मेडिकल मामलों पर उनके case reports और medical publications विभिन्न मेडिकल जर्नल्स में प्रकाशित हुए हैं।
​उनके लिए किसी दुर्लभ केस की सफलता तभी अधिक सार्थक होती है, जब उससे दूसरे डॉक्टर और मेडिकल विद्यार्थी भी सीख सकें। यही सोच उन्हें अपने अनुभव को मेडिकल साहित्य और ज्ञान के माध्यम से साझा करने के लिए प्रेरित करती रही है।
​विदेशों में रहने वाले भारतीयों तक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पहुंचाने के लिए उन्होंने SBS Radio Australia के माध्यम से भी मेडिकल awareness और knowledge sharing में भाग लिया।
​राजकोट से दुनिया तक मरीजों का भरोसा
​आज डॉ. ठक्कर के पास केवल राजकोट ही नहीं, बल्कि गुजरात के विभिन्न हिस्सों और देश के अन्य राज्यों से भी मरीज जटिल ENT उपचार के लिए पहुंचते हैं। विदेशों से भी मरीज उनके उपचार और विशेषज्ञता पर भरोसा करते हुए राजकोट आए हैं।
​यह किसी भी डॉक्टर के लिए केवल व्यावसायिक उपलब्धि नहीं, बल्कि वर्षों में अर्जित विश्वास की पूंजी है।
​सेवा, नेतृत्व और समाज से जुड़ाव
​डॉ. ठक्कर ने चिकित्सा संगठनों में भी सक्रिय भूमिका निभाई है। वे IMA Rajkot Branch के Past Secretary, ENT Society of Rajkot के Past President, Surgeons Association Rajkot के Past Treasurer और Raghuvanshi Doctors Association Rajkot के Past President रह चुके हैं।
​सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का एक और उदाहरण उनकी पुस्तक “Echoes of Compassion: A Doctor’s Journey in ENT” है, जिसका विमोचन जून 2025 में हुआ। पुस्तक को थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों और गौ सेवा को समर्पित किया गया तथा इससे प्राप्त आय को charitable causes के लिए समर्पित करने का संकल्प लिया गया।
​25 वर्षों की यात्रा का असली पुरस्कार
​आज जब डॉ. हिमांशु ठक्कर अपने लगभग 25 वर्षों के चिकित्सा सफर को पीछे मुड़कर देखते हैं, तो इसमें अनेक उपलब्धियां दिखाई देती हैं—तीन Limca Book of Records उपलब्धियां, India Book of Records, राष्ट्रीय IMA सम्मान, दुर्लभ सर्जरी, मेडिकल पब्लिकेशन, स्वास्थ्य जागरूकता अभियान, निःशुल्क चिकित्सा सेवाएं और सामाजिक सेवा।
​लेकिन इन सभी उपलब्धियों को जोड़ने वाली एक ही कड़ी है—सेवा।
​उनका जीवन-दर्शन है: “मानव सेवा ही प्रभु सेवा है।”
​एक डॉक्टर के हाथों में केवल सर्जरी करने का कौशल नहीं होता; उन हाथों में किसी परिवार की उम्मीद भी होती है। डॉ. ठक्कर ने अपने 25 वर्षों के सफर में अनेक जटिल मामलों का उपचार किया, असाधारण मेडिकल रिकॉर्ड बनाए और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान हासिल किया।
​फिर भी उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि शायद कोई रिकॉर्ड या पुरस्कार नहीं है। सबसे बड़ी उपलब्धि वह भरोसा है, जो एक मरीज इलाज की उम्मीद लेकर उनके पास आता है और स्वस्थ होकर अपने साथ लेकर लौटता है।
​रिकॉर्ड इतिहास के पन्नों में दर्ज होते हैं। पुरस्कार दीवारों की शोभा बढ़ाते हैं। लेकिन किसी इंसान के जीवन से दर्द कम करना, किसी परिवार की चिंता दूर करना और किसी मरीज को नई उम्मीद देना—यह ऐसी उपलब्धि है, जिसकी कोई रैंकिंग नहीं होती।
​डॉ. हिमांशु ठक्कर की कहानी इसलिए केवल एक डॉक्टर की सफलता की कहानी नहीं है। यह उस चिकित्सा यात्रा की कहानी है, जिसमें रिकॉर्ड बने, सम्मान मिले और कठिन सर्जरी सफल हुईं—लेकिन जिसके केंद्र में हमेशा इंसान रहा।
​क्योंकि चिकित्सा केवल बीमारी का इलाज नहीं है; चिकित्सा उम्मीद को संभालने की जिम्मेदारी भी है।

किसी डॉक्टर की पहचान केवल उसकी डिग्री, अस्पताल या सफल ऑपरेशन से नहीं होती। असली पहचान तब बनती है, ज

Celebrating India’s Top Healthcare Heroes - Independence Day SpecialSpecial Edition
15/08/2026

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Special Edition

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Jai Hind
15/08/2026

Jai Hind

08/08/2026

Ectopic tooth eruption from Nose

🦷 A Tooth Growing Inside the Nose? Yes, It’s Possible! 👃

An ectopic tooth eruption in the nasal cavity is a rare condition where a tooth develops or erupts in an unusual location—such as the nasal cavity instead of the normal dental arch.

It may present with nasal obstruction, foul smell, recurrent nasal discharge, bleeding, or discomfort and can sometimes be mistaken for a nasal foreign body or other growth.

🔍 Rare cases need careful evaluation and endoscopic examination.
Early diagnosis and appropriate treatment can help prevent complications.

👨‍⚕️ Dr. Himanshu Thakkar
ENT Surgeon | Rajkot, Gujarat
Trust • Experience • Proven Success

📌 Medical awareness only. Individual diagnosis requires evaluation by a qualified specialist.

This case is being shared with the patient’s informed consent for the purpose of medical education and public awareness


नाक के अंदर दाँत निकलना एक बहुत ही दुर्लभ स्थिति है। इसे Ectopic Tooth कहा जाता है, जिसमें दाँत अपनी सामान्य जगह के बजाय नाक की गुहा में विकसित या बाहर निकल आता है। इससे नाक बंद होना, दुर्गंध, बार-बार नाक से स्राव, खून आना या असुविधा हो सकती है। सही निदान के लिए Nasal Endoscopy महत्वपूर्ण है।

નાકની અંદર દાંત નીકળવો એક અત્યંત દુર્લભ સ્થિતિ છે. તેને Ectopic Tooth કહેવામાં આવે છે, જેમાં દાંત પોતાની સામાન્ય જગ્યાએ ઊગવાને બદલે નાકની અંદર વિકસે છે અથવા બહાર આવે છે. તેના કારણે નાક બંધ થવું, દુર્ગંધ, વારંવાર નાકમાંથી પ્રવાહ, રક્તસ્ત્રાવ અથવા તકલીફ થઈ શકે છે. યોગ્ય નિદાન માટે Nasal Endoscopy મહત્વપૂર્ણ છે.

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