25/06/2026
Here is the meaning ;
> जहाँ यह सृष्टि नहीं है, वहाँ मैं-ही-मैं हूँ। मेरे अतिरिक्त न स्थूल था न सूक्ष्म और न दोनों का कारण अज्ञान। जहाँ यह सृष्टि नहीं है, वहाँ मैं-ही-मैं हूँ और इस सृष्टि के रूप में जो कुछ प्रतीत हो रहा है, वह भी मैं ही हूँ और जो कुछ बच रहेगा, वह भी मैं ही हूँ॥२॥
> वास्तव में न होने पर भी कुछ अवस्तुवाच्य वस्तु में अतिरिक्त मुझ परमात्मा में दो चन्द्रमाओं की तरह मिथ्या ही प्रतीत हो रही है, अथवा विद्यमान होने पर भी आकाश-मण्डल के नक्षत्रों में रही भाँति जो मेरी प्रतीति नहीं होती, इसे मेरी माया समझनी चाहिए॥
> जैसे भौतिक पञ्चमहाभूत छोटे-बड़े शरीरों में आकाशादि पञ्चमहाभूत उन शरीरों के कार्यरूप से निर्मित होने के कारण प्रवेश करते भी हैं और पहले से ही उन स्थानों और स्वरूप में कारणरूप से विद्यमान रहने के कारण प्रवेश नहीं भी करते, वैसे ही उन प्राणियों के शरीरों की दृष्टि से मैं उनमें अपने रूप से प्रवेश किये हुए हूँ और आत्मदृष्टि से अपने अतिरिक्त और को�