20/12/2025
शनि – नपुंसक , सेवक , अति शूद्र वर्ण , चौपाया स्वरूप , वात प्रधान , क्रूर एवं पापी ग्रह , तमोगुण , सांवला रंग , मोटे व खुरदरे अंग , मोटे बाल , पतला शरीर , मोटे दाँत , सुंदर भूरे रंग के नेत्र , आलसी / आयु -100 वर्ष , 36 वर्ष में अपना विशेष फल देने वाला / निवास – कूड़ा , कबाड़ , अवशेष रखने का स्थान /
♦️कारक – स्नायुमंडल , आयु , मृत्यु , नौकर , तेल , खनिज पदार्थ , विपत्ति , नपुंसकता , झूठ बोलना , मजदूर , नौकरी , बंधन , जेल , मुकद्दमा , बुढ़ापा , पाप , आलस्य , रुकावट , विलंब , अपमान , दरिद्रता , रोग , विकलांगता , राजभय , आयु , शारीरिक बल , दृढ़ता , विपत्ति , मोक्ष , ऐश्वर्य , नौकरी , विदेशी भाषा , बंधन , इत्यादि का कारक होता है ।
♦️वैदिक ज्योतिष में शनि ग्रह का बड़ा महत्व है। हिन्दू ज्योतिष में शनि ग्रह को आयु, का कारक माना जाता है । शनि का गोचर एक राशि में ढ़ाई वर्ष तक रहता है। ज्योतिषीय भाषा में इसे शनि ढैय्या कहते हैं। नौ ग्रहों में शनि की गति सबसे मंद है। गोचर में शनि जब नाम की राशि के पहले वाली राशि पर ढ़ाई वर्ष तक रहते है , फिर राशि पर ढ़ाई वर्ष तक रहते है एवं राशि के बाद वाली राशि पर ढ़ाई वर्ष तक विराजमान होते हैं इसे शनि की साढ़ेसाती जाता है। समाज में शनि ग्रह को लेकर नकारात्मक धारणा बनी हुई है। लोग इसके नाम से भयभीत होने लगते हैं । परंतु वास्तव में ऐसा नहीं है । ज्योतिष में शनि ग्रह को भले एक क्रूर ग्रह माना जाता है परंतु यह पीड़ित होने पर या किसी ग्रह को पीड़ित करने पर ही जातकों को नकारात्मक फल देता है । यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में कारक होकर शनि उच्च राशि में विराजमान हो और सूर्य , चन्द्र , मंगल पर दृष्टि ना हो तो वह उसे रंक से राज बना सकता है। शनि तीनों लोकों का न्यायाधीश है। अतः यह व्यक्तियों को उनके कर्म के आधार पर फल प्रदान करते है । शनि व्यक्ति को कर्मठ, कर्मशील और न्यायप्रिय बनाता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति को कार्यक्षेत्र में सफलता प्रदान मिलती है। यह व्यक्ति को धैर्यवान बनाता है और जीवन में स्थिरता बनाए रखता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति की उम्र में वृद्धि होती है।
👉यदि लग्न पर शनि का प्रभाव हो तो जीवन में उन्नति धीरे-धीरे होती है । ऐसे व्यक्ति घबराते नहीं हैं । कमजोर परिवार में भी जन्म लेकर उन्नति करते हैं परंतु समाज में ज्यादा सम्मान नहीं प्राप्त होता है । ऐसे व्यक्ति दार्शनिक विचार के होते हैं । ऐसे व्यक्ति प्रत्येक कार्य धीरे-धीरे करते हैं एवं आलसी होते हैं । ऐसे व्यक्ति लंबे होते हैं परंतु मोटे नहीं होते हैं । इसके कारण व्यक्ति का शरीर व बाल खुश्क होते हैं । शरीर का वर्ण काला होता है । हालाँकि व्यक्ति गुणवान होता है। शनि के प्रभाव से व्यक्ति एकान्त में रहना पसंद करेगा । ऐसे व्यक्ति लोहा या मशीनरी से संबंधित कार्य करते हैं तो उसमें सफलता प्राप्त होती है ।
👉पीड़ित शनि – वहीं पीड़ित शनि व्यक्ति के जीवन में कई प्रकार की परेशानियों को पैदा करता है। यदि शनि मंगल ग्रह से पीड़ित हो तो यह जातकों के लिए दुर्घटना और कारावास जैसी परिस्थितियों का योग बनाता है। ( कोई आवश्यक नहीं की सभी के साथ ऐसा हो जाए परंतु परेशानी तो होती है । ) इस दौरान जातकों को शनि के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए शनि का उपाय करना चाहिए एवं महामृत्युंजय मंत्र का जाप बचपन से हीं स्वयं करना चाहिए ।
♦️शनि यदि कमजोर या पीड़ित हो तो ये बीमारियाँ होती हैं – वायु रोग , गठिया , कमर , घुटने , जोड़ों का दर्द , स्नायु रोग , दुर्बलता , थकान , कैंसर , टी बी , अल्सर , लकवा , नाखून खराब , गंजापन , इत्यादि ।
👉यदि कुंडली में फलादेश के हिसाब से शनि लाभ दे रहा हो और कमजोर हो तो इसको प्रबल करने के लिए नीलम चांदी या पंच धातु में धारण करना चाहिए । जब तक नीलम धारण करने की सामर्थय नहीं है तब तक शमी का जड़ धारण कर सकते हैं । लोहे का छल्ला धारण कर सकते हैं या मंत्र जाप कर सकते हैं।
।। ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः ।।
👉यदि शनि फलादेश के हिसाब से किसी प्रकार की परेशानी दे रहा हो तो शनि का दान किसी वृद्ध मजदूर को शनिवार को करना चाहिए ।
दान – काले वस्त्र , उरद , कला तिल , लोहे की सामग्री , जूते , सरसो का तेल , बादाम , काला छाता ।
उपाय – शनिवार को लोहे की कटोरी में सरसों तेल डालकर उसमें अपनी परछाई देखकर दान करें । शनिवार को संध्याकाल में पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं , काला तिल एवं मीठा जल चढ़ाएं तथा 7 बार परिक्रमा करें । मोर पंख पूजा स्थान में रखें । शनिवार को रोटी में हल्का सरसों तेल और नमक लगाकर काले कुत्ते या काली गाय या भैसा या कौए को खिलाएं । शराब का सेवन ना करें । बूढ़े मजदूर को भोजन कराये एवं मदद करें ।
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