Bhatt astro and pooja path

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आचार्य जयदीप जी
जय श्री रुद्रेश🙏 नमस्ते दोस्तो आज एक नई शुरूवात के साथ जो कई विगत ५ वर्ष पूर्व ऑफलाइन माध्यम से कर रहा था आप से जुडने के लिए आज इस पेज को बना रहा हू ताकी आप भी इस पेज के माध्यम से मुझ तक जुडे ओर अपनी ज

ीवन की समस्या को दूर कर सकते है।

जैसे - विवाह की समस्याएं, संपत्ति, स्वास्थ्य के मुद्दे, कानूनी मामले, विदेश यात्रा, मंगनी, शिक्षा, करियर आदी।

आपको यदी कोई भी पूजा पाठ जैसे-सत्यानारायण कथा नवरात्री पाठ जाप हवन इत्यादी कोई भी धार्मिक कार्य हेतु आप संम्पर्क कर सकते है

अतः पूजा संम्बन्धित कोईं भी प्रश्न
जैसे- सूतक प्रारम्भ विचार गण मूल दोष इत्यादि ज्योतिष सम्बन्धित प्रश्न भी आप ग्रुप मे चर्चा कर सकते हे।
हर हर महादेव 🙏😊

23/12/2025
23/12/2025

👉लग्नेश की दशा के बारे में ज्योतिषियों का भ्रम।
कुछ ज्योतिषियों का मानना है। कि लग्नेश की महादशा हमेशा अच्छा ही फल करती है।👈

👉जबकि मैंने जो नियम पढ़ा है।
उसके अनुसार लग्नेश की दशा सामान्य रूप से ठीक फल देती है।
लेकिन साथ में शारीरिक कष्ट भी देती है।👈

👉लेकिन मैंने जो प्रैक्टिकल में पाया वह थोड़ा और अलग है👈
यदि लग्न और लग्नेश दोनों दो या तीन पाप ग्रहों से पीड़ित है।
और लग्न कुंडली की तरह ही चलित कुंडली में भी पूरी तरह से पीड़ित है।
और लगन के कारक सूर्य चंद्र को माना जाता है यह दोनों भी संयोग से पीड़ित है।
तो फिर लग्नेश की दशा भयंकर पीड़ा दायक होती है।
घोर कष्टकारी होती है।
मृत्यु भी संभव है।
जबकि सामान्य रूप से लग्नेश की दशा में मृत्यु नहीं होना चाहिए।
लेकिन अधिक पीड़ित होने पर लग्नेश की दशा में मृत्यु भी संभव है।
अब क्योंकि व्यक्ति केवल भावेश की दशा पढ़ लेता है और फिर उसी आधार पर वह जिद करने लगता है।
भावेश की दशाओं के नियम लिखे गए हैं।
पीड़ित होने पर भाव किस तरह से फल देते हैं भावेश किस तरह से फल देते हैं यह नियम भी लिखे गए हैं।
दौनौ नियम अलग-अलग लिखे गए तो आपको दोनों नियमों को मिलना पड़ेगा।
यदि आप नियमों को मिश्रित किए बिना फल की घोषणा करेंगे तो गलत हो जाएगा।
अब इसमें भी कोई रॉकेट साइंस नहीं है।
सामान्य रूप से चिंतन करने की आवश्यकता है।
लग्न आपके पूरे शरीर का प्रतिनिधित्व करती है।
तो जो भी आपकी कुंडली में अच्छे और बुरे योग होंगे उनको भोगना तो शरीर को ही है।
और जब लगन और लग्नेश स्वयं ही पीड़ित होंगे।
तो लग्नेश की दशा उसे कष्ट को क्यों नहीं भोगेगी फिर कौन भोगेगा।
किसके साथ ही लग्नेश महादशा में जब पीड़ित ग्रहों की अंतर्दशा और प्रत्यंतर दशा आएगी तो कष्ट की तीव्रता और बढ़ जाएगी।
एक कुंडली हमें प्राप्त हुई थी एक ज्योतिष के मित्र के द्वारा ही प्राप्त हुई थी।
सिंह लग्न की कुंडली में सूर्य सिंह लग्न में ही बैठा था लगन और लग्नेश बुरी तरह पीड़ित थे सूर्य की महादशा उसे जातक के लिए अत्यंत कष्टकारी रही।
एक जातक हमारे पास आया था कन्या लग्न का था उसकी कुंडली में लग्न में शनि और मंगल बैठकर लगन को पीड़ित कर रहे थे बुध मंगल की वृश्चिक राशि में बैठकर शनि से दृष्ट था। बुध के साथ राहु बैठा था। अर्थात लग्न शनी और राहु दो से पीड़ित हो गया और लगन मंगल शनि के बैठने से और केतु की दृष्टि से पीड़ित हो गई थीं।
बुद्ध की महादशा में राहु की अंतर्दशा चल रही थी जातक अत्यंत बीमार था चलने फिरने में असमर्थ था।
हमने उसको बुध का रत्न पन्ना पहनाया।
और पीड़ित करने वाले ग्रहों के शांति प्रत्येक महीने करवाना शुरू की।
आश्चर्य जनक रूप से आश्चर्य जनक रूप से जातक 90 प्रतिशत स्वस्थ हो गया।
लगभग 2 साल हो गए थे प्रत्येक महीने शनि मंगल राहु केतु की शांति हो रही थी।
अब वह लोग भी शांति कराते कराते थक गए थे।
एकदम हमसे पूछने आए आप शांति करवाना बंद कर दें।
हमें भी संकोच बस कहना पड़ा कि ठीक है अगर अब आराम है तोबंद कर दो।
शांति बंद करने के लगभग चार-पांच महीने बाद अचानक उसकी तबीयत खराब हुई और वह मृत्यु को प्राप्त हो गया।
इस लेख से मैं दो बातें स्पष्ट करना चाहता हूं।
एक तो है कि लग्नेश की दशा देखकर निश्चिंत ना हो जाए।
👉लग्नेश की दशा भी कष्टकारी हो सकती है👈
दूसरी बात ग्रहों की शांति एक बार करवा देने से शांति नहीं होती है।
लगातार करवाते रहना पड़ता है।
हमने अपना अनुभव लिखा।
अन्य विद्वतजन भी अपना अनुभव लिख सकते हैं।

🙏🙏🙏🙏🙏

20/12/2025

शनि – नपुंसक , सेवक , अति शूद्र वर्ण , चौपाया स्वरूप , वात प्रधान , क्रूर एवं पापी ग्रह , तमोगुण , सांवला रंग , मोटे व खुरदरे अंग , मोटे बाल , पतला शरीर , मोटे दाँत , सुंदर भूरे रंग के नेत्र , आलसी / आयु -100 वर्ष , 36 वर्ष में अपना विशेष फल देने वाला / निवास – कूड़ा , कबाड़ , अवशेष रखने का स्थान /

♦️कारक – स्नायुमंडल , आयु , मृत्यु , नौकर , तेल , खनिज पदार्थ , विपत्ति , नपुंसकता , झूठ बोलना , मजदूर , नौकरी , बंधन , जेल , मुकद्दमा , बुढ़ापा , पाप , आलस्य , रुकावट , विलंब , अपमान , दरिद्रता , रोग , विकलांगता , राजभय , आयु , शारीरिक बल , दृढ़ता , विपत्ति , मोक्ष , ऐश्वर्य , नौकरी , विदेशी भाषा , बंधन , इत्यादि का कारक होता है ।

♦️वैदिक ज्योतिष में शनि ग्रह का बड़ा महत्व है। हिन्दू ज्योतिष में शनि ग्रह को आयु, का कारक माना जाता है । शनि का गोचर एक राशि में ढ़ाई वर्ष तक रहता है। ज्योतिषीय भाषा में इसे शनि ढैय्या कहते हैं। नौ ग्रहों में शनि की गति सबसे मंद है। गोचर में शनि जब नाम की राशि के पहले वाली राशि पर ढ़ाई वर्ष तक रहते है , फिर राशि पर ढ़ाई वर्ष तक रहते है एवं राशि के बाद वाली राशि पर ढ़ाई वर्ष तक विराजमान होते हैं इसे शनि की साढ़ेसाती जाता है। समाज में शनि ग्रह को लेकर नकारात्मक धारणा बनी हुई है। लोग इसके नाम से भयभीत होने लगते हैं । परंतु वास्तव में ऐसा नहीं है । ज्योतिष में शनि ग्रह को भले एक क्रूर ग्रह माना जाता है परंतु यह पीड़ित होने पर या किसी ग्रह को पीड़ित करने पर ही जातकों को नकारात्मक फल देता है । यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में कारक होकर शनि उच्च राशि में विराजमान हो और सूर्य , चन्द्र , मंगल पर दृष्टि ना हो तो वह उसे रंक से राज बना सकता है। शनि तीनों लोकों का न्यायाधीश है। अतः यह व्यक्तियों को उनके कर्म के आधार पर फल प्रदान करते है । शनि व्यक्ति को कर्मठ, कर्मशील और न्यायप्रिय बनाता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति को कार्यक्षेत्र में सफलता प्रदान मिलती है। यह व्यक्ति को धैर्यवान बनाता है और जीवन में स्थिरता बनाए रखता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति की उम्र में वृद्धि होती है।
👉यदि लग्न पर शनि का प्रभाव हो तो जीवन में उन्नति धीरे-धीरे होती है । ऐसे व्यक्ति घबराते नहीं हैं । कमजोर परिवार में भी जन्म लेकर उन्नति करते हैं परंतु समाज में ज्यादा सम्मान नहीं प्राप्त होता है । ऐसे व्यक्ति दार्शनिक विचार के होते हैं । ऐसे व्यक्ति प्रत्येक कार्य धीरे-धीरे करते हैं एवं आलसी होते हैं । ऐसे व्यक्ति लंबे होते हैं परंतु मोटे नहीं होते हैं । इसके कारण व्यक्ति का शरीर व बाल खुश्क होते हैं । शरीर का वर्ण काला होता है । हालाँकि व्यक्ति गुणवान होता है। शनि के प्रभाव से व्यक्ति एकान्त में रहना पसंद करेगा । ऐसे व्यक्ति लोहा या मशीनरी से संबंधित कार्य करते हैं तो उसमें सफलता प्राप्त होती है ।

👉पीड़ित शनि – वहीं पीड़ित शनि व्यक्ति के जीवन में कई प्रकार की परेशानियों को पैदा करता है। यदि शनि मंगल ग्रह से पीड़ित हो तो यह जातकों के लिए दुर्घटना और कारावास जैसी परिस्थितियों का योग बनाता है। ( कोई आवश्यक नहीं की सभी के साथ ऐसा हो जाए परंतु परेशानी तो होती है । ) इस दौरान जातकों को शनि के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए शनि का उपाय करना चाहिए एवं महामृत्युंजय मंत्र का जाप बचपन से हीं स्वयं करना चाहिए ।

♦️शनि यदि कमजोर या पीड़ित हो तो ये बीमारियाँ होती हैं – वायु रोग , गठिया , कमर , घुटने , जोड़ों का दर्द , स्नायु रोग , दुर्बलता , थकान , कैंसर , टी बी , अल्सर , लकवा , नाखून खराब , गंजापन , इत्यादि ।

👉यदि कुंडली में फलादेश के हिसाब से शनि लाभ दे रहा हो और कमजोर हो तो इसको प्रबल करने के लिए नीलम चांदी या पंच धातु में धारण करना चाहिए । जब तक नीलम धारण करने की सामर्थय नहीं है तब तक शमी का जड़ धारण कर सकते हैं । लोहे का छल्ला धारण कर सकते हैं या मंत्र जाप कर सकते हैं।
।। ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः ।।

👉यदि शनि फलादेश के हिसाब से किसी प्रकार की परेशानी दे रहा हो तो शनि का दान किसी वृद्ध मजदूर को शनिवार को करना चाहिए ।
दान – काले वस्त्र , उरद , कला तिल , लोहे की सामग्री , जूते , सरसो का तेल , बादाम , काला छाता ।
उपाय – शनिवार को लोहे की कटोरी में सरसों तेल डालकर उसमें अपनी परछाई देखकर दान करें । शनिवार को संध्याकाल में पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं , काला तिल एवं मीठा जल चढ़ाएं तथा 7 बार परिक्रमा करें । मोर पंख पूजा स्थान में रखें । शनिवार को रोटी में हल्का सरसों तेल और नमक लगाकर काले कुत्ते या काली गाय या भैसा या कौए को खिलाएं । शराब का सेवन ना करें । बूढ़े मजदूर को भोजन कराये एवं मदद करें ।
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18/12/2025

Har har mahadev

18/12/2025

🚩🚩har har Mahadev 🚩🚩

माँ #चामुण्डा #रानी और #नन्दीकेश्वर #महादेव जी के #रात्रि दर्शन 🚩🚩🚩🚩🙏🙏

🚩🚩har har Mahadev 🚩🚩माँ  #चामुण्डा  #रानी और  #नन्दीकेश्वर  #महादेव जी के  #रात्रि दर्शन 🚩🚩🚩🚩🙏🙏
18/12/2025

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कोई भी ग्रह एक ही भाव में विराजमान होने के बाद भी किसी कुंडली में लाभ दे सकता है किसी कुंडली में परेशानी दे सकता है । कई...
16/12/2025

कोई भी ग्रह एक ही भाव में विराजमान होने के बाद भी किसी कुंडली में लाभ दे सकता है किसी कुंडली में परेशानी दे सकता है ।
कई लोग लिखते हैं की दशम भाव में राहु बहुत अच्छा होता है परंतु यह सभी कुंडलियों में लागू नहीं होता है ।
👉यह इस बात पर निर्भर करता है कि किस राशि में विराजमान है एवं किस ग्रह के साथ संबंध बना रहा है ।
♦️ पहले तुला लग्न की कुंडली है जिसमें राहु दशम भाव में कर्क राशि में चंद्रमा के साथ विराजमान है एवं द्वितीय भाव में सूर्य को पीड़ित कर रहे हैं जिसके कारण राहु की अंतर्दशा में इनको रोजगार में बहुत ज्यादा परेशानी हुई । द्वितीय भाव में सूर्य को पीड़ित करने के कारण आमदनी में भी परेशानी हुई धन एवं कुटुंब से संबंधित भी परेशानी हुई बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा ।
♦️ दूसरी कुंडली धनु लग्न की है जिसमें राहु दशम भाव में कन्या राशि में विराजमान है । इनकी राहु की अंतर्दशा में रोजगार में बहुत अच्छी सफलता प्राप्त हुई । धन का भी श्रेष्ठ लाभ प्राप्त हुआ ।
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💥 जो सदस्य कभी भी कुंडली पोस्ट करके प्रश्न पूछना चाहते हैं  इस पोस्ट को अपने प्रोफाइल में सेव करके रखें ताकि जब उपाय बता...
01/12/2025

💥 जो सदस्य कभी भी कुंडली पोस्ट करके प्रश्न पूछना चाहते हैं इस पोस्ट को अपने प्रोफाइल में सेव करके रखें ताकि जब उपाय बताया जाए तो आपको ढूंढना ना पड़े।
कुछ समय बाद यह मत पूछना किस ग्रह का क्या मंत्र है ? प्रबल कैसे करें ? दान उपाय क्या करना है ?
♦️ज्योतिष में सिर्फ दो ही उपाय होते हैं । जो ग्रह आपको फलादेश के हिसाब से लाभ दे रहे हैं यदि वह कमजोर है तो उन्हें प्रबल करें ।
जो ग्रह आपको फलादेश के हिसाब से परेशान कर रहे हैं उनका दान एवं उपाय उन ग्रहों से संबंधित जीव-जंतुओं के लिए करें ।
👉 प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में विधि विधान से साधना अवश्य करना चाहिए । कुछ महत्वपूर्ण मंत्र है जिनका जाप प्रत्येक व्यक्ति को बचपन से करना चाहिए । जिसके माध्यम से आप कई सारे कष्टों से छुटकारा पा सकते हैं ।
👉 किसी भी ग्रह का मंत्र जाप तभी लाभ देगा जब आप विधि विधान से साधना करेंगे और उसके बाद ज्यादा से ज्यादा संख्या में मंत्र जाप करें । एक दो माला मंत्र जाप करने से कुछ होने वाला नहीं है । परंतु आप एक दो माला से प्रारंभ करें और और धीरे-धीरे बढ़ाएं एवं अनुष्ठान करें ।
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👉 सूर्य –
प्रबल – यदि किसी की कुंडली में सूर्य कारक है एवं फलादेश के हिसाब से लाभ पहुंचा रहे हैं और कमजोर हैं तो ऐसी स्थिति में माणिक्य सोने या तांबे में रविवार को धारण करना चाहिए । जब तक आपके पास माणिक्य धारण करने की स्थिति नहीं है तब तक आप बेल का जड़ या लाल चंदन की माला धारण कर सकते हैं । लाल चंदन का तिलक लगा सकते हैं । लाल चंदन की माला से सूर्य मंत्र का जाप कर सकते हैं । ( पूर्ण लाभ माणिक्य से ही होगा )
मंत्र – ।। ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः ।।
♦️यदि सूर्य जन्म कुंडली में आकारक है या फलादेश के हिसाब से किसी प्रकार की परेशानी उत्पन्न कर रहे हैं तब सूर्य से संबंधित दान एवं उपाय रविवार को करना चाहिए ।

सूर्य से संबंधित दान – गेहूं , तांबा , गुड़ , लाल चंदन , लाल वस्त्र किसी 50 वर्ष से ऊपर के व्यक्ति को रविवार को दान करना चाहिए ।

उपाय – प्रातः तांबे के लोटे में जल , कुंकुम, अक्षत एवं लाल पुष्प डालकर सूर्य को अर्पित करें । भूरे गाय को गेहूं एवं गुड़ अपने हाथों से खिलाए । बंदरों को गुड़ एवं चने खिलाए । पिता के पैर छूकर आशीर्वाद लें एवं पिता की सेवा करें ।

👉 चन्द्र –
प्रबल – यदि कुंडली में चंद्रमा पीड़ित या कमजोर है तो सोमवार को मोती चांदी में धारण करना चाहिए । जब तक आपके पास मोती धारण करने की व्यवस्था नहीं है तब तक आप चंद्रमा का मंत्र जाप कर सकते हैं । सफेद चंदन का तिलक लगा सकते हैं । खिरनी का जड़ धारण कर सकते हैं ।
मंत्र – ।। ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः ।।
पूर्णिमा की रात्रि को खीर बनाकर छत पर चंद्रमा की रोशनी में रखें ( चलनी से ढक देना चाहिए ताकि कोई कीड़ा उसमें ना पड़े ) दूसरे दिन प्रातः उसको प्रसाद के रूप में ग्रहण करें ।

चंद्रमा किसी भी ग्रह को शत्रु दृष्टि से नहीं देखता है । बहुत कम ही देखा गया है कि चंद्रमा प्रबल होकर किसी प्रकार की परेशानी करे । परंतु फिर भी यदि ऐसा होता है तो चंद्रमा से संबंधित दान एवं उपाय करना चाहिए । दान – सफेद वस्त्र , दूध , चावल , शंख , मोती , सफेद चंदन , मिस्त्री ( सोमवार को माता के समान स्त्री को )

👉 मंगल –
प्रबल – यदि मंगल कुंडली में कारक हो और फलादेश के हिसाब से लाभ दे रहा हो परंतु कमजोर हो तो इसको प्रबल करने के लिए मूंगा सोने या तांबे में मंगलवार को धारण करना चाहिए ।
जब तक मूंगा धारण करने की व्यवस्था ना हो तब तक मंगल का मंत्र जाप करें । तांबे की अंगूठी या कड़ा धारण करें । अनंतमूल का जड़ धारण करें । मंत्र – ॥ ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः ॥
♦️यदि जन्म कुंडली में मंगल किसी प्रकार की परेशानी दे रहा हो तो मंगल से संबंधित दान एवं उपाय ( मंगलवार को ) करना चाहिए । ( किसी युवा सन्यासी या व्यक्ति को या हनुमान मंदिर में )

दान – गुड़ , मसूर की दाल , शहद , लाल वस्त्र , लाल चंदन , तांबा , सिंदूर ।

उपाय – हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें । कार्तिकेय भगवान की आराधना करें । गाय को रोटी में गुड रखकर खिलाए । हनुमान मंदिर में चोला चढ़ाएं । भाई से अच्छा संबंध रखें । स्वास्थ्य ठीक हो तो रक्त दान करें । ( यदि कोई कन्या मांगलिक हो तो मंगला गौरी की आराधना करें तथा मंगल चंडिका स्तोत्र का पाठ करें । )

👉 बुध –
प्रबल- यदि जन्म कुंडली में बुध फलादेश के हिसाब से लाभ पहुंचा रहा हो और कमजोर हो तो पन्ना सोने या पीतल में बुधवार को धारण करना चाहिए ।
जब तक आपके पास पन्ना धारण करने की व्यवस्था ना हो तब तक विधारा की जड़ धारण कर सकते हैं या बुध का मंत्र जाप कर सकते हैं ।
मंत्र – ।। ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः ।।
♦️यदि जन्म कुंडली में बुध फलादेश के हिसाब से किसी प्रकार की परेशानी दे रहा हो तो उससे संबंधित दान एवं उपाय करना चाहिए

दान – हरा वस्त्र , मूंग की दाल , फल , हरि सब्जी , हरि कांच की चूड़ी , किन्नर या किसी कन्या को ।

उपाय – मूंग की दाल मंगलवार की रात को जल में भीगा दें एवं बुधवार को दिन में पंछियों को खिलाएं । बुधवार को गाय को हरा चारा घास या हरी शब्जी खिलाएं ।
बहन या बुआ को वस्त्र एवं मिठाई दान कर सकते हैं ।

👉 गुरु –
प्रबल – यदि जन्म कुंडली में फलादेश के हिसाब से गुरु ग्रह लाभ दे रहा हो एवं कमजोर हो तो पुखराज सोने या पीतल में गुरुवार को धारण करना चाहिए । जब तक आपके पास पुखराज धारण करने की सामर्थ्य नहीं है तब तक आप केले की जड़ या हल्दी की गांठ धारण कर सकते हैं । हल्दि या केसर का तिलक लगाएं । हल्दी की माला से मंत्र जाप करें ।
मंत्र – ।। ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः ।।
♦️यदि फलादेश के हिसाब से गुरु ग्रह किसी प्रकार की परेशानी दे रहा हो तो इससे संबंधित दान किसी ब्राह्मण , पुरोहित या गुरु को करना चाहिए एवं उपाय करना चाहिए ।

दान – पीला वस्त्र , हल्दी , चने की दाल , धार्मिक पुस्तक , पिला फल

उपाय – बुधवार को रात को चने की दाल भिगोकर रखें गुरुवार को प्रातः रोटी में चने दाल हल्दी एवं नमक भर के गाय को खिलाएं । पीपल के पेड़ पर जल अर्पित करें । किसी सच्चे साधु , महात्मा या गुरु का अपमान नहीं करना चाहिए ।

👉 शुक्र –
प्रबल – फलादेश के हिसाब से शुक्र लाभ दे रहा हो एवं कमजोर हो तो हीरा या ओपल चांदी में शुक्रवार को धारण करना चाहिए । जब तक रत्न धारण करने की सामर्थ्य नहीं है तब तक सरपुंखा या गूलर की जड़ धारण कर सकते हैं । मंत्र जाप कर सकते हैं ।
मंत्र- ।। ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः ।।
♦️यदि फलादेश के हिसाब से शुक्र परेशानी दे रहा हो तो शुक्र से संबंधित दान किसी युवती या काने व्यक्ति को करना चाहिए एवं उपाय करना चाहिए ।
दान – चांदी , दूध , दही , घी , इत्र , चावल , मिश्री , सफेद मिठाई , सफेद चंदन , रेशमी रंगीन वस्त्र , ( शुक्रवार को )

उपाय – गाय को रोटी खिलाएं एवं गाय की सेवा करें । आटा एवं शक्कर चीटियों को डालें ।

👉 शनि –
प्रबल – यदि कुंडली में फलादेश के हिसाब से शनि लाभ दे रहा हो और कमजोर हो तो इसको प्रबल करने के लिए नीलम चांदी या पंच धातु में शनिवार को धारण करना चाहिए। जब तक नीलम धारण करने की सामर्थय नहीं है तब तक शमी का जड़ धारण कर सकते हैं । लोहे का छल्ला धारण कर सकते हैं या मंत्र जाप कर सकते हैं।
मंत्र – ।। ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः ।।
♦️यदि शनि फलादेश के हिसाब से किसी प्रकार की परेशानी दे रहा हो तो शनि का दान किसी वृद्ध मजदूर को शनिवार को करना चाहिए ।
दान – काले वस्त्र , उरद , कला तिल , लोहे की सामग्री , जूते , सरसो का तेल , बादाम , काला छाता ।
उपाय – शनिवार को लोहे की कटोरी में सरसों तेल डालकर उसमें अपनी परछाई देखकर दान करें । शनिवार को संध्याकाल में पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं , काला तिल एवं मीठा जल चढ़ाएं तथा 7 बार परिक्रमा करें । मोर पंख पूजा स्थान में रखें । शनिवार को रोटी में हल्का सरसों तेल और नमक लगाकर काले कुत्ते या काली गाय या भैसा या कौए को खिलाएं । शराब का सेवन ना करें । बूढ़े गरीब मजदूर को भोजन कराएं ।

👉 राहु –
राहु से होने वाले परेशानी से बचने के लिए राहु का दान एवं उपाय शनिवार या बुधवार को करना चाहिए । ( कुष्ठ रोगी या सफाई कर्मी को ) । मंत्र – ॥ ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः ॥
♦️दान – नीले काले वस्त्र , ( यव ) जौ , काली उड़द , जटा वाला नारियल , चाय पत्ती , तंबाकू , मूली , कोयला इत्यादि।
उपाय – कुष्ठ रोगी को भोजन कराएं जिसमें काले उड़द की एक सामग्री अवश्य होनी चाहिए । जौ कच्चे दूध से धोकर नदी में विसर्जित करें या पंछियों को खिलाएं । घर में या छत पर किसी भी प्रकार का बंद बिजली का सामान या कबाड़ ना रखें । ( उड़द की दाल , जौ , बाजरा , काला तिल , सफेद तिल एक साथ मिलाकर पंछियों को प्रतिदिन खिलाएं । ) पारद शिवलिंग स्थापित करके रुद्राक्ष की माला से महामृत्युंजय मंत्र का स्वयं जाप करें । रुद्राष्टाध्यायी ( पांचवें अध्याय के 16 मंत्र ) का पाठ करते हुए पारद शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करें ।

👉 केतु –
फलादेश के हिसाब से केतु यदि समस्या उत्पन्न कर रहा हो तो दान एवं उपाय करना चाहिए ।( मंगलवार या शनिवार को कुष्ठ रोगी या सफाईकर्मी को )
मंत्र – ।। ॐ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमः ।।
♦️दान – चितकबरा कंबल , भूरा वस्त्र , सतनाजा , नारियल , काला – सफेद तिल , तिल का तेल , बकरा इत्यादि ।
उपाय – असगंध की जड़ धारण करें । काले एवं सफेद तिल के लड्डू गणेश जी को चढ़ा कर बांटें । कुत्ते को दूध एवं ब्रेड खिलाएं , प्रतिदिन कुत्ते को बिस्किट या रोटी खिलाएं । सतनाजे की रोटी कुत्ते को खिलाएं । ( उड़द की दाल , जौ , बाजरा , काला तिल , सफेद तिल एक साथ मिलाकर पंछियों को प्रतिदिन खिलाएं । )

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💥 जो सदस्य विधिवत गुरु दीक्षा लेकर नियम से प्रतिदिन साधना करते हैं उनके जीवन की परेशानी धीरे-धीरे कम होने लगते है ।

🔶 महामृत्युंजय मंत्र – जीवन में होने वाले रोग बीमारी , कष्ट , अकाल मृत्यु से रक्षा के लिए सोमवार से प्रारंभ करके प्रतिदिन पारद या स्फटिक का शिवलिंग तथा महामृत्युंजय यंत्र स्थापित करके रुद्राक्ष की माला से मंत्र जाप करें ।
( ॥ ॐ हौं जुं सः त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टि वर्धनं उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् सः जुं हौं ॐ ॥ )

🔶 नवार्ण मंत्र – ( अमोध सुरक्षा प्रदान करने वाला मंत्र ) समस्त प्रकार की व्याधियों , बाहरी आक्रमणों और घाट प्रतिघात से बचाने वाला यह एक मात्र मंत्र है , जिसे सिद्ध करने पर मानव को न शत्रुओं से भय रहता है और न किसी प्रकार की आधि – व्याधि , कष्ट – पीड़ा का डर रहता है । यह मंत्र मानव को सभी दृष्टियों से सुरक्षा प्रदान करता है । ऐसे व्यक्ति पर किसी भी प्रकार का कोई तान्त्रिक प्रभाव व्याप्त नहीं रहता है । ( ॥ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॥ )

🔶 लक्ष्मी मंत्र – जीवन में दरिद्रता को समाप्त करके धन – धान्य एवं समृद्धि प्राप्त करने के लिए शुक्रवार से प्रारंभ करके प्रतिदिन कमलगट्टे की माला से लक्ष्मी मंत्र का जाप करें एवं कनकधार स्तोत्र या श्री सूक्त का पाठ करें ।
( ॥ ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः ॥ )

🔶 कर्ज मुक्ति के लिए बुधवार से प्रारंभ करें - गणेश जी की छोटी सी प्रतिमा स्थापित करके हल्दी की माला से कर्ज मुक्ति गणेश मंत्र का जाप करें ।
।। ॐ गणेश ऋणं छिन्धि वरेण्यं हुं नमः फट् ॥
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Mo - 074670 62534

27/11/2025

सीखे रुद्राष्टाध्याय का पाठ करना 1 अध्याय

26/11/2025

*|।ॐ।| जय गोपीनाथ की|।ॐ।|*
*आज का पंचांग*

*तिथि.........................षष्ठी*
*गते.........................ग्यारह*
*वार.......................बुधवार*
*पक्ष.........................शुक्ल*
*नक्षत्र.......................श्रवण*
*योग............................गंड*
*राहुकाल.....१२.१०--१३.४९*
*मास....................मार्गशीर्ष*
*ऋतु.........................हेमंत*
*युगाब्द ..................५१२७*
*विक्रम संवत्.............२०८२*
*26 नवम्बर ई.स. -2025*
*आज का दिन सभी के लिए मंगलमय हो*
🕉️🚩🔔🪔🚩🔔🌻🕉️
*_ऊॅं श्री जम्भेश्वराय नमः_*
*Jaydeep i*

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Rishikesh
249202

Opening Hours

9am - 5pm

Telephone

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