06/07/2026
यदि इन दिनों...
मन थोड़ा थका हुआ महसूस करता है,
तो स्वयं पर कठोर मत होइए।
जीवन कभी-कभी ऐसा भी होता है।
बाहर से सब कुछ ठीक दिखाई देता है,
फिर भी भीतर
कुछ शांत नहीं होता।
और यह भी ठीक है।
हम दिनभर
लोगों से मिलते हैं,
बातें करते हैं,
अपनी जिम्मेदारियाँ निभाते हैं।
लेकिन कभी-कभी
स्वयं से मिले बिना ही
दिन, सप्ताह और महीने बीत जाते हैं।
शायद इसलिए मन
थोड़ा रुकना चाहता है।
थोड़ा सुना जाना चाहता है।
थोड़ा महसूस किया जाना चाहता है।
एक दुनिया बाहर है,
एक दुनिया भीतर।
बाहर की दुनिया में
हम अपना जीवन जीते हैं।
भीतर की दुनिया में
हम अपने जीवन को महसूस करते हैं।
जब भीतर कोई पीड़ा होती है,
तो बाहर की सबसे सुंदर चीज़ें भी
हमें वैसी नहीं छू पातीं।
और जब भीतर शांति उतरती है,
तो साधारण-सी हवा,
एक मुस्कान,
एक सुबह,
भी सुंदर लगने लगती है।
इसलिए आज
सब कुछ ठीक करने की कोशिश मत कीजिए।
केवल कुछ क्षण
अपने साथ बैठ जाइए।
बिना किसी निर्णय के।
बिना कुछ बदले।
बिना स्वयं को समझाए।
कभी-कभी...
उपचार किसी समाधान से नहीं,
अपने प्रति थोड़ी-सी
करुणा से आरम्भ होता है।
🌺
आत्मबोधः सर्वप्रश्नानां परान्तः।
चैतन्य स्वामी
Shreem Chaitanyaa Yoga