Spiritual Healing Astrology by Vibha Jain

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महादेव मंत्र और हृदय चक्र: "ॐ नमः शिवाय" से अनाहत का जागरण 1. हृदय चक्र: अनाहत का विज्ञानयोग-तंत्र में 7 मुख्य चक्र हैं।...
12/05/2026

महादेव मंत्र और हृदय चक्र: "ॐ नमः शिवाय" से अनाहत का जागरण
1. हृदय चक्र: अनाहत का विज्ञान

योग-तंत्र में 7 मुख्य चक्र हैं। चौथा चक्र है अनाहत चक्र — हृदय के मध्य, रीढ़ के सामने।

| तत्व | विवरण |

●स्थान-छाती के केंद्र में, स्तनों के बीच |
●रंग- हरा, कुछ परंपराओं में धुआँ-गुलाबी |
●बीज मंत्र- यं YAM |
●तत्व - वायु — स्पर्श, गति, प्राण |
●कमल- 12 पंखुड़ियों वाला |
●देवता- ईशान रुद्र शिव + काकिनी शक्ति |
●विषय- प्रेम, करुणा, क्षमा, संतुलन, संबंध |

"अनाहत" का अर्थ है "बिना आहत किए" — वह ध्वनि जो दो वस्तुओं के टकराने से नहीं बनती। ऋषियों ने हृदय में सूक्ष्म "सोऽहम्" ध्वनि सुनी — जो साँस के साथ खुद-ब-खुद चलती है। यही अनाहत नाद है। जब यह चक्र खुलता है, व्यक्ति बिना शर्त प्रेम करना सीखता है।

बंद हृदय चक्र के लक्षण-: अकेलापन, ईर्ष्या, द्वेष, पुराने रिश्तों का दर्द, माफ न कर पाना, अस्थमा, हृदय रोग, रक्तचाप।
खुला हृदय चक्र-: करुणा, भरोसा, सहानुभूति, गहरी साँस, मजबूत इम्यूनिटी।

2. महादेव और हृदय: क्यों शिव ही अनाहत के स्वामी?

1. ईशान रुद्र: शिव पुराण के अनुसार अनाहत के अधिष्ठाता "ईशान" हैं — शिव का ऊर्ध्वमुखी रूप। ईशान का अर्थ है "संपूर्ण ईश"। हृदय ही वह स्थान है जहाँ जीव ईश से मिलता है।
2. नीलकंठ कथा: समुद्र मंथन का विष शिव ने कंठ में रोका। कंठ विशुद्ध चक्र है, पर विष हृदय तक न पहुँचे इसलिए रोका। जो दूसरों का विष पीकर भी प्रेम बाँटे, वही अनाहत का स्वामी है।
3. अर्धनारीश्वर: शिव का आधा भाग शक्ति है। हृदय चक्र पर ही शिव-शक्ति का मिलन पूर्ण होता है। इसलिए प्रेम, युगल, संतुलन — सब अनाहत से जुड़ा।
4. डमरू नाद: शिव का डमरू अनाहत नाद का प्रतीक है। दो त्रिकोण मिलते हैं — ऊपर शिव, नीचे शक्ति। हृदय पर हाथ रखकर डमरू सुनो तो धड़कन और नाद एक हो जाते हैं।

3. मुख्य महादेव मंत्र और हृदय पर प्रभाव

A. पंचाक्षर मंत्र: ॐ नमः शिवाय

यह सबसे सीधा हृदय-मंत्र है। 5 अक्षर = पंचतत्व। "शि" अग्नि, "वा" जल, "य" वायु। "य" ही अनाहत का बीज "यं" से जुड़ता है।

हृदय पर प्रभाव:

1. नाद-थेरेपी: "नमः शि-वा-य" का उच्चारण 3:2:2:3 मात्रा में करो। "शि" पर हृदय फैलता है, "वा" पर सिकुड़ता है — ठीक धड़कन की तरह। 108 बार करने से Heart Rate Variability बेहतर होती है।

2. वायु शुद्धि: अनाहत का तत्व वायु है। "य" का उच्चारण नाभि से उठकर छाती में गूँजता है। इससे फेफड़े खुलते हैं, अस्थमा-एलर्जी में लाभ।

3. भाव-शोधन: "नमः" = न मम = मेरा नहीं। हृदय की सबसे बड़ी बीमारी "मेरा-मेरा" है। जप करते-करते ममता गलती है, माफी आती है।

विधि-: सुखासन। बायाँ हाथ हृदय पर, दाहिना गोद में। आँख बंद। हर मंत्र के साथ भाव करो कि हरे रंग का कमल खिल रहा है। 11 मिनट रोज़।

B. महामृत्युंजय मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

हृदय संबंध-: यह मंत्र "भय" का काट है। अनाहत का सबसे बड़ा शत्रु भय है — मृत्यु भय, खोने का भय, प्रेम न मिलने का भय। "त्र्यम्बकं" = तीन अंबा वाले, तीन नेत्र वाले। हृदय को "तीसरा नेत्र" कहते हैं — अंतर्ज्ञान।

जब मृत्यु-भय जाता है, हृदय खुलता है। कार्डियोलॉजी रिसर्च बताती है: पुराना ट्रॉमा HRV खराब करता है। महामृत्युंजय का कंपन वागस-नर्व को सक्रिय करता है, जिससे "Rest & Digest" मोड ऑन होता है।

प्रयोग-: हार्ट-ब्रेक, तलाक, किसी की मृत्यु के बाद — 1 माला रोज़, 40 दिन। पानी को अभिमंत्रित कर पियो।

C. रुद्र गायत्री

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

प्रभाव: गायत्री बुद्धि के लिए, रुद्र गायत्री "भाव-बुद्धि" के लिए। हृदय और मस्तिष्क का ब्रिज। जिनका दिमाग ज्यादा चलता है, दिल कम — उनके लिए। "प्रचोदयात्" का अर्थ है "हृदय को प्रेरित करो"।

D. शिव तांडव स्तोत्र

"जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले..." की तरंग 144 Hz के आसपास है — हृदय की प्राकृतिक फ्रीक्वेंसी। इसे सुनने से हृदय-चक्र की 12 पंखुड़ियाँ एक साथ हिलती हैं। अवसाद, सुस्ती में तेज लाभ।

4. विज्ञान क्या कहता है?

1. Vagus Nerve Stimulation-: "ओम" का "म्" 3 सेकंड खींचने से वागस नर्व उत्तेजित होती है। यह हृदय-गति धीमी करता है, BP कम करता है, सूजन घटाता है। ॐ नमः शिवाय में 2 बार "म्" आता है।
2. Nitric Oxide-: जप करते समय जीभ तालु से लगती है — खेचरी मुद्रा का हल्का रूप। इससे नाइट्रिक ऑक्साइड बनता है, जो रक्त-वाहिनी खोलता है।
3. Coherence-: HeartMath Institute की रिसर्च: प्रेम/कृतज्ञता भाव + मंत्र = Heart-Brain Coherence. EEG में Alpha बढ़ता है, ECG में साइन-वेव। शिव को "आशुतोष" कहते हैं — जल्दी प्रसन्न होने वाले। भाव से जपो, कोहेरेंस जल्दी आती है।

5. हृदय चक्र जागरण की 21 दिन साधना

संकल्प-: 21 दिन, रोज़ 20 मिनट, एक ही समय।

चरण:
1. मिनट 1-3: शरीर: बैठो। रीढ़ सीधी। 3 गहरी साँस — 4 गिनती में भरना, 6 गिनती में छोड़ना। छोड़ते समय "हा" की आवाज — हृदय की ग्रंथि खुलती है।
2. मिनट 4-8: स्पर्श-: बायाँ हाथ हृदय पर। महसूस करो धड़कन। हर धड़कन के साथ मन में "शिव"। धड़कन ही डमरू है।
3. मिनट 9-18: मंत्र: ॐ नमः शिवाय। माला न हो तो 5 साँस में 1 मंत्र। "ॐ" साँस भरते, "नमः शिवाय" छोड़ते। भाव: हरे प्रकाश का कमल खिल रहा है। हर पंखुड़ी से पुराना दर्द झड़ रहा है।
4. मिनट 19-20: भाव: किसी एक व्यक्ति को याद करो जिसे माफ करना मुश्किल है। उसके चेहरे पर मानसिक गुलाब रखो। बोलो: "मैं तुम्हें शिव को सौंपता हूँ।"

21 दिन बाद: डायरी लिखो। नींद, गुस्सा, रिश्ते — क्या बदला। 80% लोगों को 2 हफ्ते में सपने बदलते हैं — पानी, हरा रंग, शिवलिंग दिखता है।

6. सावधानी: शिव भोले हैं, पर भाले भी हैं

1. खाली पेट नहीं: हृदय-जप भाव जगाता है। खाली पेट भावुकता बढ़ सकती है। 1 घंटे पहले हल्का खा लो।
2. रात 12 के बाद न करें: अनाहत खुलने पर ऊर्जा ऊपर जाती है। देर रात करने से नींद उड़ सकती है। ब्रह्ममुहूर्त सर्वोत्तम।
3. नफरत के साथ जप मत करो: "दुश्मन का नाश हो" भाव से ॐ नमः शिवाय जपोगे तो हृदय और बंद होगा। शिव संहार करते हैं, पर द्वेष से नहीं, करुणा से।
4. मेडिकल रिप्लेसमेंट नहीं: BP, हार्ट की दवा डॉक्टर से पूछकर ही बदलें। मंत्र सहायक है, विकल्प नहीं।

7. हृदय-शिव ध्यान: 5 मिनट की आपातकालीन विधि**

जब पैनिक अटैक, ब्रेकअप, गुस्सा आए:
1. जहाँ हो वहीं रुक जाओ।
2. दाहिना हाथ हृदय पर, बायाँ पेट पर।
3. आँख बंद। 3 बार लंबा "ॐ" — इतना लंबा कि आखिरी में "म्" हृदय में गूँजे।
4. फिर बहुत धीरे "नमः शि-वा-य" — हर अक्षर पर हृदय को ढीला छोड़ो।
5. भाव: "शिव, तू साँस है। जब तक साँस है, तू है।"

3 राउंड में ही Panic चला जाएगा। क्योंकि तुमने ध्यान भय से हटाकर "नाद" पर लगा दिया।

8. अंतिम बात: हृदय ही कैलाश है

लोग कहते हैं शिव कैलाश पर हैं। तंत्र कहता है — सहस्रार कैलाश है। पर भक्त कहते हैं — हृदय ही कैलाश है। क्योंकि शिव वहाँ मिलते हैं जहाँ तुम टूटते हो।

जब प्रेम में धोखा मिले, जब माँ-बाप डाँटें, जब दोस्त छोड़ जाए — उस टूटे हुए हृदय पर हाथ रखकर "ॐ नमः शिवाय" बोलो। तुम पाओगे: जो तोड़ने आया था, वही जोड़ने वाला है।

क्योंकि शिव श्मशान में रहते हैं — और टूटा हृदय भी श्मशान ही है। वहीं राख से नया कुमुद खिलता है। वही अनाहत है। वही शिव है।

ॐ नमः शिवाय
*हृदय के डमरू पर यही नाद बजता रहे — बिना आहत किए, बिना रुके।*

मूलाधार चक्र : जितना तेज घूमता है, उतना अधिक पैसा देता है।आपने बहुत बार यह नोटिस किया होगा की कुछ लोग बहुत कम काम करते ह...
11/05/2026

मूलाधार चक्र : जितना तेज घूमता है, उतना अधिक पैसा देता है।

आपने बहुत बार यह नोटिस किया होगा की कुछ लोग बहुत कम काम करते है, फिर भी उसके पास बहुत सारा पैसा आ जाता है।
वही कुछ लोग बहुत कड़ी मेहनत करते है, फिर उन्हें उनकी अपेक्षा के अनुसार पैसे नहीं मिलते।

कुछ लोग मिट्टी को भी छू लेते है, तो उसका सोना बन जाता है और कुछ लोग सोने को भी छू लेते है तो उसकी मिट्टी बन जाती है।
अर्थात कुछ लोग बिना कुछ सोचे समझे भी कोई काम करते है, तो उनको बहुत सारा लाभ हो जाता है। जबकि कुछ लोग बहुत सोच समझकर भी कोई काम करते है, तो भी उन्हें हानि ही उठानी पड़ती है। यह पोस्ट आप फेसबुक पेज "मुमुक्षा. मोक्ष की अभिलाषा" पर पढ़ रहे है।

अधिकतर अमीर लोगों के पास पैसा खुद ही चला आता है। जबकि अन्य लोगों के पास पैसा आता ही नहीं है।
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• क्या कभी आपने सोचा है कि ऐसा क्यों होता है?

यह होता है मूलाधार चक्र के कारण। मूलाधार चक्र जितने तेजी से घूमता है, उतना ही अधिक पैसों को आकर्षित करता है। और जितना कम घूमता है, या लगभग बंद के होने के करीब ही होता है, तो कम पैसा आकर्षित करता है और पैसे आने के मार्गों में मुश्किलें आना शुरू हो जाती है। यह पोस्ट आप फेसबुक पेज "मुमुक्षा. मोक्ष की अभिलाषा" पर पढ़ रहे है।
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• मूलाधार चक्र (Root Chakra) क्या होता है :

आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार मूलाधार चक्र (Root Chakra) सूक्ष्म शरीर का सबसे पहला ऊर्जा केंद्र माना जाता है, जो रीढ़ की हड्डी के सबसे निचले हिस्से में स्थित होता है। जो मूलभूत जरूरतों को नियंत्रित करता है।
औरसुरक्षा, स्थिरता, और अप्रत्यक्ष रूप से धन से सम्बन्धित होता है। यह पोस्ट आप फेसबुक पेज "मुमुक्षा. मोक्ष की अभिलाषा" पर पढ़ रहे है।
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• मूलाधार चक्र धीरे धीरे क्यों घूमने लगता है :

मूलाधार चक्र के मार्ग में आए ब्लॉकेजेस(ऊर्जा के मार्ग में आई रुकावटें) के कारण मूलाधार चक्र धीरे धीरे घूमने लगता है।

मूलाधार चक्र में ब्लॉकेजेस कोई अचानक निर्माण नहीं होते। बल्कि यह बहुत पहले से ही धीरे धीरे निर्माण होना शुरू हो चुके होते है। यह ब्लॉकेजेस कभी कभी 2 से 4 वर्ष पुराने हो सकते है, तो कभी 15 से 20 वर्ष पुराने। तो कभी-कभी यह पिछले जन्म से भी संबंधित भी हो सकते है।

और जैस जैसे ब्लॉकेज बढ़ते जाते है, उसी अनुपात में चक्र का घूमना धीमा-धीमा होते जाता है। और उसके ही साथ पैसों का आकर्षित करना कम होते जाता है, पैसों का आना कम कम होते जाता है। यह पोस्ट आप फेसबुक पेज "मुमुक्षा. मोक्ष की अभिलाषा" पर पढ़ रहे है।

और इसी के साथ पैसों के आने में मुश्किलें बढ़ते जाती है। मेहनत करने पर भी पैसा नहीं आता। सारी कोशिशें नाकाम होने लगती है। दिया पैसा अटक जाता। कर्ज चुका नहीं पाते। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने लगता है और न जाने क्या क्या..
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• क्या करे के, मूलाधार चक्र के ब्लॉकेजेस दूर हो जाए
और मूलाधार चक्र संतुलित हो जाए :

मूलाधार चक्र हीलिंग (Root Chakra Healing) ✓

हीलिंग से मूलाधार चक्र में निर्माण हुए ब्लॉकेजेस धीरे-धीरे कम होते है और वह संतुलित होने लगता है। जिससे उसकी गति धीरे-धीरे बढ़ने लगती है।

वैसे तो तो मूलाधार चक्र की हीलिंग तब तक करनी चाहिए जब तक कि सभी ब्लॉकेज दूर न हो जाए।

लेकिन सभी लोग ऐसा कर नहीं पाते, इसलिए मूलाधार चक्र के अधिकतर ब्लॉकेजेस दूर हो जाए और मूलाधार चक्र पुनः उसके प्राकृतिक संतुलित अवस्था में आ जाए, इसलिए कम से कम 14 महीने तक तो भी हीलिंग करनी चाहिए। ताकि कम से कम 20-30% प्रतिशत ब्लॉकेज आपके मूलाधार चक्र से दूर हो जाए, ताकि उतना ही अधिक वह गति से चक्र घूमने लगता है। और आपका जीवन बेहतर होता है। यह पोस्ट आप फेसबुक पेज "मुमुक्षा. मोक्ष की अभिलाषा" पर पढ़ रहे है।
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• क्या मूलाधार चक्र की हीलिंग करने के बाद तुरंत परिणाम आन लगत है? कैश में पैसे आने लगेंगे?

उत्तर : हीलिंग प्रक्रिया यह लक्षणों पर नहीं तो मूल कारणों(ब्लॉकेजेस) पर कार्य करती है, इसलिए आपको प्रतीक्षा और धैर्य रखना जरूरी होता है।
जब मूलाधार चक्र संतुलित होना शुरू होता है, तो उसके बाद धीरे धीरे घूमना भी शुरू होता है। यह पोस्ट आप फेसबुक पेज "मुमुक्षा. मोक्ष की अभिलाषा" पर पढ़ रहे है।
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• क्या मूलाधार चक्र की हीलिंग करने के बाद तुरंत कैश में पैसे आने लगता है?

उत्तर : मूलाधार चक्र प्रकट रूप से नहीं, तो अप्रत्यक्ष और सूक्ष्म रूप से आपके जीवन में धन के मार्ग खोलता है। जो आगे चलकर धनलाभ के कारण बन सकते है।

मूलाधार चक संतुलित हो रहा है, इसके कुछ संकेत :
(जो कुछ लोग अनुभव कर सकते है)

1. भविष्य को लेकर डर थोड़ा कम होना
2. पैसों की चिंता में कमी महसूस होना
3. खर्च से पहले सोचने की आदत बनना
4. फालतू खर्च अपने आप कम होना
5. छोटी बचत शुरू होना
6. पैसे को लेकर मानसिक दबाव हल्का होना
7. काम करने की ऊर्जा बढ़ना
8. आलस्य और टालमटोल कम होना
9. दिनचर्या व्यवस्थित होना
10. मन में स्थिरता महसूस होना
11. घर के माहौल में तनाव कम होना
12. पैसों को लेकर झगड़े कम होना
13. परिवार से संवाद बेहतर होना
14. जिम्मेदारी लेने की इच्छा बढ़ना
15. निर्णय लेने में डर कम होना
16. आत्मविश्वास बढ़ना
17. काम में ध्यान टिकना
18. नौकरी/काम में स्थिरता की भावना आना
19. रुका हुआ छोटा काम शुरू होना
20. छोटे काम पूरे होने लगना
21. पुराने संपर्कों से दोबारा जुड़ाव होना
22. सही समय पर उपयोगी व्यक्ति से मुलाकात होना
23. नए काम के आइडिया आना
24. कमाई के नए तरीके सोच में आना
25. स्किल सीखने की इच्छा बढ़ना
26. अनावश्यक खर्च कम होना
27. समय की समझ बेहतर होना
28. खुद पर नियंत्रण बढ़ना
29. फोकस और एकाग्रता बढ़ना
30. “मैं कर सकता हूँ” वाला भाव मजबूत होना
31. छोटे अवसर पहचान में आने लगना
32. मेहनत का असर दिखना शुरू होना
33. काम में निरंतरता बढ़ना
34. आत्म-संदेह कम होना
35. बातचीत में आत्मविश्वास बढ़ना
36. नकारात्मक लोगों से दूरी बनना
37. मानसिक तनाव हल्का होना
38. जीवन में स्थिरता की भावना बढ़ना
39. योजना बनाकर चलने की आदत बनना
40. जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता बढ़ना
41. किसी पुराने रुके भुगतान का मिलना जैसा संयोग लगना
42. किसी पुराने काम से अचानक आर्थिक राहत मिलना
43. किसी परिचित से मदद या सपोर्ट मिलना
44. अचानक छोटा लाभकारी अवसर मिलना
45. पुराने हुनर से कमाई का विचार आना
46. घर/काम को व्यवस्थित करने की इच्छा बढ़ना
47. भविष्य की योजना स्पष्ट लगना
48. अंदर से “स्टेबिलिटी आ रही है” ऐसा महसूस होना
49. जीवन में नियंत्रण और संतुलन बढ़ना
50. अंत में यह भावना बनना कि मेरी सोच और आदतें बदलने से मेरा जीवन भी बदल रहा है

• "मूलाधार चक्र की हीलिंग कैसे करे" इस संबंधित अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए 📩 inbox में मैसेज करे।

सार : मूलाधार चक्र को स्थिरता, सुरक्षा और धन आकर्षण से जुड़ा माना जाता है। जब इसमें ऊर्जा संतुलित रहती है, तो आत्मविश्वास, सही निर्णय, काम में स्थिरता और आर्थिक अवसर बढ़ने लगते हैं। हीलिंग द्वारा इसके ब्लॉकेज धीरे-धीरे कम होते हैं, जिससे सोच, आदतों और जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगते हैं।

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