Bliss Yoga Centre

Bliss Yoga Centre I am starting this page to spread positivity, knowledge and to share my thoughts regarding yoga and how it has changed my life.

I hope to bring a slightest change in all of your lives by the means of yoga.
- Yogacharya Megha Julka

08/05/2026

*|| कपालभाति प्राणायाम ||*

*रिसर्च में विश्व भर के डॉक्टरों ने यह माना है कि कपालभाति प्राणायाम मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए काफी महत्वपूर्ण है।*
*कपालभाती यह केवल एक प्राणायाम ही नहीं, बल्कि तन मन की शुद्धी क्रिया भी है,*

*कपालभाती को बीमारी दूर करने वाले प्राणायाम के रूप में देखा जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि काफी ऐसे पेशेंट्स देखे गए हैैं जो बिना बैसाखी के चल नही पाते थे लेकिन नियमित कपालभाती करने के बाद उनकी बैसाखी छूट गई और वे ना सिर्फ चलने, बल्कि दौड़ने भी लगे...!*

*1* - _कपालभाती करने वाला साधक आत्मनिर्भर और स्वयंपूर्ण हो जाता है, कपालभाती से हार्ट के ब्लॉकेजेस् पहले ही दिन से खुलने लगते हैं और 15 दिन में बिना किसी दवाई के वे पूरी तरह खुल जाते है !_

*2* - _कपालभाती करने वालों के हृदय की कार्यक्षमता बढ़ती है, जबकि हृदय की कार्यक्षमता बढ़ाने वाली कोई भी दवा उपलब्ध नही है !_

*3* - _कपालभाती करने वालों का हृदय कभी भी अचानक काम करना बंद नही करता, जबकि आजकल बड़ी संख्या में लोग अचानक हृदय बंद होने से मर जाते हैं !_

*4* - _कपालभाती करने से शरीरांतर्गत और शरीर के ऊपर की किसी भी तरह की गाँठ गल जाती है, क्योंकि कपालभाती से शरीर में जबर्दस्त उर्जा निर्माण होती है जो गाँठ को गला देती है, फिर वह गाँठ चाहे ब्रेस्ट की हो अथवा अन्य कही की। ब्रेन ट्यूमर हो अथवा ओव्हरी की सिस्ट हो या यूटेरस के अंदर फाइब्रॉईड हो, क्योंकि सबके नाम भले ही अलग हो लेकिन गाँठ बनने की प्रक्रिया एक ही होती है !_

*5* - _कपालभाती से बढा हुआ कोलेस्टेरोल कम होता है। खास बात यह है कि कपालभाती शुरू करने के प्रथम दिन से ही मरीज की कोलेस्टेरॉल की गोली बंद हो सकती है !_

*6* - _कपालभाती से बढा हुआ इएसआर, युरिक एसिड, एसजीओ, एसजीपीटी, क्रिएटिनाईन, टीएसएच, हार्मोन्स, प्रोलेक्टीन आदि सामान्य स्तर पर आ जाते है !_

*7* - _कपालभाती करने से हिमोग्लोबिन एक महीने में 12 तक पहुँच जाता है, जबकि हिमोग्लोबिन की एलोपॅथीक गोलियाँ खाकर कभी भी किसी का हिमोग्लोबिन इतना बढ़ नही पाता है। कपालभाती से हीमोग्लोबिन एक वर्ष में 16 से 18 तक हो जाता है। महिलाओं में हिमोग्लोबिन 16 और पुरुषों में 18 होना उत्तम माना जाता है !_

*8* - _कपालभाती से महिलाओं के मासिक धर्म की सभी शिकायतें एक महीने में सामान्य हो जाती है !_

*9* - _कपालभाती से थायरॉईड की बीमारी एक महीने में ठीक हो जाती है, इसकी गोलियाँ भी पहले दिन से बंद की जा सकती है !_

*10* - _इतना ही नही बल्कि कपालभाती करने वाला साधक 5 मिनिट में मन के परे पहुँच जाता है। गुड़ हार्मोन्स का सीक्रेशन होने लगता है। स्ट्रेस हार्मोन्स गायब हो जाते है, मानसिक व शारीरिक थकान नष्ट हो जाती है। इससे मन की एकाग्रता भी आती है !_

*_कपालभाति के कई विशेष लाभ भी हैं ।_*

*(A)* - _कपालभाती से खून में प्लेटलेट्स बढ़ते हैं। व्हाइट ब्लड सेल्स या रेड ब्लड सेल्स यदि कम या अधिक हुए हो तो वे निर्धारित मात्रा में आकर संतुलित हो जाते हैं। कपालभाती से सभी कुछ संतुलित हो जाता है, ना तो कोई अंडरवेट रहता है, ना ही कोई ओव्हरवेट रहता है। अंडरवेट या ओव्हरवेट होना दोनों ही बीमारियाँ है !_

*(B)* - _कपालभाती से कोलायटीस, अल्सरीटिव्ह कोलायटीस, अपच, मंदाग्नी, संग्रहणी, जीर्ण संग्रहणी, आँव जैसी बीमारियाँ ठीक होती है। काँस्टीपेशन, गैसेस, एसिडिटी भी ठीक हो जाती है। पेट की समस्त बीमारियाँ ठीक हो जाती है !_

*(C)* - _कपालभाती से सफेद दाग, सोरायसिस, एक्झिमा, ल्युकोडर्मा, स्कियोडर्मा जैसे त्वचारोग ठीक होते हैं। स्कियोडर्मा पर कोई दवाई उपलब्ध नही है लेकिन यह कपालभाती से ठीक हो जाता है। अधिकतर त्वचा रोग पेट की खराबी से होते है, जैसे जैसे पेट ठीक होता है ये रोग भी ठीक होने लगते हैं !_

*(D)* - _कपालभाती से छोटी आँत को शक्ति प्राप्त होती है जिससे पाचन क्रिया सुधर जाती है। पाचन ठीक होने से शरीर को कैल्शियम, मैग्नेशियम, फॉस्फरस, प्रोटीन्स इत्यादि उपलब्ध होने से कुशन्स, लिगैमेंट्स, हड्डियाँ ठीक होने लगती हैं और 3 से 9 महिनों में अर्थ्राइटीस, एस्ट्रो अर्थ्राइटीस, एस्ट्रो पोरोसिस जैसे हड्डियों के रोग हमेशा के लिए ठीक हो जाते हैं !_

*ध्यान रखिये की कैल्शियम, प्रोटीन्स, हिमोग्लोबिन, व्हिटैमिन्स आदि को शरीर बिना पचाए बाहर निकाल देता है क्योंकि केमिकल्स से बनाई हुई इस प्रकार की औषधियों को शरीर द्वारा सोखे जाने की प्रक्रिया हमारे शरीर के प्रकृति में ही नही है !*

_हमारे शरीर में रोज 10 % बोनमास चेंज होता रहता है, यह प्रक्रिया जन्म से मृत्यु तक निरंतर चलती रहती है अगर किसी कारणवश यह बंद हुई, तो हड्डियों के विकार हो जाते हैं.... कपालभाती इस प्रक्रिया को निरंतर चालू रखती है इसीलिए कपालभाती नियमित रूप से करना आवश्यक है !_

*सोचिए, यह सिर्फ एक क्रिया कितनी लाभकारी है इसीलिए नियमित रूप से कपालभाति करना एक उत्तम व्यायाम प्रक्रिया है !!*

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25/03/2026

Bliss Yoga Center offers yoga classes in both online and offline formats.

24/03/2026

Suryanamaskar 🧘‍♂️🧘🧘‍♀️

24/03/2026

*सर्दी-जुकाम से राहत पाने के घरेलू उपचार*

जुकाम से पीड़ित होने के कई कारण हो सकते हैं। मौसम में बदलाव होने पर कई लोगों को जुकाम हो जाती है, तो अनेक लोग अधिक ठण्डी चीज खाने, नमी युक्त वातावरण में रहने से भी जुकाम से ग्रस्त हो जाते हैं। आमतौर पर जुकाम होने पर लोग सीधे एलोपैथिक दवा का प्रयोग करते हैं, लेकिन आप जुकाम का इलाज घरेलू उपायों से भी कर सकते हैं।

एक-दो नहीं बल्कि अनेक घरेलू नुस्खे हैं, जिनसे आप जुकाम से राहत पा सकते हैं।

जुकाम क्या है?
जुकाम को नजला भी कहते हैं। यह श्वसन तंत्र का संक्रमण के कारण होने वाला रोग है। इसमें व्यक्ति की नाक प्रभावित होती है। सामान्य जुकाम वायरस के संक्रमण के कारण होता है। जुकाम होने का सबसे आम कारण राइनोवायरस का संक्रमण है। जुकाम में व्यक्ति को नाक से पानी बहने, छींक आने, गले की खराश, नाक बन्द होना जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

जुकाम होने के लक्षण
जुकाम में लोगों को ऐसी परेशानियां होती हैंः-

नाक से पानी बहना
नाक में खुजली होना
गले में खराश
नाक बंद होना
सिर में दर्द एवं भारीपन
आँखों में जलन
खाँसी
बुखार
छींक आना

जुकाम होने के कारण
यह वायरस के संक्रमण के कारण होता है। दो सौ से अधिक वायरस जुकाम होने के कारण माने गए हैं, लेकिन मुख्य रूप से निम्न दो वायरस ही सामान्य जुकाम के लिए उत्तरदायी होते हैं।

कोरेनावायरस (15-30 प्रतिशत मामलों में)
राइनोवायरस ( 30-80 प्रतिशत मामलों में)

जुकाम का घरेलू इलाज करने के लिए उपाय
आप जुकाम को ठीक करने के लिए ये घरेलू उपचार कर सकते हैंः-

हल्दी और दूध से जुकाम का इलाज
एक गिलास गर्म दूध में दो चम्मच हल्दी पाउडर डालकर पिएं। इससे बंद नाक और गले की खराश में आराम मिलता है। नाक से पानी बहना बंद हो जाता है।

तुलसी के सेवन से जुकाम का उपचार
जुकाम में तुलसी अमृत के समान फल देती है। खाँसी और जुकाम होने पर 5-7 पत्तियें को पीसकर पानी में डालकर काढ़ा बना लें। इस काढ़ा को पिएं।
नाक बंद होने पर तुलसी की मंजरियों को रुमाल में सूंघने से नाक खुल कर आराम मिलता है।
छोटे बच्चों में जुकाम हेने पर 6-7 बूंद अदरक एवं तुलसी का रस शहद में मिलाकर चटाएं। यह बंद नाक को खोलने और बहती नाक को रोकने दोनों में सहायक है।

जुकाम का घरेलू इलाज मेथी और अलसी से
मेथी और अलसी को 3-4 ग्राम की मात्रा में लेकर 1 गिलास पानी में उबालें। जब अच्छी तरह उबल जाए, तब इसकी 3-4 बूंद को दोनों नाक में डालें। इससे जुकाम में आराम मिलता है।

जुकाम का घरेलू इलाज हल्दी और अजवायन से
दस ग्राम हल्दी और दस ग्राम अजवायन को एक कप पानी में डालकर पकाएं। जब पानी आधा रह जाए, तब इसमें थोड़ा सा गुड़ मिलाकर पिएं। इससे जुकाम में तुरंत आराम मिलता है, और नाक से पानी बहना कम हो जाता है।

काली मिर्च का प्रयोग जुकाम में लाभदायक
काली मिर्च के चूर्ण को शहद के साथ चाटने से जुकाम में आराम मिलता है, और नाक से पानी बहना कम होता है।
आधा चम्मच काली मिर्च का चूर्ण और एक चम्मच मिश्री मिलाकर एक गिलास गर्म दूध के साथ दिन में दो बार पिएं।

सरसों का तेल जुकाम में फायदेमंद
सोते समय दोनों नाक के दोनों छिद्र में 2-2 बूंदे बादाम रोगन या सरसों के तेल की डालकर सोएं। इससे नाक का किसी भी प्रकार का रोग नहीं होता।

अदरक के प्रयोग से जुकाम में लाभ
कफयुक्त खाँसी में दूध में अदरक उबालकर पिएं।
अदरक के रस में शहद मिलाकर चाटने से भी जुकाम में आराम मिलता है।
1-2 अदरक के छोटे-टुकड़े, 2 काली मिर्च, 4 लौंग और 5-7 तुलसी की ताजी पत्तियां पीसकर एक गिलास पानी में उबालें। जब यह उबलकर आधा गिलास रह जाए, तब इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर पिएं।
अदरक के छोटे-छोटे टुकड़ों को देसी घी में भूनकर दिन में 3-4 बार पीसकर खाएं। इससे नाक से पानी बहने की समस्या से आराम मिलता है.

जुकाम में फायदा पहुंचाता है लहसुन
लहसुन में एलिसिन नामक रसायन होता है, जो एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल, एंटी-फंगल होता है। यह सर्दी-जुकाम के संक्रमण को दूर करता है। इसके लिए 4-5 लहसुन की कलियों को घी में भूनकर खाएं।

गाय के घी से जुकाम में आराम
गाय का शुद्ध देशी घी को पिघलाकर 2 बूंद सुबह नाक में डालें। ऐसा नियमित रूप से तीन महीने तक करें। पुराना जुकाम भी ठीक हो जाता है।

जुकाम में मुनक्के से लाभ
7-8 मुनक्के पानी में डालकर उबालें। जब पानी आधा रह जाए तब मुनक्के निकालकर खाएं, और पानी को पी लें। इससे बहती नाक की समस्या से आराम मिलता है.

जुकाम से राहत पाने के अन्य घरेलू नुस्खे
सोंठ, छोटी पीपल और छोटी इलायची के बीज को 4-4 ग्राम की मात्रा में लेकर गुड़ के साथ पीस लें। इसकी 1-1 ग्राम की छोटी गोलियाँ बना लें। एक-एक गोली रात में सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ लेने से जुकाम ठीक हो जाता है।
दोनों नासिकाओं में ताजा गोमूत्र की दो-दो बूंदें सुबह-शाम डालें।
बहती नाक से परेशान हैं तो चिरायता, सोंठ, अडूसे तथा कटेरी की जड़ को 5-5 ग्राम की मात्रा में लेकर काढ़ा बनाकर पिएँ।
कलौंजी के बीजों को तवे पर भूनकर कपड़े में लपेटकर सूंघने से आराम मिलता है।
आधा चम्मच दालचीनी को एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर खाएँ।

जुकाम में आपका खान-पान
जुकाम के दौरान आपका खान-पान ऐसा होना चाहिएः-

आधा चम्मच मूली के बीजों का चूर्ण शहद के साथ चाटें।
पके हुए अमरूद को उपलों की आग में हल्का भून कर खाएं।
जीरे का चूर्ण घी और शक्कर के साथ मिलाकर खाएं। इससे नाक से पानी बहना कम होता है।
जायफल को पीसकर इसकी एक चुटकी की मात्रा को दूध में मिलाकर पिएं।
गुड़, घी और औंठ को समान मात्रा में लेकर मिला लें। इसे गर्म करके रात को सोते वक्त एक चम्मच की मात्रा में लें।

जुकाम में आपकी जीवनशैली
जुकाम के दौरान आपकी जीवनशैली ऐसी होनी चाहिएः-

गर्म वातावरण से आकर तुरंत ठण्डे पानी से स्नान ना करें।
ए.सी. में न बैठें।
जुकाम संक्रमण से होने वाला रोग है, इसलिए भोजन करने से पहले हाथों को अच्छी प्रकार धोएं।
धूल एवं प्रदूषण युक्त वातावरण में चेहरे पर मास्क लगा कर चलें।
प्राणायाम करें।
लगभग 10-15 मिनट भस्त्रिका एवं कपालभाँति रोज करें।

जुकाम में परहेज
ठण्डी एवं बादी चीजों का सेवन बिल्कुल ना करें।
दही और चावल का सेवन कम करें।
कोल्ड्रिंक, आइसक्रीम बहुत ठण्डा पानी और बर्फ से बनी चीजों को नहीं खाना चाहिए।
बासी भोजन बिल्कुल ना करें।
जंकफूड और तेलीय भोजन का सेवन ना करें।
मौसमी फल एवं सब्जियों का सेवन करें।
जुकाम से जुडे़ सवाल-जवाब
जुकाम क्यों होता है?

आयुर्वेद में हर रोग का कारण दोषों के असंतुलन को माना गया है। आयुर्वेद में जुकाम को प्रतिश्याय कहा गया है। आपके ऊपरी श्वसन तंत्र में वात एवं कफ दोष के असंतुलन के कारण जुकाम की समस्या हो जाती है। उचित उपचार ना करने पर यह गंभीर होकर कष्टकारक हो जाता है।

जुकाम कितने दिनों में ठीक होता है?

सामान्य जुकाम 8-10 दिन में उचित खान-पान और घरेलू उपचार से ठीक हो जाता है। इसके लक्षण आमतौर पर 6-10 दिन के भीतर समाप्त हो जाते हैं। कई बार यह लक्षण 2 सप्ताह तक भी रह सकते हैं। यह सबसे अधिक होने वाला संक्रामक रोग है, जो वर्ष में एक या दो बार सबको होता है। छोटे बच्चे संक्रमण के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते है, इसलिए यह बच्चों में ज्यादा जल्दी होता है।

जुकाम को गंभीर कब समझना चाहिए?

यदि जुकाम 8-10 दिनों से ज्यादा अवधि तक चलता रहे, और लक्षण (गले में खराश व नाक से पानी बहना) और भी ज्यादा दिखने लगे, तो यह गंभीर रोग में बदल सकता है या साइनुसाइटिस हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए।

जुकाम किस गंभीर बीमारी का लक्षण होता है?

यदि लम्बे समय तक जुकाम बना रहे, और नाक बन्द होना या नाक से पानी बहना, सिर दर्द , सूंघने की शक्ति का कमजोर हो रही हो तो यह साइनुसाइटिस भी हो सकता है। यह सामान्य जुकाम से अलग गम्भीर रोग है। साइनुसाइटिस मुख्य रूप से प्रदूषण, धूम्रपान और इन्फेक्शन के कारण होता है। इस रोग में साइनस की अंदरूनी सतह पर सूजन एवं एलर्जी हो जाती है। यह सूजन बैक्टेरिया या वायरस के संक्रमण के कारण होता है।

21/03/2026

*घर पर तुरंत सिरदर्द से राहत— आसान और नैचुरल तरीके*

Headache Relief - - सिरदर्द एक ऐसी परेशानी है, जो लगभग हर किसी को कभी न कभी जरूर होती है। कभी काम का प्रेशर, कभी नींद की कमी, तो कभी टेंशन—ये सब मिलकर अचानक सिर में भारीपन और दर्द पैदा कर देते हैं।

अक्सर ऐसा होता है कि सिरदर्द हमारी पूरी रूटीन बिगाड़ देता है—काम पर फोकस नहीं बनता, मूड खराब हो जाता है और छोटी-छोटी चीजें भी मुश्किल लगने लगती हैं।

अच्छी बात यह है कि हर बार दवा लेने की जरूरत नहीं होती। हल्के और सामान्य सिरदर्द में कुछ आसान, नैचुरल तरीके अपनाकर भी काफी राहत मिल सकती है।

सिरदर्द के आम कारण समझ लें
बार-बार होने वाला सिरदर्द कई वजहों से जुड़ा हो सकता है:

मानसिक तनाव और ओवरथिंकिंग
गलत बैठने का तरीका (poor posture)
शरीर में पानी की कमी
नींद पूरी न होना
लंबे समय तक स्क्रीन देखना

जब कारण समझ में आ जाता है, तो राहत पाना भी आसान हो जाता है।

1. गुनगुने पानी से स्नान (Relaxing Bath)
दिनभर की थकान और तनाव को कम करने का सबसे आसान तरीका है—गुनगुने पानी से नहाना।

कैसे करें:

टब में गुनगुना पानी लें
चाहें तो उसमें थोड़े Epsom सॉल्ट डालें
20–30 मिनट रिलैक्स करें

फायदा:

मांसपेशियों का तनाव कम होता है
दिमाग शांत होता है
स्ट्रेस से होने वाला सिरदर्द जल्दी कम होता है

2. सिर और कनपटी की मालिश (Head Massage)
हल्की मालिश सिरदर्द के लिए सबसे असरदार तरीकों में से एक है।

कैसे करें:

उंगलियों से गोल-गोल मूवमेंट करें
कनपटी, माथे और गर्दन पर फोकस रखें
चाहें तो लैवेंडर ऑयल का इस्तेमाल करें

फायदा:

ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है
मसल्स रिलैक्स होती हैं
दर्द धीरे-धीरे कम होने लगता है

3. सेब का सिरका (Apple Cider Vinegar)
थोड़ा अलग लग सकता है, लेकिन यह टेंशन कम करने में मदद करता है।

कैसे लें:

1 गिलास पानी में 1 चम्मच सिरका मिलाएं
दिन में 2–3 बार लें

ध्यान रखें:
पानी बहुत ठंडा न हो, वरना सिरदर्द बढ़ सकता है।

4. ठंडी चीजों का इस्तेमाल (Watermelon / Cold Effect)
अगर सिरदर्द गर्मी या शरीर के ताप बढ़ने से हो, तो ठंडक देना फायदेमंद रहता है।

कैसे करें:

ठंडी तरबूज की स्लाइस या ठंडा कपड़ा माथे पर रखें
15–20 मिनट तक रखें

फायदा:

सूजन कम होती है
तुरंत ठंडक से राहत मिलती है

5. अदरक की चाय (Ginger Tea)
अदरक में नैचुरल एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं।

कैसे बनाएं:

पानी में अदरक उबालें
चाहें तो शहद या नींबू मिलाएं
धीरे-धीरे पिएं

फायदा:

दर्द और सूजन कम करता है
माइग्रेन के साथ होने वाली मतली में भी राहत

6. कोल्ड कंप्रेस (Cold Compress)
यह सबसे तेज असर देने वाला तरीका है।

कैसे करें:

ठंडा कपड़ा या आइस पैक माथे या गर्दन पर रखें
15–20 मिनट तक

फायदा:

ब्लड वेसल्स सिकुड़ती हैं
दर्द जल्दी कम होता है

7. मैग्नीशियम से भरपूर आहार
कई बार सिरदर्द की वजह शरीर में मैग्नीशियम की कमी भी होती है।

क्या खाएं:

बादाम
पालक
केला
एवोकाडो
डार्क चॉकलेट

फायदा:

सिरदर्द की फ्रीक्वेंसी कम होती है
माइग्रेन में भी मदद मिलती है

8. कैमोमाइल चाय (Chamomile Tea)
यह एक सॉफ्ट और रिलैक्सिंग हर्बल ड्रिंक है, जो सिरदर्द में काफी मदद कर सकती है।

कैसे बनाएं:

1 कप पानी उबालें
उसमें कैमोमाइल डालकर कुछ मिनट रखें
छानकर धीरे-धीरे पिए
फायदा:

दिमाग को शांत करता है
माइग्रेन और टेंशन हेडेक में राहत
नींद बेहतर करने में मदद

9. लैवेंडर ऑयल (Aromatherapy)
लैवेंडर की खुशबू दिमाग को शांत करती है।

कैसे करें:

डिफ्यूजर में डालकर सूंघें
या गर्म पानी में डालकर भाप लें

फायदा:

स्ट्रेस कम करता है
रिलैक्सेशन देता है
टेंशन से होने वाला दर्द घटाता है

10. पेपरमिंट ऑयल (Peppermint Oil)
इसमें मौजूद मेंथॉल सिरदर्द में काफी जल्दी असर करता है।

कैसे इस्तेमाल करें:

कुछ बूंदें नारियल या जैतून तेल में मिलाएं
माथे और गर्दन पर हल्की मालिश करें

फायदा:

ब्लड फ्लो बढ़ाता है
मसल्स रिलैक्स करता है
टेंशन हेडेक में तुरंत राहत

कुछ आसान टिप्स जो तुरंत काम आते हैं
खूब पानी पिएं (hydration जरूरी है)
शांत और अंधेरे कमरे में आराम करें
गहरी सांस लें
स्क्रीन टाइम कम करें

कब डॉक्टर से मिलना जरूरी है
अगर सिरदर्द:

बहुत तेज हो
बार-बार हो रहा हो
या इन उपायों से ठीक न हो
तो प्रोफेशनल सलाह लेना जरूरी है।

समझने वाली बात
सिरदर्द सिर्फ एक दर्द नहीं है—यह शरीर का सिग्नल है कि कहीं न कहीं बैलेंस बिगड़ रहा है।
अगर आप समय पर ध्यान दें और इन आसान उपायों को अपनाएं, तो बिना दवा के भी काफी हद तक राहत पाई जा सकती है।

19/03/2026

*पाचन सुधारने के लिए 6 मुख्य चीजें*

1. प्रोबायोटिक दही का सेवन

चरण 1: रोज़ाना खाने के साथ एक कटोरी ताज़ा और सादा दही पानी मिला कर लें।

चरण 2: आप इसे दोपहर में छाछ के रूप में भी पी सकते हैं; इसमें भुना हुआ जीरा और काला नमक ज़रूर मिलाएं।

लाभ: यह आंतों में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाता है और पाचन का संतुलन बनाए रखता है।

2. पपीता को सुबह खाएं

चरण 1: सुबह खाली पेट या नाश्ते में एक बड़ा बाउल पका हुआ पपीता खाएं।

चरण 2: इसे नियमित रूप से खाएं, लेकिन बहुत अधिक मात्रा में सेवन न करें।

लाभ: इसमें 'पपेन' एंजाइम होता है जो प्रोटीन को पचाता है और कब्ज को रोकता है।

3. सुबह गुनगुना पानी और डिटॉक्स

चरण 1: सुबह उठते ही सबसे पहले 1-2 गिलास गुनगुना पानी पिएं।

चरण 2 (वैकल्पिक): इसमें 20ml आंवला जूस और आधा नींबू का रस मिलाकर पी सकते हैं।

लाभ: यह शरीर को डिटॉक्स करता है और मल त्याग की प्रक्रिया को सुचारू बनाता है।

4. ओट्स या दलिया का नाश्ता

चरण 1: हफ्ते में कम से कम 3-4 दिन नाश्ते में ओट्स या गेहूं का दलिया लें।

चरण 2: इसे पानी या कम वसा वाले दूध में पकाएं और इसमें ताज़े फल मिलाएं।

लाभ: यह घुलनशील फाइबर का अच्छा स्रोत है जो दस्त और कब्ज दोनों स्थितियों में मदद करता है।

5. एक सेब (पहाड़ी लोग)रोज़ाना खाएं

चरण 1: दोपहर के नाश्ते के रूप में एक साबुत सेब छिलके सहित खाएं।

चरण 2: इसे अच्छी तरह चबाकर खाएं और खाने में नियमितता बनाए रखें।

लाभ: यह कब्ज में फाइबर देता है और दस्त की स्थिति में पानी सोखने में मदद करता है।

6अमरूद: (मैदानी लोग) रोज एक अमरूद जरूर खायें
(4 महीने नवम्बर,दिसम्बर,जनवरी और फरवरी में अमरूद खाना विशेष लाभकारी है) अमरूद एक बेहद पौष्टिक फल है, जो फाइबर, विटामिन C (संतरे से 4 गुना अधिक) और पोटेशियम का उत्कृष्ट स्रोत है। यह पाचन को सुधारकर कब्ज दूर करता है, इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है, वजन घटाने में मदद करता है और हाई ब्लड प्रेशर व डायबिटीज को नियंत्रित करने में सहायक है। यह दिल की सेहत और त्वचा के लिए भी लाभदायक है।

चरण 1: दोपहर या सुबह नाश्ते के रूप में एक साबुत अमरूद छिलके सहित अच्छी तरहं चबा कर खाएं।

चरण 2: इसके बीज बिना चबाए मुलायम कर के निगल जाएं और खाने में नियमितता बनाए रखें।

लाभ: यह कब्ज में फाइबर देता है और इसमें आयरन (लोहे) की मात्रा अधिक होती जिससे खून बढ़ाने में मदद करता है।

स्वस्थ पाचन, सुखी जीवन

Feedback of seven chakra meditation 💐💐
18/03/2026

Feedback of seven chakra meditation 💐💐

जीरा, अजवाइन और सौंफ का मिश्रण पाचन सुधारने, पेट की गैस-एसिडिटी दूर करने, वजन घटाने (मेटाबॉलिज्म बूस्ट) और पेट की सूजन क...
03/03/2026

जीरा, अजवाइन और सौंफ का मिश्रण पाचन सुधारने, पेट की गैस-एसिडिटी दूर करने, वजन घटाने (मेटाबॉलिज्म बूस्ट) और पेट की सूजन कम करने के लिए एक बेहतरीन घरेलू उपाय है। यह मिश्रण शरीर को डिटॉक्स करने, कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखने और मुंह की बदबू दूर करने में मदद करता है। इन्हें बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण या चाय के रूप में सेवन करना फायदेमंद है।
जीरा, अजवाइन और सौंफ के प्रमुख फायदे:
बेहतर पाचन और गैस से राहत: यह तीनों मसाले डाइजेस्टिव एंजाइमों को सक्रिय करते हैं, जिससे कब्ज, पेट की गैस, एसिडिटी और अपच की समस्या कम होती है

वजन घटाने में सहायक: यह मेटाबॉलिज्म को तेज करता है और शरीर में जमी अतिरिक्त चर्बी को कम करने में मदद करता है, जो स्वस्थ खान-पान के साथ अधिक प्रभावी है
एंटी-इंफ्लेमेटरी और डिटॉक्स: इसमें सूजन-रोधी गुण होते हैं जो शरीर के जोड़ों या पेट की सूजन को कम करते हैं यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है

कोलेस्ट्रॉल और शुगर कंट्रोल: यह खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और ब्लड शुगर के स्तर को प्रबंधित करने में सहायक है।
इम्यूनिटी और ओरल हेल्थ: इसमें एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं और मुंह की बदबू को भी दूर कर सकते हैं!
सेवन करने का तरीका:

रात में एक चम्मच इस मिश्रण (बराबर मात्रा में भुना हुआ जीरा, सौंफ और अजवाइन) को गर्म पानी के साथ लें, या रात भर पानी में भिगोकर सुबह इसे उबालकर चाय की तरह पी सकते हैं

07/01/2026

*महानारायण तेल: जोड़ों और नसों का आयुर्वेदिक रक्षक — दर्द पर प्रकृति की निर्णायक जीत*

घुटनों का दर्द, कमर जकड़न, गर्दन की अकड़न और नसों की कमजोरी आम समस्या बन चुकी है। दर्द न सिर्फ शरीर को थकाता है, बल्कि मनोबल भी तोड़ देता है। ऐसे में आयुर्वेद का एक प्राचीन, परखा हुआ और आज भी उतना ही प्रभावी समाधान है — महानारायण तेल। यह केवल एक तेल नहीं, बल्कि वात रोगों के लिए संजीवनी माना जाता है।

#महानारायण तेल क्या है?

महानारायण तेल एक शास्त्रोक्त आयुर्वेदिक तैल है, जिसका वर्णन भैषज्य रत्नावली, चरक संहिता और शारंगधर संहिता जैसे ग्रंथों में मिलता है। इसका उपयोग विशेष रूप से वात दोष शमन, जोड़ों के दर्द, नसों की कमजोरी, गठिया और थकान में किया जाता है।

आयुर्वेद में इसे “बल्य, स्निग्ध और वातहर” बताया गया है।

महानारायण तेल किन-किन द्रव्यों से बनता है?

यह तेल एक-दो नहीं, बल्कि 50 से अधिक आयुर्वेदिक औषधियों से तैयार होता है। इसके प्रमुख घटक हैं:

तिल का तेल (Sesame Oil) – आधार द्रव्य, वातशामक

अश्वगंधा – नसों और मांसपेशियों को बल देता है

शतावरी – स्नायुओं को पोषण

दशमूल – सूजन और दर्द में प्रभावी

बला – कमजोरी और कंपन में उपयोगी

यष्टिमधु (मुलेठी) – सूजन कम करता है

चंदन, अगरु, देवदारु – शीतलता और रक्तसंचार बढ़ाने वाले

गोदुग्ध और गोघृत – गहराई तक पोषण पहुंचाने वाले

👉 यही कारण है कि इसे “बहु-द्रव्य सिद्ध तैल” कहा जाता है।

दर्द में महानारायण तेल कैसे काम करता है?

महानारायण तेल का प्रभाव केवल ऊपर-ऊपर नहीं, बल्कि त्वचा के रोमछिद्रों से होकर नसों और जोड़ों तक पहुंचता है।

🔬 कार्यविधि (Working Mechanism):

वात दोष को शांत करता है

सूखी नसों और जोड़ो में स्निग्धता लाता है

रक्तसंचार को बढ़ाता है

मांसपेशियों की जकड़न खोलता है

तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को शांत करता है

👉 यही कारण है कि नियमित अभ्यंग (तेल मालिश) से दर्द की जड़ पर काम होता है।

महानारायण तेल के सिद्ध (Proved) लाभ

✔️ गठिया (Arthritis) में दर्द और सूजन में राहत
✔️ कमर दर्द, सायटिका और सर्वाइकल में उपयोगी
✔️ नसों की कमजोरी और झनझनाहट में लाभ
✔️ फ्रैक्चर के बाद की जकड़न में सहायक
✔️ वृद्धावस्था में जोड़ों की लचीलापन बढ़ाता है
✔️ थकान और शरीर टूटने में अत्यंत प्रभावी

महानारायण तेल का सही उपयोग कैसे करें?

हल्का गुनगुना करके प्रभावित स्थान पर मालिश करें

रात को सोने से पहले प्रयोग अधिक लाभकारी

सर्दियों में रोज़, गर्मियों में 3–4 दिन में एक बार

मालिश के बाद हल्की भाप या गुनगुना स्नान लाभ बढ़ाता है

दुर्लभ लेकिन सत्य तथ्य (Rare & Unknown Facts)

🔹 महानारायण तेल केवल दर्द नहीं, वातजन्य अनिद्रा में भी लाभ देता है
🔹 आयुर्वेद में इसे प्रसवोत्तर स्त्रियों के लिए विशेष रूप से अनुशंसित किया गया है
🔹 यह तेल वृद्धावस्था में कंपन (Tremors) कम करने में सहायक है
🔹 नियमित अभ्यंग से शरीर की Ojas शक्ति बढ़ती है
🔹 यह तेल केवल बाहरी नहीं, बल्कि मानसिक तनाव से उत्पन्न दर्द में भी असर दिखाता है

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

“स्नेहोऽनिलं हन्ति बलं पुष्णाति देहिनाम्।”
अर्थ: स्नेह (तेल) वात को नष्ट करता है और शरीर को बल प्रदान करता है।

निष्कर्ष

महानारायण तेल आधुनिक पेनकिलर नहीं, बल्कि दर्द के कारण पर काम करने वाली आयुर्वेदिक विरासत है। जहां रसायन दर्द को दबाते हैं, वहीं यह तेल शरीर को पुनः संतुलन की ओर ले जाता है। नियमित, सही और धैर्यपूर्ण प्रयोग से यह तेल जीवन को फिर से सहज, सक्रिय और दर्दमुक्त बना सकता है !

23/12/2025








सरल आसन - गुणों की खान सेतुबन्ध आसन

योग किसी भी आयु में किया जा सकता है। इतना ही नहीं योग से आयु संबंधी समस्याओं पर भी नियंत्रण रखा जा सकता है। जानिए इस विचार को सेतुबंध आसन कैसे सिद्ध करता है। बढ़ती उम्र के साथ-साथ वृद्धावस्था तक पहुँचते-पहुँचते पाचन शक्ति का कमज़ोर होना, स्नायु प्रणाली का असंतुलित/अनियंत्रित होना, श्वास लेने में दिक्कत, विसर्जन क्रिया, रक्त्त संचार ठीक से न होना ऐसे सत्य हैं। जिनसे बच पाना असंभव नहीं तो मुश्किल आवश्यक है।

वृद्धावस्था में रक्त्त संचार ठीक रहे, हड्डियों-जोड़ों में लचक बनी रहे, पाचन क्रिया, श्वसन प्रणाली ठीक ढंग से काम करती रहे, दिल, दिमाग ठीक सुचारू रूप से काम करते रहें इन सब के लिये प्रतिदिन आवश्यक है कि इंसान अपने बहुमूल्य जीवन के कुछ क्षण योग को ज़रूर समर्पित करे।

योग में बहुत आसन हैं जिन्हें सहजता व क्षमतानुसार किये जाने से जीवन सुखमय बनाया जा सकता है।

हम आज जिस आसन के बारे में बताने जा रहे हैं उसका नाम है ‘‘सेतुबन्ध’’। संस्कृत के शब्द सेतु का हिन्दी अर्थ है ‘‘पुल’’ व बन्ध का अर्थ जोड़ना-बान्धना। जिस प्रकार पुल के माध्यम से कठिन रास्तों को पार किया जा सकता है। ठीक उसी तरह सेतु बन्ध आसन भी हमें कई प्रकार की शारीरिक व मानसिक कठिनाईयों से आसानी से पार करा देता है।

आसन एवं गुणकारी सेतुबन्धासन हर उम्र के स्त्री - पुरुष के लिये लाभकारी है। विधिः-

समतल भूमि पर चद्दर या मैट बिछा पीठ के बल लेट जायें।

बाज़ु सीधी कमर के पास, हथेलियाँ ज़मीन मी तरफ व अंगुलियाँ पैरों की ओर रखें।

दोनों घुटनों को मोड़ते हुये पैरों को नितम्बों के बराबर फासला बनाये रखें।

हाथों को ज़मीन की तरफ हल्का दबाते हुये नितम्ब, कमर व पीठ को यथाशक्ति ऊपर की तरफ उठायें।

इस स्थिति में आधा मिनट से एक मिनट तक रुकें व श्वास छोड़ते हुये धीरे-धीरे वापिस आयें। इस क्रम को 5 बार दोहरायें व तत्पश्चात् कुछ देर शवासन करें।

लाभः-

रक्त्त संचार बेहतर होता है।

सिर दर्द व कमर दर्द के लिये उत्तम, तनाव एवं अनिद्रा दूर करने में उपयोगी।

पाचन शक्ति बढ़ाता है।

मस्तिष्क शान्त रहता है।

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