25/08/2026
हमारी आंतों में करोड़ों बैक्टीरिया रहते हैं, जिन्हें मिलाकर गट माइक्रोबायोम कहा जाता है. इनमें कुछ बैक्टीरिया शरीर के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. इन अच्छे बैक्टीरिया को सही तरह का पोषण देने के लिए डाइट में प्रीबायोटिक फूड्स शामिल करना फायदेमंद हो सकता है. प्रीबायोटिक ऐसे होते हैं जिन्हें शरीर पूरी तरह पचा नहीं पाता, लेकिन ये आंतों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं. अगर आप अपनी गट हेल्थ को बेहतर रखने के लिए डाइट में बदलाव करना चाहते हैं तो डाइट में इस चीजों को जरूर शामिल करें.
*लहसुन* में फ्रुक्टोज और इंसुलिन जैसे प्रीबायोटिक कार्बोहाइड्रेट पाए जाते हैं. ये आंतों में मौजूद कुछ बैक्टीरिया के लिए फर्मेंटेबल सब्सट्रेट का काम कर सकते हैं.
*प्याज* भी प्रीबायोटिक फूड्स की लिस्ट में शामिल किया जाता है. इसमें इंसुलिन और फ्रुक्टो-ओलिगोसैकराइड्स जैसे कंपाउंड पाए जाते हैं, जो कुछ गट बैक्टीरिया के लिए फायदेमंद हो सकते हैं.
*हरा या थोड़ा कच्चा केला* रेसिस्टेंट स्टार्च का अच्छा स्रोत होता है. यह स्टार्च छोटी आंत में पूरी तरह पचने के बजाय बड़ी आंत तक पहुंच सकता है, जहां गट माइक्रोबायोटा इसका इस्तेमाल कर सकता है. हरा केला सब्जी के रूप में या उबालकर खाया जा सकता है.
*ओट्स* में बीटा-ग्लूकन और फाइबर पाया जाता है. नाश्ते में ओट्स को दूध या दही, फल और नट्स के साथ लिया जा सकता है
*सेब* में पेक्टिन नाम का फाइबर पाया जाता है. यह गट माइक्रोबायोटा के लिए फर्मेंटेबल फाइबर का स्रोत हो सकता है. सेब को छिलके सहित खाने से डाइट में फाइबर की मात्रा भी बढ़ सकती है,
*दालें*
मसूर, चना, राजमा और दूसरी दालों में फाइबर और रेजिस्टेंट स्टार्च जैसे घटक पाए जाते हैं. ये बड़ी आंत में पहुंचकर गट माइक्रोबायोटा के लिए फर्मेंटेबल सब्सट्रेट का काम कर सकते हैं. डाइट में अलग-अलग तरह की दालों को शामिल करने से फाइबर का सेवन बढ़ाया जा सकता है@