12/06/2026
श्री विश्व अमृतधारा आयुर्वेद चिकित्सालय, शामली
डॉ. विजय सैनी
(BAMS,PGDYO)
[आयुर्वेद, पंचकर्म एवं न्यूरोपंचकर्म विशेषज्ञ]
पता:- मेरठ रोड, इंडियन पेट्रोल पंप ⛽ के सामने, शामली
मोबाइल -8650352901
आयुर्वेद अनुसार भोजन करने के मूल नियम इस प्रकार हैं:
1. गर्म और ताज़ा भोजन करें (उष्णम अश्नीयात्):- हमेशा ताज़ा, गर्म और पका हुआ भोजन करें। गर्म भोजन आसानी से पचता है, जठराग्नि (पाचन शक्ति) को बढ़ाता है और वात दोष को शांत करता है l
2. उचित मात्रा में खाएं (मात्रावद् अश्नीयात्):-भोजन हमेशा अपनी पाचन क्षमता के अनुसार ही करें (पेट का एक-तिहाई हिस्सा पानी और हवा के लिए खाली छोड़ना चाहिए)l
3. पचने के बाद ही दोबारा खाएं (जीर्णे अश्नीयात्):-पिछला भोजन पूरी तरह पच जाने (मल-मूत्र का वेग शांत होने, भूख लगने) के बाद ही अगला भोजन करेंl
4. घी-तेल युक्त भोजन करें (स्निग्धम अश्नीयात्):-आहार में पर्याप्त चिकनाई (जैसे गाय का घी, उचित तेल) होनी चाहिए। यह शरीर को पुष्ट करता है और वात-पित्त को संतुलित रखता है l
5. सही गति से खाएं:-
न अति द्रुतम् अश्नीयात्:-भोजन बहुत जल्दी-जल्दी नहीं करना चाहिए, इससे भोजन के पोषक तत्व ठीक से अवशोषित नहीं होते l
न अति विलम्बितम् अश्नीयात्:- बहुत धीरे-धीरे भी न खाएं, अन्यथा भोजन ठंडा हो जाता है और तृप्ति नहीं मिलती l
6. मन लगाकर खाएं (तन्मना भुञ्जीत):-भोजन करते समय टीवी देखना, मोबाइल चलाना, बातें करना या हंसना नहीं चाहिए। शांत मन से, एकाग्र होकर और भगवान को धन्यवाद देकर भोजन करना चाहिए l
7. उचित स्थान और बर्तन:-भोजन हमेशा स्वच्छ, शांत और अपने मनपसंद स्थान पर, उचित बर्तनों (जैसे तांबे, पीतल या मिट्टी) में करना चाहिए l