BAMS ( Bachelor of Ayurvedic Medicine and Surgery )

BAMS ( Bachelor of Ayurvedic Medicine and Surgery ) Unique place for Students/Doctors of Ayurveda !! "स्वस्थस्य स्वास्थ्यरक्षणं; आतुरस्य विकारप्रशमनं च।'
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वाह! लगता है नोबेल आयुर्वेद कॉलेज ने ‘घोस्ट टीचर्स’ (Ghost Teachers) का गजब का 'आयुर्वेदिक' इलाज ढूँढ निकाला है!13 'अदृश...
26/08/2026

वाह! लगता है नोबेल आयुर्वेद कॉलेज ने ‘घोस्ट टीचर्स’ (Ghost Teachers) का गजब का 'आयुर्वेदिक' इलाज ढूँढ निकाला है!

13 'अदृश्य' शिक्षकों को पास कराने का ये गजब का नुस्खा – सिर्फ ₹10 लाख! भई, भ्रष्टाचार के इस दौर में कॉरपोरेट लेवल के डिस्काउंट तो बनते ही हैं।
क्रेडिट तो सीबीआई और उस साहसी प्रिंसिपल को देना चाहिए, जिन्होंने इस 'चमत्कारी' डील का 'पर्दाफाश' कर दिया। वरना क्या पता, अगले साल ‘भूत विद्या’ का नया सिलेबस ही लॉन्च हो जाता! 😉

24/08/2026
🚨 NTA का सख्त कदम: परीक्षा एजेंसी निलंबित! 🚨जयपुर के परीक्षा केंद्र पर बिजली कटौती के कारण AIAPGET 2026 परीक्षा बाधित हो...
23/08/2026

🚨 NTA का सख्त कदम: परीक्षा एजेंसी निलंबित! 🚨
जयपुर के परीक्षा केंद्र पर बिजली कटौती के कारण AIAPGET 2026 परीक्षा बाधित होने के मामले में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने जिम्मेदार एजेंसी को निलंबित कर दिया है।

📅 पुनर्परीक्षा अपडेट:
प्रभावित 49 छात्रों के लिए अब 1 सितंबर को 'राजस्थान कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग फॉर विमेन' में फिर से परीक्षा आयोजित की जाएगी। ई-प्रवेश पत्र जल्द ही ईमेल द्वारा भेजे जाएंगे।

अधिक जानकारी या सहायता के लिए NTA हेल्पलाइन (011-40759000) पर संपर्क करें।

🦅 Share your experience if you are one of those 49 Doctors?

Proud of you dr.bulkesh.moond जो हमारे “नामी” संस्थान से नहीं हुआ वो आपने किया 🕊️
23/08/2026

Proud of you dr.bulkesh.moond
जो हमारे “नामी” संस्थान से नहीं हुआ वो आपने किया 🕊️

🚨 महामना की विरासत दांव पर: क्या बीएचयू (BHU) आयुर्वेद फार्मेसी का निजीकरण ही एकमात्र समाधान है?काशी हिंदू विश्वविद्यालय...
22/08/2026

🚨 महामना की विरासत दांव पर: क्या बीएचयू (BHU) आयुर्वेद फार्मेसी का निजीकरण ही एकमात्र समाधान है?

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के आयुर्वेद संकाय की जिस फार्मेसी की स्थापना स्वयं महामना मदन मोहन मालवीय जी ने 1932 में की थी, आज वह अपने सबसे बुरे दौर से गुज़र रही है। जिस रस शास्त्र विभाग का मूल उद्देश्य भारतीय चिकित्सा पद्धति से बनी सस्ती और शुद्ध दवाओं के ज़रिए 'लोक कल्याण' था, उसे अब निजी हाथों (PPP मॉडल) में सौंपने की तैयारी चल रही है।

📉 पतन के मुख्य कारण जो हमें सोचने पर मजबूर करते हैं:
उत्पादन में भारी गिरावट: कभी जहाँ च्यवनप्राश सहित 250 से अधिक औषधियों का निर्माण होता था, आज वह संख्या सिमट कर मात्र 30-35 रह गई है।
कमीशनबाज़ी और लापरवाही: सबसे अधिक निराशाजनक बात यह है कि इस दुर्दशा का कारण कथित तौर पर कुछ डॉक्टरों की कमीशन के लालच में बाहरी कंपनियों की दवाएं लिखने की प्रवृत्ति है।
प्रशासनिक विफलता: नीचीबाग में चलने वाला दवा विक्रय काउंटर बहुत पहले ही बंद हो चुका है, जो सीधे तौर पर कुप्रबंधन को दर्शाता है।

🤔 एक बड़ा सवाल:
आयुर्वेद क्षेत्र से जुड़े एक पेशेवर और चिकित्सक होने के नाते, यह स्थिति आत्ममंथन का विषय है। क्या किसी प्रतिष्ठित सरकारी संस्थान को सिर्फ इसलिए प्राइवेट सेक्टर को सौंप देना चाहिए क्योंकि वहां का प्रशासन कमीशनखोरी और लापरवाही रोकने में नाकाम रहा?

यह केवल बीएचयू की एक फार्मेसी का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रतीक है कि कैसे स्वार्थ और कुप्रबंधन के कारण हमारे ऐतिहासिक आयुर्वेद संस्थानों को खोखला किया जा रहा है। समिति का गठन तो हो गया है, लेकिन क्या वह वास्तव में जवाबदेही तय करेगी या सिर्फ निजीकरण का रास्ता साफ करेगी?

आयुर्वेद को आगे ले जाने के लिए हमें अपने संस्थानों की जड़ों को मज़बूत करना होगा, उन्हें बेचना नहीं। इस पर आपकी क्या राय है?

🏥 बीएचयू (BHU) का आयुर्वेद विंग अब एम्स (AIIMS) की तर्ज पर होगा विकसित!काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के आयुर्वेद संक...
22/08/2026

🏥 बीएचयू (BHU) का आयुर्वेद विंग अब एम्स (AIIMS) की तर्ज पर होगा विकसित!
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के आयुर्वेद संकाय को और अधिक आधुनिक और सुविधाजनक बनाने की तैयारी तेज हो गई है।

प्रमुख अपडेट्स:
✅ अस्पताल और रिसर्च ब्लॉक का विस्तार किया जाएगा।
✅ आधुनिक और पारंपरिक चिकित्सा का बेहतरीन समन्वय देखने को मिलेगा।
✅ आयुर्वेदिक फार्मेसी और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है।
✅ सुविधाओं की समीक्षा के लिए उच्च-स्तरीय 5 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है।

आयुर्वेद और चिकित्सा के क्षेत्र में यह एक बहुत बड़ा कदम है, जिससे मरीजों को बेहतर इलाज और छात्रों को शानदार रिसर्च सुविधाएं मिलेंगी।

21/08/2026

ऑन पेपर शिक्षकों पर तो 1.5 लाख से 5 लाख तक की पेनल्टी लगा दी !

पर ऐसा करवाने वाले मैनेजमेंट और कॉलेज का क्या ?
उन्हें किस बात का संरक्षण?

वाह रे हमारे 'अदृश्य' (On-Paper) शिक्षक! शरीर घर के सोफे पर और नाम कॉलेज के रजिस्टर में। 👻अब NCISM ने आपके इस 'जादुई टैल...
20/08/2026

वाह रे हमारे 'अदृश्य' (On-Paper) शिक्षक! शरीर घर के सोफे पर और नाम कॉलेज के रजिस्टर में। 👻

अब NCISM ने आपके इस 'जादुई टैलेंट' को आखिरकार पहचान ही लिया है। आपकी इन बेहतरीन और अदृश्य सेवाओं के लिए अब 1.5 लाख से 5 लाख रुपये तक का शानदार इनाम (जुर्माना) तय किया गया है। और हाँ, साथ में टीचिंग से 'परमानेंट बैन' बिल्कुल फ्री! 🎁💸

तो जो लोग बिना कॉलेज गए सैलरी का मज़ा ले रहे थे, वो अब कृपया घर बैठे-बैठे जुर्माना भरने की तैयारी कर लें! 😂👇

🌿 Ancient Wisdom Meets Modern AI! 🤖✨The Central Council for Research in Ayurvedic Sciences (CCRAS) has partnered with An...
19/08/2026

🌿 Ancient Wisdom Meets Modern AI! 🤖✨

The Central Council for Research in Ayurvedic Sciences (CCRAS) has partnered with Anuvadini AI to bring scientifically verified Ayurveda research to everyone in 13 regional languages

🌟 Key Highlights:
📖 Research in Your Language: Key scientific journals and findings translated for students, researchers, and everyday readers.
🛡️ Countering Misinformation: Making verified, evidence-based facts easily accessible to avoid false health claims.
🌍 Global Reach: Taking traditional Indian wellness wisdom to the world with the power of modern technology.

महर्षि चरक: आयुर्वेद के शाश्वत प्रणेता - एक संक्षिप्त स्मरणनागपंचमी के पावन अवसर पर आयुर्वेद जगत अपने पितामह महर्षि चरक ...
17/08/2026

महर्षि चरक: आयुर्वेद के शाश्वत प्रणेता - एक संक्षिप्त स्मरण

नागपंचमी के पावन अवसर पर आयुर्वेद जगत अपने पितामह महर्षि चरक की जयंती अत्यंत श्रद्धापूर्वक मनाता है। सर्प पूजा के इस पर्व और महर्षि चरक का गहरा सांकेतिक संबंध है। आयुर्वेद चिकित्सकों और छात्रों के लिए यह दिन उनके वैज्ञानिक अवदान और मानवतावादी दृष्टि को पुनः याद करने और आत्मसात करने का क्षण है।

संक्षिप्त परिचय एवं अवदान:
महर्षि चरक (लगभग ईसा पूर्व दूसरी से पहली शताब्दी) एक उत्कृष्ट चिकित्सक और परिव्राजक दार्शनिक थे। 'चरक' शब्द उनके निरंतर घूमकर जनसामान्य को रोगों से मुक्ति दिलाने के स्वभाव का प्रतीक है। उनका सर्वोच्च योगदान चरक संहिता है। उन्होंने विखरे हुए अग्निवेश तन्त्र का प्रतिसंस्कार कर उसे तर्क, प्रमाण और युक्ति की कसौटी पर कसकर एक सुव्यवस्थित वैज्ञानिक शास्त्र का रूप दिया, जो केवल चिकित्सा नहीं बल्कि दीर्घ और स्वस्थ जीवन का मार्ग है।

मुख्य वैज्ञानिक सिद्धांत:
1. प्रतिषेधात्मक आयुर्वेद: उन्होंने स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणं पर सर्वाधिक बल देते हुए दिनचर्या व ऋतुचर्या के माध्यम से प्रिवेंटिव मेडिसिन की नींव रखी।
2. वैयक्तिक चिकित्सा: चरक ने स्पष्ट किया कि हर मनुष्य की प्रकृति भिन्न होती है, इसलिए चिकित्सा रोगी की प्रकृति, देश, काल और बल के अनुसार होनी चाहिए।
3. कायचिकित्सा: अष्टांग आयुर्वेद में कायचिकित्सा को प्रधानता देते हुए उन्होंने दोष-धातु-मल सिद्धांत और रोगों की संप्राप्ति को विस्तार से समझाया।
4. चिकित्सकीय नैतिकता: संहिता में वैद्यों के लिए वर्णित उच्च आदर्श और निर्देश आज के बायोएथिक्स का आधार हैं।

नागपंचमी से संबंध:
परंपरा के अनुसार महर्षि चरक को अगाध ज्ञान और पृथ्वी का भार धारण करने वाले शेषनाग का अवतार माना जाता है। नागपंचमी पर उनका स्मरण ज्ञान की गहराई और जनसेवा के संकल्प की याद दिलाता है।

आज जब विश्व आयुर्वेद की ओर देख रहा है, हमारा दायित्व है कि हम संहिता का केवल पाठ न करें, बल्कि उसके वैज्ञानिक तत्व को समझकर नैतिकता के साथ अभ्यास करें।
महर्षि चरक को कोटिशः नमन!

"मात्र काल आश्रया युक्तिः सिद्धी युक्तौ प्रतिष्ठिता।"
(औषधि की मात्रा और समय का ज्ञान ही चिकित्सक की सफलता की कुंजी है।) - महर्षि चरक

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Ayukari Health Care, Jhanda Chock
Shujalpur
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