Dr Avneesh kumar pandey

Dr Avneesh kumar pandey MD NEURO-PSYCHIATRY

बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर              भावनाओं की सीमा पर खड़ा मनुष्यआधुनिक समाज तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन मनुष...
31/01/2026

बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर
भावनाओं की सीमा पर खड़ा मनुष्य
आधुनिक समाज तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन मनुष्य का आंतरिक संसार उतना ही अस्थिर होता जा रहा है। तनाव, अकेलापन और रिश्तों में बढ़ती जटिलता के बीच कुछ मानसिक विकार ऐसे हैं, जो दिखते कम हैं पर भीतर से व्यक्ति को पूरी तरह तोड़ देते हैं। बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर (BPD) उन्हीं में से एक गंभीर, परंतु कम समझा गया मानसिक विकार है।
BPD से पीड़ित व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान उसकी भावनात्मक अस्थिरता होती है। उसकी भावनाएँ अत्यंत तीव्र होती हैं और बहुत कम समय में बदल जाती हैं। जो बात सामान्य व्यक्ति को मामूली लगे, वही उसके लिए असहनीय पीड़ा का कारण बन सकती है। यह अस्थिरता केवल मन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि व्यवहार और निर्णयों में भी झलकती है।
इस विकार का केंद्र बिंदु है — छोड़ दिए जाने का भय। यह भय वास्तविक हो या केवल कल्पना में, इसका प्रभाव समान रूप से विनाशकारी होता है। किसी अपने की थोड़ी-सी दूरी भी व्यक्ति के भीतर यह आशंका जगा देती है कि वह अब अकेला पड़ गया है। इसी डर से वह कभी अत्यधिक चिपक जाता है, तो कभी संबंधों को स्वयं ही तोड़ देता है।
BPD में रिश्ते अक्सर तूफ़ानी होते हैं। व्यक्ति कभी सामने वाले को आदर्श मानता है, तो कभी उसी व्यक्ति को पूरी तरह दोषी ठहराने लगता है। यह “सब या कुछ नहीं” वाली सोच रिश्तों को अस्थिर बना देती है। परिणामस्वरूप, व्यक्ति बार-बार टूटते संबंधों का दंश झेलता है।
स्वयं के प्रति भी उसका दृष्टिकोण स्थिर नहीं होता। पहचान का संकट, जीवन के लक्ष्य को लेकर भ्रम और अपने ही अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न — ये सब BPD के आम लक्षण हैं। इसी अस्थिरता से जन्म लेती है अंदरूनी खालीपन की भावना, जिसे कोई उपलब्धि या संबंध स्थायी रूप से नहीं भर पाता।
कई बार यह मानसिक पीड़ा व्यक्ति को आवेगशील व्यवहार की ओर धकेल देती है — नशा, अनियंत्रित खर्च, असुरक्षित यौन व्यवहार या जोखिम भरे निर्णय। कुछ मामलों में यह पीड़ा स्वयं को नुकसान पहुँचाने या आत्महत्या के विचारों के रूप में भी सामने आती है। इसे ध्यान आकर्षित करने का प्रयास समझना एक गंभीर भूल होगी।
तनाव की स्थिति में BPD से ग्रस्त व्यक्ति को दुनिया अवास्तविक लग सकती है या वह दूसरों पर अत्यधिक संदेह करने लगता है। यह स्थिति उसे समाज से और अधिक अलग-थलग कर देती है।
समाज के लिए यह आवश्यक है कि वह बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर को चरित्र दोष नहीं, बल्कि एक उपचार योग्य मानसिक रोग के रूप में देखे। वैज्ञानिक मनोचिकित्सकीय उपचार, जैसे डायलेक्टिकल बिहेवियर थेरेपी (DBT) और स्कीमा थेरेपी, के माध्यम से इन व्यक्तियों को भावनात्मक संतुलन और जीवन की दिशा दी जा सकती है।
मानसिक स्वास्थ्य पर चुप्पी साधना समस्या का समाधान नहीं है। संवेदनशीलता, समझ और समय पर उपचार ही वह रास्ता है, जिससे BPD से जूझ रहे लोग अपने जीवन को दोबारा अर्थ और स्थिरता दे सकते हैं।

Man and His Symbolsआधुनिक युग स्वयं को ज्ञान और विज्ञान का शिखर मानता है, किंतु मानसिक अशांति, अवसाद और अस्तित्वगत रिक्त...
30/01/2026

Man and His Symbols

आधुनिक युग स्वयं को ज्ञान और विज्ञान का शिखर मानता है, किंतु मानसिक अशांति, अवसाद और अस्तित्वगत रिक्तता पहले से अधिक गहरी होती जा रही है। इस विरोधाभास का उत्तर कार्ल गुस्ताव युंग की सुप्रसिद्ध कृति Man and His Symbols में निहित है। युंग का तर्क स्पष्ट है—मनुष्य ने अपने ही मन की भाषा, अर्थात् प्रतीकों की भाषा, को समझना बंद कर दिया है।
विज्ञान ने मनुष्य को बाहरी संसार पर अधिकार दिलाया, पर आंतरिक संसार उपेक्षित रह गया। युंग के अनुसार मनुष्य का अचेतन मन केवल दबी हुई इच्छाओं का भंडार नहीं, बल्कि वह सक्रिय, सृजनशील और मार्गदर्शक शक्ति है। यह शक्ति शब्दों में नहीं, प्रतीकों में संवाद करती है। सपने, मिथक, धार्मिक चिह्न और लोककथाएँ उसी संवाद की अभिव्यक्ति हैं।
दुर्भाग्यवश, आधुनिक समाज सपनों को अंधविश्वास और प्रतीकों को अवैज्ञानिक मानकर खारिज करता है। परिणामस्वरूप मनुष्य अपने ही भीतर चल रहे संघर्ष को पहचान नहीं पाता। युंग मानते हैं कि जब अचेतन की चेतावनियों को अनदेखा किया जाता है, तब वे मानसिक विकारों के रूप में उभरती हैं। इस दृष्टि से देखा जाए तो मानसिक रोग केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सभ्यतागत समस्या भी हैं।
युंग द्वारा प्रतिपादित आर्केटाइप मानव अनुभव की सार्वभौमिक संरचनाएँ हैं। Shadow हमें हमारे दमन और नैतिक पाखंड की याद दिलाता है; Persona सामाजिक स्वीकृति की मजबूरी को उजागर करता है; Anima–Animus लिंग-आधारित संकीर्णताओं को तोड़ने का संकेत देता है; और Self उस समग्रता का प्रतीक है, जिसकी खोज में मानव जीवन निरंतर भटकता है। इन प्रतीकों को समझे बिना मनुष्य अधूरा ही रहता है।
आज की उपभोक्तावादी संस्कृति व्यक्ति को बाहर से सजाती है, भीतर से नहीं। सफलता, प्रतिष्ठा और तकनीक ने Persona को तो सुदृढ़ किया, पर Self उपेक्षित रह गया। यही कारण है कि भीड़ में रहते हुए भी मनुष्य अकेला महसूस करता है। युंग की अवधारणा Individuation इसी विघटन का समाधान प्रस्तुत करती है—जहाँ व्यक्ति अपने अचेतन को स्वीकार कर, स्वयं के साथ ईमानदार होता है।
Man and His Symbols वस्तुतः मनोविज्ञान की पुस्तक मात्र नहीं, बल्कि आधुनिक मानव के लिए एक दार्शनिक चेतावनी है। यह हमें याद दिलाती है कि प्रतीकों के बिना जीवन यांत्रिक हो जाता है और अर्थहीनता मानसिक रोग का सबसे गहरा रूप है।
अंत में, युंग का संदेश आज पहले से अधिक प्रासंगिक है—यदि मनुष्य ने अपने प्रतीकों से पुनः संवाद स्थापित नहीं किया, तो वह तकनीकी रूप से शक्तिशाली, पर मानसिक रूप से खोया हुआ प्राणी बनकर रह जाएगा।

29/05/2024

Dr. Ashvin Chouhan(MBBS, MD, DNB, MIMA, MInPS)Neuropsychiatrist, Deaddiction specialist, S*x disorder specialistCall: 8779662575E-Mail : drashvinpsychiatrist...

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