14/05/2026
पेपर लीक यदि नाशिक से शुरू होकर हरियाणा होते हुए पूरे भारत में फैला और आखिर में सीकर तक पहुंचा, तो फिर मेरे कोटा वाले दोस्तों — हर चीज़ के लिए सीकर कैसे जिम्मेदार हो गया?
इधर एक ओर समस्या है
सीकर के कुछ लोग, जिन्हें एक-दूसरे की सफलता से जलन है,
कुछ लोग जिन्हें कोचिंग संस्थानों से नफरत है,
और कुछ लोग जो अपनी राजनीतिक दुश्मनी निकालना चाहते हैं
वे सोशल मीडिया पर बिना तथ्य के कुछ भी लिख रहे हैं।
ज़रा सामान्य बुद्धि से सोचो —
यदि किसी एक कोचिंग ने पेपर लीक करवाया होता, तो क्या वह पेपर पूरे देश में घूमता?
क्या वह हर राज्य, हर शहर और हजारों बच्चों तक पहुंच जाता?
जवाब है
नहीं।
वह सीमित लोगों तक ही रहता।
लेकिन यहां तो बिना किसी प्रमाण के पूरे शहर, संस्थानों, शिक्षकों और मेहनती विद्यार्थियों को बदनाम किया जा रहा है।
किसी को CLC से जलन है,
किसी को GCI से,
तो किसी को P*P से।
पर व्यक्तिगत जलन में यह भूल जाना कि वहां हजारों बच्चे सालभर मेहनत करते हैं, बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
जब आप किसी कोचिंग मालिक पर आरोप लगाते हैं,
तो चोट सिर्फ उस व्यक्ति पर नहीं जाती बल्कि
उस विद्यार्थी पर भी जाती है जो दिन-रात मेहनत कर रहा है,
उस शिक्षक पर भी जाती है जो अपना पूरा समय बच्चों के भविष्य के लिए देता है।
सबसे दुखद बात यह है कि सीकर को बदनाम बाहर वाले कम,
सीकर वाले खुद ज्यादा कर रहे हैं — सिर्फ आपसी जलन और द्वेष के कारण।
किसी ने सही कहा है —
“सीकर को दूसरों की नहीं, अपनों की सफलता हजम नहीं होती।”
अपराधियों को सजा अवश्य मिलनी चाहिए।