Navkar Ayurveda

Navkar Ayurveda �Navkar Aushdhalaya, Bara Dhana Singoli Distt. Neemuch (M.P.)

18/06/2026

आज गुरु पुष्य नक्षत्र का शुभ संयोग

बच्चों के स्वास्थ्य, बुद्धि और रोग प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ बनाने के लिए गुरु पुष्य नक्षत्र अत्यंत शुभ माना जाता है। इस पावन अवसर पर अपने बच्चों के लिए स्वर्ण प्राशन संस्कार का लाभ अवश्य लें।

स्वर्ण प्राशन के प्रमुख लाभ
✅ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक
✅ स्मरण शक्ति एवं एकाग्रता में लाभकारी
✅ शारीरिक एवं मानसिक विकास को प्रोत्साहित करने वाला
✅ बार-बार होने वाले सर्दी-जुकाम एवं संक्रमण से बचाव में सहायक
✅ पाचन शक्ति एवं भूख में सुधार करने वाला
✅ बच्चों के सर्वांगीण विकास में उपयोगी

आयुर्वेद में स्वर्ण प्राशन को बाल स्वास्थ्य संवर्धन की एक महत्वपूर्ण परंपरा माना गया है। नियमित सेवन से बच्चों के विकास एवं स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

गुरु पुष्य नक्षत्र पर स्वर्ण प्राशन प्रारंभ करना विशेष शुभ माना जाता है।

स्वर्ण प्राशन उपलब्ध है
नवकार आयुर्वेदा
बारह ढाणा, सिंगोली

📞 संपर्क: 8358078639

“बच्चों को केवल अच्छी शिक्षा ही नहीं, उत्तम स्वास्थ्य और मजबूत प्रतिरक्षा भी दें।”

दालचीनी: रसोई का मसाला ही नहीं, सौंदर्य का भी प्राकृतिक साथीभारतीय रसोई में वर्षों से अपनी मनमोहक सुगंध और विशिष्ट स्वाद...
15/06/2026

दालचीनी: रसोई का मसाला ही नहीं, सौंदर्य का भी प्राकृतिक साथी

भारतीय रसोई में वर्षों से अपनी मनमोहक सुगंध और विशिष्ट स्वाद के लिए प्रसिद्ध दालचीनी केवल एक मसाला भर नहीं है। आयुर्वेद में इसे औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। यह भोजन का स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ स्वास्थ्य लाभ देने में भी उपयोगी रही है। आजकल दालचीनी अपनी एक और विशेषता के कारण चर्चा में है, और वह है त्वचा की प्राकृतिक देखभाल और सौंदर्य संवर्धन।

दालचीनी में एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल और सूजनरोधी गुण पाए जाते हैं। इसके साथ ही इसमें मैंगनीज, कैल्शियम, आयरन और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं, जो शरीर और त्वचा दोनों के लिए लाभकारी माने जाते हैं।

स्वास्थ्य के लिए दालचीनी के लाभ
✅ पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में सहायक।
✅ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मददगार।
✅ सर्दी-जुकाम और गले की परेशानी में उपयोगी।
✅ रक्त शर्करा के संतुलन में सहयोगी मानी जाती है।
✅ शरीर में सूजन को कम करने में सहायक।

त्वचा की खूबसूरती के लिए दालचीनी
आजकल प्राकृतिक सौंदर्य उपचारों में दालचीनी का प्रयोग बढ़ रहा है। उचित मात्रा और सही विधि से इसका उपयोग त्वचा को कई लाभ पहुंचा सकता है।
मुंहासों से बचाव में सहायक
इसके जीवाणुरोधी गुण त्वचा पर बैक्टीरिया की वृद्धि को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।
दाग-धब्बों को हल्का करने में सहयोगी
त्वचा की रंगत को निखारने और दागों की तीव्रता कम करने में सहायक मानी जाती है।
त्वचा में प्राकृतिक चमक
रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद मिलने से त्वचा अधिक ताजगी और आभा से भरपूर दिखाई दे सकती है।
त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में मददगार
एंटीऑक्सीडेंट गुण त्वचा को बाहरी नुकसान से बचाने में सहायक होते हैं।

उपयोग करते समय रखें सावधानी
• दालचीनी का सीधे त्वचा पर अधिक मात्रा में प्रयोग न करें।
• संवेदनशील त्वचा वाले लोग पहले पैच टेस्ट अवश्य करें।
• किसी भी घरेलू प्रयोग को सीमित मात्रा और उचित सलाह के साथ अपनाएं।
• अत्यधिक सेवन या गलत उपयोग से बचें।

दालचीनी हमें यह सिखाती है कि हमारी रसोई में मौजूद साधारण चीजें भी असाधारण गुणों से भरपूर हो सकती हैं। आवश्यकता केवल उन्हें सही जानकारी और संतुलित तरीके से अपनाने की है।

याद रखें, खूबसूरती केवल बाहरी सजावट से नहीं, बल्कि भीतर के स्वास्थ्य से निखरती है। और जब स्वास्थ्य और सौंदर्य का संगम हो जाए, तो प्रकृति की यह देन सचमुच अमूल्य बन जाती है।

रसोई की खुशबू को स्वास्थ्य और सौंदर्य का हिस्सा बनाइए, दालचीनी के गुणों को अपनाइए।

नवकार आयुर्वेदा
बारह ढाणा, सिंगोली
📞 8358078639

13/06/2026

तनाव केवल मन की समस्या नहीं, पूरे शरीर का दुश्मन है

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव (Stress) लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बनता जा रहा है। काम का दबाव, आर्थिक चिंताएं, पारिवारिक जिम्मेदारियां और भविष्य की अनिश्चितताएं मन पर बोझ बढ़ा देती हैं। लेकिन बहुत कम लोग यह समझ पाते हैं कि तनाव केवल हमारी सोच और भावनाओं को ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित करता है।

शुरुआत में तनाव बेचैनी, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता की कमी के रूप में दिखाई देता है, लेकिन यदि यह लंबे समय तक बना रहे तो इसके दुष्प्रभाव गंभीर हो सकते हैं।

लंबे समय तक तनाव रहने के संभावित दुष्प्रभाव
👉 सोचने-समझने और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होना।
👉 नींद न आना या बार-बार नींद टूटना।
👉 सिरदर्द, थकान और कमजोरी महसूस होना।
👉 पाचन संबंधी समस्याएं, गैस और भूख में बदलाव।
👉 उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों का खतरा बढ़ना।
👉 रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ना।
👉 चिंता और अवसाद जैसी मानसिक समस्याओं की आशंका बढ़ना।

तनाव कम करने के प्राकृतिक उपाय
✅ प्रतिदिन कुछ समय योग, प्राणायाम और ध्यान के लिए निकालें।
✅ पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद लें।
✅ मोबाइल और सोशल मीडिया से समय-समय पर दूरी बनाएं।
✅ परिवार और मित्रों के साथ समय बिताएं।
✅ संतुलित और पौष्टिक आहार लें।
✅ प्रकृति के बीच कुछ समय बिताने की आदत डालें।

आयुर्वेद का मानना है कि स्वस्थ शरीर और शांत मन एक-दूसरे के पूरक हैं। मन में संतुलन होगा तो शरीर भी स्वस्थ रहेगा।

याद रखें, तनाव को नजरअंदाज करना समाधान नहीं है। समय रहते जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करके हम स्वयं को शारीरिक और मानसिक रूप से अधिक स्वस्थ बना सकते हैं।

मन को सुकून दीजिए, शरीर स्वयं स्वस्थ होने लगेगा।

नवकार आयुर्वेदा
बारह ढाणा, सिंगोली
📞 8358078639

संतान सुख की आशा और आयुर्वेद की संभावनाएं निःसंतानता आज केवल एक चिकित्सीय समस्या नहीं, बल्कि अनेक परिवारों के लिए भावनात...
11/06/2026

संतान सुख की आशा और आयुर्वेद की संभावनाएं

निःसंतानता आज केवल एक चिकित्सीय समस्या नहीं, बल्कि अनेक परिवारों के लिए भावनात्मक और सामाजिक चुनौती भी बन चुकी है। ऐसे में यदि वैज्ञानिक परीक्षणों और शोध के माध्यम से आयुर्वेद की किसी पद्धति से सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं, तो यह आशा की नई किरण है।

आयुर्वेद केवल औषधि तक सीमित नहीं है, बल्कि संतुलित आहार, दिनचर्या, मानसिक स्वास्थ्य और प्राकृतिक जीवनशैली पर भी समान रूप से बल देता है। आधुनिक विज्ञान और पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान का समन्वय समाज के लिए अधिक प्रभावी और किफायती समाधान उपलब्ध करा सकता है।

हालांकि किसी भी उपचार को अपनाने से पूर्व योग्य चिकित्सक की सलाह और वैज्ञानिक तथ्यों का मूल्यांकन आवश्यक है, फिर भी ऐसे शोध यह संकेत देते हैं कि भारतीय चिकित्सा पद्धतियों में अभी भी अपार संभावनाएं विद्यमान हैं, जिन्हें गंभीरता से समझने और आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

स्वस्थ जीवनशैली, सकारात्मक सोच और उचित चिकित्सा मार्गदर्शन, मातृत्व-पितृत्व के सपनों को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

नवकार आयुर्वेदा
बारह ढाणा, सिंगोली
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दही-चावल: सादगी में छिपा स्वास्थ्य का स्वाद आज जब हमारी थाली में तरह-तरह के मसालेदार और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ जगह बना र...
10/06/2026

दही-चावल: सादगी में छिपा स्वास्थ्य का स्वाद

आज जब हमारी थाली में तरह-तरह के मसालेदार और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ जगह बना रहे हैं, तब भी भारतीय भोजन संस्कृति का एक साधारण व्यंजन अपनी उपयोगिता और लोकप्रियता बनाए हुए है—दही-चावल।

यह केवल एक भोजन नहीं, बल्कि उस पारंपरिक सोच का प्रतीक है जिसमें कम मसालों, सीमित सामग्री और सहज पाचन के साथ स्वाद और स्वास्थ्य दोनों का ध्यान रखा जाता है।

दही-चावल क्यों है खास?
✅ पाचन के लिए लाभकारी।
दही में मौजूद प्राकृतिक प्रोबायोटिक्स आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं।
✅ गर्मी में ठंडक प्रदान करता है
यह शरीर को शीतलता देता है और गर्मी के मौसम में राहत पहुंचाता है।
✅ हल्का और सुपाच्य भोजन
अपच, कमजोरी या भूख कम लगने की स्थिति में भी यह उपयोगी माना जाता है।
✅ तुरंत ऊर्जा का स्रोत
चावल ऊर्जा प्रदान करते हैं, जबकि दही पोषण और संतुलन बनाए रखता है।
✅ कम मसाले, अधिक पोषण
यह हमें याद दिलाता है कि स्वादिष्ट भोजन के लिए हमेशा अत्यधिक मसालों की आवश्यकता नहीं होती।

इसे और पौष्टिक कैसे बनाएं?
• भुना जीरा और काली मिर्च मिलाएं।
• अनार के दाने या कद्दूकस की हुई गाजर डालें।
• हरा धनिया और करी पत्ते का तड़का लगाएं।
• मौसम और अपनी पाचन क्षमता के अनुसार सेवन करें।

भारतीय भोजन की असली खूबसूरती उसकी सादगी में है। दही-चावल हमें सिखाता है कि स्वास्थ्यवर्धक भोजन महंगा या जटिल नहीं, बल्कि संतुलित और प्राकृतिक होना चाहिए।

कभी-कभी सादगी ही सबसे बड़ा स्वाद और सबसे अच्छी दवा होती है।

नवकार आयुर्वेदा
बारह ढाणा, सिंगोली
📞 8358078639

08/06/2026

क्या आपकी थाली में जरूरत से ज्यादा तेल तो नहीं?

स्वाद के लिए तेल जरूरी हो सकता है, लेकिन अधिक मात्रा में तेल का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है। आधुनिक शोध और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जरूरत से ज्यादा तला-भुना भोजन मोटापा, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए प्रतिदिन सीमित मात्रा में तेल का सेवन ही उचित माना जाता है। इसलिए भोजन में तेल की मात्रा पर ध्यान देना आवश्यक है।

बाजारों, होटलों और कई खाद्य प्रतिष्ठानों में एक ही तेल को बार-बार गर्म करके उपयोग किया जाता है। बार-बार गर्म होने पर तेल की गुणवत्ता बदल जाती है और उसमें ऐसे हानिकारक तत्व बनने लगते हैं, जो लंबे समय में शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

✅ तले हुए भोजन की मात्रा कम करें।
✅ घर में ताजा तेल का उपयोग करें।
✅ एक ही तेल को बार-बार गर्म करने से बचें।
✅ भाप, उबालकर या कम तेल में बने भोजन को प्राथमिकता दें।
✅ पैकेट वाले तले स्नैक्स और फास्ट फूड का सेवन सीमित करें।

याद रखें, भोजन में तेल स्वाद बढ़ा सकता है, लेकिन अधिक तेल स्वास्थ्य घटा सकता है।
संतुलित मात्रा और सही उपयोग ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है।

कम तेल, बेहतर स्वास्थ्य।

नवकार आयुर्वेदा
बारह ढाणा, सिंगोली
📞 8358078639

06/06/2026

विश्व पर्यावरण दिवस पर एक विचार…
- डॉ. सुनील रणावत

5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर बड़े उत्साह के साथ हजारों पौधे लगाए जाते हैं। फोटो खिंचते हैं, संकल्प लिए जाते हैं और सोशल मीडिया पर हरियाली के संदेश भी खूब प्रसारित होते हैं। लेकिन एक प्रश्न मन में उठता है कि क्या जून के पहले सप्ताह की भीषण गर्मी में लगाए गए ये पौधे वास्तव में जीवित रह पाएंगे?

सच्चाई यह है कि इस समय तापमान इतना अधिक होता है कि पुराने और स्थापित पौधों को भी अतिरिक्त देखभाल की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में नए पौधों का जीवित रहना नियमित सिंचाई, सुरक्षा और निरंतर देखभाल पर निर्भर करता है।

इसलिए पर्यावरण संरक्षण को केवल “पौधारोपण” तक सीमित न रखें, बल्कि उसे “पौधा पालन” का अभियान बनाएं। एक पौधा लगाकर उसे पेड़ बनने तक संभालना, सौ पौधे लगाकर उन्हें भूल जाने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

आइए, इस पर्यावरण दिवस पर केवल पौधे लगाने का नहीं, बल्कि उन्हें बचाने और बड़ा करने का संकल्प लें। क्योंकि प्रकृति को हमारी संख्या नहीं, हमारी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की आवश्यकता है।

“पेड़ लगाना एक उत्सव है, लेकिन उसे जीवित रखना हमारा कर्तव्य है।”

- डॉ. सुनील रणावत

05/06/2026

जंक फूड का स्वाद कुछ मिनटों का, नुकसान कई वर्षों का
- डॉ. सुनील रणावत

आज के समय में जंक फूड का चलन तेजी से बढ़ रहा है। पिज्जा, बर्गर, चिप्स, नूडल्स और कोल्ड ड्रिंक बच्चों और युवाओं की पहली पसंद बनते जा रहे हैं। स्वाद और आकर्षण के कारण इन्हें बार-बार खाने की आदत पड़ जाती है, लेकिन इसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव अक्सर देर से दिखाई देते हैं।

जंक फूड से होने वाले संभावित नुकसान
👉 मोटापा बढ़ने का खतरा
अधिक कैलोरी और कम पोषण होने के कारण वजन तेजी से बढ़ सकता है।
👉 पाचन संबंधी समस्याएं
गैस, कब्ज, अपच और पेट की अन्य समस्याएं बढ़ सकती हैं।
👉 रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी
पौष्टिक तत्वों की कमी शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा को कमजोर कर सकती है।
👉 एकाग्रता और ऊर्जा पर असर
अत्यधिक जंक फूड बच्चों और युवाओं में सुस्ती तथा ध्यान की कमी का कारण बन सकता है।
👉 भविष्य में गंभीर रोगों का खतरा
लगातार गलत खानपान मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों की संभावना बढ़ा सकता है।

क्या करें?
✅ घर का ताजा और संतुलित भोजन प्राथमिकता बनाएं।
✅ फल, सलाद, अंकुरित अनाज और देशी नाश्तों को आहार में शामिल करें।
✅ कोल्ड ड्रिंक की जगह छाछ, नींबू पानी और ताजे पेय लें।
✅ बच्चों को स्वाद के साथ-साथ पोषण का महत्व भी समझाएं।

याद रखें—स्वास्थ्य बाजार में नहीं मिलता, यह हमारी थाली में बनता है।
आज की सही खानपान की आदतें ही कल का स्वस्थ जीवन तय करती हैं।

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