आचार्य पंडित माधव पाराशर

आचार्य पंडित माधव पाराशर Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from आचार्य पंडित माधव पाराशर, Astrologist & Psychic, शांतिनगर चौक डुमरा सीतामढ़ी बिहार, Sitamarhi.
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🔱 आचार्य पंडित माधव पाराशर 🔱
जगत जननी माँ जानकी की जन्मभूमि
📍 सीतामढ़ी, बिहार – 843301

🪔 वैदिक कर्मकांडी एवं ज्योतिषाचार्य 🪔

✨ सेवाएँ ✨
🔸 रुद्राभिषेक
🔸 कुंडली निर्माण
🔸 महामृत्युंजय अनुष्ठान
🔸 ग्रहों के वैदिक मंत्र द्वारा अनुष्ठान
🔸More......

🌺🕉️ श्री सूक्त पाठ सहित अभिषेक का दिव्य आयोजन 🕉️🌺📍 स्थान — बेलसंड क्षेत्र🙏 वैदिक मंत्रोच्चार एवं श्रद्धापूर्वक श्री सूक्...
20/08/2026

🌺🕉️ श्री सूक्त पाठ सहित अभिषेक का दिव्य आयोजन 🕉️🌺

📍 स्थान — बेलसंड क्षेत्र
🙏 वैदिक मंत्रोच्चार एवं श्रद्धापूर्वक श्री सूक्त पाठ सहित अभिषेक का आयोजन संपन्न हुआ।

✨ श्री सूक्त पाठ एवं अभिषेक से माँ लक्ष्मी की कृपा, धन-समृद्धि, सुख-शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति के लिए प्रार्थना की गई।
🌸 सभी श्रद्धालुओं के जीवन में सुख, समृद्धि और मंगल की कामना।

💐 पंडित माधव पाराशर
📞 संपर्क सूत्र: 9031555179

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💥💐।। श्रीशिवरामाष्टक- स्तोत्रम् ।।💐💥         (हिंदी अर्थ सहित)शिव हरे शिव राम सखे प्रभो, त्रिविधतापनिवारण हे विभो।अज जने...
18/08/2026

💥💐।। श्रीशिवरामाष्टक- स्तोत्रम् ।।💐💥
(हिंदी अर्थ सहित)

शिव हरे शिव राम सखे प्रभो, त्रिविधतापनिवारण हे विभो।
अज जनेश्वर यादव पाहि मां, शिव हरे विजयं कुरु मे वरम्।।१।।

हे शिव ! हे हरे, हे शिव, हे राम, हे सखे! हे प्रभो, हे त्रिविध ताप- निवारण विभो! हे अज, हे जगन्नाथ, हे यादव! मेरी रक्षा करो; हे शिव! हे हरे! मेरी कल्याणमय विजय करें।

कमललोचन राम दयानिधे, हर गुरो गजरक्षक गोपते।
शिवतनो भव शङ्कर पाहि मां, शिव हरे विजयं कुरु मे वरम्।।२।।

हे कमललोचन दयानिधे राम ! हे हर ! हे गुरो ! हे गजरक्षक ! हे गोपते ! हे कल्याणरूपधारी भव ! हे शंकर ! मेरी रक्षा करो; हे शिव ! हे हरे ! मेरा उत्तम विजय-साधन करो।

सुजनरञ्जन मङ्गलमन्दिरं, भजति ते पुरुषः परमं पदम्।
भवति तस्य सुखं परमद्भुतं, शिव हरे विजयं कुरु मे वरम्।।३।।

हे सज्जन-मनरंजन ! जो पुरुष तुम्हारे मंगलमन्दिर ( शिव और विष्णुरूप) परमपद का आश्रय लेते हैं, उन्हें परम दिव्य सुख प्राप्त होता है; अतएव हे शिव ! हे हरे ! मेरा वर विजय-साधन करो।

जय युधिष्ठिरवल्लभ भूपते, जय जयार्जितपुण्यपयोनिधे।
जय कृपामय कृष्ण नमोऽस्तु ते, शिव हरे विजयं कुरु मे वरम्।।४।।

हे युधिष्ठिर के प्रियतम ! हे भूपते ! आप विजयी हों ! हे पुण्यमहासागर के उपार्जन करनेवाले ! आपकी जय हो, जय हो; हे दयामय कृष्ण ! आपकी जय हो, आपको नमस्कार है; हे शिव ! हे हरे ! आप मेरी कल्याणमय विजय करें।

भवविमोचन माधव मापते, सुकवि मानसहंस शिवारते।
जनकजारत राघव रक्ष मां, शिव हरे विजयं कुरु मे वरम्।।५।।

हे भवभयहारी माधव ! हे लक्ष्मीपते ! हे सुकवि- मानस-हंस ! हे पार्वतीप्रिय ! हे जानकीजीवन राघव ! मेरी रक्षा करो, हे शिव! हे हरे ! मेरा वर विजयसम्पादन करो।

अवनिमण्डलमङ्गल मापते, जलदसुन्दर राम रमापते।
निगमकीर्तिगुणार्णव गोपते, शिव हरे विजयं कुरु मे वरम्।।६।।

हे भूमिमण्डल के मंगलस्वरूप ! हे श्रीपते ! हे घनश्याम सुन्दर ! हे राम ! हे रमापते ! हे वेदवर्णित गुण-सागर ! हे गोपते ! हे शिव! हे हरे ! मेरी कल्याणमय विजय करो।

पतितपावन नाममयी लता, तव यशो विमलं परिगीयते।
तदपि माधव मां किमुपेक्षसे, शिव हरे विजयं कुरु मे वरम्।।७।।

हे पतितपावन ! तुम्हारा नाम कल्पलता है, तुम्हारा यश नित्य सर्वत्र गाया जाता है तथापि हे माधव ! तुम मेरी उपेक्षा क्यों कर रहे हो ? हे शिव ! हे हरे ! मेरा शुभ विजय-साधन करो।

अमरतापरदेव रमापते, विजयतस्तव नामधनोपमा।
मयि कथं करुणार्णव जायते, शिव हरे विजयं कुरु मे वरम्।।८।।

हे देवों में श्रेष्ठ देव ! हे दयासागर रमापते ! सर्वत्र विजय पानेवाले तुझ परमेश्वर के नाम रूपी धन का आदर्श कोष मेरे पास किस प्रकार संचित हो जायगा? हे शिव ! हे हरे ! मेरा परम विजय-साधन करो।

हनुमतः प्रिय चापकर प्रभो, सुरसरिद्धृतशेखर हे गुरो।
मम विभो किमु विस्मरणं कृतं, शिव हरे विजयं कुरु मे वरम्।।९।।

हे हनुमत्प्रिय ! हे चापधारी प्रभो ! हे शीश पर गंगाजी को धारण करनेवाले गुरुदेव! हे विभो! तुम मुझे क्यों भूल गये ? हे शिव ! हे हरे ! मेरा परम जय-साधन करो।

अहरहर्जनरञ्जनसुन्दरं, पठति यः शिवरामकृतं स्तवम्।
विशति रामरमाचरणाम्बुजे, शिव हरे विजयं कुरु मे वरम्।।१०।।

जो मनुष्य इस लोकप्रिय सुन्दर रामानन्द स्वामी के विरचित शिवराम-स्तव का पाठ करता है, वह राम-रमा के चरणकमलों में प्रवेश करने में समर्थ होता है। हे शिव ! हे शिव ! हे हरे ! मेरा श्रेष्ठ विजय-साधन करो।

प्रातरुत्थाय यो भक्त्या, पठेदेकाग्रमानसः।
विजयो जायते तस्य, विष्णुमाराध्यमाप्नुयात्।।११।।

जो प्रातःकाल उठकर एकाग्रचित्त से इस शिवरामस्तोत्र का पाठ करता है, उसकी सर्वत्र जय होती है और वह अपने आराध्यदेव विष्णु को प्राप्त होता है।

।। इति श्रीरामानन्दस्वामिना विरचितं श्रीशिवरामाष्टकं सम्पूर्णम् ।।
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👉हनुमान जी के सिंदूर का प्रयोग कर गुस्से और जिद पर काबू पायें 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️हर माता – पिता की यही प्रयास ...
18/08/2026

👉हनुमान जी के सिंदूर का प्रयोग कर गुस्से और जिद पर काबू पायें
〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️
हर माता – पिता की यही प्रयास करते हैं कि वो अपने बच्चों को अच्छी परवरिश तथा अच्छा जीवन दें. जिसके लिए वो अपने बच्चों की हर इच्छा को पूर्ण कर देते हैं. लेकिन कभी – कभी बच्चों के द्वारा कुछ ऐसी वस्तुओं की मांग की जाती हैं. जिनको पूरा कर पाना उनके माता – पिता के लिए असंभव हो जाता हैं. ऐसी स्थिति में कुछ बच्चे अपने माता – पिता से गुस्सा हो जाते हैं और अपनी मांग की पूर्ति हेतु जिद्द करते हैं. अगर इसके बाद लगातार बच्चों की बातों को माता – पिता नजरअंदाज करने लगते हैं तो गुस्सा और जिद्द उनके व्यवहार में निहित हो जाता हैं. जिसके बुरे परिणाम का भी कई बार बच्चों के साथ – साथ उनके माता – पिता को सामना करना पड़ता हैं. यदि आपका बच्चा भी जिद्दी हैं और उसे जल्द ही गुस्सा आ जाता हैं. तो नीचे दिए गये उपायों का प्रयोग जरूर करें.

हनुमान चालीसा एक चमत्कारी रामबाण उपाय
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1.कभी – कभी बच्चे अपनी छोटी – छोटी बातों को मनवाने के लिए जिद्द करने लग जाते हैं. जिससे जिद्द करना उनकी आदत बन जाती हैं. अपने बच्चे की जिद्द करने की प्रवृति को कम करवाने के लिए आप पहले तो बच्चों को आराम से प्यार से समझाएं. अगर वो इसके बाद भी न माने तो नीचे अगला प्रयोग आजमायें।

गुस्से और जिद्द पर काबू कैसे पायें
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2.शास्त्रों के अनुसार यदि कोई बच्चा बहुत ज्यादा जिद्दी हो, छोटी – छोटी बातों पर गुस्सा हो जाता हो, माता – पिता की बात बिल्कुल न सुनता हो, जिद्द के कारण ही जमीन पर लेट जाता हो, चिडचिडापन उसके व्यवहार की मुख्य प्रवृति बन गई हो. तो इसके लिए किसी प्रतिष्ठित हनुमान जी के मंदिर में शनिवार और मंगलवार को जाएँ और उनके बायें पैर का सिंदूर लेकर उसके माथे पर लागायें. हर मंगलवार और शनिवार के दिन इस प्रयोग को करने से आपका बच्चा जिद्द करना और गुस्सा करना बिल्कुल छोड़ देगा.

हनुमान जी के सिंदूर का महत्व
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हनुमान जी के दोनों पैरों पर लगा सिंदूर बहुत ही प्रभावशाली होता हैं. ऐसा माना जाता हैं कि इस सिंदूर का तिलक जब कोई भी व्यक्ति अपने मस्तिष्क पर लगता हैं. तो हनुमान जी उस व्यक्ति को सद्बुद्धि प्रदान करते हैं. इसीलिए हनुमान जी को बल और बुद्धि का दाता भी माना जाता हैं तथा इसीलिए जो व्यक्ति या बच्चे ज्यादा जिद्दी या गुस्सैल होते हैं. उनके लिए यह सिंदूर बहुत ही उपयोगी सिद्ध होता हैं. हनुमान जी के सिंदूर को लगाने के बाद व्यक्ति का गुस्सा जैसे – एक दम से ही गायब हो जाता हैं और जिद्द धीरे – धीरे ख़त्म हो जाती हैं. हनुमान जी के सिंदूर को लगाने से व्यक्ति को इन दोनों ही चीजों से मुक्ति तो मिलती ही हैं. इसके साथ ही उन्हें पुण्य लाभ भी प्राप्त होता।

डॉ0 विजय शंकर मिश्र:।Copied

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🙏🕉️ पितृ दोष निवारण यन्त्र 🕉️🙏🌺 पितृ देवताओं की कृपा से जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि बनी रहे। 🌺पितृ दोष को सनातन परंप...
18/08/2026

🙏🕉️ पितृ दोष निवारण यन्त्र 🕉️🙏

🌺 पितृ देवताओं की कृपा से जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि बनी रहे। 🌺

पितृ दोष को सनातन परंपरा में जीवन की अनेक बाधाओं से जोड़कर देखा जाता है। श्रद्धा एवं शास्त्रोक्त विधि से पितृ पूजन, तर्पण, श्राद्ध एवं पितृ दोष निवारण जैसे उपाय किए जाते हैं। 🙏

🕉️ ॐ पितृदेवाय नमः।
🕉️ ॐ सर्वपितृभ्यो नमः।
🙏 पितृ देवताओं को कोटि-कोटि नमन। 🙏

📿 पितृ दोष, ऋण दोष एवं ग्रह संबंधी समस्याओं के शास्त्रोक्त समाधान हेतु संपर्क करें।

पं. माधव पाराशर
📞 संपर्क सूत्र: 9031555179

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🙏🪔 जय श्री हरि 🙏 जय माता दी 🪔🙏🌺 आज की दिव्य आरती 🌺ईश्वर की आरती के साथ अपने दिन की शुरुआत/समापन भक्ति, शांति और सकारात्म...
18/08/2026

🙏🪔 जय श्री हरि 🙏 जय माता दी 🪔🙏

🌺 आज की दिव्य आरती 🌺
ईश्वर की आरती के साथ अपने दिन की शुरुआत/समापन भक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा के साथ करें।
✨ प्रभु की कृपा से आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि एवं मंगल बना रहे। ✨

🙏 आरती दर्शन करें और श्रद्धा से “जय श्री…” अवश्य लिखें।
🔱 हरि स्मरण • धर्म • संस्कार • सनातन संस्कृति 🔱

पं. माधव पाराशर
📞 संपर्क सूत्र: 9031555179

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🍁  सन्ध्या - वन्दन की दिव्य महिमा  🍁--------------------"या सन्ध्या सा जगत्सूतिर्मायातीता हि निष्कला ।ऐश्वर्यरूपा परा शक...
16/08/2026

🍁 सन्ध्या - वन्दन की दिव्य महिमा 🍁
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"या सन्ध्या सा जगत्सूतिर्मायातीता हि निष्कला ।
ऐश्वर्यरूपा परा शक्तिस्तत्त्वत्रयसमुद्भवा ॥
ध्यात्वार्कमण्डलगतां सावित्रीं वै जपन् बुधः ।
प्राङ्मुखः सततं विप्रः सन्ध्योपासनामाचरेत् ॥"

• जो सन्ध्या है, वही सम्पूर्ण विश्व की सूक्ष्म सृष्टिकर्त्री है।
वह मायातीत, निष्कल, तत्त्वत्रय—सत्त्व, रज, तम—से उद्भूत पराशक्ति है।
• बुद्धिमान ब्राह्मण को चाहिए कि वह पूर्वाभिमुख होकर, सूर्यमण्डल में प्रतिष्ठित सावित्री का ध्यान करते हुए नित्य विधिपूर्वक सन्ध्योपासना करे।

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"सन्ध्याहीनोऽशुचिर्नित्यमनर्हः सर्वकर्मसु ।
यदन्यत् कुरुते किञ्चिन्न तस्य फलमाप्नुयात् ॥
अनन्यचेतसः शान्ता ब्राह्मणा वेदपारगाः ।
उपास्य विधिवत्सन्ध्यां प्राप्ताः पूर्वं परां गतिम् ॥"

• जो द्विज सन्ध्या से रहित होता है, वह नित्य अपवित्र एवं समस्त कर्मों के लिए अयोग्य होता है।
• वह चाहे जो भी कार्य करे, किन्तु उसे उसका कोई फल नहीं प्राप्त होता।
• पूर्वकाल के वेदपारंगत, शान्तचित्त ब्राह्मणों ने अनन्यभाव से विधिपूर्वक सन्ध्या की उपासना कर, परमगति को प्राप्त किया।

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"योऽन्यत्र कुरुते यत्नं धर्मकार्ये द्विजोत्तमः ।
विहाय सन्ध्याप्रणतिं स याति नरकायुतम् ॥
तस्मात्सर्वप्रयत्नेन सन्ध्योपासनमाचरेत् ।
उपासितो भवेत् तेन देवो योगतनुः परः ॥"

• जो द्विजोत्तम सन्ध्या को त्यागकर अन्य धर्मकृत्य का यत्न करता है, वह सहस्रों नरकों को प्राप्त होता है।
• अतः सम्पूर्ण प्रयत्नों सहित नित्य सन्ध्योपासना करनी चाहिए।
• ऐसी उपासना से परब्रह्म परमात्मा—योगविग्रह—की उपासना स्वतः ही सम्पन्न हो जाती है।

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● सन्ध्या — केवल एक कर्म नहीं, अपितु ब्रह्म की उपासना का राजमार्ग है।
● यह ज्ञान, ध्यान, और तेज का संगम है — जो इसे त्यागे, वह वैदिकत्व से च्युत हो जाता है।
● जो इसे धारण करे, वह स्वयं वेदरूप हो जाता है।

ℹ️ सन्ध्या — द्विजत्व का प्राण है।
ℹ️ सन्ध्या — परमगति की साधना है।

✦ "सन्ध्या ही आत्म-शुद्धि का आरम्भ है, और ब्रह्मबोध का प्रथम सोपान।" ✦

¤ धर्मप्रेमियों का वैदिक अभियान ¤

💥💐।। श्री हनुमत्कवचम् ।।💥💐👉अस्य श्री हनुमत् कवचस्तोत्रमहामंत्रस्य वसिष्ठ ऋषिः, अनुष्टुप् छंदः, श्री हनुमान् देवता, मारुत...
15/08/2026

💥💐।। श्री हनुमत्कवचम् ।।💥💐

👉अस्य श्री हनुमत् कवचस्तोत्रमहामंत्रस्य वसिष्ठ ऋषिः, अनुष्टुप् छंदः, श्री हनुमान् देवता, मारुतात्मज इति बीजं, अंजनासूनुरिति शक्तिः, वायुपुत्र इति कीलकं, हनुमत्प्रसाद सिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः।।

उल्लंघ्य सिंधोस्सलिलं सलीलं
यश्शोकवह्निं जनकात्मजायाः।।
आदाय तेनैव ददाह लंकां
नमामि तं प्रांजलिरांजनेयम्।।१।।

मनोजवं मारुततुल्यवेगं
जितेंद्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं
श्रीरामदूतं शिरसा नमामि।।२।।

उद्यदादित्यसंकाशं उदारभुजविक्रमम्।
कंदर्पकोटिलावण्यं सर्वविद्याविशारदम्।।३।।

श्रीरामहृदयानंदं भक्तकल्पमहीरुहम्।
अभयं वरदं दोर्भ्यां कलये मारुतात्मजम्।।४।।

श्रीराम राम रामेति रमे रामे मनोरमे।
सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने।।५।।

पादौ वायुसुतः पातु रामदूतस्तदंगुलीः।
गुल्फौ हरीश्वरः पातु जंघे चार्णवलंघनः।।६।।

जानुनी मारुतिः पातु ऊरू पात्वसुरांतकः।
गुह्यं वज्रतनुः पातु जघनं तु जगद्धितः।।७।।

आंजनेयः कटिं पातु नाभिं सौमित्रिजीवनः।
उदरं पातु हृद्गेही हृदयं च महाबलः।।८।।

वक्षो वालायुधः पातु स्तनौ चाऽमितविक्रमः।
पार्श्वौ जितेंद्रियः पातु बाहू सुग्रीवमंत्रकृत्।।९।।

करावक्ष जयी पातु हनुमांश्च तदंगुलीः।
पृष्ठं भविष्यद्र्बह्मा च स्कंधौ मति मतां वरः।।१०।।

कंठं पातु कपिश्रेष्ठो मुखं रावणदर्पहा।
वक्त्रं च वक्तृप्रवणो नेत्रे देवगणस्तुतः।।११।।

ब्रह्मास्त्रसन्मानकरो भ्रुवौ मे पातु सर्वदा।
कामरूपः कपोले मे फालं वज्रनखोऽवतु।।१२।।

शिरो मे पातु सततं जानकीशोकनाशनः।
श्रीरामभक्तप्रवरः पातु सर्वकलेबरम्।।१३।।

मामह्नि पातु सर्वज्ञः पातु रात्रौ महायशाः।
विवस्वदंतेवासी च संध्ययोः पातु सर्वदा।।१४।।

ब्रह्मादिदेवतादत्तवरः पातु निरंतरम्।
य इदं कवचं नित्यं पठेच्च शृणुयान्नरः।।१५।।

दीर्घमायुरवाप्नोति बलं दृष्टिं च विंदति।
पादाक्रांता भविष्यंति पठतस्तस्य शत्रवः।
स्थिरां सुकीर्तिमारोग्यं लभते शाश्वतं सुखम्।।१६।।

इति निगदितवाक्यवृत्त तुभ्यं
सकलमपि स्वयमांजनेय वृत्तम्।
अपि निजजनरक्षणैकदीक्षो
वशग तदीय महामनुप्रभावः।।१७।।

।। इति श्री हनुमत् कवचं समाप्तम् ।।

🌺 मूल (गण्डान्त) नक्षत्र शांति प्रयोग 🌺जन्म के समय यदि जातक का नक्षत्र मूल, ज्येष्ठा, आश्लेषा, रेवती या अश्विनी आदि गण्ड...
15/08/2026

🌺 मूल (गण्डान्त) नक्षत्र शांति प्रयोग 🌺

जन्म के समय यदि जातक का नक्षत्र मूल, ज्येष्ठा, आश्लेषा, रेवती या अश्विनी आदि गण्डान्त/मूल संज्ञक नक्षत्रों से संबंधित हो, तो शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार नक्षत्र शांति विधान कराया जाता है।

🕉️ उचित विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रों द्वारा मूल शांति, गण्डान्त शांति एवं ग्रह-नक्षत्र संबंधी शांति कर्म संपन्न कराए जाते हैं।

📿 जन्म नक्षत्र के प्रभाव को समझें और शास्त्रोक्त उपाय जानें।

पं. माधव पाराशर
📞 संपर्क सूत्र: 9031555179
🔱 ज्योतिष • कर्मकांड • पूजा-पाठ • ग्रह दोष निवारण

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💐।। श्री गणेश जी के दिव्य द्वादश नाम ।।💐विघ्नहर्ता, सिद्धिदाता और मंगलमूर्ति भगवान श्री गणेश के द्वादश नामों का स्मरण जी...
14/08/2026

💐।। श्री गणेश जी के दिव्य द्वादश नाम ।।💐

विघ्नहर्ता, सिद्धिदाता और मंगलमूर्ति भगवान श्री गणेश के द्वादश नामों का स्मरण जीवन में सुख, समृद्धि, बुद्धि और सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।

सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णकः।
लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायकः।।

धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः।
द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छृणुयादपि।।

श्रीगणेश के द्वादश नाम स्तोत्र में वर्णित बारह नाम इस प्रकार हैं-

सुमुख- सुंदर मुख वाले,
एकदन्त- एक दाँत वाले,
कपिल- ताम्रवर्ण या कपिल वर्ण वाले,
गजकर्णक- हाथी के समान बड़े कान वाले,
लम्बोदर- विशाल उदर वाले,
विकट- अद्भुत एवं विशाल स्वरूप वाले,
विघ्ननाश- विघ्नों का नाश करने वाले,
विनायक- श्रेष्ठ नेतृत्वकर्ता एवं मार्गदर्शक,
धूम्रकेतु- धूम्रवर्ण ध्वजा धारण करने वाले,
गणाध्यक्ष- समस्त गणों के अधिपति,
भालचन्द्र- मस्तक पर चन्द्र धारण करने वाले,
गजानन- गज (हाथी) के समान मुख वाले।

फलश्रुति-
शास्त्रों के अनुसार जो श्रद्धापूर्वक इन बारह नामों का नित्य स्मरण करता है, उसके कार्यों में आने वाले विघ्न दूर होते हैं तथा उसे बुद्धि, सिद्धि, धन, यश और शुभ फल की प्राप्ति होती है।

Address

शांतिनगर चौक डुमरा सीतामढ़ी बिहार
Sitamarhi
843301

Opening Hours

Monday 9am - 6am
Tuesday 9am - 6am
Wednesday 9am - 6am
Thursday 9am - 6am
Friday 9am - 6am
Saturday 9am - 6am

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