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05/02/2026

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🌹ज्योतिष एवं वास्तु आचार्य पारस जानी 🌹
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🔱जय श्री अंबे🔱

27/11/2025

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24/11/2025

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आज हम आपको बताने वाले है कि शनि की दशा में शुक्र और शुक्र की दशा में शनि हो तो जातक की आर्थिक स्थिति कैसी होगी? धनु या म...
12/11/2025

आज हम आपको बताने वाले है कि शनि की दशा में शुक्र और शुक्र की दशा में शनि हो तो जातक की आर्थिक स्थिति कैसी होगी?

धनु या मीन लग्न हो तो शुक्र की महादशा में शनि का होना या शनि की महादशा में शुक्र का होना अत्यंत शुभ होता है।

*नोट -* यदि धनु लग्न हो, तो धन की दृष्टि से शुक्र शुभ अवस्था में होने पर शुभ फल देता है और शनि उपचय (तृतीय) भाव का स्वामी होने से शुभ फल देता है। यदि मीन लग्न हो, तो शुभ शनि शुभ होगा और शुक्र तृतीयेश (उपचय भाव का स्वामी) होने से शुभ फल देता है। संभवतः यही कारण है कि शुक्र और शनि शुभ होते हैं, हालाँकि पराशर ने तृतीयेश को पापी माना है।

यदि अष्टम भाव का स्वामी छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो, तो छठे, आठवें या बारहवें भाव के स्वामी की धुक्तिका घातक हो सकती है।

*नोट -* जब अष्टमेश छठे भाव में हो, तो षष्ठेश स्वयं और अष्टमेश दोनों को अशुभ फल देता है और मारक हो जाता है। जब अष्टमेश दूसरे भाव में हो, तो द्वादशेश स्वयं और अष्टम भाव को अशुभ फल देगा और मारक हो जाएगा। इस दृष्टि से अष्टमेश का अष्टम भाव में, अर्थात् अपने ही भाव में, विशेष शुभ नहीं होता।

यदि दशमेश और तृतीयेश में परस्पर युति आदि हो, दृष्टि योग हो, तो राज्येश, दशमेश की दशा में शुभ फल प्राप्त होंगे और तृतीयेश की दशा में और भी अधिक शुभ फल प्राप्त होंगे।

*नोट -* दशम और तृतीय भाव दोनों ही लग्न भाव हैं। तृतीय भाव कमतर और दशम भाव अधिक फल देने वाला भाव है। यदि भुक्तिनाथ का प्रभाव मुख्य माना जाए तो दशम भाव के स्वामी की दशा में शुभ फल प्राप्त होंगे और तृतीय भाव के स्वामी की दशा में और भी अधिक शुभ फल प्राप्त होंगे।

*नोट -* दशम और तृतीय भाव दोनों ही लग्न भाव हैं। तृतीय भाव कमतर और दशम भाव अधिक फल देने वाला भाव है। यदि भुक्तिनाथ का प्रभाव मुख्य माना जाए तो दशम भाव की महादशा में तृतीयेश का प्रभाव कम होगा लेकिन तृतीय भाव के स्वामी की दशा में भुक्तिनाथ का प्रभाव बहुत अच्छा होगा। लेखक का यही आशय प्रतीत होता है।

यदि पंचम, सप्तम और नवम भावों के स्वामी अपनी-अपनी कुंडली में पंचम, सप्तम और नवम भावों में स्थित हों, तो गंगास्नान एक की दशा और दूसरे की भुक्ति में होगा। *नोट -* जैसा कि श्लोक संख्या 5 के नोट में बताया गया है, पंचम, सप्तम और नवम भाव धर्म और शुभ कर्मों के सूचक हैं। गंगास्नान को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए। अतः इनमें से कोई भी दशा या भुक्ति गंगास्नान के लिए उपयोगी होगी।

उपरोक्त ग्रह योग की पुष्टि करते समय संबंधित ग्रहों की दृष्टि, गोचर, स्थिति और कई अन्य कारकों पर विचार करना चाहिए।

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15/10/2025

Mahadev Mahadev Mahadev

05/10/2025

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Paras jani 🌹

☀️ज्योतिष शास्त्र में मेरा अनुभव कहता है कुछ खास बातें ☀️1 यदि शनि 5 भाव में केतु 7 भाव में हो तो विवाह नहीं चलता है ।2 ...
09/07/2025

☀️ज्योतिष शास्त्र में मेरा अनुभव कहता है कुछ खास बातें ☀️
1 यदि शनि 5 भाव में केतु 7 भाव में हो तो विवाह नहीं चलता है ।
2 शुक्र बुध मीन या कन्या राशि में हो तो कई प्रेम होगा कई विवाह होगा।
3 नीच का केतु 3 भाव में हो तो छोटा भाई मानसिक रूप में पीड़ित होगा प्रेत आदि से गले की समस्या होगी
4 कन्या राशि का शुक्र 12 हाउस में बहुत अच्छा फल देता है।
5 केतु का प्रभाव चन्द्रमा पर हो ओर चंद उच्च का हो तो जातक मानसिक रूप से बीमार होता है परन्तु बुध भी मजबूत नहीं होना चाहिए।
6 12 भाव का स्वामी 12 भाव में हो तो जातक कंजूस व्यक्ति होता है।
7 तुला राशि का सूर्य मंगल ग्रह के प्रभाव में हो तो जातक सरकारी नोकरी करता है। जब ये 12 ,8,6,3,1 भाव में हो।
8- कर्क राशि में केतु मानसिक तनाव या रोग देता है।
9- 8 हाउस में केतु पर मंगल या शनि का प्रभाव हो तो आपरेशन करवाता है।
10- 4 हाउस में सूर्य राहु की युति हो शनि का भी प्रभाव हो तो दिल की धड़कन कम हो जाती हैं मंगल हो तो दिल की धड़कन तेज हो जाती हैं केतु हो तो आपरेशन करना होगा।

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