समर्थ बालक "गर्भ संस्कार केंद्र "

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समर्थ बालक "गर्भ संस्कार केंद्र " abcd

१.हमारे यहाँ गर्भाधान से पहले ,गर्भाधान के अंतर्गत एव गर्भधान के पश्चात् आवश्यक परिचर्चा होता है
२.आपकी आने वाली संतान स्वस्थ , सुन्दर , शारीरिक , मानसिक , बौद्धिक रूप से सक्षम हो एव आपकी संतान में तेज़ , वीरता , ज्ञान , बुद्धि , सद्गुण , प्रतिभा , उदारता , एव चरीत्र जैसे गुण हो एसा आप चाहते है ? तो आपको यहाँ से मार्गदर्शन मिल सकेगा

 #भविष्य_को_प्रभावित_करते_हैं_उनका_जन्म_माह----------------------कार्तिक, मार्गशीर्ष और पौष माह भारतीय समाज में अत्यंत प...
25/03/2017

#भविष्य_को_प्रभावित_करते_हैं_उनका_जन्म_माह
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कार्तिक, मार्गशीर्ष और पौष माह भारतीय समाज में अत्यंत पवित्र माह माने जाते हैं। मार्गशीर्ष माह का अर्थ ही है 'शीर्ष पर पहुंचने का मार्ग।' इस माह में जन्मे लोगों का नजरिया भौतिक सफलता को लेकर बेहद गहरा होता है। इनके भीतर भौतिक सुख-साधनों और समृद्धि से लेकर एक विशिष्ट तरह की समझ होती है। जो गर्भ फरवरी, मार्च व अप्रैल माह में यानी माघ, फाल्गुन और चैत्र माह में धारण किए जाते हैं वह बच्चे विशाल व्यक्तित्व के मालिक और जीवन में सफल होते हैं। ऐसी नहीं कि इन इन काल में जन्मे व्यक्तियों के जीवन में संघर्ष नहीं होता, पर इन व्यक्तियों की संघर्ष क्षमता में आश्चर्यजनक वृद्धि होती है। इन माहों में जन्मे लोग संघर्ष भी एक स्तर के ऊपर ही रहकर करते हैं। यदि इनके कार्य और आचर्ण शुद्ध हों तो ये निरंतर उन्नति करते रहते हैं।

सिर्फ इन महीनों में गर्भ धारण करना या जन्म लेना ही पर्याप्त नहीं है। सफलता तो संस्कार, विचार और कर्म पर निर्भर करती है, पर उपरोक्ट महीनों में जन्म लेने से इनकी क्षमता में अवश्य वृद्धि होती है और क्षमता ही सफलता की गारंटी है।

 #गर्भ_संस्कार #गर्भ_संस्कारगर्भ संस्कार क्या है?माता-पिता का उत्कृष्ट बीज व दृढ़ संकल्प ही उत्कृष्ट संतति का कारण होता ...
09/03/2017

#गर्भ_संस्कार

#गर्भ_संस्कार

गर्भ संस्कार क्या है?
माता-पिता का उत्कृष्ट बीज व दृढ़ संकल्प ही उत्कृष्ट संतति का कारण होता है। माता-पिता के छोटे से बीज के संयोग से गर्भधारण व गर्भ का अणुरूप बीज मानव शरीर में रूपांतरित होता है। इस वक्त सिर्फ शारीरिक ही नहीं, आत्मा व मनका परिणाम बीज रूप पर होता है। चैतन्य शक्ति का छोटा-सा आविष्कार ही गर्भ है।

माता-पिता का एक-एक क्षण व बच्चे का एक-एक कण एक-दूसरे से जुड़ा है। माता-पिता का खाना-पीना, विचारधारा, मानसिक परिस्थिति इन सभी का बहुत गहरा परिणाम गर्भस्थ शिशु पर होता है। गर्भस्थ शिशु को संस्कारित व शिक्षित करने का प्रमाण हमें धर्म ग्रंथों में मिलता ही है। कई वैज्ञानिक भी इस बात से सहमत हैं व उन्होंने इसे सिद्ध किया है। हमारे धर्म ग्रंथों में प्रचलित सभी मंत्रों में यही कंपन रहता है- ऊँ, श्रीं,क्लीं, ह्रीम इत्यादि। गर्भस्थ शिशु को इन बीज मंत्रों को सिखाने की प्रथा हमारे धर्मग्रंथों में है।
चौथे महीने में गर्भस्थ शिशु के कर्णेंद्रिय का विकास हो जाता है और अगले महीनों में उसकी बुद्धि व मस्तिष्क का विकास होने लगता है। अतः,माता-पिता की हर गतिविधि,बौद्धिक विचारधारा का श्रवण कर गर्भस्थ शिशु अपने आपको प्रशिक्षित करता है। चैतन्य शक्ति का छोटा सा आविष्कार यानी,गर्भस्थ शिशु अपनी माता को गर्भस्थ चैतन्य शक्ति की 9 महीने पूजा करना है। एक दिव्य आनंदमय वातावरण का अपने आसपास विचरण करना है। हृदय प्रेम से लबालब भरा रखना है जिससे गर्भस्थ शिशु भी प्रेम से अभिसिप्त हो जाए और उसके हृदय में प्रेम का सागर उमड़ पड़े। आम का पौधा लगाने पर आम का पौधा ही बनेगा।
उत्कृष्ट देखभाल,खाद-पानी देने पर उत्कृष्ट किस्म का फल उत्पन्न करना हमारे वश में है। तेजस्वी संतान की कामना करने वाले दंपति को गर्भ संस्कार व धर्मग्रंथों की विधियों का पालन ही उनके मन के संकल्प को पूर्ण कर सकता है।

गर्भ संस्कार की विधि गर्भधारण के पूर्व ही, गर्भ संस्कार की शुरूआत हो जाती है। गर्भिणी की दैनंदिन दिनचर्या, मासानुसार आहार, प्राणायाम, ध्यान, गर्भस्थ शिशु की देखभाल आदि का वर्णन गर्भ संस्कार में किया गया है। गर्भिणी माता को प्रथम तीन महीने में बच्चे का शरीर सुडौल व निरोगी हो,इसके लिए प्रयत्न करना चाहिए। तीसरे से छठे महीने में बच्चे की उत्कृष्ट मानसिकता के लिए प्रयत्न करना चाहिए। छठे से नौंवे महीने में उत्कृष्ट बुद्धिमत्ता के लिए प्रयत्न करना चाहिए।

 #अपना_ख्याल_रखें: हालांकि यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने बच्चे की देखभाल करें, पर इसका मतलब यह नही की आप खुद की उपेक्षा कर...
04/02/2017

#अपना_ख्याल_रखें:
हालांकि यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने बच्चे की देखभाल करें, पर इसका मतलब यह नही की आप खुद की उपेक्षा करें। सुनिश्चित करें की आप नियमित रूप से स्नान लें, स्वस्थ आहार खाएं, और जितनी अधिक हो सके उतनी नींद लें। आप और आपके पति एक ऐसी प्रणाली बना सकते हैं जिसमे आप दोनों को अपनी देखभाल करने के लिए कुछ समय मिले। [८]
हालांकि यह वो समय नहीं जब आप एक नया शौक या एक संस्मरण लेखन शुरू करें, आप यह सुनिश्चित करें कि आप थोड़ा व्यायाम करें, अपने दोस्तों को कभी कभी मिलने जाएँ, और जब भी हो सके थोड़ा "खुद के लिए समय " निकालें।
यह न सोचें की आपके बच्चे के पैदा होने के बाद आप खुद के लिए समय चाहने से मतलबी बन रही हैं। यदि आप अपना ख्याल रखने के लिए थोड़ा समय निकालेंगी, तो आप अपने बच्चे का भी बेहतर ध्यान रख पाएंगी।
खुद पर ज़्यादा बोझ न डालें। यह न तो पूरे घर को साफ़ करने का समय है और न ही 10 पौंड कम् करने का।

 #अपने_बच्चे_को_हर_दिन "  #टमी_टाइम" दें: क्यूंकि आपका बच्चा ज़्यादा समय अपनी पीठ के भार ही लेटता है ,इसलिए यह आवश्यक है...
02/02/2017

#अपने_बच्चे_को_हर_दिन " #टमी_टाइम" दें:
क्यूंकि आपका बच्चा ज़्यादा समय अपनी पीठ के भार ही लेटता है ,इसलिए यह आवश्यक है की आप अपने बच्चे को उसके पेट के भार भी लेटने का समय दें, ताकि वह मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से विकसित हो और उसके हाथ, सिर, और गर्दन मजबूत बनें। कुछ डॉक्टरों का कहना है की बच्चों को एक दिन में 15-20 मिनट पेट के सहारे लेटना चाहिए, जबकि कुछ यह कहते हैं की आपको अपने बच्चे को दिन के अलग अलग समय 5 मिनट तक पेट के सहारे लिटाना चाहिए।
बच्चे के जन्म के एक सप्ताह बाद आप टमी टाइम शुरू कर सकते हैं,बस एक बार बच्चे की गर्भनाल निकल जाए।
टमी टाइम मजेदार बनाने के लिए, आप अपने बच्चे के स्तर पर आएं। आँख से संपर्क बनाएं, अपने बच्चे को गुदगुदाए और उसके साथ खेलें।
टमी टाइम कठिन काम है, और कुछ बच्चे इसके लिए प्रतिरोधी हो जाते हैं। अगर ऐसा होता है तो -- आश्चर्य न करें -- न ही उसे करना छोड़ें ।

 #अपने_बच्चे_को_कार_की_सवारी_के_लिए_तैयार_करें: आपको अपने बच्चे के जन्म से पहले उसकी कार की सवारी के लिए तैयार रहने की आ...
31/01/2017

#अपने_बच्चे_को_कार_की_सवारी_के_लिए_तैयार_करें: आपको अपने बच्चे के जन्म से पहले उसकी कार की सवारी के लिए तैयार रहने की आवश्यकता होगी, क्यूंकि आपको अपने बच्चे को हॉस्पिटल से घर ले जाने का एक रास्ता चाहिए होगा। आपको एक कार की सीट लाने की आवश्यकता होगी जो नवजात शिशुओं के लिए उपयुक्त हो और यह सुनिश्चित कर लें की वह आपके बच्चे के लिए सुदृढ़ और सुरक्षित है। हालांकि आपको अपने नवजात शिशु के साथ कार में अधिक समय नही बिताना होगा , लेकिन कुछ माताओं का यह मानना है की बच्चे को कार की सवारी पर ले जाने से उसको सुलाने में मदद मिलती है।
आपको अपने बच्चे के लिए एक शिशु सीट भी लेनी चाहिए। ये सीट आपके बच्चे को बैठने में मदद करती हैं ,पर उसे कार में सुरक्षित रखने में 'नहीं'। इस प्रकार की सीट में, बेस की सतह फिसलने वाली नही होनी चाहिए और वह सीट की तुलना में चौड़ी होनी चाहिए, और उस में एक सुरक्षित ताला तंत्र होना चाहिए, और साथ में उसका कपडा धुलने वाला होना चाहिए। कभी भी अपने बच्चे को सीट पर किसी ऊंची सतह पर न बिठाएँ जहाँ से उसे गिरने का खतरा हो।
बच्चे की सुरक्षा सीटों के लिए, यह सुनिश्चित करें की वह सीट मोटर वाहन सुरक्षा मानक 213 से मेल खाए और वास्तव में आपका बच्चा उसमे फिट बैठ सके। शिशु और छोटे बच्चे जब तक २ साल के नही हो जाते तब तक उन्हें रियल-फेसिंग सीट में बैठना चाहिए।

 #अपने_नवजात_शिशु_को_नियमित_रूप_से_डॉक्टर_के_पास_ले_जाएँ: आपके बच्चे को अपने पहले वर्ष के दौरान अनुसूचित चेक अप और शॉट क...
30/01/2017

#अपने_नवजात_शिशु_को_नियमित_रूप_से_डॉक्टर_के_पास_ले_जाएँ:
आपके बच्चे को अपने पहले वर्ष के दौरान अनुसूचित चेक अप और शॉट के लिए, डॉक्टर से लगातार भेंट करनी पड़ेगी। बहुत से नवजात शिशु की डॉक्टर से पहली मुलकात आपके और उसके हॉस्पीटल से छुट्टी होने के सिर्फ़ 1-3 दिन बाद हो सकती है। उसके बाद, चिकित्सक का प्रत्येक कार्यक्रम थोड़ा भिन्न होगा,लेकिन आपको आम तौर पर अपने बच्चे को जन्म के बाद एक महीने से 2 सप्ताह कम् पर, दूसरे महीने के बाद,और फिर हर दूसरे महीने में डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए। [६] It's important to schedule regular visits with your baby to make sure that your baby is growing normally and receiving the necessary care.[७]
यदि आप कुछ असामान्य चीज़ देखें, तो यह ज़रूरी है की आप तुरंत डॉक्टर से मिलने जाएँ; चाहे आपको ये यकीन न हो की जो हो रहा है वो असामान्य है, फिर भी आपको हमेशा डॉक्टर के कार्यालय में फ़ोन करके जांच करनी चाहिए।
जो लक्षण आपको देखने चाहिए उनमे शामिल हैं:
#निर्जलीकरण: प्रति दिन तीन से कम गीले डायपर, अत्यधिक तंद्रा, शुष्क मुँह
्याग_की_समस्या: पहले दो दिनों के दौरान कोई सञ्चालन नहीं, मल में सफेद बलगम,मल में फ्लेक्स या लाल रंग की धारियाँ, ज़्यादा उच्च या कम तापमान।
#श्वसन_समस्याएँ: घुरघुराना,नाक का फूलना,सांस लेने में तेज़ी या शोर,सीने में दावा-वापसी
#गर्भनाल_स्टंप_की_समस्याएं: स्टंप में मवाद, गंध, या उससे खून निकलना।
#पीलिया: छाती, शरीर, या आँखों में पीला रंग दिखना।
#लंबे_समय_तक_रोना: तीस मिनट से अधिक रोना।
#अन्य_बीमारियां: लगातार खाँसी, दस्त,पीलापन, दो से अधिक लगातार फीडिंग्स के लिए सशक्त उल्टी, प्रति दिन 6 की तुलना में कम फीडिंग्स।

 #नवजात_शिशु_को_चुप_कराना_सीखें: अगर आपका बच्चा परेशान है तो, तुरंत ही उसका सही कारण ढूंढना आसान नही होता, हालांकि कुछ न...
29/01/2017

#नवजात_शिशु_को_चुप_कराना_सीखें:

अगर आपका बच्चा परेशान है तो, तुरंत ही उसका सही कारण ढूंढना आसान नही होता, हालांकि कुछ नुस्के हैं जिन्हे आप आज़मा सकते हैं। गीले डायपर के लिए जाँच करें। उन्हें खिलाने की कोशिश करें। अगर वह काम नहीं करता तो, यदि ठण्ड है तो कपडे की एक और परत डालें और अगर गर्मी है तो एक परत हटा दें। कभी कभी, आपका बचा बस यह चाहता है की आप उसे उठाएं या फिर हो सकता है की वो बहुत ज्यादा उत्तेजना का अनुभव कर रहा हो। जैसे जैसे आप अपने नवजात शिशु को जानने लगेंगे वैसे वैसे आपको खुद ही पता लग जाया करेगा की उसे क्या परेशानी है।[५]
आपके बच्चे को सिर्फ डकार लेने की ज़रूरत हो सकती है।
उन्हें धीरे से हिलाने और गान गाने या फिर लोरी गाने से भी मदद मिल सकती है। यदि वह काम न करे तो उन्हें एक पेसिफायर दीजिए। वे थके हुए भी हो सकते हैं इसलिए उन्हें नीचे लेटा दें। कभी कभी, बच्चों सिर्फ रोते हैं और आपको उन्हें वैसा ही रहने देना पड़ता है जब तक वे सो न जाएँ।

 #अपने_नवजात_शिशु_के_गर्भनाल_स्टंप_की_देखभाल_करें: आपके बच्चे की गर्भनाल स्टंप उसके जीवन के पहले दो हफ्तों के भीतर गिर ज...
28/01/2017

#अपने_नवजात_शिशु_के_गर्भनाल_स्टंप_की_देखभाल_करें: आपके बच्चे की गर्भनाल स्टंप उसके जीवन के पहले दो हफ्तों के भीतर गिर जानी चाहिए । उसका रंग सूखने पर पीले-हरे से भूरा और काला होगा और वह खुद से ही गिर जायेगी। उसके गिरने से पहले उसकी देखभाल करना महत्वपूर्ण है ताकि संक्रमण से बचा जा सके। यहाँ देखिये आपको क्या करना चाहिए:[४]
इसे साफ रखें। इसे सादे पानी से साफ करें और एक स्वच्छ और शोषक कपड़े से सुखाएं। सुनिश्चित करें की उसे छूने से पहले आप अपने हाथ धो लें। जब तक वह गिर न जाए तब तक अपने बच्चे को सपंज से नहलाएं।
इसे सूखा रखें। उसे हवा में रखें ताकि उसका बेस सूख जाए, और अपने बच्चे के डायपर का अगला हिस्सा नीचे फोल्ड कर दें ताकि वह किसी चीज़ से कवर न हो।
उसे खुद से खींचने की इच्छा से बचें। स्टंप को अपना समय लेकर गिरने दें।
संक्रमण के लक्षण पर नज़र रखें। स्टंप के नज़दीक थोड़ा सूखा खून या पापड़ी दिखना स्वाभाविक है; लेकिन यदि स्टंप एक बदबूदार मुक्ति या पीले मवाद पैदा करता है , उससे खून निकालता रहे या वह सूज जाए और लाल हो जाए तो आपको तुरंत ही उसे डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

अपने बच्चे को हर दिन "टमी टाइम" दें: क्यूंकि आपका बच्चा ज़्यादा समय अपनी पीठ के भार ही लेटता है ,इसलिए यह आवश्यक है की आ...
27/01/2017

अपने बच्चे को हर दिन "टमी टाइम" दें: क्यूंकि आपका बच्चा ज़्यादा समय अपनी पीठ के भार ही लेटता है ,इसलिए यह आवश्यक है की आप अपने बच्चे को उसके पेट के भार भी लेटने का समय दें, ताकि वह मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से विकसित हो और उसके हाथ, सिर, और गर्दन मजबूत बनें। कुछ डॉक्टरों का कहना है की बच्चों को एक दिन में 15-20 मिनट पेट के सहारे लेटना चाहिए, जबकि कुछ यह कहते हैं की आपको अपने बच्चे को दिन के अलग अलग समय 5 मिनट तक पेट के सहारे लिटाना चाहिए।
बच्चे के जन्म के एक सप्ताह बाद आप टमी टाइम शुरू कर सकते हैं,बस एक बार बच्चे की गर्भनाल निकल जाए।
टमी टाइम मजेदार बनाने के लिए, आप अपने बच्चे के स्तर पर आएं। आँख से संपर्क बनाएं, अपने बच्चे को गुदगुदाए और उसके साथ खेलें।
टमी टाइम कठिन काम है, और कुछ बच्चे इसके लिए प्रतिरोधी हो जाते हैं। अगर ऐसा होता है तो -- आश्चर्य न करें -- न ही उसे करना छोड़ें ।

 #अपने_नवजात_शिशु_को_पकड़ें: आप यह सुनिश्चित करें की जब भी आप अपने बच्चे को पकड़ें तो उसके सिर और गर्दन को जितना हो सके ...
24/01/2017

#अपने_नवजात_शिशु_को_पकड़ें:
आप यह सुनिश्चित करें की जब भी आप अपने बच्चे को पकड़ें तो उसके सिर और गर्दन को जितना हो सके उतना सहारा दें। आपको अपने बच्चे के सिर को इस तरह अपनी कोहनी के अंदर वाले भाग पर टिकाना चाहिए, ताकि उसका शरीर आपकी कलाई के ऊपर आराम करे। उसका बाहरी कूल्हा और टांगों का ऊपरी हिस्सा इस तरह आपके हाथ पर आराम करे, ताकि आपके हाथ का अंदर वाला हिस्सा उसकी छाती और पेट पर आये। बच्चे को आराम से पकड़ें और अपना सारा ध्यान उसे दें।[३]
आप अपने बच्चे के पेट को अपनी छाती के ऊपर वाले हिस्से पर रख कर भी पकड़ सकते हैं, और उसी तरफ वाली बाजू से उसका शरीर पकड़ें , और दूसरी बाजू से पीछे की तरफ से बच्चे के सिर को सहारा दें।
अगर आपके बच्चे के छोटे भाई बहन या कसिनस है या वह उन लोगों के आसपास है जो बच्चों का ख़याल रखने से अपरिचित हैं,तो उन्हें ध्यान से बच्चे को पकड़ने के बारे में हिदायत दें और यह सुनिश्चित करें की उनके पास कोई जानकार व्यक्ति बैठा हो ताकी बच्चा सुरक्षित रहे।

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1 Anand Park Socity, Althan Garden, Bharthana Road, Surat
Surat
395017

Telephone

9428541027

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