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07/06/2026

अष्टकवर्ग में 40 अंक.... आखिर इसका मतलब क्या होता है?

अष्टकवर्ग में जितने ज्यादा अंक होते हैं, उतना ही वह भाव और राशि मजबूत मानी जाती है। सामान्य रूप से 30+ अंक अच्छे और 33+ अंक बहुत शक्तिशाली माने जाते हैं।

इस कुंडली में 3रे भाव में 40 अंक हैं, जो पूरे अष्टकवर्ग में सबसे ज्यादा हैं। इसके अलावा 11वें भाव में 37 अंक और 4थे भाव में 35 अंक भी अच्छी स्थिति में हैं।

3रा भाव मेहनत, पराक्रम, कम्युनिकेशन, मार्केटिंग, सोशल मीडिया और अपने दम पर आगे बढ़ने की क्षमता को दर्शाता है। वहीं 11वां भाव लाभ और कमाई का भाव माना जाता है।

यहाँ एक दिलचस्प बात देखने को मिलती है। 3रे भाव के अंक 11वें भाव से भी ज्यादा हैं। इसका मतलब यह हो सकता है कि जातक को जीवन में सफलता तो मिले, लेकिन उसके लिए दूसरों की तुलना में ज्यादा मेहनत करनी पड़े। यानी मेहनत ज्यादा, लाभ थोड़ा कम या देर से मिलने वाला योग बन सकता है।

अब बात करते हैं 6ठे, 8वें और 12वें भाव की.

सामान्य जीवन के लिए इन भावों में बहुत ज्यादा अंक हमेशा अच्छे नहीं माने जाते। क्योंकि ये भाव ऋण, रोग, संघर्ष, बाधा, अचानक घटनाओं और खर्चों से जुड़े होते हैं।

उदाहरण के लिए, यदि 6वें भाव के अंक 2वें और 11वें भाव से कम हों, तो व्यक्ति के ऊपर आया कर्ज आसानी से उतर सकता है।

हालांकि यदि कोई व्यक्ति चिकित्सा, रिसर्च, ज्योतिष, सुरक्षा सेवा, जांच-पड़ताल, बीमा, साधना या विदेश से जुड़े क्षेत्रों में काम करता है, तो 6ठे, 8वें और 12वें भाव की मजबूती उसके लिए लाभदायक भी साबित हो सकती है।

सिर्फ अंक देखकर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। भाव के साथ उसके स्वामी ग्रह (भावेश) की स्थिति भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। जब भाव और भावेश दोनों मजबूत हों, तब परिणाम और बेहतर देखने को मिलते हैं।

आपकी कुंडली में सबसे ज्यादा अंक किस भाव में हैं? Comment में बताइए।

#अष्टकवर्ग #ज्योतिष #वैदिकज्योतिष #कुंडली

ज्योतिष मे देवगुरु बृहस्पति और शनिदेव का राशिपरिवर्तन करना महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह परिवर्तन प्रत्येक जीव के भाग्य म...
01/06/2026

ज्योतिष मे देवगुरु बृहस्पति और शनिदेव का राशिपरिवर्तन करना महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह परिवर्तन प्रत्येक जीव के भाग्य मे शुभाशुभ परिवर्तन लेकर आता है।
2 जून 2026 को 12 वर्ष उपरांत देवगुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क मे प्रविष्ट होंगे।
बृहस्पति 1 राशि मे लगभग 13 माह का समय व्यतीत करते है , और 12 राशियों मे बृहस्पति का यह भ्रमण 12 वर्ष का समय लेता है।
प्रभु श्री राम को 14 वर्ष का वनवास होकर फिर राज्य कि प्राप्ति होना , पांडवों को 12 वर्ष का अज्ञातवास होकर फिर राज्य कि प्राप्ति होना , यह संपूर्ण राशियों मे बृहस्पति का भ्रमण होकर भाग्य मे नया परिवर्तन दर्शाता है। यह परिवर्तन अपनी अपनी जन्मकुंडली के अनुसार शुभ और अशुभ दोनों प्रकार का हो सकता है।
राजस्थानी भाषा मे एक कहावत है कि 12 वर्ष मे "रेवडी" अर्थात कचरे के ढेर के भी दिन बदल जाते है, यह कहावत बृहस्पति के गोचर के आधार पर ही कही गयी है।

जिनकी जन्मपत्रिका मे बृहस्पति कर्क राशि मे है , उनके लिये बृहस्पति का एक चक्र पूर्ण होकर दूसरे 12 वर्ष का चक्र प्रारंभ होने वाला है। प्रत्येक व्यक्ति के मन मे जिज्ञासा रहती है कि मेरे लिये यह परिवर्तन कैसा होगा , इस जिज्ञासा कि शांती केवल मात्र अपनी अपनी जन्मपत्रिका से ही संभव हो सकती है। राशिफल आदि मे कोई सटीकता नहीं होती है, और ना ही किसी को राशिफल से कोई दिशा मिलती है।
हाॅं यदि आपका राशिफल आपकी ही जन्मपत्रिका से बताया जाये या लिखा जाये तो उसमे 100% सटीकता होती है।
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Astro Ajeet Rupa Modi
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19/05/2026

आगामी 2 जून 2026 को वृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क राशि में गोचर करेंगे, वृहस्पति की दृष्टि उनकी स्वयं की राशि मीन एवं शनि पर पड़ेगी।

वृहस्पति धन और धर्म के कारक माने जाते हैं, इसलिए धन, अर्थव्यवस्था और धर्म से संबंधित विषयों में एक बहुत बड़ा परिवर्तन और उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।

इस बात में तनिक भी संदेह नहीं कि विश्व की सरकारें बैंकिंग व्यवस्था, क्रिप्टोकरेंसी और सोने को लेकर अत्यंत कठोर निर्णय ले सकती हैं।

अभी तो एक देश की सरकार ने सोने को लेकर जनता से अपील किया है लेकिन इस विषय एवं आर्थिक को लेकर विश्व की सरकारें बेहद कड़े निर्णय लेने को मजबूर हो जाएगी, कोई अपील नहीं |

सभी प्रभाव जून/जुलाई 2026 से दिखने आरम्भ हो जाएंगे |

इसी प्रकार यह भी लगभग निश्चित है कि विश्वभर के लोगों को प्रबल कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

आज के समय में विश्व के किसी भी क्षेत्र से लगभग हर वस्तु मंगवाई जा सकती है, इसके बावजूद आने वाले समय में कई देशों को भीषण अनाज संकट का सामना करना पड़ सकता है।

साथ ही चिकित्सा संबंधी आपात स्थितियाँ भी उत्पन्न हो सकती हैं, इस विषय पर मैंने पहले भी एक पोस्ट लिखी थी।

विश्व की सरकारें लोगों से अन्न की बर्बादी रोकने की अपील भी कर सकती हैं।

आपको स्मरण होगा कि मैंने अपनी किसी पूर्व पोस्ट में लिखा था कि 2028/29 तक विश्व की स्थिति ऐसी हो सकती है कि लोग न तो अपने लिए ईश्वर से प्रार्थना करेंगे और न ही अपने शत्रुओं के लिए बद्दुआ, क्योंकि तब तक मानवता स्वयं को असहाय महसूस करने लगेगी और अकेली पड़ जाएगी |

उस समय तक बहुत कुछ सामान्य मनुष्य के नियंत्रण से बाहर जा चुका होगा या समाप्ति की ओर बढ़ चुका होगा, आप बस इतना समझ लें इस कलियुग में विश्व में जितना शांति का समय था सब लगभग बीत चुका है, अब परिस्थिति बद से बदतर होती चली जायेगी |

आनेवाले समय में धर्म भी शायद अधिक सहायता न कर पाए, क्योंकि पापी लोगों ने धर्म को संघर्ष और युद्ध का माध्यम बना दिया है।

पशु भी किसी न किसी रूप में प्राकृतिक धर्म का पालन करते होंगे, लेकिन संसार में ऐसे लोगों की कमी नहीं जो पशुओं से भी बदतर आचरण करते हैं — जो न केवल दूसरे धर्मों का सम्मान नहीं करते बल्कि अपने ही धर्म का अपमान करने से भी नहीं थकते।

किंतु संभवतः यही कलियुग का प्रभाव है; यदि ऐसे लोग न हों, तो इस कलियुग का प्रभाव दिखाई कैसे देगा?

मैं यह बातें किसी सामान्य ज्योतिषीय सिद्धांत के आधार पर नहीं लिख रहा हूँ, मैं यह “कालसूत्राभिषेकम” सिद्धांत के अनुसार लिख रहा हूँ, जिसके माध्यम से की गई अनेक भविष्यवाणियाँ पहले भी सटीक सिद्ध हो चुकी हैं।

यह भी तय है कि 2 जून 2026 के आस पास विश्व मे चल रहे युद्ध/तनाव को लेकर कुछ दिन शांति देखने को मिलेगी, लेकिन ये शांति एक बबल्स होगी जो जल्द फुट जाएगी, कई देशों की सरकारों के बबल्स भी फूटने वाले हैं |

डोनाल्ड ट्रंप को लेकर भविष्यवाणी पिछले कुछ वर्ष पहले ही कर चुका हूं, अब बहुत जल्द इसका भी परिणाम दिखेगा |

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Astro Ajeet Rupa Modi

18/05/2026
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