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आज की जीवन विद्या(18):कैसे सुने ?संवाद में निहित आवश्यक संदेश को पहचाने ,उसके पैकिंग मेटेरियल पर ध्यान न दे संवाद में दू...
18/09/2026

आज की जीवन विद्या(18):कैसे सुने ?

संवाद में निहित आवश्यक संदेश को पहचाने ,उसके पैकिंग मेटेरियल पर ध्यान न दे संवाद में दूसरे ने जो कहा उसकी need पहचान ले ,साथ में जो व्यर्थ में कहा उसे भूल जाएl वक्ता जो चाहता है ,उसे पकड़े, उसके भाव और शब्दों पर न जाए l जब हम आइसक्रीम खाते है तब तो रेपर चबा कर अपना मुंह खराब नहीं करते फिर संवाद में उसके शब्दों को,भावों को ,उसके व्यवहार को पकड़ कर चोट क्यों खाते है ?...

संवाद में निहित आवश्यक संदेश को पहचाने ,उसके पैकिंग मेटेरियल पर ध्यान न दे संवाद में दूसरे ने जो कहा उसकी need पहचान ल.....

आज की जीवन विद्या (17): जब दूसरा गुस्से में है तो क्या करें ?कल्पना कीजिए कि हम जब सड़क पर जा रहे हैं और कोई हमारे आगे क...
16/09/2026

आज की जीवन विद्या (17): जब दूसरा गुस्से में है तो क्या करें ?

कल्पना कीजिए कि हम जब सड़क पर जा रहे हैं और कोई हमारे आगे कार टकरा गई हो,भले तब हम नियमानुसार सही चल रहे हो तब भी ब्रेक लगा कर अपनी गाड़ी रोकते है ताकि हम उससे टकरा न जाए , स्वयं को रोक लेते है जिससे अपने हाथ पैर नहीं टूटे l संवाद के दौरान जब अगला आहत होकर परेशान है ,मानसिक दुर्घटना ग्रस्त है और क्रोध में हमको गाली देता है तब उस पर क्रोध करने से क्या होगा l तब अपने भाव को उससे बचाने की जरूरत है l क्या ऐसे में उस से गुस्सा कर उससे टकराने की जरूरत है ?...

कल्पना कीजिए कि हम जब सड़क पर जा रहे हैं और कोई हमारे आगे कार टकरा गई हो,भले तब हम नियमानुसार सही चल रहे हो तब भी ब्रे.....

आज कि जीवन विद्या (16): असली सम्मान क्या हैं ?युवा लोग जब पढ़ रहे होते है तो आईएएस बनना चाहते है ताकि लाल बत्ती वाली गाड...
31/08/2026

आज कि जीवन विद्या (16): असली सम्मान क्या हैं ?

युवा लोग जब पढ़ रहे होते है तो आईएएस बनना चाहते है ताकि लाल बत्ती वाली गाड़ी में घूम कर प्रभाव दिखा सके जिससे सम्मान मिले l आईएएस बनने पर इस तरह लाल बत्ती वाली गाड़ी सिर्फ सड़क पर नहीं दौड़ती है बल्कि लोगों के दिलों में दौड़ती हुई उन्हे घायल करती है l गाड़ी में घूमने वाला घाव देकर समझता है कि वह अपने घाव भर रहा है जबकि इससे घाव भरते नहीं है क्यूंकि असली सम्मान का पता ज्ञात नहीं है l घाव देना और घाव भरना दोनों का सम्मान से कोई लेना देना नहीं है l असली सम्मान सही मूल्यांकन , विश्वास और स्नेह से उपजता है l

युवा लोग जब पढ़ रहे होते है तो आईएएस बनना चाहते है ताकि लाल बत्ती वाली गाड़ी में घूम कर प्रभाव दिखा सके जिससे सम्मान...

30/08/2026

आज की जीवन विद्या (15): क्रोध क्या है ?

गुस्सा मन का वह तीव्र और उग्र भाव है जो असंतोष, अपमान, या इच्छाएं पूरी न होने पर उत्पन्न होता है। ए नागराज जी के शब्दों में "स्वयं की अक्षमता का प्रदर्शन ही क्रोध है।" क्रोध मेरी अयोग्यता / अक्षमता का प्रदर्शन है,अर्थात उक्त कार्य मैं शांति से सम्पन्न नहीं करा पा रहा हूँ l मैं अपने हिसाब से जब किसी को नहीं चला पाता हूँ तो उससे नाराज होकर आवेश में आकर अपना निर्णय उस पर थोपना क्रोध करना है l यह …...

24/08/2026

आज की जीवन विद्या(14): सुख और सुविधा में क्या अंतर है ?

जीवन विद्या के अनुसार, सुख और सुविधा के बीच का अंतर ही मानव जीवन की सबसे बड़ी समझ है। ये जीवन विद्या के आधार है l आज के समय में अधिकांश लोग ' साधनों से प्राप्त सुविधा' को ही 'सुख' मान लेते हैं, जिसके कारण वे सब सुविधा पाकर भी अतृप्त ही रहते हैं।चूंकि सुविधा से प्राप्त सुख स्थायी नहीं होता l…...

आज की जीवन विद्या (13): आज बुरी बात करने का फल चखा !पत्नी का बातों ही बातों में अपमान कर दिया lमकसद तो विद्या हेतु प्रेर...
22/08/2026

आज की जीवन विद्या (13): आज बुरी बात करने का फल चखा !

पत्नी का बातों ही बातों में अपमान कर दिया lमकसद तो विद्या हेतु प्रेरित करना था लेकिन वो तरीका गलत था l गलती तो संबंधों में कर दी ,अवमूल्यन व निर्मूल्यन कर उसका असम्मान किया l इस पर, वह बस नाराज हो गई कहने लगी, "मुझे मत बताओ जीवन विद्या ,स्वास्थ्य -सेतु वाले बड़े समझते है, उनके लिए लिखो l”...

पत्नी का बातों ही बातों में अपमान कर दिया lमकसद तो विद्या हेतु प्रेरित करना था लेकिन वो तरीका गलत था l गलती तो संबंधो....

आज की जीवन विद्या (12):दर्शन प्रणेता नागराज जी प्राय: आगन्तुकों से कहते थे कि अच्छी बात सुनाओ,इसके मायने क्या हैइस प्रका...
18/08/2026

आज की जीवन विद्या (12):दर्शन प्रणेता नागराज जी प्राय: आगन्तुकों से कहते थे कि अच्छी बात सुनाओ,इसके मायने क्या है

इस प्रकार बाबाजी हमें सकारात्मक भाव विचार में लाने हेतु अच्छी बातें करने के लिए प्रेरित करते थे ताकि व्यक्ति शुभ भाव में आ सके और उसकी मानसिकता में परिवर्तन हो। इससे वह बुराई, अशुभ भाव, और तनाव से बाहर आकर अपने दुख और नकारात्मकता को भूल सके। कुल मिलाकर, बाबाजी शुभ भाव विचार के लिए अच्छी बातों की महत्वपूर्णता पर बल देते थे ताकि आगंतुक की मन स्थिति शुभ हो जाए l

इस प्रकार बाबाजी हमें सकारात्मक भाव विचार में लाने हेतु अच्छी बातें करने के लिए प्रेरित करते थे ताकि व्यक्ति शुभ भ...

आज की जीवन विद्या (11):हर दिन मेरी खुशी कैसे बढ़े ?जीवन का असली लाभ : प्रतिदिन बढ़ती हुई खुशियाँ मेरी ज़िंदगी का असल लाभ...
14/08/2026

आज की जीवन विद्या (11):हर दिन मेरी खुशी कैसे बढ़े ?

जीवन का असली लाभ : प्रतिदिन बढ़ती हुई खुशियाँ मेरी ज़िंदगी का असल लाभ बढ़ती हुई कमाई नहीं, बल्कि दिन प्रतिदिन बढ़ती हुई खुशियाँ हैl गत वर्ष ,गत मास ,गए दिन की अपेक्षा आज अधिक खुश होना जीवन का असली लाभ है l बाकी सब खाने पीने की व्यवस्था हैl जीवन का असली लाभ आंतरिक शांति, आत्म-संतुष्टि...

जीवन का असली लाभ : प्रतिदिन बढ़ती हुई खुशियाँ मेरी ज़िंदगी का असल लाभ बढ़ती हुई कमाई नहीं, बल्कि दिन प्रतिदिन बढ़ती ...

आज की जीवन विद्या(10): बाहर सुख है कि दुःख है ?बाहर न तो सुख है ,न दु:ख है,केवल बाहर घटनाएँ है,परिस्थितियाँ है l उस घटना...
13/08/2026

आज की जीवन विद्या(10): बाहर सुख है कि दुःख है ?

बाहर न तो सुख है ,न दु:ख है,केवल बाहर घटनाएँ है,परिस्थितियाँ है l उस घटना की व्याख्या हम कैसे करते है ,उसके प्रति व्यवहार कैसे करते है यानि उनके प्रति हमारा प्रतिक्रीया महत्वपूर्ण है l हमारी मनःस्थिति ही परिस्थिति को बदलती है, मात्र नजरिए से सुख दु:ख मिलता है l सुख दु:ख घटनाओं में नहीं होता हैं l यह हमारा हेंडल करने का तरीका घटना की प्रकृति तय करता है l अगर मुझको उनको हेंडल करने आता है तो मेरे लिए सुख ही सुख है, हेंडल करना न आए तो दु:ख है l सुख दु:ख मानसिक स्थिति , 'स्टेट ऑफ माइंड' है, यह हमारे भाव विचार तय करते है l इसलिए घटनाओं की बजाय अपने अंदर काम करने की अधिक जरूरत हैं l बाहर की दुनिया केवल एक दर्पण है जो आपके आंतरिक विचारों और मानसिक स्थिति को दर्शाती है।

बाहर न तो सुख है ,न दु:ख है,केवल बाहर घटनाएँ है,परिस्थितियाँ है l उस घटना की व्याख्या हम कैसे करते है ,उसके प्रति व्यवह....

आज की जीवन विद्या (9):जीवन विद्या की जड़े कहाँ है ?जीवन विद्या की जड़े किसी शब्द ,व्यक्ति ,शास्त्र ,वाद ,शैली आदि में नह...
11/08/2026

आज की जीवन विद्या (9):जीवन विद्या की जड़े कहाँ है ?

जीवन विद्या की जड़े किसी शब्द ,व्यक्ति ,शास्त्र ,वाद ,शैली आदि में नहीं है बल्कि व्यक्ति के वर्तमान में सह अस्तित्व पूर्वक जीने में है l विद्या का अर्थ विध्यमान सह - अस्तित्व पूर्ण सत्य से है, जो है उसको पहचानने से है,जीने से हैं l मध्यस्थ दर्शन (Co-existentialism) जीवन विद्या का मूल आधार है। यह एक ऐसा भारतीय दर्शन है जो मनुष्य को स्वयं, समाज और प्रकृति के साथ …...

जीवन विद्या की जड़े किसी शब्द ,व्यक्ति ,शास्त्र ,वाद ,शैली आदि में नहीं है बल्कि व्यक्ति के वर्तमान में सह अस्तित्व .....

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