Palm Reading/Astrology

Palm Reading/Astrology Interpret aspects of a persons life by reading the lines of palmistry. https://youtube.com/?si=mlcgU895vns20ckm

01/12/2021

घर में इन जगहों पर न लगाएं परलोक गए लोगों की तस्वीरें, बढ़ जाएंगी परेशानी

दादी, माता-पिता आदि जो इस दुनिया से जा चुके हैं, वह पितर या पूर्वज कहलाए जाते हैं। इनके चले जाने के बाद केवल इनकी यादें रह जाती हैं, जिनका दिल से गहरा नाता होता है। ज्यादातर लोग पूर्वजों की तस्वीर को पूजा घर में रखकर पूजा करते हैं। शास्त्रों के अनुसार, ऐसा करना गलत बताया है। पूर्वज देवताओं के समान होते हैं लेकिन देवताओं के स्थान पर इनकी तस्वीरों को नहीं रखना चाहिए, ऐसा करने से देवता नाराज होते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूर्वजों की तस्वीरों को घर में जरूर रखना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से उनका आशीर्वाद हमेशा बना रहता है लेकिन उसके लिए कुछ नियम होते हैं, जिनसे आप पूर्वजों और देवताओं की कृपा पा सकते हैं…

यहां तस्वीर लगाने से होती है कलह

शास्त्र के अनुसार, पितरों की तस्वीर को भूलकर भी घर के ब्रह्म अर्थात मध्य स्थान पर, बेडरूम या फिर किचन में नहीं लगानी चाहिए। ऐसा करने से पूर्वजों का अपमान होता है और घर में पारिवारिक कलह बढ़ जाती है, साथ ही सुख-समृद्धि में कमी आती है।

यहां तस्वीर लगाने से लगता है देवदोष

पितरों की तस्वीरों को देवी-देवताओं के साथ रखने से देवतागण नाराज होते हैं और देवदोष भी लगता है। शास्त्रों में पितर और देवताओं के स्थान अलग-अलग बताए गए हैं क्योंकि पितर देवताओं के समान ही समर्थवान और आदरणीय हैं। एक जगह दोनों को रखने से किसी के आशीर्वाद का शुभ फल नहीं प्राप्त होता है।

स्वास्थ्य पर पड़ता है नकारात्मक प्रभाव

पितरों की तस्वीरों को कभी भी जीवीति लोगों के साथ नहीं लगानी चाहिए, ऐसा करना शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि जिस जीवित व्यक्ति के साथ पितरों की तस्वीर होती है, उन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। साथ ही उनकी आयु में भी कमी आती है और जीवन जीने का उत्साह भी कम होने लगता है। वह व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार हो सकता है।

इस दिशा में तस्वीर लगाना उत्तम

शास्त्र के अनुसार, पितरों की तस्वीरों को हमेशा उत्तर की दिवारों पर लगाएं ताकि उनकी दृष्टि दक्षिण की ओर रहे। दक्षिण दिशा को यम और पितरों की दिशा माना गया है, इससे अकाल मृत्यु और संकट से बचाव होता है। साथ ही आप उत्तरी हिस्से के कमरों में, ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) या फिर ऐसे स्थान पर तस्वीर लगाएं जो दिशादोष से मुक्त हो।

21/08/2021

Why do we wear threads on Wrists:

Many people are told to wear threads of different colors in their wrist. A thread is as good as an expensive stone in many cases when it is worn after chanting specific mantras. The wrist has the 3 nadis that affect "vaat" "pitta" and "kapha". These "nadis" are sometimes called "aadi", "antya", and "madhya" or "ingla", "pingla", and "shushuma". So wearing the different threads on the wrists affects different nadis differently. For instance, the color red represent energy and strength. It's also the color of Hanuman. The color red is very beneficial in any psychic problems or in improving one's health. Sun, Moon, and Jupiter are also on the wrist, so if one can wear some threads to keep these planets positive, then that can prove highly beneficial in achieving success in life.

21/08/2021

Indian Traditions

Vrat and Upvaas - Upvaas is mainly about food; vrat is done for a more wholesome change in personality. There are 3 types of vrat: 1) nitya-vrat - is connected to the daily/regular routine; 2) naimittik vrat - is done to get rid of specific sinful karma; 3) kaamya vrat - is done to improve one's life.

Tulsi plant (holy basil) - helps with any problems related to father, wealth, and reputation apart from helping in removing vaastu and illnesses. Bring it in your home on Sundays, it's the best day to worship Tulsi as it helps strengthen your Sun.

Candles: When we light a candle/deepak, then that fire has some energy, this affects our chakras, which in turn helps us become stronger. So when you feel weak, put 75 candles around you and then pray, you will feel the energy rise in you.

Traditionally, Hindu priests keep a pony tail while the rest of the hair is shaved off, this it so their energy does not get stolen/dissipate into the surroundings. This pony tail also keeps the person's eyes strong, provides a long life, and keeps the person healthy.

It's said that one must always worship the Peepal tree in Vedic Hindu culture. There's a scientific reason for this. All the parts of the tree, including, branches, roots, bark, fruits and leaves are a good source for increasing life-force. This is why it's believed that the different parts of the tree house different Gods and goddesses. The trunk of the tree is considered to be the place of Vishnu. So doing remedies such as, typing a thread in the trunk or marrying the tree removes obstacles in one's married life or if someone is unable to get married then such remedies help find them a good partner.

Why should one walk around the temple after praying in the temple? This is because it strengthens the bond between you and God. It also gets rid of fear.

It's not a good sign if holy-basil is drying up in your house. Make sure you get a new one in the home before the first one dries up.

Start doing Gayatri yag every Sunday and donating wheat every Sunday too. Why is prayer called "upasana"? It is made of "up" - this means close to God, "asana" - to sit. So the full word means "to sit close to God".

Sesame seeds are used on ekadashi as it's the preferred choice of Vishnu bhagwaan due to its energizing effects on the mind and body.

Flowers should never be burnt when doing yag, so make sure you never throw flowers in the yag when doing any kind of puja.

18/07/2021
17/04/2021
23/02/2021

हमेशा हमारे बड़े- बूढे कहते हैं कि पैसा अच्छे तरीके से कमाओ तभी वो फलदायक होगा। गलत काम करके कमाया गया पैसा हमारे लिए नुकसानदायक होता है। वे इस बात को ऐसे ही नहीं कहते। दरअसल इस बात को महाभारत में भी कहा गया है। महाभारत में धृतराष्ट्र और विदुर के संवाद हैं। इन संवादों में विदुर ने धृतराष्ट्र को कई ऐसी नीतियां बताई गई हैं, जिनका ध्यान रखने पर हम कई परेशानियों से बच सकते हैं। इनमे कुछ नीतियां धन से संबंधित हैं।

विधुर कहते हैं- श्रीर्मङ्गलात् प्रभवति प्रागल्भात् सम्प्रवर्धते। दाक्ष्यात्तु कुरुते मूलं संयमात् प्रतितिष्ठत्ति।।

ये उद्योगपर्व के 35 वें अध्याय का 44 वां श्लोक है।
इस नीति श्लोक में चार बातें धन से संबंधित बताई गई हैं। इस नीति की पहली बात ये है कि अच्छे कर्म से स्थाई लक्ष्मी आती है। महाभारत में दुर्योधन ने छल और गलत तरीके से पांडवों से उनकी धन-संपत्ति छीन ली थी, लेकिन ये संपत्ति उसके पास टिक ना सकी।
मेहनत और ईमानदारी से किए गए कामों से जो धन प्राप्त होता है, उससे स्थाई लाभ मिलता है और घर में बरकत बनी रहती है। जबकि, जो लोग गलत कामों से धन कमाते हैं, वे कई प्रकार की बीमारियों और परेशानियों का सामना करते हैं।

इस नीति मे दूसरी बात ये है कि धन का सही-सही प्रबंधन या निवेश करना। दुर्योधन ने धन का प्रबंधन पांडवों को नष्ट करने के लिए किया और खुद ही नष्ट हो गया। अगर हम धन का सही उपयोग करेंगे, अच्छे कामों में पैसा लगाएंगे तो, निश्चित रूप से अच्छा लाभ मिल सकता है।

तीसरी बात यह है कि चतुराई से योजनाएं बनानी चाहिए कि धन को कहां-कहां खर्च करना चाहिए। महाभारत में पांडव दुर्योधन से सबकुछ हार गए थे, इसके बाद उन्होंने अभाव का जीवन व्यतीत किया और चतुराई से योजना बनाते हुए विशाल सेना तैयार कर ली। जिससे वे महाभारत युद्ध में विजयी हुए। चौथी बात यह है कि धन के संबंध में धैर्य बनाए रखें, धन आने पर बुरी आदतों से बचना चाहिए। शास्त्रों में कई ऐसे पात्र बताए गए हैं जो बुरी आदतों के कारण नष्ट हो गए। युधिष्ठिर अपनी गलत आदत द्युत क्रीड़ा (जुआं) में ही दुर्योधन और शकुनि से सब कुछ हार गए थे।

17/02/2021

राहु को छाया ग्रह कहा जाता है, और श्रीमदभागवतमहापुराण में तो शुकदेवजी ने स्पष्ट वर्णनकिया कि यह सूर्य से 10 हजार योजन नीचे स्थित है,और श्याम वर्ण की किरणें निरन्तर पृथ्वी परछोडता रहता है, यह मिथुन राशि में उच्च का होता है,धनु राशि में नीच का हो जाता है, राहु और शनि रोगकारक ग्रह है, इसलिये यह ग्रह रोग जरूर देता है। काला जादू तंत्र टोना आदि यही ग्रह अपने प्रभाव सेकरवाता है। अचानक घटनाओं के घटने के योग राहु केकारण ही होते है, और षष्टांश में क्रूर होने पर ग्रद्य रोगहो जाते है। राहु ब्रह्माण्ड का दृश्य रूप है।

राहु की दशा से मुक्ति के उपाय
शनिवार के दिन सूर्य उदय से पूर्व दो मोर पंख ले कर आयेंपंख के नीचे भूरे रंग का धागा बाँध लेँ एक थाली मेंपंखों के साथ दो सुपारियाँ रखें गंगाजल छिड़कते हुए 21बार ये मंत्र पढ़ें "ॐ राहवे नम: जाग्रय स्थापय स्वाहा:"
चौमुखा दिया जला कर राहु को अर्पित करें. कोईभी मीठा प्रसाद बना कर चढ़ाएं।

राहु का जाप मंत्र :-
"ऊँ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहुवे नम:॥" यह मंत्र 18000 बार रोजाना, शांति मिलने तक जाप करना चाहिए।

राहु ग्रह शांति के उपाय :-

1. अपने पास सफेद चन्दन अवश्य रखना चाहिए। सफेद चन्दन की माला भी धारण की जा सकती है। प्रतिदिन सुबह चन्दन का टीका भी लगाना चाहिए। अगर हो सके तो नहाने के पानी में चन्दन का इत्र डाल कर नहाएं।

2. राहु की शांति के लिए श्रावण मास में रुद्राष्टाध्यायी का पाठ करना सर्वोत्तम है।

3. शनिवार को कोयला, तिल, नारियल, कच्चा दूध, हरी घास, जौ, तांबा बहती नदी में प्रवाहित करें।

4. बहते पानी में शीशा अथवा नारियल प्रवाहित करें।

5. नारियल में छेद करके उसके अन्दर ताम्बे का पैसा डालकर नदी में बहा दें।

6. बहते पानी में तांबे के 43 टुकड़े प्रवाहित करें।

7. नदी में लकड़ी का कोयला प्रवाहित करें।

8. नदी में पैसा प्रवाहित करें।

9. एक नारियल + 11 बादाम (साबुत) काले वस्त्र मेंबांधकर जल में प्रवाहित करें।

10. हर बुधवार को चार सौ ग्राम धनियां पानी में
बहाएं।

11. कुष्ठ रोगी को मूली का दान दें।

12. काले कुत्ते को मीठी रोटियां खिलाएं।

13. मोर व सर्प में शत्रुता है अर्थात सर्प, शनि तथा राहू के संयोग से बनता है। यदि मोर का पंख घर के पूर्वी और उत्तर पश्चिम दीवार में या अपनी जेब व डायरी में रखा हो तो राहू का दोष कभी भी नहीं परेशान करता है, मोरपंख की पूजा करें या हो सके तो उसे हमेशा अपने पास रखें।

14. रात को सोते समय अपने सिरहाने में जौ रखें जिसे सुबह पंक्षियों को दें।

15. सरसों तथा नीलम का दान किसी भंगी या कुष्ठ रोगी को दें।

16. राहु ग्रह से पीडि़तव्यक्ति को रोजाना कबूतरों को बाजरे में काले तिल मिलाकर खिलाना चाहिए।

17. गिलहरी को दाना डालें।

18. दो रंग के फूलों को घर में लगाएं और गणेश जी को अर्पित भी करें।

19. कुष्ठ रोगियों को दो रंग वाली वस्तुओं का दान करें।

20. हर मंगलवार या शनिवार को चीटियों को मीठा खिलाएं।

21. अगर राहू आपकी कुंडली में 12 वे घर में बैठा है तो भोजन रसोई घर में करें।

22. अष्टधातु का कड़ा दाहिने हाथ में धारण करना चाहिए।

23. जमादार को तम्बाकू का दान करना चाहिए।

24. अपने पास ठोस चाँदी से बना वर्गाकार टुकड़ा रखें।

25. श्री काल हस्ती मंदिर की यात्रा।

26. चाय की कम से कम 200 ग्राम पत्ती 18 बुधवार दान करने से रोग कारक अनिष्टकारी राहु स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है।

27. नेत्रेत्य कोण में पीले फूल लगायें।

28. अपने घर के वायु कोण (उत्तर-पश्चिम) में एक लाल झंडा लगाएं।

29. यदि क्षय रोग से पीडि़त हों तो गोमूत्र से जौ को धो कर एक बोतल में रखें तथा गोमूत्र के साथ
उस जौ से अपने दाँत साफ करें।

30. शनिवार के दिन अपना उपयोग किया हुआ कंबल किसी गरीब को दान करें।

31. अमावस्या को पीपल पर रात में 12 बजे दीपक जलाएं।

32. शिवजी पर जल, धतुरा के बीज, चढ़ाएं और सोमवार
का व्रत करें।

33. यदि राहु चंद्रमा के साथ हो तो पूर्णिमा के दिन नदी की धारा में नारियल, दूध, जौ, लकड़ी का कोयला, हरी दूब, यव, तांबा, काला तिल प्रवाहित करें।

34. यदि राहु सूर्य के साथ हो तो सूर्य ग्रहण के समय कोयला और सरसों नदी की धारा में प्रवाहित करना चाहिए।

35. अगर आपकी कुंडली में भी राहु और शनि एक साथ बैठे है तो यह उपाय करे। हर रोज मजदूरों को तम्बाकु की पुडिया दान दे। ऐसा 43 दिन करे आपको कभी यह योग बुरा फल नहीं देगा।

36. यदि राहु सूर्य के साथ हो तो जौ को दूध या गौ मूत्र से धोकर बहते पानी में बहायें।

37. शुक्र राहु की युति होने पर दूध एवं हरे नारियल का दान करें ।

38. 41 दिन तक 1 रूपया प्रतिदिन भंगी को दें।

13/02/2021

ज्योतिष और विश्वासघात का सम्बन्ध —

(ज्योतिष और धोखा खाने के योग)––

ज्योतिष की माने तो सितारें ये बता सकते है कि किसका कैरेक्टर ठीक नहीं है? ज्योतिष के अनुसार लड़के-लड़कियों की कुंडली में मंगल, शुक्र और चंद्र की स्थिति ये बताती है कि किसका कैरेक्टर कैसा है।

कैसे जानें किसी का कैरेक्टर-

– अगर किसी लड़की की कुंडली में कन्या राशि के साथ मंगल होता है तो ऐसी लड़कियों का चरित्र संदेह के घेरे में होता है।

– किसी भी कुंडली में शुक्र और मंगल एक राशि नहीं होने चाहिए, अगर ऐसा होता है तो लड़का या लड़की कोई भी हो उसके एक से अधिक प्रेम संबंध होते हैं।

– किसी लड़की की कुंडली के पहले भाव में जो राशि (नंबर) हो उस राशि का स्वामी पाप ग्रहों के साथ मिल कर बारहवें भाव में होता है तो ऐसी लड़की का कैरेक्टर ढीला होता है।

– कुंडली के पहले घर में कन्या राशि (6 नंबर) के साथ मंगल हो और सातवें घर में शुक्र हो तो ऐसी लड़कियों के एक से अधिक संबंध होते हैं।

– जिन लड़कों की कुंडली में चंद्र और शुक्र एक ही राशि में होते हैं वो लड़के लव, सेक्स और धोखे में विश्वास करते हैं।

—सातवें घर में अशुभ गृह की उपस्थिति यह बताने में सक्षम है कि विवाह के पहले ही दोनों में से एक धोखा कर दे अथवा शादी से इंकार कर दे ! पहले घर में बैठा अशुभ ग्रह यह तो बता ही देता है कि धोखा सव्यम् खुद आप ही ऐसा जातक अपने प्रेमी या प्रेमिका को दे देता है ||

–राहु के प्रभाव स्वरूप कोई भी व्यक्ति अपने शरीर के अंदर किसी भी प्रकार की गंदगी पाले रखता है तो उसके ऊपर काली छाया मंडराने लगती है अर्थात राहु के फेर में व्यक्ति के साथ अचानक होने वाली घटनाएँ बढ़ जाती है। घटना-दुर्घटनाएँ, होनी-अनहोनी और कल्पना-विचार की जगह भय और कुविचार जगह बना लेते हैं।

—राहु के फेर में आया व्यक्ति बेईमान या धोखेबाज होगा। राहु ऐसे व्यक्ति की तरक्की रोक देता है। राहु का खराब होना अर्थात् दिमाग की खराबियाँ होंगी, व्यर्थ के दुश्मन पैदा होंगे, सिर में चोट लग सकती है। व्यक्ति मद्यपान या संभोग में ज्यादा रत रह सकता है। राहु के खराब होने से गुरु भी साथ छोड़ देता है।

–केतु के प्रभाव स्वरूप कोई भी व्यक्ति जुबान और दिल से गंदा है और रात होते ही जो रंग बदल देता है वह केतु का शिकार बन जाता है। यदि व्यक्ति किसी के साथ धोखा, फरेब, अत्याचार करता है तो केतु उसके पैरों से ऊपर चढ़ने लगता है और ऐसे व्यक्ति के जीवन की सारी गतिविधियाँ रुकने लगती है। नौकरी, धंधा, खाना और पीना सभी बंद होने लगता है। ऐसा व्यक्ति सड़क पर या जेल में सोता है घर पर नहीं। उसकी रात की नींद हराम रहती है, लेकिन दिन में सोकर वह सभी जीवन समर्थक कार्यों से दूर होता जाता है।

—हिन्दू ज्योतिष में केतु अच्छी व बुरी आध्यात्मिकता एवं पराप्राकृतिक प्रभावों का कार्मिक संग्रह का द्योतक है। केतु विष्णु के मत्स्य अवतार से संबंधित है। केतु, भौतिकीकरण के शोधन के आध्यात्मिक प्रक्रिया का प्रतीक है और हानिकर और लाभदायक, दोनों ही माना जाता है, क्योंकि ये जहां एक ओर दु:ख एवं हानि देता है, वहीं दूसरी ओर एक व्यक्ति को देवता तक बना सकता है। यह व्यक्ति को आध्यात्मिकता की ओर मोडऩे के लिये भौतिक हानि तक करा सकता है। यह ग्रह तर्क, बुद्धि, ज्ञान, वैराग्य, कल्पना, अंतर्दृष्टि, मर्मज्ञता, विक्षोभ और अन्य मानसिक गुणों का कारक है।

माना जाता है कि केतु, अपने भक्त के परिवार को समृद्धि दिलाता है, सर्पदंश या अन्य रोगों के प्रभाव से हुए विष के प्रभाव से मुक्ति दिलाता है। ये अपने भक्तों को अच्छा स्वास्थ्य, धन-संपदा व पशु-संपदा दिलाता है। मनुष्य के शरीर में केतु अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। ज्योतिष गणनाओं के लिए केतु को तटस्थ अथवा नपुंसक ग्रह मानते हैं। केतु स्वभाव से मंगल की भांति ही एक क्रूर ग्रह है तथा मंगल के प्रतिनिधित्व में आने वाले कई क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व केतु भी करता है। यह ग्रह तीन नक्षत्रों का स्वामी है अश्विनी, मघा एवं मूल नक्षत्र। यही केतु जन्म कुण्डली में राहु के साथ मिलकर कालसर्प योग की स्थिति बनाता है। केतु को सूर्य व चंद्र का शत्रु कहा गया हैं। केतु, मंगल ग्रह की तरह प्रभाव डालता है। केतु वृश्चिक व धनु राशि में उच्च का और वृष व मिथुन में नीच का होता है।

गुप्त नवरात्रि 2021 में कलश स्थापना का शुभ मुहुर्तगुप्त नवरात्रि प्रारंभ- 12 फरवरी 2021 शुक्रवारगुप्त नवरात्रि समाप्त- 2...
12/02/2021

गुप्त नवरात्रि 2021 में कलश स्थापना का शुभ मुहुर्त

गुप्त नवरात्रि प्रारंभ- 12 फरवरी 2021 शुक्रवार
गुप्त नवरात्रि समाप्त- 21 फरवरी 2021 दिन रविवार
कलश या घट स्थापना का मुहूर्त- 12 फरवरी सुबह 8.34 बजे से 9.59 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त- 12 फरवरी को दोपहर 12.13 से 12.58 बजे तक

Address

Udaipur
313001

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Palm Reading/Astrology posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share