Acharya Krishna Mishra

Acharya Krishna Mishra श्री महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय‌ वेद वेदांग विद्यालय (उज्जैन) मप्र ।
गुरुकुल शुक्ल यजुर्वेद अध्यापक Krishna astrology

31/08/2026

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28/08/2026

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28/08/2026

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Acharya Krishna Mishra

27/08/2026

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Acharya Krishna Mishra

ll वैदिक ज्योतिष में राहु की युति — जब आत्मा अधूरा अध्याय खोलती है” llरात गहरी थी।एक युवक छत पर बैठा आकाश देख रहा था।उसे...
26/08/2026

ll वैदिक ज्योतिष में राहु की युति — जब आत्मा अधूरा अध्याय खोलती है” ll
रात गहरी थी।
एक युवक छत पर बैठा आकाश देख रहा था।
उसे समझ नहीं आ रहा था —
कुछ लोग जीवन में क्यों तूफ़ान बनकर आते हैं?
क्यों एक चेहरा पहली मुलाक़ात में ही परिचित लगता है?
क्यों एक आवाज़ भीतर तक काँप देती है?
क्यों कुछ संबंध समझ से बाहर होते हैं?
उसी क्षण छाया हँसी।
वह राहु था !!
🌑 राहु बोला —
“मैं मिलाता नहीं…
मैं अधूरा लौटाता हूँ।”
“तुमने जिनसे वचन अधूरे छोड़े थे,
जिनसे भावनाएँ अधूरी थीं,
जिनसे हिसाब बाकी था…
उन्हें मैं फिर लाता हूँ।”
🔥 और फिर उसने एक-एक परदा उठाया…
🌊 राहु–चंद्र
पूर्व जन्म में तुम किसी की भावनाओं के केंद्र थे।
किसी ने तुम पर विश्वास किया…
और तुम चले गए।
अब इस जन्म में —
तुम किसी से छूट नहीं पाते।
तुम डरते हो कि कोई छोड़ देगा।
भावनाएँ गहरी हैं… पर शांति नहीं।
यह प्रेम नहीं…
यह स्मृति है।
🔥 राहु–शुक्र
एक अधूरा प्रेम।
समाज के विरुद्ध।
समय के विरुद्ध।
तुमने चाहा था…
पर निभा न सके।
अब आकर्षण तर्क से बड़ा है।
दिल कहता है — “यही है।”
पर जीवन उलझ जाता है।
यह वासना नहीं…
यह अधूरा मिलन है।
☀️ राहु–सूर्य
पूर्व जन्म में सत्ता थी।
अहंकार था।
किसी का अधिकार छीना था।
अब हर अधिकार के सामने संघर्ष है।
पिता से दूरी।
स्वाभिमान में दरार।
यह दुर्भाग्य नहीं…
यह संतुलन है।
⚔️ राहु–मंगल
रक्त का हिसाब।
क्रोध का अधूरा प्रहार।
तुम्हें समझ नहीं आता —
इतना गुस्सा क्यों आता है?
यह इस जन्म का नहीं…
यह अधूरी लड़ाई का शेष कंपन है।
📿 राहु–गुरु
पूर्व जन्म में ज्ञान था…
पर सत्य नहीं।
धर्म का उपयोग किया…
धर्म को जिया नहीं।
अब भ्रम है।
गुरु मिलते हैं… पर विश्वास नहीं टिकता।
📖 और अब… तुमने पूछा था…
🌫️ राहु–बुध
पूर्व जन्म में शब्द हथियार थे।
किसी का विश्वास तोड़ा था।
किसी को भ्रम में रखा था।
किसी से झूठा वचन लिया था।
अब मन में द्वंद्व है।
निर्णय कठिन।
चिंता स्थायी।
संबंधों में गलतफहमी।
यह मानसिक कमजोरी नहीं—
यह शब्दों का कर्म है।
राहु–बुध कहता है—
“अब सच बोलो… चाहे खोना पड़े।”
🪨 राहु–शनि
सबसे भारी।
पूर्व जन्म में जिम्मेदारी से भागे थे।
किसी का कर्तव्य अधूरा छोड़ा था।
किसी को प्रतीक्षा में रखा था।
अब जीवन में देरी है।
कर्म कठोर हैं।
संबंधों में दूरी।
सफलता देर से।
यह सज़ा नहीं…
यह अधूरा अनुबंध है।
राहु–शनि कहता है—
“भागना अब संभव नहीं।”
युवक ने पूछा—
“तो क्या यह सब दंड है?”
राहु मुस्कुराया।
“नहीं।
यह पूर्णता है।”
“मैं तुम्हें गिराने नहीं आता।
मैं तुम्हें उस जगह ले जाता हूँ
जहाँ तुम अधूरे थे।”
अंतिम सत्य
जिससे तुम अनायास आकर्षित होते हो…
जिससे तुम बिना कारण उलझते हो…
जिससे तुम भाग नहीं पाते…
वही राहु का दर्पण है।
तुम्हें उसे जीतना नहीं है।
तुम्हें उसे समझना है।
पूर्ण करना है।
या छोड़ देना है।
क्योंकि राहु प्रेम नहीं देता—
वह अधूरा अध्याय खोलता है।
और जब तुम उस अध्याय को
सच में बंद कर देते हो…
तभी पहली बार
आत्मा हल्की होती है।

Acharya Krishna Mishra

26/08/2026

वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की युति का प्रभाव
Effect of Planetary Conjunctions in Vedic Astrology

याद रहे हर युति का हाल लग्न में हर राशि में अलग फल होता है Remember, every conjunction in the ascendant has different results in every zodiac sign.

Acharya Krishna Mishra

23/08/2026

जानें ज्योतिष के अनुसार किस ग्रह का प्रभाव किस भाव में सबसे ज्यादा अशुभ फल देता है।

जन्म का पाया जन्मकुंडली विश्लेषण....जन्म समय के अनुसार नक्षत्र और राशि के पाये को देखा जाता है नक्षत्र पाया शरीर और परिव...
22/08/2026

जन्म का पाया जन्मकुंडली विश्लेषण....

जन्म समय के अनुसार नक्षत्र और राशि के पाये को देखा जाता है नक्षत्र पाया शरीर और परिवार से जोडा जाता है राशि का पाया दिमागी सोच सांसारिक स्थान और कार्य विवाह आदि के लिये माना जाता है। पाये चार प्रकार के होते है -

स्वर्ण पाया
रजत पाया
ताम्र पाया
लौह पाया

नक्षत्र का स्वर्ण पाया👉 सही माना जाता है लेकिन राशि का स्वर्ण पाया सही नही माना जाता है जो पाया स्त्री के लिये सुखकारी होता है वही पाया पुरुष के लिये हानिकारक माना जाता है। अगर राशि का पाया स्त्री का स्वर्ण है तो वह उत्तम माना जाता है और पुरुष केलिये स्वर्ण पाया राशि से खराब माना जाता है। पुरुष के स्वर्ण पाये मे जन्म लेने से या तो उसके जीवन में अल्प आयु का योग होता है या वह आजीवन अपने अहम और बुद्धिमान समझने के कारण आगे नही बढ पाता है इस कारण मे एक बात और भी देखी जाती है कि जातक को वास्तविक जीवन मे जाने के लिये माता पिता रोकते रहते है उसे गमले का पौधा समझकर पाला जाता है जातक का स्थानन्तरण होता रहता है इस प्रकार से व्यक्ति अपने सामाजिक पारिवारिक और व्यवहारिक जीवन को समझ नही पाता है फ़लस्वरूप वह एकान्त मे रहने वाला और अपने काम को खुद करने के बाद सफ़लता को नही लेने वाला होता है। सफ़लता के लिये जीवन की लडाई को लडना जरूरी होता है और जब जीवन की लडाई दूसरो के भरोसे से लडी जाती है तो कभी न कभी बडी असफ़लता हाथ ही लगती है.इस पाये के व्यक्ति को पिता का सुख कम मिलता है अपने पारिवारिक जीवन से जैसे चाचा चाची ताऊ ताई दादा दादी से दूरिया बनी रहती है।

रजत पाया👉 सभी मायनो मे सही माना जाता है यह स्त्री जातक के लिये भी और पुरुष जातक दोनो के लिये श्रेष्ठ माना जाता है। व्यक्ति अपने मानसिक कारणो को सम्भालने उन्हे बेलेन्स करने के लिये अपनी योग्यता को जाहिर करता रहता है सभी प्रकार के कार्य जो उसके जीवन के लिये प्रभावी होते है वह लोक रीति से सामाजिकता से एक दूसरे के मानसिक प्रभाव को जल्दी समझ लेने से पूरा करता रहता है उसे अपने जीवन मे लोगो की बुरी सोच का परिणाम भी सफ़लता के लिये आगे बढाने वाला होता है वह किसी कार्य के गलत होने पर उसे शिक्षा के रूप मे मानता है माता के साथ सम्बन्ध अच्छे रहते है पिता का ही लगाव सही रहता है लेकिन बहिनो की संख्या और स्त्री संतान की अधिकता होना माना जाता है,इस पाये मे जन्म लेने वाले जातक पानी के किनारे रहने पानी सम्बन्धी काम करने मे सफ़ल होते है.

ताम्र पाया👉 तकनीकी दिमाग को प्रदान करने वाला होता है जातक बात का धनी होता है लम्बी आयु को जीने वाला होता है धन की कमी जातक को नही अखरती है वह अपने व्यवहार आदि से धन के क्षेत्र को कायम रखने वाला होता है खुद के लोग उस पर भरोसा करने वाले होते है जातक जो भी बात करता है उसे निभाने वाला होता है समय पर काम आने वाला होता है लेकिन अपने जीवन को दूसरो के प्रति बलिदान करने वाला भी होता है। जमीन जायदाद अचल सम्पत्ति और खनिज आदि कारको मे आगे बढता जाता है। भाइयों के लिये मित्रो के लिये और जान पहिचान वालो के लिये जीवन को बचाने वाला रोजाना की जिन्दगी मे अपने को आगे ही आगे बढाने वाला होता है। सन्तान सुख मे कमी रहती है लेकिन जो भी सन्तान होती है वह नाम कमाने वाली और परिवार का नाम रोशन करने वाली होती है मर्यादा मे तथा कायदे से चलने वाली होती है जीवन साथी से मतभेद होना और किसी न किसी बात पर आपसी कलह को भी होता देखा जाता है लेकिन जीवन साथी से दूरिया नही हो पाती है कुछ समय के लिये आपसी कलह तो हो सकती है लेकिन हमेशा के लिये नही माना जा सकता है जातक भोजन सम्बन्धी कारणो मे आगे रखने वाला होता है जातक का हाजमा भी सही होता है और जातक को भूख भी बहुत लगती है.तीखे भोजन मे जातक की अधिक रुचि होती है।

लोहे का पाया👉 लोहे के पाये को खराब माना जाता है जातक या जातिका आलसी प्रवृत्ति के होते है चालाकी से काम करना एकान्त मे रहना मेहनत वाले काम करने के बाद केवल जीविका को चलाने के लिये माने जाते है दूसरो की सेवा करना और अपने श्रम के आधार पर ही जीवन को चलाना माना जाता है सन्तान भी आलसी होती है साथ ही जीवन मे कब पैदा हुये और कब मर गये इसका भी प्रभाव नाम और धन के क्षेत्र मे उजागर नही हो पाता है। माता पिता के लिये भी कष्टकारी होता है विद्या के क्षेत्र मे कमी रहती है विवाह आदि के क्षेत्र मे सरलता से जीवन नही चल पाता है जीवन साथी को एक प्रकार से जातक को ढो कर ले कर चलने वाली बात को माना जाता है वह बात चाहे अस्पताल सम्बन्धी कारण से बनी हो या जातक की अकर्मण्यता से मानी जाती हो जातक को शराब कबाब तामसी और नशे की आदते भी होती देखी जाती है नीचे लोगो से मित्रता और नीचे काम करने जुआ लाटरी सट्टा आदि के क्षेत्र मे अधिक रुचि देखी जाती है खेल कूद मे भी कम मन लगता है दूसरो को लडाकर खुद मजा लेने वाले लोग भी अधिकतर इसी पाये मे जन्म लिये हुये देखे गये है,हिंसा से बहुत अधिक प्रीति देखी जाती है दया भाव की कमी होती है ऐसे लोग अपने ही लोगो को ठग भी सकते है और धोखा भी देते देखे गये है।

उपाय
〰️🔸〰️
👉 स्वर्ण के पाये मे जन्म लेने वाले जातक को सोने मे हरे रंग के नगीने पिरोकर गले मे पहिनना चाहिये जिससे उनके जीवन मे आहत होने वाले कारण कम होते है नारियल का दान देते रहना चाहिये,पिता की आयु की बढोत्तरी के लिये रोजाना सूर्य को अर्घ देना चाहिये पराये धन और स्त्री पुरुष से सम्बन्धो के मामले मे बचना चाहिये कारण इस पाये मे जन्म लेने वाले को यौन सम्बन्धी बीमारिया अधिक होती है,धारी वाले कपडे पहिनने से भी इस पाये का दोष कम होता है हाथ मे कलावा बांधने से भी दोष मे कमी होती है धार्मिक स्थानो मे जाना और माथा टेकते रहने से भी दोष कम होता है।

👉 रजत पाये वाले व्यक्ति को तीर्थ स्थानो मे जाते रहना चाहिये और तीर्थ स्थान के जल को अपने घर मे या सोने वाले कमरे मे ऊंचे स्थान पर रखना चाहिये माता के कष्ट को दूर करने के लिये रोजाना शिव स्तोत्र का पाठ करना चाहिये चांदी के पात्र मे पानी या दूध पीना चाहिये,हरे रंग के कपडो का अधिक प्रयोग करना चाहिये,ठगी चालाकी आदि के कामो से दूर रहना चाहिये।

👉 ताम्र पाये के दोष की शांति के लिये मन्दिरो मे या दान के स्थानो मे भोजन का दान करना चाहिये तांबे की कोई न कोई चीज अपने पास रखनी चाहिये भोजन मे मिर्च का अधिक प्रयोग नही करना चाहिये मीठा भी कम ही लेना चाहिये,भाइयों की सेवा करने से और मित्रो का सहयोग करने से भी इस पाये का दोष कम होता है।

👉 लौह के पाये मे जन्म लेने वाले जातक को अपने वजन के बराबर का लोहा शनि स्थान मे दान करना चाहिये आलसी प्रभाव को रोकने के लिये मिर्च का अधिक सेवन करना चाहिये लेकिन काली मिर्च का सेवन ही सुखकारी होगा,आंखो की ज्योति को बढाने के लिये घी काली मिर्च और बतासे को आग मे पका कर रोजाना सुबह को प्रयोग मे लेना चाहिये तुलसी की पत्ती काली मिर्च और नीम की टांची को रोजाना बासी पेट लेने से भी इस पाये का दोष दूर होता है लोहे का छल्ला दाहिने हाथ मे स्त्री और पुरुष दोनो को मध्यमा उंगली मे पहिनने से भी परिवार की कलह और घर के मतभेद दूर होते है।

ll Acharya Krishna Mishra ll

20/08/2026

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