24/07/2026
🚨 राजस्थान सरकार की नई पहल: सरकारी अस्पतालों में शुरू होगी "प्रसव सखी" व्यवस्था
ARJUN RAM HANSALIYA
हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को भर्ती से लेकर डिस्चार्ज तक मिलेगा समन्वित सहयोग, मातृ मृत्यु दर कम करने की दिशा में बड़ा कदम
राजस्थान सरकार ने राज्य में हाल के दिनों में विभिन्न जिलों में प्रसूताओं की मृत्यु के मामलों को गंभीरता से लेते हुए सरकारी अस्पतालों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर अब सरकारी अस्पतालों में "प्रसव सखी" व्यवस्था शुरू की जाएगी। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य विशेष रूप से हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में भर्ती होने से लेकर सुरक्षित प्रसव, प्रसवोत्तर देखभाल और डिस्चार्ज तक हर चरण में समुचित मार्गदर्शन, समन्वय और सहायता उपलब्ध कराना है।
यह पहल केवल एक नई व्यवस्था नहीं है, बल्कि मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक मरीज-केंद्रित (Patient-Centric) बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
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आखिर क्या है "प्रसव सखी" व्यवस्था?
नई व्यवस्था के तहत सरकारी अस्पतालों में भर्ती होने वाली प्रत्येक चिन्हित हाई रिस्क गर्भवती महिला के साथ एक प्रशिक्षित नर्सिंगकर्मी, एएनएम अथवा चयनित महिला स्वास्थ्यकर्मी को "प्रसव सखी" के रूप में जोड़ा जाएगा।
प्रसव सखी का कार्य उपचार करना नहीं होगा, बल्कि गर्भवती महिला और अस्पताल की विभिन्न सेवाओं के बीच समन्वय स्थापित करना होगा ताकि किसी भी स्तर पर देरी, भ्रम या जानकारी के अभाव के कारण मरीज को परेशानी न उठानी पड़े।
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भर्ती से डिस्चार्ज तक साथ
प्रसव सखी की भूमिका अस्पताल में प्रवेश के साथ ही शुरू हो जाएगी।
वह गर्भवती महिला की—
अस्पताल में भर्ती
रजिस्ट्रेशन
जांच
सोनोग्राफी
आवश्यक रक्त की व्यवस्था हेतु ब्लड बैंक से समन्वय
डॉक्टर से परामर्श तक पहुंच
ऑपरेशन अथवा सामान्य प्रसव की तैयारी
प्रसव
प्रसवोत्तर देखभाल
नवजात को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना
टीकाकरण संबंधी जानकारी
डिस्चार्ज
आवश्यकता पड़ने पर रेफरल
जैसी प्रक्रियाओं में सहयोग करेगी।
यदि किसी मरीज को दूसरे अस्पताल रेफर करना पड़े तो उस प्रक्रिया के समन्वय में भी प्रसव सखी की भूमिका रहेगी।
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अस्पताल और मरीज के बीच बनेगी मजबूत कड़ी
सरकार का मानना है कि कई बार अस्पतालों में लंबी प्रक्रियाएं, अलग-अलग काउंटर, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी तथा मरीज और परिजनों को पर्याप्त जानकारी नहीं मिलने के कारण अनावश्यक परेशानी होती है।
प्रसव सखी इस अंतर को कम करेगी।
वह मरीज और अस्पताल के बीच एक सुविधा समन्वयक (Facilitator) के रूप में कार्य करेगी ताकि महिला स्वयं को अकेला महसूस न करे।
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104 जननी एक्सप्रेस, हेल्प डेस्क और प्रसव सखी होंगे एकीकृत
नई व्यवस्था में तीन महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं को जोड़ने की योजना बनाई गई है—
✅ 104 जननी एक्सप्रेस
✅ 24×7 मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य हेल्प डेस्क
✅ प्रसव सखी
इससे घर से अस्पताल तक सुरक्षित परिवहन, अस्पताल पहुंचने के बाद उचित मार्गदर्शन तथा प्रसव तक निरंतर निगरानी एक ही समन्वित व्यवस्था के माध्यम से सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
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हाई रिस्क गर्भवतियों को मिलेगी प्राथमिकता
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को—
परिवहन
भर्ती
जांच
उपचार
रेफरल
जैसी सेवाओं में प्राथमिकता दी जाएगी।
उद्देश्य यह है कि किसी भी गंभीर मरीज के उपचार में अनावश्यक विलंब न हो।
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अस्पतालों में स्थापित होंगे हेल्प डेस्क
सरकार प्रत्येक चिन्हित सरकारी अस्पताल में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य हेल्प डेस्क भी स्थापित करेगी।
यह हेल्प डेस्क अस्पताल का पहला संपर्क केंद्र होगा।
यहां—
मरीजों का मार्गदर्शन
रजिस्ट्रेशन में सहायता
अस्पताल की सेवाओं की जानकारी
परिजनों को आवश्यक सूचना
शिकायतों का संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाना
जैसे कार्य किए जाएंगे।
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प्रसव सखी की जिम्मेदारियां
समाचारों के अनुसार प्रसव सखी—
✔ गर्भवती महिला को समय-समय पर मार्गदर्शन देगी।
✔ अस्पताल की विभिन्न सेवाओं से जोड़ने में सहायता करेगी।
✔ रजिस्ट्रेशन और जांच प्रक्रियाओं में समन्वय करेगी।
✔ सोनोग्राफी, ब्लड बैंक आदि से समन्वय करेगी।
✔ हाई रिस्क गर्भवती की निगरानी में सहयोग करेगी।
✔ प्रसव के बाद मां एवं नवजात को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में सहायता करेगी।
✔ टीकाकरण सहित आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएगी।
✔ रेफरल की स्थिति में समन्वय करेगी।
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क्या नहीं करेगी प्रसव सखी?
स्वास्थ्य विभाग ने इसकी कार्य सीमा भी स्पष्ट रखने की तैयारी की है।
प्रसव सखी—
❌ डॉक्टर की तरह चिकित्सा परामर्श नहीं देगी।
❌ किसी प्रकार की दवा प्रिस्क्राइब नहीं करेगी।
❌ स्वयं इलाज नहीं करेगी।
❌ सामान्य या सिजेरियन डिलीवरी का निर्णय नहीं लेगी।
❌ जांच रिपोर्ट की व्याख्या नहीं करेगी।
❌ डॉक्टरों के निर्णय में हस्तक्षेप नहीं करेगी।
इसकी भूमिका केवल सहायता, मार्गदर्शन, सुविधा और समन्वय तक सीमित रहेगी।
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कितनी होंगी प्रसव सखी?
समाचारों के अनुसार किसी अस्पताल में प्रसव सखी की संख्या इस आधार पर तय की जाएगी—
औसत मासिक डिलीवरी
हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की संख्या
सिजेरियन मामलों की संख्या
अन्य अस्पतालों से आने वाले रेफरल केस
अर्थात सभी अस्पतालों में समान संख्या नहीं होगी।
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हाई रिस्क गर्भधारण की विशेष निगरानी
राजस्थान में 37 हजार से अधिक हाई रिस्क प्रेग्नेंसी केस चिन्हित बताए गए हैं।
इनमें प्रमुख रूप से कई जिलों में अधिक संख्या पाई गई है।
सरकार ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक हाई रिस्क गर्भवती महिला की नामवार सूची तैयार की जाए और उसकी नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।
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एनीमिया पर विशेष फोकस
प्रमुख शासन सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) ने हाई रिस्क गर्भवतियों में एनीमिया के मामलों को गंभीर मानते हुए विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं।
कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों की समीक्षा भी की जाएगी ताकि मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हो सके।
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हाल की घटनाओं के बाद लिया गया निर्णय
हाल ही में राजस्थान के विभिन्न जिलों में प्रसूताओं की मृत्यु के मामले सामने आए थे।
इन घटनाओं के बाद सरकार ने पूरे सिस्टम की समीक्षा शुरू की और हाई रिस्क गर्भधारण की ट्रैकिंग, निगरानी तथा रेफरल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए यह नई पहल शुरू करने का निर्णय लिया।
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नर्सिंग स्टाफ की भूमिका और महत्वपूर्ण होगी
इस व्यवस्था में नर्सिंग स्टाफ की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।
यदि किसी अस्पताल में नर्सिंगकर्मी को "प्रसव सखी" की जिम्मेदारी दी जाती है तो वह मरीज को विभिन्न सेवाओं से जोड़ने, समन्वय करने और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने में प्रमुख भूमिका निभाएगा।
हालांकि चिकित्सा निर्णय, उपचार और दवा संबंधी अधिकार डॉक्टरों के पास ही रहेंगे।
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मरीजों को क्या लाभ मिलेगा?
यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो—
✔ मरीजों को अस्पताल में भटकना कम पड़ेगा।
✔ समय पर जांच और उपचार में सहायता मिलेगी।
✔ रेफरल प्रक्रिया बेहतर होगी।
✔ हाई रिस्क गर्भवतियों की नियमित निगरानी होगी।
✔ अस्पताल में मरीज और परिजनों को बेहतर मार्गदर्शन मिलेगा।
✔ सुरक्षित संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिलेगा।
✔ मातृ एवं नवजात मृत्यु दर कम करने में सहायता मिल सकती है।
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अंतिम बात
"प्रसव सखी" व्यवस्था राजस्थान सरकार की एक महत्वपूर्ण मरीज-केंद्रित पहल के रूप में सामने आई है। इसका मुख्य उद्देश्य हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को समय पर समन्वित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना, अस्पतालों में बेहतर मार्गदर्शन देना और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना है।
ध्यान दें: वर्तमान में उपलब्ध जानकारी समाचार रिपोर्टों एवं सरकारी घोषणा पर आधारित है। विस्तृत सरकारी आदेश (GO), SOP या संचालन दिशानिर्देश जारी होने के बाद ही यह पूरी तरह स्पष्ट होगा कि यह व्यवस्था किन अस्पतालों में, किस चरण में, किन कर्मचारियों के माध्यम से और किन विस्तृत नियमों के तहत लागू की जाएगी।
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स्रोत: राजस्थान सरकार की आधिकारिक जानकारी एवं विभिन्न समाचार रिपोर्टों के आधार पर तैयार।