19/07/2026
सातवें दिन लगने वाला इंसुलिन किसके लिए..?
-शुगर मरीजों के लिए l
साल में 365 की जगह केवल 52 इंजेक्शन ही लगाने होंगे।
किन लोगों के लिए यह इंजेक्शन ठीक रहेगा, किनके लिए नहीं? क्या-क्या बातें ध्यान में रखने की ज़रूरत है?
अगर डायबीटीज़ के मरीज़ अनुशासित जीवन जिएं, वक्त पर और सही मात्रा में सही चीज़ खाएं, हर दिन फिजिकल ऐक्टिविटी करें, दवा सही वक्त पर लें। रात को जल्दी सो जाएं और 6 से 8 घंटें की नींद पूरी करने के बाद ही उठें। उन्हें स्ट्रेस को काबू करना आ जाए तो वे किसी भी सामान्य शख्स की तुलना में ज्यादा हेल्दी और लंबी उम्र जी सकते हैं। लेकिन ऐसा कुछ ही लोग कर पाते हैं। आमतौर पर ज्यादातर डायबीटीज़ के मरीज़ न तो अपने भोजन और न उठने-सोने का रुटीन अनुशासित कर पाते हैं। नतीजा यह कि शुगर काबू में नहीं रहती। जिससे उस शख्स के शरीर के दूसरे अंगों पर भी असर पड़ता है। ऐसे में हफ्ते में एक बार लगने वाली इंसुलिन शुगर मरीज़ को अनुशासित जीवन जीने में न सिर्फ मदद करेगी, बल्कि हर दिन इंसुलिन लेने में लगने वाली सुई के झंझट से भी बचाएगी। लेकिन यह भी सच है कि यह सभी शुगर के मरीज़ों के लिए बराबर मुफीद नहीं है।
काम करने के तरीके के आधार पर इंसुलिन 2 तरह की
1. Basal (बेसल) Insulin: इसे बैक्रग्राउंड इंसुलिन भी कहा जाता है। यह पूरे दिन-रात से लेकर अब पूरे हफ्ते तक काम करती है। यह लंबे समय तक ब्लड शुगर के लेवल को स्थिर रखने में मदद करती है। Awiqli सप्ताहिक इंसुलिन भी एक बेसल इंसुलिन ही है। लेकिन यह खाने के समय लगने वाले तेज़ असर वाले इंसुलिन (Bolus Insulin) का ऑप्शन नहीं है।
2. Bolus (बोलस) Insulin: यह इंसुलिन खाने के बाद ब्लड शुगर के स्तर में अचानक होने वाली बढ़ोतरी को काबू करने के लिए लिया जाता है।
Awiqli एक अल्ट्रा-लॉन्ग ऐक्टिंग बेसल इंसुलिन है। इसका जेनेरिक नाम Insulin Icodec ( इंसुलिन आइकोडेक) है।
कब लगानी है, लगाने में क्या रखें ध्यान?
इसे सप्ताह में एक बार ही लगाना है। साथ ही हर बार लगभग एक ही दिन और करीब-करीब एक ही समय पर स्किन के नीचे लगाई जाती है, जैसा कि पहले के इंसुलिन इंजेक्शन लगते रहे हैं।
अगर फास्टिंग (उपवास) पर हैं तो?
अगर Awiqli इंसुलिन लिया है तो व्रत यानी फास्ट न रखें। अगर बेहद ज़रूरी हो तो Awiqli न लगाना ही बेहतर है या फिर अपने डॉक्टर की सलाह ज़रूर ले लें। ऐसा न करने से लो शुगर होने की आशंका हो सकती है। लो शुगर की स्थिति हाई शुगर से ज्यादा खतरनाक मानी जाती है।
सबसे बड़ी खासियत इसकी लॉन्ग हाफ-लाइफ (करीब-करीब 8 दिन) है। यही वजह है कि मरीज़ को रोज इंजेक्शन लगाने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
ध्यान देने वाली बात यह है कि यह सिर्फ बेसल इंसुलिन है। जिन मरीज़ों को खाने के साथ रैपिड-ऐक्टिंग (तेजी से असर करने वाले) इंसुलिन की ज़रूरत होती है, उन्हें वह पहले की तरह अलग से लेना होगा। सिर्फ Awiqli से काम नहीं बनेगा, खासकर टाइप-1 डायबिटीज़ में।
इन मरीज़ों के लिए ज्यादा फायदेमंद...
-जो रोज इंजेक्शन लगाना भूल जाते हैं।
-जिन्हें रोज इंजेक्शन लगाने से डर लगता है।
-जिनकी बेसल इंसुलिन की ज़रूरत स्थिर है।
-टाइप-2 डायबीटीज़ के वे मरीज़ जिन्हें लंबे समय से इंसुलिन शुरू करने की सलाह दी जा रही थी, लेकिन वे इंजेक्शन के डर से टाल रहे थे।
इन्हें न दें यह इंसुलिन
-बार-बार हाइपोग्लाइसीमिया (लो शुगर की परेशानी) होता हो।
-इंसुलिन की ज़रूरत तेजी से बदलती रहती हो यानी शुगर कभी ज्यादा तो कभी कम होता हो।
-किडनी या लिवर की गंभीर बीमारी हो।
-प्रेग्नेंसी में या ब्रेस्ट फीडिंग कराने वाली महिलाओं को भी नहीं लेना है।
-डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (DKA) जैसी इमरजेंसी की स्थिति हो। इसमें इंसुलिन की कमी से कोशिकाएं ग्लूकोज़ का उपयोग नहीं कर पातीं और इसके बजाय फैट को तोड़ना शुरू कर देती हैं। इससे ब्लड में कीटोन नामक खतरनाक एसिड जमा हो जाते हैं।