Pt. Akhileshwar Dutt Dwivedi

Pt. Akhileshwar Dutt Dwivedi सुख शांति की इच्छा रखने वाले जीव कर्णों से ज्ञान रस का पान करें।

Astrologer
#ज्योतिर्विदपंडितअखिलेश्वरदत्तद्विवेदी
*सुख शांति की इच्छा रखने वाले जीव कर्णों से ज्ञान रस का पान करें।*

*सत्य ही सनातन धर्म है, यह जीवन, शक्ति और प्रेम तीनों प्रदान करता है, इनके प्रति मात्र संकल्प धारण करें।।*

*संकलन ज्योतिर्विद पंडित अखिलेश्वर दत्त द्विवेदी दत्त द्विवेदी*

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01/06/2024
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12/11/2023

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*दीपावली पर्व पर श्रीरामचंद्राष्टकम् दीपावली महोत्सव पर भगवान श्री सीताराम आगमन स्तुति*

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https://youtu.be/sbVpl_wsIQ4?si=M9GDpWT9N823nSDjनवरात्रि का प्रथम दिवस माता शैलपुत्री का होता है माता शैलपुत्री की असीम ...
15/10/2023

https://youtu.be/sbVpl_wsIQ4?si=M9GDpWT9N823nSDj

नवरात्रि का प्रथम दिवस माता शैलपुत्री का होता है माता शैलपुत्री की असीम कृपा आप सभी पर बनी रहे जिसके प्रभाव से आप सभी की मनोरथ पूर्ण हो।

*नवरात्रि : पहली देवी शैलपुत्री की पावन कथा...*

अनंत शक्तियों से संपन्न हैं नवरात्रि की पहली देवी मां शैलपुत्री का स्वरूप

वन्दे वांच्छितलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्‌।

वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्‌ ॥

नवरात्रि में दुर्गा पूजा के अवसर पर दुर्गा देवी के नौ रूपों की पूजा-उपासना बहुत ही विधि विधान से की जाती है। इन रूपों के पीछे तात्विक अवधारणाओं का परिज्ञान धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विकास के लिए आवश्यक है। आइए जानते हैं मां शैलपुत्री के बारे में... मां दुर्गा को सर्वप्रथम शैलपुत्री के रूप में पूजा जाता है। हिमालय के वहां पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण उनका नामकरण हुआ शैलपुत्री। इनका वाहन वृषभ है, इसलिए यह देवी वृषारूढ़ा के नाम से भी जानी जाती हैं। इस देवी ने दाएं हाथ में त्रिशूल धारण कर रखा है और बाएं हाथ में कमल सुशोभित है। यही देवी प्रथम दुर्गा हैं। ये ही सती के नाम से भी जानी जाती हैं। उनकी एक मार्मिक कहानी है। एक बार जब प्रजापति ने यज्ञ किया तो इसमें सारे देवताओं को निमंत्रित किया, भगवान शंकर को नहीं। सती यज्ञ में जाने के लिए विकल हो उठीं। शंकरजी ने कहा कि सारे देवताओं को निमंत्रित किया गया है, उन्हें नहीं। ऐसे में वहां जाना उचित नहीं है। सती का प्रबल आग्रह देखकर शंकरजी ने उन्हें यज्ञ में जाने की अनुमति दे दी। सती जब घर पहुंचीं तो सिर्फ मां ने ही उन्हें स्नेह दिया। बहनों की बातों में व्यंग्य और उपहास के भाव थे। भगवान शंकर के प्रति भी तिरस्कार का भाव है। दक्ष ने भी उनके प्रति अपमानजनक वचन कहे। इससे सती को क्लेश पहुंचा। वे अपने पति का यह अपमान न सह सकीं और योगाग्नि द्वारा अपने को जलाकर भस्म कर लिया। इस दारुण दुःख से व्यथित होकर शंकर भगवान ने उस यज्ञ का विध्वंस करा दिया। यही सती अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्मीं और शैलपुत्री कहलाईं। पार्वती और हेमवती भी इसी देवी के अन्य नाम हैं। शैलपुत्री का विवाह भी भगवान शंकर से हुआ। शैलपुत्री शिवजी की अर्द्धांगिनी बनीं। इनका महत्व और शक्ति अनंत है।

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28/08/2023

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#ज्योतिर्विदपंडितअखिलेश्वरदत्तद्विवेदीसुख शांति की इच्छा रखने वाले जीव कर्णों से आनन्द रस का पान करें।💐*सुख शा....

04/07/2023

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सुख शांति की इच्छा रखने वाले जीव कर्णों से ज्ञान रस का पान करें। सत्य ही सनातन धर्म है, यह जीवन, शक्ति और प्रेम तीनों प्रदान करता है, इनके प्रति मात्र संकल्प धारण करें।। *संकलन ज्योतिर्विद पंडित अखिलेश्वर दत्त द्विवेदी दत्त द्विवेदी*

*शरद पूर्णिमा महत्व और कथा*इस वर्ष रविवार, 9 अक्टूबर 2022 को शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima) का व्रत रखा जा रहा है। इस दिन...
09/10/2022

*शरद पूर्णिमा महत्व और कथा*

इस वर्ष रविवार, 9 अक्टूबर 2022 को शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima) का व्रत रखा जा रहा है। इस दिन छत या गैलरी पर चंद्रमा के प्रकाश में चांदी के बर्तन में दूध या खीर को रखा जाता है। फिर उसे भगवान को भोग लगाने के बाद खाने की परंपरा है। एक साहूकार के दो पुत्रियाँ थी। दोनों पुत्रियाँ पूर्णिमा का व्रत रखती थी। परन्तु बड़ी पुत्री पूरा व्रत करती थी और छोटी पुत्री अधूरा व्रत करती थी। परिणाम यह हुआ कि छोटी पुत्री की सन्तान के जन्म होते ही मर जाती थी। उसने पण्डितों से इसका कारण पूछा तो उन्होंने बताया की तुम पूर्णिमा का अधूरा व्रत करती थी जिसके कारण तुम्हारी सन्तान का जन्म होते ही मर जाती है। पूर्णिमा का पूरा विधिपूर्वक व्रत करने से तुम्हारी सन्तान जीवित रह सकती है।

उसने पण्डितों के परामर्श पर पूर्णिमा का पूरा व्रत विधिपूर्वक किया। उसके लड़का हुआ परन्तु शीघ्र ही मर गया। उसने लड़के को पीढे पर लिटाकर ऊपर से कपड़ा ढक दिया। फिर बड़ी बहन को बुलाकर लाई और बैठने के लिए वही पीढा दे दिया। बड़ी बहन जब पीढे पर बैठने लगी जो उसका घाघरा बच्चे का छू गया। बच्चा घाघरा छूते ही रोने लगा। बड़ी बहन बोली-” तू मुझे कलंक लगाना चाहती थी। मेरे बैठने से यह मर जाता।“ तब छोटी बहन बोली, ” यह तो पहले से मरा हुआ था। तेरे ही भाग्य से यह जीवित हो गया है। तेरे पुण्य से ही यह जीवित हुआ है। “फिर नगर में उसने पूर्णिमा का पूरा व्रत करने का ढिंढोरा पिटवा दिया।

शरद पूर्णिमा, जिसे कोजागरी पूर्णिमा व रास पूर्णिमा भी कहते हैं; हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा को कहते हैं। ज्‍योतिष के अनुसार, पूरे वर्ष में केवल इसी दिन चन्द्रमाँ सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। हिन्दू धर्म में इस दिन कोजागर व्रत माना गया है। इसी को कौमुदी व्रत भी कहते हैं। इसी दिन श्रीकृष्ण ने महारास रचाया था। मान्यता है इस रात्रि को चन्द्रमा की किरणों से अमृत झड़ता है। तभी इस दिन उत्तर भारत में खीर बनाकर रात भर चाँदनी में रखने का विधान है।
शरद पूर्णिमाइस प्रकार प्रतिवर्ष किया जाने वाला यह कोजागर व्रत लक्ष्मीजी को संतुष्ट करने वाला है। इससे प्रसन्न हुईं माँ लक्ष्मी इस लोक में तो समृद्धि देती ही हैं और शरीर का अन्त होने पर परलोक में भी सद्गति प्रदान करती हैं।

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04/04/2022

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*नवरात्रि का तृतीय दिवस माता चंद्रघंटा के शुभ आगमन पर आप सभी को इस हिंदू नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाए*

नवरात्रि का तृतीय दिवस माता चंद्रघंटा के शुभ आगमन पर आप सभी को इस हिंदू नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाए

19/10/2021

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23/09/2021

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