Ravi Agrahari

Directions Website Contact the practice

Ravi Agrahari [ Senior Journlist | Trustee: NVF | Clinical Psychologist, Psycho-Spiritualist, Counsellor and Energy Therapist] What you know is just a pinch of unknown.

एक दिन छह साल का एक छोटा-सा बच्चा अपनी चार साल की बहन का हाथ थामे बाजार से गुजर रहा था। रास्ते में अचानक उसे महसूस हुआ क...
12/08/2026

एक दिन छह साल का एक छोटा-सा बच्चा अपनी चार साल की बहन का हाथ थामे बाजार से गुजर रहा था। रास्ते में अचानक उसे महसूस हुआ कि बहन पीछे रह गई है।

वह तुरंत रुका और पीछे मुड़कर देखा। उसकी छोटी बहन एक खिलौने की दुकान के सामने खड़ी थी और बड़ी मासूमियत से एक गुड़िया को निहार रही थी।

भाई उसके पास गया और प्यार से पूछा, “तुम्हें ये गुड़िया चाहिए?”

बहन ने कुछ नहीं कहा, बस अपनी उंगली से गुड़िया की ओर इशारा कर दिया।

भाई ने उसका हाथ पकड़ा, गुड़िया उठाई और उसे अपनी बहन को दे दी। गुड़िया पाकर बहन के चेहरे पर ऐसी खुशी आई, जैसे उसे दुनिया का सबसे बड़ा उपहार मिल गया हो।

दुकानदार चुपचाप यह सब देख रहा था। बच्चों के इस निश्छल प्रेम ने उसे भीतर तक छू लिया।

दोनों भाई-बहन गुड़िया लेकर काउंटर पर पहुँचे।

भाई ने बड़े आत्मविश्वास से पूछा, “सर, इसकी कीमत कितनी है?”

दुकानदार मुस्कुराया और बोला, “बेटा, तुम्हारे पास क्या है?”

बच्चे ने तुरंत अपनी जेब में हाथ डाला और कुछ सीपियाँ निकालकर काउंटर पर रख दीं।

वे वही सीपियाँ थीं, जिन्हें उसने कुछ देर पहले अपनी बहन के साथ समुद्र किनारे बड़ी मेहनत और खुशी से चुन-चुनकर इकट्ठा किया था।

दुकानदार ने उन सीपियों को ऐसे गिनना शुरू किया, जैसे कोई बहुत बड़ी रकम गिन रहा हो। गिनने के बाद उसने बच्चे की ओर देखा।

बच्चे ने मासूमियत से पूछा, “सर... कुछ कम है क्या?”

दुकानदार मुस्कुराया, “नहीं बेटा। ये तो इस गुड़िया की कीमत से भी ज्यादा हैं।”

फिर उसने केवल चार सीपियाँ अपने पास रखीं और बाकी सीपियाँ बच्चे की हथेली पर वापस रखते हुए कहा, “ये तुम्हारी बाकी रकम।”

बच्चा खुशी से अपनी सीपियाँ जेब में रखता है, बहन का हाथ पकड़ता है और दोनों मुस्कुराते हुए दुकान से चले जाते हैं।

कुछ देर तक दुकान का कर्मचारी यह सब देखता रहा। फिर उसने हैरानी से दुकानदार से पूछा, “मालिक, वह गुड़िया तो काफी महँगी थी। आपने सिर्फ चार सीपियों के बदले उसे दे दिया?”

दुकानदार ने मुस्कुराकर कहा, “हमारे लिए ये सिर्फ सीपियाँ हैं। लेकिन उस बच्चे के लिए ये उसकी जमा की हुई सबसे कीमती चीजें थीं।”

वह थोड़ी देर रुका और फिर बोला, “बच्चा अभी इतना छोटा है कि उसे पैसों की असली कीमत नहीं पता, लेकिन उसे अपनी बहन की खुशी की कीमत जरूर पता है।”

“शायद आज उसे यह भी नहीं पता कि मैंने उसके साथ क्या किया। लेकिन जब वह बड़ा होगा और कभी उसे यह घटना याद आएगी, तो शायद वह सोचेगा—‘उस दुनिया में एक ऐसा इंसान भी था, जिसने मेरी मासूमियत की कीमत समझी थी।"

“और शायद वही याद उसके भीतर यह विश्वास बनाए रखेगी कि दुनिया में अच्छाई अभी भी मौजूद है।”

“फिर हो सकता है, एक दिन वह भी किसी जरूरतमंद के लिए वही करे जो मैंने आज उसके लिए किया।”

क्योंकि कभी-कभी हम किसी बच्चे को सिर्फ एक खिलौना नहीं देते। हम उसे दुनिया पर भरोसा करना सिखाते हैं।

हम उसे बताते हैं कि उसकी मासूमियत का भी मूल्य है।
और शायद सबसे खूबसूरत बात यही है—

अच्छाई का सबसे बड़ा पुरस्कार यह नहीं कि कोई हमें याद रखे; बल्कि यह है कि हमारी अच्छाई किसी दूसरे इंसान को भी अच्छा बनने के लिए प्रेरित कर दे। चार सीपियों की कीमत शायद एक गुड़िया से भी कम थी,
लेकिन उस बच्चे के दिल में उनकी कीमत जिंदगी भर की हो सकती थी।

10/08/2026

जहाँ बीजेपी है वहाँ गिरोह को प्रधानमंत्री को गाली देने, ठोक देने और मरने की दुआ से लेकर जीते जी तेरही तक की छूट चाहिए?

लेकिन जहाँ कांग्रेस या आम आदमी पार्टी है ये खुद को ही क्लीन चिट देकर हर मामले में बरी कर लेते हैं। पंजाब में पेपर लीक पर जो हुआ सबने देखा ही है, केरल में छात्रों पर वॉटर कैनन और पुलिस प्रताड़ना किसी से छिपी नहीं है। कर्नाटक में तो कांग्रेस की सरकार तब एक्शन लेगी जब छात्र 25 दिन तक पहले भूख हड़ताल करें और लाठी खाएँ तब?

बाकी झारखण्ड में, कल कई पत्रकारों ने दिखाया कि पुलिस खुलेआम पैलेट गन लेकर प्रदर्शन स्थल पर घूम रही है जबकि वहाँ न छात्र कोई उपद्रव कर रहे, न पत्थरबाजी और न ही उस आंदोलन में जिहादियों, अपराधियों और अराजकों की घुसपैठ है और न कोई राजनीतिक पार्टी वहाँ छात्रों को खुला समर्थन देने गया। बॉलीवुड, लिबरल कट्टरपंथी गैंग सब झारखण्ड पर मौन हैं। फिर भी पुलिस ने कटीली तार से घेरकर उसे बॉर्डर बना दिया है।

जंतर-मंतर पर हो-हल्ला मचाने वाले तमाम पत्रकारों के पास झारखण्ड जाने का बजट नहीं है और जो गए हैं वो पुलिस के निशाने पर हैं। सीधा होटल तक पुलिस आ जा रही है कि जब हमारी पप्पू मीडिया शांत है तो आप काहें कवर कर रहे हैं ये आंदोलन?

आज सुबह पत्रकार अमन चोपड़ा को झारखंड पुलिस नाश्ते के टेबल से उठा कर ले गई। उनका 'अपराध' सिर्फ इतना है कि वे झारखंड आंदोलन को कवर कर रहे थे।

लेकिन “तानाशाह” तो मोदी हैं। वो गाली देते, मरने की दुआ करते बच्चों को भी माफ कर देता है।

हाँ, अमन चोपड़ा पर इस पुलीसिया कार्रवाई पर भी पूरा गिरोह चुप्पी साध लेगा। यही इनका दोगलापन और धूर्तता है।

09/08/2026

"मैं 56 साल से प्रधानमंत्री बनने की तैयारी कर रहा हूँ, आज भी मुझे पूरा मेरा गिरोह युवा नेता कहता है, कल मैंने पिंक सर्ट क्या पहन ली पूरा सिस्टम हिल गया। मोदी, अमित शाह, RSS काँपने लगे।

अल्लाबाद में 10 हजार की कांग्रेस, NSUI कार्यकर्ताओं और कुछ छात्रों की भीड़ ने सिस्टम हिला दिया, अपना मत जाहिर कर दिया। मूत दिया करोड़ों लोगों द्वारा मोदी को चुनने पर यह है इकोसिस्टम की ताकत?

बाकी सोशल मीडिया पर आपने फेमिनिस्ट, LGBTQ, वामपंथियों, जिहादियों और कांग्रेसियों का पोस्ट देख ही लिया होगा, सुप्रिया, पप्पू मीडिया सहित सब आहें भर रहे थे किसी को मेरी मुस्कान पसंद थी तो कोई गुलाबी सर्ट पर ही फ़िदा था।

फैसला कल ही हो गया था। वो तो देश का सिस्टम खराब है जो पिंक सर्ट और मुस्कान पर प्रधानमंत्री नियुक्त नहीं कर रहा है। अब समय आ गया है, हमें इस सिस्टम को बदलना होगा!"

राहुल गांधी के कल के लॉजिक से तो यही लग रहा है कि सोशल मीडिया पर सिर्फ इस आधार पर प्रधानमंत्री बना देना चाहिए कि तैयारी करते-करते 56 साल बीत गए। अब और इंतजार नहीं होगा, सिस्टम बदलना होगा। और कांग्रेस का नया सिस्टम केवल सर्ट बदलने से प्रधानमंत्री बदल देगा?

बताईए कैसा-कैसा लॉजिक कल उछाला गया अल्लाबाद के मंच से- कोई बिहार का छात्र है, पता नहीं यह अल्लाबाद में तैयारी कर रहा था या बिहार से विशेष तौर पर बुलाया गया था। जिसका लॉजिक था- "मैंने 2018 में अपनी तैयारी शिक्षक भर्ती परीक्षा के लिए शुरू की थी और 2018 से लेकर आज भी मैं उसी की तैयारी कर रहा हूँ।"

वैसे ही जैसे युवराज जी 56 साल से प्रधानमंत्री बनने की तैयारी कर रहे हैं?

अबे सा... माफ कीजिएगा गाली नहीं देना चाहता। भाऊ 8 साल से तैयारी कर रहे हो तो इसीलिए तुम्हें शिक्षक बना दिया जाए?

लाखों शिक्षकों की भर्ती हुई है तब से, जब से तुम तैयारी कर रहे हो, जब योग्यता नहीं है तो तुझे ऐसे ही टीचर की नौकरी दे दिया जाए?

गजब मूर्खता चल रही है भाई?

और कांग्रेस इसे अपने मंच से उछाल कर बच्चों को बेवकूफ भी बना रही है। जैसे कांग्रेस के समय 70 सालों तक किसी को इसलिए नौकरी दे दी जाती थी कि वो लम्बे समय से तैयारी कर रहा है? या कह रहा है कि तैयारी कर रहा है। पता नहीं उसकी आड़ में 8 साल से NSUI में ही अपना समय खराब क्यों न कर रहा हो।

सेटिंग, घोटाला, नकल और पेपर लीक आम बात थी कांग्रेस के शासन में, यहाँ तक कि परीक्षा कोई और देता था और नौकरी किसी और को मिलती थी। वो भी लम्बे अंतराल पर।

शिक्षा, विकास या किसी भी पैरामीटर पर मोदी सरकार कांग्रेस से बहुत आगे है लेकिन तथ्यों और तर्कों पर बात किसे करनी है? हाँ, अभी भी बहुत काम की आवश्यकता है लेकिन चूतियों और चुनौतियों से निपटते हुए उत्तरोत्तर विकास ही कर रही है।

गजबे पप्पू लॉजिक है भाई, मतलब कोई कहे कि वह 2018 से सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहा है तो मोदी सरकार उसको सीधे आईएएस बना दे?

अगर कोई 2018 से NEET की तैयारी कर रहा है तो सरकार सीधे उसे दिल्ली एम्स में दाखिला दे दे?

वीडियो में ये भाई 2018 से तैयारी कर रहा है और इस बीच अकेले उत्तर प्रदेश में शिक्षकों की दो बड़ी वैकेंसी आ चुकी है जिसमें 2019 में 80000 शिक्षकों की वैकेंसी आई थी। उसके बाद पुलिस की वैकेंसी आई, बिहार में भी 2023 तक के शिक्षकों की वैकेंसी को नियुक्ति मिल चुकी है।

लेखपाल की वैकेंसी आई, उसके बाद जूनियर इंजीनियर की वैकेंसी आई। फिर भी तुम सेलेक्ट नहीं हो पा रहे हो तो कमी मोदी सरकार की है?

अभी जंतर-मंतर पर आंदोलन के नाम पर जो गालीगलौज हुआ, सारी मर्यादा लांघी गई। आतंकी हमले साजिश और हजारों अपराधियों की वहाँ उपस्थिति से होने वाले नुकसान से छात्रों और देश के नागरिकों को बचाने के लिए दो कदम बीजेपी ने पीछे क्या लिया कि कॉकरोचों को लगा कि मोदी सरकार उनसे डर गई, और कांग्रेस को तमाम फेल मुद्दों के बाद छात्रों को उकसाने, अराजकता को बढ़ावा देने में जैसे प्रधानमंत्री बनने की उम्मीद दिखाई देने लगी।

उधर धूर्तता की प्रतिमूर्ति केजरीवाल खुलेआम कह रहा है कि जंतर-मंतर पर अराजकों की भीड़ "मोदी को ठोकने" आई थी। ऐसी मंशा कांग्रेस भी जाहिर कर चुकी है लेकिन वो क्या है न हर पापी और धूर्त की मनोकामना यदि पूर्ण होने लगी तो इस संसार में अच्छे और सच्चे लोगों के लिए जगह नहीं बचेगी।

कोई भी यदि वह छात्र है तो इन धूर्तों और वामपंथियों के बहकावे में न आए, सही दिशा में मेहनत की जाए तो सफलता जरूर मिलेगी।

आज देश में जो इतने विरोधियों, अराजकों और देश विरोधी ताकतों के तमाम प्रयास के बावजूद शांति है, देश तरक्की कर रहा है और अमेरिका सहित कई देश भारत के ग्रोथ से परेशान हैं, पाकिस्तान और बांग्लादेश सड़क पर हैं तो यह सब मोदी सरकार की वजह से है।

जो जलें, कुढ़े उन्हें बर्नाल मुबारक।

हाँ, जब तक देश में संविधान है और लोगों के मतदान की ताकत सुरक्षित है तब तक कोई भी केवल मुस्कान, पिंक सर्ट और वामपंथियों की सिफारिश के आधार पर प्रधानमंत्री तो नहीं बन सकता, चाहे जितना कोई सिस्टम को कोस ले, यही बाबा साहब अम्बेडकर के संविधान की ताकत, व्यवस्था और सिस्टम है। जय हिन्द।

08/08/2026

संसद में FCRA बिल की आहट पर इस एनीमेशन वीडियो में देखिए कि जंतर-मंतर पर आंदोलन के नाम पर कैसे एक गहरी साजिश रची गई थी और कैसे इस साजिश में न सिर्फ देश के अंदर के जिहादी, देश विरोधी और भारत को अस्थिर करने वाली ताकतों के साथ ही पाकिस्तान सीआईए के साथ मिलकर एक ख़तरनाक मंसूबे को अंजाम देने वाला था।

काहें परेशान है कांग्रेस कि मोदी कहाँ हैं, अमित शाह कहाँ हैं, वह यहीं हैं और जब-जब देश के खिलाफ साजिशों का जाल बुना गया है वो दिन रात एक करके नाकाम किए हैं।

जल्दी ही संसद में सबका जवाब मिलेगा। बाकी पर्दे के पीछे जो खेल रचा गया उसका खुलासा तो पंजाब पुलिस के आला अधिकारी ने कर दिया। जिनको केजरीवाल सरकार ने हटाकर अपनी मिलीभगत का सबूत भी खुद ही दे दिया।

वीडियो थोड़ा लम्बा है लेकिन एक साथ कई फ्रंट पर खुलासे करती है। बहुत सी बातें आपको पता है। कुछ आपको चौकाएंगी लेकिन उनकी सच्चाई कन्वसिंग है।

#साभार

25/05/2026

हार कुमार का ये गाना देखा क्या?

23/03/2026

हम केवल Pok लेना चाहते हैं वहाँ पाकिस्तानी भीखमंगई और महंगाई से तंग आकर पूरा पाकिस्तान देने को तैयार हैं!

लाहौल विला कुवत! ये क्या हो रहा है!

सत्ता के लालच और वोट बैंक की राजनीति ने देश का कितना बड़ा नुकसान किया है, ये आँकड़े उसका जीता-जागता प्रमाण हैं! यूपीए सर...
13/03/2026

सत्ता के लालच और वोट बैंक की राजनीति ने देश का कितना बड़ा नुकसान किया है, ये आँकड़े उसका जीता-जागता प्रमाण हैं! यूपीए सरकार के समय जारी किए गए 'तेल बांड' का 3.23 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज मोदी सरकार को अपनी तरफ से चुकाना पड़ा है।

जरा सोचिए, करदाताओं की गाढ़ी कमाई का जो पैसा विकास में लगना चाहिए था, उससे 200 नए AIIMS, 25,000 किमी से ज्यादा हाईवे, 1000 किमी मेट्रो और 1.3 करोड़ गरीबों के लिए पक्के घर बन सकते थे। लेकिन वह सारा पैसा पिछली सरकार की गलत नीतियों की भेंट चढ़ गया।

एक तरफ वो लोग हैं जिन्होंने देश के भविष्य को कर्ज के बोझ तले दबाया, और दूसरी तरफ वो नेतृत्व है जो ईमानदारी से पिछला कर्ज उतार कर एक सशक्त, सुरक्षित और आत्मनिर्भर राष्ट्र का निर्माण कर रहा है। देश का पैसा अब सही हाथों में है। फर्क बिल्कुल साफ है! 🇮🇳

​

27/02/2026

रंगभरी एकादशी पर माँ गौरा का गौना कराकर अपने धाम पहुँचे बाबा काशी विश्वनाथ!

एक राजा को राज भोगते हुए काफी समय हो गया था। बाल भी सफ़ेद होने लगे थे। एक दिन उसने अपने दरबार में एक उत्सव रखा और अपने ग...
01/01/2026

एक राजा को राज भोगते हुए काफी समय हो गया था। बाल भी सफ़ेद होने लगे थे। एक दिन उसने अपने दरबार में एक उत्सव रखा और अपने गुरुदेव एवं मित्र देश के राजाओं को भी सादर आमन्त्रित किया। उत्सव को रोचक बनाने के लिए राज्य की सुप्रसिद्ध नर्तकी को भी बुलाया गया।

राजा ने कुछ स्वर्ण मुद्रायें अपने गुरु जी को भी दीं, ताकि यदि वे चाहें तो नर्तकी के अच्छे गीत व नृत्य पर वे उसे पुरस्कृत कर सकें। सारी रात नृत्य चलता रहा। ब्रह्म मुहूर्त की बेला आई। नर्तकी ने देखा कि मेरा तबले वाला ऊँघ रहा है, उसको जगाने के लिए नर्तकी ने एक दोहा पढ़ा-

"बहु बीती, थोड़ी रही, पल पल गयी बिताय।
एक पलक के कारने, क्यों कलंक लग जाय।"

अब इस दोहे का अलग-अलग व्यक्तियों ने अपने अनुरुप अलग-अलग अर्थ निकाला। तबले वाला सतर्क होकर बजाने लगा। जब यह बात गुरु जी ने सुनी तो उन्होंने सारी मोहरें उस नर्तकी के सामने फेंक दीं।

वही दोहा नर्तकी ने फिर पढ़ा तो राजा की लड़की ने अपना नवलखा हार नर्तकी को भेंट कर दिया।

उसने फिर वही दोहा दोहराया तो राजा के पुत्र युवराज ने अपना मुकट उतारकर नर्तकी को समर्पित कर दिया।

नर्तकी फिर वही दोहा दोहराने लगी तो राजा ने कहा-

"बस कर, एक दोहे से तुमने वैश्या होकर भी सबको लूट लिया है।"

जब यह बात राजा के गुरु ने सुनी तो गुरु के नेत्रों में आँसू आ गए और गुरु जी कहने लगे-

"राजा! इसको तू वेश्या मत कह, ये तो अब मेरी गुरु बन गयी है। इसने मेरी आँखें खोल दी हैं। यह कह रही है कि मैं सारी उम्र संयमपूर्वक भक्ति करता रहा और आखिरी समय में नर्तकी का मुज़रा देखकर अपनी साधना नष्ट करने यहाँ चला आया हूँ, भाई! मैं तो चला।"

यह कहकर गुरु जी तो अपना कमण्डल उठाकर जंगल की ओर चल पड़े।

राजा की लड़की ने कहा- "पिता जी! मैं जवान हो गई हूँ। आप आँखें बन्द किए बैठे हैं। मेरी शादी नहीं कर रहे थे और आज रात मैंने आपके महावत के साथ भागकर अपना जीवन बर्बाद कर लेना था। लेकिन इस नर्तकी ने मुझे सुमति दी है कि जल्दबाजी मत कर। कभी तो तेरी शादी होगी ही। क्यों अपने पिता को कलंकित करने पर तुली है?"

युवराज ने कहा - "पिता जी! आप वृद्ध हो चले हैं, फिर भी मुझे राज नहीं दे रहे थे। मैं आज रात ही आपके सिपाहियों से मिलकर आपका कत्ल करवा देता। लेकिन इस नर्तकी ने समझाया कि पगले! आज नहीं तो कल आखिर राज तो तुम्हें ही मिलना है, क्यों अपने पिता के खून का कलंक अपने सिर पर लेता है। धैर्य रख।"

जब ये सब बातें राजा ने सुनी तो राजा को भी आत्म ज्ञान हो गया। राजा के मन में वैराग्य आ गया। राजा ने तुरन्त फैसला लिया - "क्यों न मैं अभी युवराज का राजतिलक कर दूँ।"

फिर क्या था, उसी समय राजा ने युवराज का राजतिलक किया और अपनी पुत्री को कहा - "पुत्री! दरबार में एक से एक राजकुमार आये हुए हैं। तुम अपनी इच्छा से किसी भी राजकुमार के गले में वरमाला डालकर पति रुप में चुन सकती हो।"

राजकुमारी ने ऐसा ही किया और राजा सब त्याग कर जंगल में गुरु की शरण में चला गया।

यह सब देखकर नर्तकी ने सोचा - "मेरे एक दोहे से इतने लोग सुधर गए, लेकिन मैं क्यूँ नहीं सुधर पायी?" उसी समय नर्तकी में भी वैराग्य आ गया। उसने उसी समय निर्णय लिया कि आज से मैं अपना बुरा धंधा बन्द करती हूँ और कहा कि "हे प्रभु! मेरे पापों से मुझे क्षमा करना। बस, आज से मैं सिर्फ तेरा नाम सुमिरन करुँगी।"

समझ आने की बात है। दुनिया बदलते देर नहीं लगती। एक दोहे की दो लाईनों से भी हृदय परिवर्तन हो सकता है। बस, केवल थोड़ा धैर्य रखकर चिन्तन करने की आवश्यकता है।

प्रशंसा से पिघलना नहीं चाहिए, आलोचना से उबलना नहीं चाहिए। नि:स्वार्थ भाव से कर्म करते रहें। क्योंकि इस धरा का, इस धरा पर, सब धरा रह जाएगा।

#अंतर्मन

Address

Sunderpur
Varanasi

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Ravi Agrahari posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Practice

Send a message to Ravi Agrahari:

Shortcuts

Share

Category