Astrologer

Astrologer vastu shastra about your home and other problems rising because of it

27/09/2023

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क्रोध भी तब पुण्य बन जाता है,जब वह धर्म और
मर्यादा के लिए किया जाय। और सहनशीलता भी तब पाप बन जाती है
जब वह धर्म और मर्यादा को बचा न पाए।
🙏

07/10/2021

मंगल कवच
अङ्गारक कवच
अथ अङ्गारक कवचम्
अङ्गारकः शिरो रक्षेत् मुखं वै धरणीसुतः ।
श्रवौ रक्तम्बरः पातु नेत्रे मे रक्तलोचनः ॥ 1 ॥

नासां शक्तिधरः पातु मुखं मे रक्तलोचनः ।
भुजौ मे रक्तमाली च हस्तौ शक्तिधरस्तथा ॥2 ॥

वक्षः पातु वराङ्गश्च हृदयं पातु रोहितः ।
कटिं मे ग्रहराजश्च मुखं चैव धरासुतः ॥ 3 ॥

जानुजङ्घे कुजः पातु पादौ भक्तप्रियः सदा ।
सर्वाण्यन्यानि चाङ्गानि रक्षेन्मे मेषवाहनः ॥ 4 ॥

फलश्रुतिः
य इदं कवचं दिव्यं सर्वशत्रुनिवारणम् ।
भूतप्रेतपिशाचानां नाशनं सर्वसिद्धिदम् ॥

सर्वरोगहरं चैव सर्वसम्पत्प्रदं शुभम् ।
भुक्तिमुक्तिप्रदं नॄणां सर्वसौभाग्यवर्धनम् ॥

रोगबन्धविमोक्षं च सत्यमेतन्न संशयः ॥

॥ इति श्री मार्कण्डेयपुराणे अङ्गारक कवचं सम्पूर्णम् ॥

07/10/2021

अगर घर में लगा है तुलसी का पौधा तो न करें ये गलतियां, सुख-समृद्धि की बजाय आता है दुर्भाग्य....
आयुर्वेद में तुलसी को बहुत ही फायदेमंद माना गया है इसका उपयोग कई तरह के रोगों से बचने के लिए औषधी के रुप में किया जाता है। इसी के साथ सनातन धर्म में भी तुलसी का विशेष महत्व होता है। तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं। भगवान विष्णु के विग्रह स्वरुप शालीग्राम से तुलसी विवाह का विधान है। तुलसी को हरिवल्लभा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जिस घर में तुलसी के पौधे की नियमित देखभाल और पूजन होता है, वहां पर हमेशा सुख और समृद्घि बने रहते हैं। वास्तु में भी तुलसी का बहुत महत्व माना जाता है, तुलसी नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देती है। यदि आपके घर में भी तुलसी का पौधा लगा हुआ है तो कुछ बातों को ध्यान में रखना बहुत आवश्यक होता है। तुलसी को सौभाग्य दायक माना गया है लेकिन यदि इसे सही से न रखा जाए तो कुछ गलतियों की वजह से सौभाग्य के स्थान पर आपके जीवन में समस्याएं आ सकती हैं। तो चलिए जानते हैं कि तुलसी को घर में रखते समय नहीं करनी चाहिए कौन सी गलतियां।

तुलसी की दिशा-
पहले के समय में आंगन के बीचो-बीच तुलसी लगाई जाती थी लेकिन आज के समय में घरों का आकार बदल गया है, इसलिए तुलसी के लिए सही स्थान का चुनाव करना आवश्यक है। गलत दिशा में लगी तुलसी से फायदे की जगह नुकसान उठाना पड़ सकता है। घर की पूर्व यी दक्षिणृ-पूर्व दिशा में तुलसी नहीं रखनी चाहिए। तुलसी के पौधे को उत्तर दिशा से लेकर पूर्व-उत्तर यानी ईशान कोण में रखना शुभ रहता है।

सूखने न दें तुलसी-
यदि आपने घर में तुलसी रखी है तो उसका विशेष ध्यान रखना बहुत ही आवश्यक होता है। तुलसी के पौधे को कभी सूखने नहीं देना चाहिए। यदि तुलसी का पौधा सूखता है तो उसे दुर्भाग्य की निशानी माना जाता है। आपके घर में अगर तुलसी का पौधा सूख भी जाए तो उसे ऐसे ही न रखें। सूखी हुई तुलसी के स्थान पर नई तुलसी रोप दें और पुरानी तुलसी को जल में प्रवाहित कर देना चाहिए।

तुलसी के पास न रखें ये चीजें-
तुलसी को बहुत ही पवित्र और पूजनीय माना गया है, इसलिए इसके रख-रखाव में विशेष सावधानी बरतने की जरुरत होती है। तुलसी के पौधे के पास हमेशा सफाई रखनी चाहिए और इसके आस-पास जूते-चप्पल, गंदे कपड़े या फिर झाड़ू आदि नहीं रखनी चाहिए। तुलसी को हमेशा साफ हाथों से ही तोड़ना चाहिए अन्यथा तुलसी सूखने लगती है।

इस जगह न लगाएं तुलसी-
कुछ लोग अपने घरों में जमीन में भी तुलसी लगा देते हैं लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए। तुलसी को कभी भी जमीन में नहीं लगाना चाहिए। तुलसी का पौधा हमेशा गमले में लगाना ही सही रहता है। इसके अलावा तुलसी को छत के ऊपर लगाना भी सही नहीं माना जाता है।

तुलसी तोड़ते समय बरते ये सावधानी-
रविवार के दिन तुलसी नहीं तोड़नी चाहिए और न ही जल अर्पित करना चाहिए। इस बात का ध्यान रखें कि तुलसी को कभी भी खींचकर या फिर नाखून से न तोड़े। स्नानादि करने और हाथों को सही प्रकार से धोने के बाद ही तुलसी को छूना चाहिए। तुलसी को तोड़ते समय सर्वप्रथम प्रणाम करें उसके बाद ही तोड़ना चाहिए

24/09/2021

लाजवर्त रत्न धारण करने के फायदे बिजनेस में और फैक्ट्री कारोबार में सफलता के लिए धारण करें-
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लाजवर्त को धारण करने के बाद व्यक्ति पर राहु, शनि और केतु का दुष्प्रभाव खत्म हो जाता है। शनि , राहु और केतु के प्रकोप से बचाता है और दुर्भागय को दूर कर के व्यक्ति को सफलता दिलाता है।

व्यक्ति पर बुरी नजर, काला जादू , टोने – टोटके का प्रभाव नहीं होता है। लाजवर्त कोई भी व्यक्ति धारण कर सकता है और हमारे यहां से सिद्ध कर के भेजा जाता है । भारत के सभी राज्यों के शहरो और गाँवों में कोरियर या स्पीड पोस्ट से भेजने की सुविधा है और भारत के बाहर विदेश में भी भेजने की सुविधा है।

लाजवर्त पत्थर के लाभ :--
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लाजवर्त तीनो क्रूर ग्रहो (शनि, राहु और केतु ) के दोषो और दुष्प्रभावो को खत्म करता है।
यदि आपको शनि की साढ़ेसाती चल रही है तो आप लाजवर्त धारण कर सकते है और लाभ प्राप्त कर सकते है।

यदि किसी व्यक्ति द्वारा घर पर या आप पर कुछ किया-कराया हुआ अनुभव होता हो या फिर घर में वास्तुदोष हो तो लाजवर्त को धारण करने से लाभ मिलता है।

काला जादू ख़त्म करता है और बुरी नज़र से बचाव करता है।
यदि आपको केतु और राहु की महादशा या अन्तर्दशा चल रही है तो आप लाजवर्द धारण कर सकते है और लाभ प्राप्त कर सकते है।

नौकरी और व्यवसाय में आ रही अड़चनो को दूर करता है।
पितृ दोष को खत्म करता है।

लाजवर्त विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभदायक है । लाजवर्त विद्यार्थी का आत्म विश्वास बढ़ा देता है और विद्यार्थी की शिक्षा में एकाग्रता भी बढ़ जाती है।

लाजवर्त को धारण करने के बाद धीरे धीरे आपके व्यवसाय में तरक्की होती है।
यदि व्यवसाय काला जादू या टोना – टोटका की वजह से मंदा चल रहा है तो आपको लाजवर्त धारण करने से लाभ अवश्य मिलेगा।

अगर घर में बरकत नही होती है तो बरकत होने लगती है ।
अगर आपके शत्रु ज़्यादा है या आपका शत्रु आपको परेशान करता है या आप पर जादू टोना करवाता है तो आपका उसके किए हुए जादू टोना से बचाव करता है और आपके शत्रु को परास्त करता है।

आपका शत्रु आपके सामने शक्तिहीन हो जाता है।
लाजवर्त को धारण कर ने से डिप्रेशन/तनाव दूर होता है। और सेहत अच्छी होती है।

लाजवर्त राहु, केतु और शनि द्वारा आ रही बाधाओ को दूर करता है और व्यक्ति को सफलता मिलने लगती है |
लाजवर्त को धारण करने के बाद व्यक्ति का दुर्घटना और एक्सीडेंट से बचाव रहता है।

यदि आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है तो आपको लाजवर्त धारण कर ने से लाभ अवश्य मिलेगा।

⭐आपको लाजवर्त शनिवार को चाँदी की अंगूठी में बनवा के सीधे हाथ की मध्यमा उंगली (middle finger) में धारण करना है।

11/07/2016

कई वार हमारे पहने हुऐ रतन या तो गुम हो जाते है या करेक हो जाते चाहै वो कितने ही वङीया क्वालिटी के हो मित्रो रत्न का रंग बदलना, तडक जाना अथवा अगूंठी से निकल कर गुम हो जाना , इस बात का स्पश्ट संकेत है कि धारण करने वाले पर कोर्इ विपति आने वाली थी। जिसे रत्न अपने ऊपर लेकर रहस्यमय ढ़ग से लुप्त हो गया। रत्नों का सीधा सम्बन्ध मानव जीवन से है। सूर्य की रषिमयां रत्नों पर पड़ती है। और रत्न धारण करने वाले के रक्त तथा षरीर पर रत्न से छन कर पड़ने वाली किरणों का प्रभाव पड़ता है।ओर रतन योग कारक गृहो का ही घारन किया जाना चाहिये रतनो के साथ यंत्रो का समावेश किया जाऐ ओर भी लाभ या यु कहे अशातीत लाभ मिलता है हा या अच्ही तरह से शुद्ध सिद्ध ओर प्राण प्रतिष्ठा से युक्त करवा कर ही घारण करे

11/07/2016

जब किसी ज्योतिषी से आप अपनी कुंडली बनवाते हैं; तो वह सॉफ्टवेर पर डालकर आपकी कुंडली बना देता हैं।यह तरीका सरल है ; और ज्योतिष के तमाम दशा, महादशा, अन्तर्दशा के साथ निकल आते है।परन्तु इस सॉफ्टवेर के द्वारा दी गयी फल गणना किसी काम की नहीं होती।चाहे वह परम्परागत ज्योतिष हो या लाल किताब में।जिस प्रकार ऊंगलियों के निशान एक से नहीं होते, कुंडली भी एक सी नहीं होती।लग्न में ग्रहों की स्थिति एक जैसी भी हो, तो राशियों की स्थिति का अंतर होता है, वह एक जैसी हो; तो ग्रहों के उदय बल सहित 6 बलों का नात्र होता है, नक्षत्रों, वर्ण,गण आदि का अंतर होता है।फल गणना पर इनका गुणात्मक अंतर होता है।इन सबको सॉफ्टवेर से कण्ट्रोल नहीं किया जा सकता
ग्रह, राशि, नक्षत्र, इनकी दृष्टि, इनके बलाबल के अतिरिक्त कुंडली के प्रथम एवं द्वितीय पृष्ठ पर दिए गये दर्जनों प्रकार के आंकड़ों – का समावेश होता है।लाल किताब को लोग सरल समझते है; पर इसमें इतने प्रकार के चार्ट है कि उन सबकी संख्या कई दर्जन हो जाते है।बिना इन सबको मिलाये राशि, भाव और ग्रह के सहारे फल की घोषणा करने वाला ज्योतिषी झोला छाप डॉक्टरों की तरह होता है; जो कुछ पेटेंट दवाओं के सहारे अपनी दूकानदारी चलाता है।एक लाल किताब के विवरणों की विस्तार से व्याख्या करने और उनसे निकलने वाले नये तत्त्वों की व्याख्या में बड़े साइज़ के (11”x 18”) के 2100 पेज भी कम पड़ गये।इसे कोई भी व्यक्ति सरसरी नजर देखकर कैसे बता सकता है
होता यह है कि ये लोग चार्ट से दशा-महादशा – अन्तर्दशा को देखकर या कुंडली के ग्रहों की स्थिति देख कर फल एवं उपाय बता देते है।सरल काम है।कोई साधारण व्यक्ति भी कर सकता है, जो ज्योतिष का थोङा सा भी ज्ञान रखता हो
पर न तो इस फल का कोई अर्थ है, न ही उपाय का।ऐसा उपाय आपको हानि में डाल सकता है
कुंडली में कोई ग्रह खराब हो रहा हो, तो ये लोग तुरंत उस ग्रह का दान करवा देते है या पानी में बहवा देते है।कुछ तो ऐसे भी होते है कि दान भी करवा देते है और रत्न भी फना देते है।जैसे- शनि की गड़बड़ी है, तो लोहे का छल्ला पहन लो और लोहा-तेल दान करो।अब एक तरफ लेना लेना बढ़ा दो, दूसरी तरफ उसे फेंको।यह कैसा उपाय है
कभी-कभी आपके भाग्य का ग्रह ही किसी कारण वश बुरा प्रभाव देने लगता है।आजकल लालकिताब का बहुत जोर है।अपने को इस विद्या का पारंगत मानने वाले कई व्यक्तियों ने जातक से उसके भाग्य का ग्रह ही पानी में बहवा दिया।कई व्यक्ति सड़क पर आ गये।ऐसे मेरे ही नहीं; कई प्रसिद्ध ज्योतिषियों के अनुभव रहे है
जो ज्योतिषी यह नहीं जानता कि बुरा प्रभाव डालने वाले ग्रह की वस्तुएं घर में लाना या पहनना उसेक प्रभाव को और बढ़ाना है और शुभ ग्रहों या भाग्य के ग्रहों का दान देना (उच्च ग्रह उसके प्रभाव को कम करना है; वह जातक के लिए कितना हानिकारक हो सकता है, इसे समझा जा सकता है।
कोई शनि का भय दिखाता है, कोई राहु-केतु का; पर ग्रह कोई भी बुरा नहीं होता।कोई न रहे, तो हमारा जीवन ही नहीं रहेगा।कोई भी ग्रह, यदि गलत जगह, गलत राशि के साथ होता है या किसी शत्रु आदि की दृष्टि के दायरे में आता है, तो बुरा प्रभाव देने लगता है।ऊपाय कारण का किया जाता है, उस ग्रह का नहीं।यही
शनि ही नहीं, बृहस्पति और चंद्रमा जैसे शुभ ग्रह भी व्यक्ति को बर्बाद कर देते है, यदि वे गलत जगह पर हों।लोग शनि को व्यर्थ ही बदनाम करते है।उससे भयानक तो बुध होता है; जो बुद्धि भ्रष्ट करके मनुष्य को दलदल में ढकेल देता हैइस तरह ग्रहों को अच्छा-बुरा कहना केवल भय पैदा करना है।
अतः ज्योतिषी चुनने में सावधानी बरतें।सस्ते के चक्कर में या टी.वी. पर विज्ञापन देखकर फँसे, तो अपना बहुत कुछ बर्बाद कर दे सकते है आज कल तो fb पर या whats up पर गरुप मे अपनी कुंङली की फोटो ङालते है ओर कुछ ज्योतिषी जो पुरा ज्ञान नही रखते उसकी व्याख्या करने लग जाते है मित्रो ज्योतिषी को चाहिऐ की कुंङली पर पुरा समय ले सभी चार्ट देखे कुंङली पर मनन चिन्तन करे फिर फल कथन करे तो सही होगा

24/10/2014

1.जितना कमाएँ उससे कम खर्च हो ऐसी जिन्दगी बनायें
2. दिन में कम से कम 3 लोगो की प्रशंसा करें
3. खुद की भूल स्वीकारने में कभी भी संकोच न करें
4. किसी के सपनो पर कभी भी न हंसे
5. अपने पीछे खडे व्यक्ति को भी कभी आगे जाने का मौका दें
6. रोज उदय होते सुरज को अवश्य देखें
7. खूब जरुरी हो तभी कोई चीज उधार लें
8. किसी से कुछ जानना हो तो, विवेक से दो बार पूछें
9. कर्ज और शत्रु को कभी बडा मत होने दें
10. ईश्वर पर अटूट भरोसा रखें
11. प्रार्थना करना कभी मत भूलें, प्रार्थना में अपार शक्ति होती है
12. हमेशा अपने काम से मतलब रखें
13. समय सबसे ज्यादा कीमती है, इसको फालतु कामो में खर्च ना करें
14. जो आपके पास है, उसी में खुश रहना सीखें
15. बुराई कभी भी किसी की भी मत करें, क्योंकि बुराई नाव में छेद समान है, छेद छोटा हो या बड़ा नाव को डुबा ही देता है
16. हमेशा सकारात्मक सोच रखें
17. हर व्यक्ति एक हुनर लेकर पैदा होता हैं, बस उस हुनर को दुनिया के सामने लाएं
18. कोई काम छोटा नही होता, हर काम बडा होता है
19. सफलता उनको ही मिलती है जो कुछ कोशिश करते हैं
20. कुछ पाने के लिए कुछ खोना नहीं बल्कि कुछ पुरुषाऱथ करना पडता है

24/10/2014

दीपावली की रात इन आठ जगहों पर दीपक अवश्य लगाना चाहिए...

1. पीपल के पेड़ के नीचे दीपावली की रात एक दीपक जलाकर रखकर वापस उसी पांवों घर लौट आएं। दीपक को पेड के नीचे रखने के बाद पीछे मुडक़र नहीं देखना चाहिए। अगर ऐसा करते है तो आपकी धन से सम्बन्धित परेशानी दूर हो सकती है।

2. यदि संभव हो सके तो दिवाली की रात के वक्त किसी श्मशान घाट में दीपक लगाएं। यदि यह संभव ना हो तो किसी बिल्कुल शांत क्षेंत्र में स्थित मंदिर में दीपक लगा सकते हैं।

3. धन प्राप्ति की कामना करने वाले को अपने घर के मुख्य दरवाजें के दोनों ओर दीपक लगाना चाहिए।

4. अपने घर के नजदीकी वाले चौराहे पर रात के वक्त दीपक लगाना चाहिए। ऐसा करने पर धन से जुड़ी सभी समस्याओं का अन्त होता है।

5. अपने घर के पूजा स्थल में दीपक लगाए, जो पूरी रातभर जलना चाहिए तथा वह बुझना नहीं चाहिए। ऐसा करने पर महालक्ष्मी खुश होती हैं।

6. किसी बिल्व पत्र के पेड़ के नीचे दीपावली की शाम दीपक लगाएं। बिल्व पत्र भगवान शिव का प्रिय वृक्ष है। अत: यहां दीपक लगाने पर शिव की कृपा प्राप्ति होती है।

7. अपने घर के नजदीक जो भी मंदिर हो वहां रात के समय दीपक जरूर लगाएं। इससे सभी देवी-देवताओं के कृपा की प्राप्ति होती है।

8. अपने घर के आंगन में भी दीपक लगाना आवश्यक है। ध्यान रखें यह दीपक भी रातभर जलना चाहिए तथा यह बुझना नहीं चाहिए।

13/09/2014

काली मिर्च के रामबाण उपाय।
यदि आप धन
की कमी जैसी समस्या से परेशान
हैं तो एक रामबाण उपाय है जो आपको मालामाल कर सकता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार व्यक्ति के पास
पैसों की कमी उसकी कुंडली में
ग्रह दोष होने के कारण होती है। लेकिन इस दोष
को दूर करने का उपाय है।
यदि इसी प्रकार के दोषों मुक्ति के लिए लोग तरह-तरह
के उपाय करते हैं, लेकिन इसके लिए कालीमिर्च के सिर्फ
5 दाने ही काफी है। जो आपका यह दोष
दूर कर मालामाल कर सकते हैं।
सबसे पहले कालीमिर्च के 5 दाने लें और उन्हे अपने
सिर पर से सात बार वार लें।
इसके बाद किसी चौराहे या सुनसान जगह पर जाएं
तथा वहां खड़े होकर 4 दाने चारों दिशाओं में तथा 1 दाने को ऊपर
आसमान की ओर फेंद दें।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस टोटके को करने से अचानक धन
प्राप्ति के योग बनते हैं।
इतना ही नहीं बल्कि इस उपाय से और
भी कई लाभ मिलते हैं। जैसे
किसी की बुरी नजर लगने से
आपकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई
हो तो बुरी नजर उतर जाती है तथा वह
दोष दूर हो जाता है।

04/09/2014

! प्रभु हनुमान जी की कृपा पाने के लिए प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करे !
!!जय श्री राम !!

23/08/2014

ग्रहों के अपनी उच्च या नीच की राशि में स्थित होने का मतलब केवल उनके बलवान या बलहीन होने से समझना चाहिए न कि उनके शुभ या अशुभ होने से।


अपनी उच्च की राशि में स्थित कोई ग्रह बहुत अशुभ फल दे रहा होता है क्योंकि अपनी उच्च की राशि में स्थित होने से ग्रह बहुत बलवान हो जाता है, इसलिए उसके अशुभ होने की स्थिति में वह अपने बलवान होने के कारण सामान्य से बहुत अधिक हानि करता है।कोई ग्रह अपनी नीच की राशि में स्थित होने पर भी स्वभाव से शुभ फल दे रहा होता हैकिन्तु बलहीन होने के कारण इन शुभ फलों में कुछ न कुछ कमी रह जाती है।

ऐसे लोगों को अपनी कुंडली में नीच राशि में स्थित किन्तु शुभ फलदायी ग्रहों के रत्न धारण करने से बहुत लाभ होता है क्योंकि ऐसे ग्रहों के रत्न धारण करने से इन ग्रहों को अतिरिक्त बल मिलता है तथा यह ग्रह बलवान होकर अपने शुभ फलों में वृद्धि करने में सक्षम हो जाते हैं।

23/08/2014

ज्योतिष में राशियां------धरती से दिखने वाले गोलाकार आकाश में ही सब ग्रह और नक्षत्र कहीं न कहीं स्थित रहते हैं या विचरते हैं। ऐसे में अगर यह बताना हो की कौन सा ग्रह कहाँ पर स्थित है तो हमें एक मापदंड की आवश्यकता होती है।

इसलिए हमने आसमान को एक नाप दे दिया है- 360 डिग्री(अंश) का । फिर इसको 12 हिस्सों में बाँट दिया गया और हर हिस्सा 30अंश का है । यह 12 हिस्से जो बने हैं इन्हीं को राशि कहा गया है । इन द्वादश राशियों को काल पुरुष का अंग भी कहा गया है ।
इन राशियों के नाम हैं मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुम्भ और मीन। आपकी जन्म कुंडली में आपको जो 12 खाने नजर आते हैं वही 12 राशियाँ हैं।

उनमें नौ ग्रह कहीं न कहीं स्थित हैं, जो आपके जन्म समय पर आकाश में चलित थे, जिनका चित्रण हमें जन्मपत्री देखने से मिलता है।

आपकी जन्म कुंडली में जिस राशि में चन्द्रमा विराजमान है, उस राशि को जन्म राशि कहते हैं । जो राशि लग्न में उदय होती है उसे लग्न राशि कहते हैं और जिस राशि में सूर्य विराजमान है उसे सूर्य राशि कहते है

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Varanasi
221005

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