Music by Durgesh Upadhyay

Music by Durgesh Upadhyay Singer, Composer, Writer and Psychologist (Ghazal, Bhajan, Bhojpuri, Etc.), Banaras

26/05/2026

भोजपुरी लोक-संस्कृति में गंगा जी के गीत (गंगा-महिमा गीत, गंगा-स्नान गीत, गंगा-मइया गीत) अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। भोजपुरी अंचल—पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी बिहार और झारखंड के कुछ भागों—में गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि माँ, मोक्षदायिनी, लोकदेवी और सांस्कृतिक पहचान के रूप में प्रतिष्ठित हैं। यही कारण है कि जन्म से लेकर विवाह, व्रत, तीर्थयात्रा, जनेऊ संस्कार तथा मृत्यु-संस्कार तक गंगा से जुड़े गीत गाए जाते हैं।

आदरणीय डॉ. राम नारायण तिवारी 'भदवरिया' जी ये अनुपम रचना सुनीं सभी। नीमन लागे त लाइक, शेयर, कमेंट कइल मति भुलाईब जा।

Durgesh K. Upadhyay Music of Durgesh

10/05/2026



यह भोजपुरी लोकभावना से ओत-प्रोत गीत माँ की महिमा, उसके त्याग, ममता और उपकारों का अत्यंत मार्मिक वर्णन करता है। कवि ने सरल लोकभाषा में यह व्यक्त किया है कि माँ के प्रेम और उसके ऋण का मूल्य कभी नहीं चुकाया जा सकता।

“माई माई हई महिमा ना गवाई मितवा,
एकर कर्जा ना भराई ना भराई मितवा”

रचनाकार: प्रो. राम नारायण तिवारी Ram Narayan Tiwari

का आशय है कि माँ की महिमा का पूर्ण वर्णन करना संभव नहीं है। “मितवा” शब्द आत्मीय संबोधन है, जिससे गीत में अपनापन और भावुकता आती है। कवि कहता है कि माँ का ऋण इतना बड़ा है कि उसे कभी चुकाया नहीं जा सकता। माँ अपने बच्चों के लिए जीवनभर त्याग करती है, लेकिन बदले में कुछ नहीं चाहती।

“केतनो गाईं, केतनो गूनीं, माई गुन ना गवाई”

में कवि कहता है कि चाहे कितने ही बड़े गायक, कवि या विद्वान क्यों न हों, वे भी माँ के गुणों का पूरा वर्णन नहीं कर सकते। माँ की ममता, दया और करुणा इतनी विशाल होती है कि शब्द उसके सामने छोटे पड़ जाते हैं।

“भदवरिया के कलम थाकी, सबकर कंठ सुखाई”

यहाँ कवि स्वयं स्वीकार करता है कि माँ की महिमा लिखते-लिखते उसकी कलम थक जाती है और गाते-गाते सबका कंठ सूख जाता है, फिर भी माँ के गुणों का अंत नहीं होता। “भदवरिया” संभवतः कवि का नाम या उपनाम है, जो अपनी सीमित अभिव्यक्ति को स्वीकार कर रहा है।

“एकरा नेकी के ना पईंचा फेराई मितवा”

का अर्थ है कि माँ की भलाई, उपकार और प्रेम का बदला कोई नहीं चुका सकता। माँ अपने बच्चों के लिए हर कठिनाई सह लेती है और निस्वार्थ भाव से उनका पालन-पोषण करती है।

पूरा गीत माँ की महानता और उसके निस्वार्थ प्रेम का गुणगान है। कवि यह संदेश देता है कि संसार में माँ से बढ़कर कोई नहीं है। उसका प्रेम अमूल्य, पवित्र और अनंत होता है। इसलिए मनुष्य को सदैव माँ का सम्मान करना चाहिए और उसके प्रति कृतज्ञ रहना चाहिए।

17 साल कैसे बीत गए पता ही नहीं चला...महादेव की कृपा बनी रहे...
27/04/2026

17 साल कैसे बीत गए पता ही नहीं चला...
महादेव की कृपा बनी रहे...

23/04/2026

एक वर्ष का ग्राम्य - जीवन

रचना: पं हरिराम द्विवेदी, काशी

#प्रस्तुतियाँ #लोकसंस्कृति #लोकभाषा #लोकजीवन #पारम्परिक #लोकरंग

20/04/2026

बिदेसिया

सुबह-ए-बनारस; लोकायन

साभार: आदरणीय Saroj Verma Ji
Durgesh K. Upadhyay Music of Durgesh #प्रस्तुतियाँ #लोकसंस्कृति #लोकभाषा #लोकजीवन #पारम्परिक

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13/04/2026

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09/04/2026

Shout out to my newest followers! Excited to have you onboard! Ajit Mishra, Chandan Sharma, Vinod Singh Rajput, Kavita Pandey, Pappu Ojha, Amit Kumar, Anil Srivastav, Bhanu Prakash Singh Bablu, Ritesh Kumar Singh, Shivkumar Vishwakarama, Divakar Thakur, Avnish Pandey, Govind Yadav, Sagar Raj, Keertendra Kumar Rai, Sanjeet Mukhiya, Amit Kumar, Shyamdhari Yadav, OM Prakash, विकाश सिंह, Rachna Upadhyay, Hariom OM, Kapildev Tiwari, Arjun Sharma, Omkar Singh Rajput, Ramanuj Namdev, Pratush Kumar, Nandkishor Choudhary, रंजन कुमार मद्धेशिया, Kapildev Thakur, Ramjee Sahu, Kailash Singh, Jitender Kumar, Abhayanand Pandey, Shay Raj, Naval Kishor Singh, Mukesh Mandal, Nitu Singh, Shivdhani Yadav, शैलेश रंजन, शिव प्रताप सिंह चन्देल, Kamalesh Mishra, Pawan Mishra, Vijay Kumar, Ajay Shukla, Avnish Singh, Shubham Kharwar, Pratibha Tiwari, Shashi Mohan, Gokul Nandan

The Subhwanti Group of Institutions (SGI), headquartered in Patna with campuses in Siwan and Bettiah, has emerged as a g...
05/04/2026

The Subhwanti Group of Institutions (SGI), headquartered in Patna with campuses in Siwan and Bettiah, has emerged as a growing private educational network in Bihar committed to academic excellence, skill-based learning, and holistic student development.

Established in the early 2010s, the group offers diverse programs including teacher education, pharmacy, and technical courses, with a strong emphasis on practical exposure and innovation.

Under the leadership of Chairman Satish Kumar Rai and President Upma Kumari Rai, the institution has expanded significantly and gained regional recognition for its contribution to quality education and student empowerment.

The institution actively promotes cultural engagement alongside academics; notably, on its Establishment Day, I was invited as the Guest of Honor, where I could enrich the occasion through my performances of traditional Bhojpuri songs and Ghazals, adding cultural depth and vibrancy to the celebration.

आगामी सांस्कृतिक महोत्सव “लोकरंग 2026” का आयोजन 11–12 अप्रैल को  #लोकरंग  #सांस्कृतिक  #समिति,  #कुशीनगर द्वारा किया जा ...
03/04/2026

आगामी सांस्कृतिक महोत्सव “लोकरंग 2026” का आयोजन 11–12 अप्रैल को #लोकरंग #सांस्कृतिक #समिति, #कुशीनगर द्वारा किया जा रहा है। यह द्वि-दिवसीय आयोजन #लोकसंस्कृति के #संरक्षण, संवर्धन और जनचेतना के प्रसार के उद्देश्य से आयोजित होगा। कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों—त्रिपुरा, बुंदेलखंड, छत्तीसगढ़, पूर्वांचल आदि—की लोककलाओं का संगम देखने को मिलेगा, जिसमें लोकनृत्य, जनगीत, पारंपरिक नाटक एवं विचार गोष्ठियाँ प्रमुख आकर्षण रहेंगी।

पहले दिन विभिन्न #लोकनृत्य एवं #नाट्य #प्रस्तुतियाँ जैसे करमा, सुआ, ददरिया, कव्वाली और नाटक “अमानत” आयोजित होंगे। दूसरे दिन विचार गोष्ठी में साहित्यकार, चिंतक और कलाकार #लोकसंस्कृति के समकालीन प्रश्नों पर विमर्श करेंगे, साथ ही जनगीत और लोकनृत्य की प्रस्तुतियाँ भी होंगी।

इस आयोजन में मेरी भी सहभागिता रहेगी। आप सभी का स्वागत है। विवरण अवश्य देखें।

साभार: श्री सुभाष चंद्र कुशवाहा जी

#लोकसंस्कृति #लोकभाषा #लोकजीवन #पारम्परिक

लोकायन कला प्रशिक्षण ट्रस्ट द्वारा आयोजित काशी चैती उत्सव 2026 में लोकसंगीत की मधुर परंपरा का भव्य प्रदर्शन देखने को मिल...
30/03/2026

लोकायन कला प्रशिक्षण ट्रस्ट द्वारा आयोजित काशी चैती उत्सव 2026 में लोकसंगीत की मधुर परंपरा का भव्य प्रदर्शन देखने को मिला। इस अवसर पर लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का आयोजन 29 मार्च 2026 को सुभ-ए-वाराणसी मंच, अस्सी घाट पर किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण के रूप में श्री दुर्गेश उपाध्याय ने अपनी प्रभावशाली गायकी से सभी का मन मोह लिया। उन्होंने पारंपरिक लोक शैलियों—सोहर, बिदेसिया, बारहमासा तथा यात्रा गीत—की प्रस्तुतियाँ देकर लोक-संस्कृति की समृद्ध विरासत को जीवंत कर दिया। उनकी प्रस्तुति में स्वर की गहराई, भावों की सजीवता और मंच पर उनकी सहज उपस्थिति ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।

सोहर की मंगलध्वनि ने उत्सव में शुभता का संचार किया, वहीं बिदेसिया के करुण रस ने दर्शकों को भावुक कर दिया। बारहमासा के माध्यम से उन्होंने ऋतुओं के बदलते स्वरूप को सुंदरता से प्रस्तुत किया, जबकि यात्रा गीत में लोकजीवन की गतिशीलता और उल्लास का सजीव चित्रण किया।

कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों और दर्शकों ने श्री दुर्गेश उपाध्याय की प्रस्तुति की सराहना करते हुए इसे लोकसंगीत के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया। उनकी गायकी ने यह सिद्ध किया कि लोकसंगीत आज भी लोगों के हृदय में अपनी गहरी जगह बनाए हुए है।

समापन पर आयोजकों ने सभी कलाकारों एवं सहभागियों का आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से लोक परंपराओं को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

साभार : Saroj Verma जी
#भोजपुरी #पारंपरिक #सुबह_ए_बनारस

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