15/03/2026
खरमास में सूर्य के धनु या मीन राशि में स्थित रहने के कारण विवाह आदि मंगलकार्य शास्त्रों में वर्जित बताए गए हैं। कार्याकार्य विचार प्रस्तुत हैं —
धन्वादौ स्थितभास्करे खलु जगन्मध्ये प्रवृत्ते खरे
मासेऽस्मिन् श्रुतिशास्त्रवर्जितकथा कार्याणि न प्रारभेत्।
विवाहादिकमङ्गलं न विधिना कर्तव्यं मनीषीजनैः,
धर्मार्थं जपहोमदाननिरतिः श्रेयोऽधिकं मन्यते॥
भावार्थ:
जब सूर्य धनु आदि राशियों में रहते हैं तब खरमास होता है। इस समय शास्त्रों के अनुसार विवाह आदि शुभ कार्य नहीं करने चाहिए, बल्कि जप, दान और धर्म में मन लगाना श्रेष्ठ माना गया है।
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सूर्ये धन्वि गते खरे समभवन्मासे प्रबुद्धैर्जनैः
वर्ज्याः सर्वविधा विवाहसहिताः कार्याः शुभाःशास्त्रतः।
देवस्यार्चनदानहोमविधयः कार्याः सदा श्रद्धया,
तस्मात् साधुजनाः प्रयत्नमनिशं कुर्वन्तु धर्मे धृताः॥
भावार्थ:
जब सूर्य धनु राशि में होते हैं तब खरमास आता है। इस समय विद्वानों ने विवाह आदि शुभ कार्यों को वर्जित बताया है, परंतु देवपूजन, दान और होम करना अत्यंत पुण्यदायक है।
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खरमाससमागमे जगति यत्सूर्यः स्थितो धन्वगे
तस्मिन्नद्य न कर्तुमर्हति बुधो विवाहमङ्गल्यम्।
श्रुत्युक्तं जपदानहोमविधिभिः पुण्यं समाराधयेत्,
धर्मे चित्तमधिष्ठितं हि सततं श्रेयःप्रदं मानवम्॥
भावार्थ:
जब खरमास आता है और सूर्य धनु में स्थित होते हैं, तब बुद्धिमान मनुष्य विवाह आदि मंगल कार्य नहीं करते, बल्कि जप, दान और धर्म में लगे रहते हैं।
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धर्मज्ञैर्निगमैः पुराणवचनैः प्रोक्तं समस्तं खरे
मासेऽस्मिन्नखिलं विवाहमखिलं कार्यं न कर्तुं बुधैः।
यत्नेन प्रभुभक्तिसाधनपराः सन्तः सदा भाविनः,
दानध्यानजपादिकर्मनिरताः कुर्वन्ति पुण्यप्रदम्॥
भावार्थ:
वेद और पुराणों में कहा गया है कि खरमास में विवाह आदि कार्य नहीं करने चाहिए। इस समय भक्ति, ध्यान और दान करना श्रेष्ठ है।
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मासे ख्याते खरे रवेरधिगतौ धन्वादिराशिस्थितौ
लोकानां शुभकर्मसंचयविधिः शास्त्रैः किल निषिद्धकः।
भक्त्या विष्णुपदाम्बुजार्चनरता दानादिके सादरं,
यः कुर्याद् स भवेदिहैव मनुजो भाग्याधिकः पुण्यवान्॥
भावार्थ:
जब सूर्य धनु आदि राशियों में रहते हैं तब खरमास होता है और उस समय शुभ कार्य वर्जित होते हैं। परंतु विष्णु की पूजा और दान करने से मनुष्य को अधिक पुण्य मिलता है
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खरमाससमागमे श्रुतिवचो वर्ज्यं विवाहादिकं
लोकानां हितकारिणः मुनिवरा यत् प्राहुरेव प्रिये।
देवार्चा जपहोमदाननिरतः सन्तो भवन्ति सदा,
धर्मे नित्यनिविष्टचित्तविभवाः प्राप्नोति पुण्यं नरः॥
भावार्थ:
खरमास में विवाह आदि कार्यों का निषेध मुनियों ने लोकहित के लिए बताया है। इस समय जप, होम और देवपूजा करना श्रेष्ठ है।
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सूर्ये मीनगते खरे समभवन्मासे जगत्पावने
वर्ज्यं मङ्गलकार्यसञ्चयमिदं शास्त्रेषु निःसंशयम्।
विष्णोः पूजनमादरात् जपविधिं दानं च नित्यं नरः,
कृत्वा पुण्यफलप्रदं लभति वै सौभाग्यमत्युत्तमम्॥
भावार्थ:
जब सूर्य मीन राशि में रहते हैं तब भी खरमास होता है और उस समय मंगलकार्य वर्जित माने जाते हैं। विष्णु पूजा और दान करना अत्यंत फलदायी है।
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श्रुत्युक्तं मुनिभिः पुराणकथितं मासे खरे मानवैः
वर्ज्यं सर्वमिदं विवाहसहितं कार्यं शुभं शास्त्रतः।
विष्णोर्भक्तिरनन्यचेतसि सदा दानं जपं साधनं,
कुर्वन् मानवजीवने लभति वै पुण्यं महद्भाग्यदम्॥
भावार्थ:
वेद, पुराण और मुनियों के अनुसार खरमास में विवाह आदि शुभ कार्य नहीं करने चाहिए। इस समय भगवान की भक्ति और जप करना अत्यंत पुण्यदायक है।
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धन्वादौ रविणा गते खलु खरे मासे प्रवृत्ते सति
शास्त्राणां निगमानुसारमखिलं वर्ज्यं शुभं कर्म तत्।
भक्त्या केशवपूजनं जपविधिं दानं च नित्यं नरः,
कृत्वा पुण्यफलं लभेत् सुकृतवान् स्याद् धर्ममार्गस्थितः॥
भावार्थ:
जब सूर्य धनु आदि राशियों में होते हैं और खरमास प्रारंभ होता है, तब शास्त्रों के अनुसार शुभ कार्य नहीं किए जाते। इस समय केशव की पूजा और दान करना उत्तम है।
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खरमासविभागकाले जगति शास्त्रोक्तमार्गस्थिताः
वर्ज्यं मङ्गलकर्म सर्वमखिलं प्राहुर्मनीषीजनाः।
विष्णोर्भक्तिरनन्यभावसहितं दानं जपं साधनं,
कुर्वन्तः सततं लभन्ति मनुजा धर्मार्थकामोदयम्॥
भावार्थ:
खरमास में विद्वान लोग शास्त्रों के अनुसार सभी मंगल कार्यों को वर्जित बताते हैं। इस समय भगवान विष्णु की भक्ति, जप और दान करने से धर्म और पुण्य की प्राप्ति होती है
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आचार्य भास्कर शुक्ला
वृन्दावन