OSHO Mystery School

OSHO Mystery School MEDITATION,LOVE&FREEDOM
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31/08/2026

मगर मन समझाए चला जाता है कि इतना सा झूठ है, क्या बनता-बिगड़ता है? इतनी सी चोरी है, कर लो, कल दान कर देंगे। और ध्यान रखना, फिर तुम कितना ही भला करो, बुरे को अनकिया करने का उपाय नहीं है। भले से अच्छा नहीं होगा वह।

Becoming part of the group you are no longer anxious, no longer burdened. For a few days while you are in the group you ...
31/08/2026

Becoming part of the group you are no longer anxious, no longer burdened. For a few days while you are in the group you feel a certain kind of relaxation; out of the group you will be back in your personality. Hence you will need the groups again and again; after a few days, a few weeks, you will again feel to participate in a group. Now the group becomes like an intoxicant which helps you to forget yourself.

This is not the purpose here. Here the purpose is totally different: you have to be helped to stand on your own feet, to be yourself.

You ask me: “In the West many group psychoanalysts treat a group as a unity.” No group can ever be a unity; a group can at the most be a union. And the difference between union and unity is great. In unity you become one, you dissolve yourself completely, you are no more separate. In union you remain separate, but you are together for a certain purpose. Once the purpose is fulfilled the union disappears. But the unity, once attained, never disappears – it is not purposive.

With people you need only unions, with existence you need unity.

OSHO 🌙
Be Still and Know

“You cannot take even your very intimate friend into your nothingness; you cannot invite anybody there – no party! You h...
30/08/2026

“You cannot take even your very intimate friend into your nothingness; you cannot invite anybody there – no party! You have to go alone.”

OSHO 🌙
The Miracle, 1

29/08/2026

मन जहर नहीं है। और जो लोग मन को जहर कहते रहे हैं, उन्होंने ही प्रेम को जहरीला कर दिया, प्रेम को प्रकट नहीं होने दिया है। मन जहर हो कैसे सकता है? इस जगत में कुछ भी जहर नहीं है। परमात्मा के इस सारे उपक्रम में कुछ भी विष नहीं है, सब अमृत है। लेकिन आदमी ने सारे अमृत को जहर कर लिया है। और इस जहर करने में शिक्षक, साधु-संत और तथाकथित धार्मिक लोगों का सबसे ज्यादा हाथ है।

मेरा विषाद मेरे खुद के लिए नहीं है। मैं पूर्ण रूप से संतुष्ट हूं। मृत्यु मुझसे कुछ भी नहीं ले जा सकती। मेरा विषाद इस पूर...
29/08/2026

मेरा विषाद मेरे खुद के लिए नहीं है। मैं पूर्ण रूप से संतुष्ट हूं। मृत्यु मुझसे कुछ भी नहीं ले जा सकती। मेरा विषाद इस पूरी मनुष्यता को लेकर है, क्योंकि उनकी मृत्यु उनसे सम्बुद्ध होने का, आनंदपूर्ण होने का, स्वयं को जानने, स्वयं का अर्थ और महत्त्व जानने का सारा अवसर छीन लेगी। वे अंधकार में जिए हैं। क्या वे अंधकार में मर भी जाएंगे?

मैं अपने लोगों से चाहूंगा, कम से कम वे अपने विकास में कोई विलम्ब ना करें, क्योंकि ये राजनेता एक दुसरे को नष्ट करने के लिए बिलकुल तैयार बैठे हैं - सभी और सब कुछ नष्ट करने के लिए । सत्ता के प्रति उनकी भूख अपने चरम पर आ गई है। इससे पहले कि वे वैश्विक आत्महत्या करवाने में सफल हो जाएं, कम से कम तुम्हे अपने भीतर विराजमान परमात्मा का बोध हो जाए। जो भी तुम्हारे संपर्क में आए तुम्हे अपनी प्रसन्नता, अपना मौन और अपनी हंसी उन तक पहुँच देनी चाहिए। अपने मित्रों, परिचितों, प्रेमियों और बच्चों को इससे बेहतर तोहफा तुम नहीं दे सकते।

समय बहुत कम है और काम बहुत अधिक, परन्तु यदि तुम में साहस है, यह चुनौती स्वीकार की जा सकती है। राजनेताओं पर निर्भर मत रहो; वे कुछ नहीं कर सकते; उन्हें तो इस बात का बोध भी नहीं कि वे मनुष्यता को कहां ले जा रहे हैं--किस अन्धकार में।

OSHO
The Hidden Splendor, Talk #7

28/08/2026

हमें जो भी सिखाया जाता है और जैसा हमारा जीवन है, वह धीरे-धीरे हमें मनुष्य कम और मशीन ज्यादा बना देता है। हम क्रमशः मशीन होते जाते हैं। और जो आदमी जितनी अच्छी मशीन हो जाता है उतना ही दुनिया में सफल और कुशल समझा जाता है। असल में जो आदमी जितना मर जाता है उतना ही यह जगत उसे सफल मानता है।

यहां भाई को हर वर्ष रक्षाबंधन बांधा जाता है कि हे भैया, साल भर हमारी रक्षा करना!... किससे रक्षा करना? भारतीय संस्कृति से...
28/08/2026

यहां भाई को हर वर्ष रक्षाबंधन बांधा जाता है कि हे भैया, साल भर हमारी रक्षा करना!... किससे रक्षा करना? भारतीय संस्कृति से रक्षा करना! ये चारों तरफ जो धूर्तों का जाल है, इससे रक्षा करना! अपमानजनक है। कोई सम्मानपूर्ण स्त्री भाई को रक्षाबंधन नहीं बांधेगी, क्योंकि रक्षा की आकांक्षा करना पुरुष से स्त्री की गरिमा को खोना है।

मेरे पास कभी कोई आ जाता है कि राखी बांधनी है आपको। किसलिए?
कि आप रक्षा करना।रक्षा की बात ही क्यों उठती है? रक्षा किससे करनी है? मगर सदियों-सदियों से भारतीय स्त्री को यह सिखाया गया है।

तो तुम जब पश्चिम से यहां आते हो तो तुम्हें इन सारी धारणाओं का कुछ पता नहीं है कि यहां पुरुष रक्षक है। और जिसका पुरुष रक्षक नहीं है, दूसरे पुरुष उसके भक्षक हो जाते हैं। फिर यह सुंदर स्त्री, जिसको किसी ने डंडा मार दिया, अगर पुलिस में रिपोर्ट करने जाती है तो वह पुलिस का इंस्पेक्टर भी उसको घूर-घूर कर वैसे ही देखता है। क्योंकि वह भी उतना ही पीड़ित और परेशान है। उसकी भी सहानुभूति इस स्त्री के साथ नहीं होती! अगर वह सहानुभूति भी दिखाता है तो उसका इरादा यही होता है कि कुछ थोड़ी दोस्ती बन जाए, कुछ थोड़ा पहचान बन जाए, तो वह भी वही करे।

अभी-अभी एक युवा लड़की पर--युवा भी कहना मुश्किल है, अभी किशोर ही है, केवल पंद्रह वर्ष की उम्र है--उस पर पूना के एक बड़े पुलिस ऑफिसर ने बलात्कार करने की चेष्टा की। अब तुम जाओ कहां? मजिस्ट्रेट के पास जाओ तो उसकी नजर भी घूर कर देखती है। यहां एक ही तरह के लोगों का जाल है। तुम्हें थोड़ा सावधान होना होगा। तुम मेरे पास आए हो किसी सत्य की खोज में, तुम्हें यह कीमत चुकानी होगी। मैं जानता हूं यह व्यर्थ है, इसकी कोई जरूरत नहीं। यह कीमत तुम्हें मुझे नहीं चुकानी पड़ रही है। यह कीमत तुम्हें इसलिए चुकानी पड़ रही है कि इस देश की स्थिति ऐसी है।

ओशो
हंसा तो मोती चुगैं ५

27/08/2026

यहां भाई को हर वर्ष रक्षाबंधन बांधा जाता है कि हे भैया, साल भर हमारी रक्षा करना!... किससे रक्षा करना? भारतीय संस्कृति से रक्षा करना! ये चारों तरफ जो धूर्तों का जाल है, इससे रक्षा करना! अपमानजनक है। कोई सम्मानपूर्ण स्त्री भाई को रक्षाबंधन नहीं बांधेगी, क्योंकि रक्षा की आकांक्षा करना पुरुष से स्त्री की गरिमा को खोना है।
मेरे पास कभी कोई आ जाता है कि राखी बांधनी हैआपको। किसलिए?कि आप रक्षा करना।रक्षा की बात ही क्यों उठती है? रक्षा किससे करनी है? मगर सदियों-सदियों से भारतीय स्त्री को यह सिखाया गया है।

There is so much joy in trying new things and meeting people who love the same things you do. Take a look at some of the...
27/08/2026

There is so much joy in trying new things and meeting people who love the same things you do. Take a look at some of the past courses at the OSHO Multiversity. So many happy, shining faces!

Explore the program and find a course you like.
https://bit.ly/Upcoming-OSHO-Courses

26/08/2026

मैंने कहा, ज्यादा और कम का सवाल नहीं है। इनकम टैक्स का गणित ही मेरी समझ में नहीं आता। मेरा गणित और है।

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