24/06/2026
लकवा (Paralysis या पैरालिसिस) क्या है?
जब शरीर के किसी हिस्से की मांसपेशियों (muscles) का नियंत्रण पूरी तरह या आंशिक रूप से खत्म हो जाता है, तो उस स्थिति को लकवा (Paralysis) कहते हैं। इसमें प्रभावित हिस्से की नसें (nerves) दिमाग तक संदेश नहीं पहुंचा पातीं, जिससे मरीज उस अंग को हिलाने-डुलाने या वहां किसी स्पर्श को महसूस करने में असमर्थ हो जाता है।
लकवा के प्रकार (Types of Paralysis)
प्रभावित क्षेत्र और गंभीरता के आधार पर लकवा मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रकार का होता है:
मोनोप्लेजिया (Monoplegia): इसमें शरीर का केवल एक ही अंग (जैसे केवल एक हाथ या केवल एक पैर) प्रभावित होता है।
हेमीप्लेजिया (Hemiplegia): इसमें शरीर का एक पूरा हिस्सा (आधा भाग—जैसे दायां हाथ और दायां पैर, या बायां हाथ और बायां पैर) लकवाग्रस्त हो जाता है। यह आमतौर पर स्ट्रोक (Brain Stroke) के कारण होता है।
पैराप्लेजिया (Paraplegia): इसमें कमर से नीचे का पूरा हिस्सा प्रभावित होता है, जिससे दोनों पैर काम करना बंद कर देते हैं। यह अक्सर रीढ़ की हड्डी (Spinal Cord) में चोट के कारण होता है।
क्वाड्रिप्लेजिया (Quadriplegia / Tetraplegia): इसमें गर्दन से नीचे का पूरा शरीर प्रभावित होता है, जिससे दोनों हाथ और दोनों पैर अपनी कार्यक्षमता खो देते हैं।
फेशियल पाल्सी (Facial Palsy / Bell's Palsy): इसमें चेहरे की नसें प्रभावित होती हैं, जिससे चेहरे का एक तरफ का हिस्सा लटक जाता है या वहां की मूवमेंट बंद हो जाती है।
लकवा होने के मुख्य कारण (Causes of Paralysis)
लकवा कोई स्वतंत्र बीमारी नहीं है, बल्कि यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) यानी दिमाग या रीढ़ की हड्डी में होने वाली किसी समस्या का परिणाम होता है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
ब्रेन स्ट्रोक (Stroke): यह लकवा का सबसे बड़ा और आम कारण है। जब दिमाग की किसी नस में ब्लॉकेज (खून का थक्का) आ जाता है या कोई नस फट जाती है, तो दिमाग के उस हिस्से को ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाती है और वहां की कोशिकाएं मृत होने लगती हैं।
रीढ़ की हड्डी या सिर में चोट (Spinal Cord or Brain Injury): किसी दुर्घटना, ऊँचाई से गिरने या गंभीर चोट के कारण यदि रीढ़ की हड्डी या मस्तिष्क की नसें क्षतिग्रस्त हो जाएं, तो संदेशों का प्रवाह रुक जाता है।
अत्यधिक उच्च रक्तचाप (Severe High Blood Pressure): ब्लड प्रेशर अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाने से दिमाग की नस फटने (Brain Hemorrhage) का खतरा बढ़ जाता है, जो लकवा का कारण बनता है।
न्यूरोलॉजिकल विकार (Neurological Disorders): मल्टीपल स्केलेरोसिस (Multiple Sclerosis), गिल्लन-बैरे सिंड्रोम (Guillain-Barré Syndrome), या मोटर न्यूरॉन बीमारी जैसी न्यूरो से जुड़ी गंभीर समस्याएं नसों को धीरे-धीरे डैमेज कर देती हैं।
ट्यूमर (Tumor): दिमाग या रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर (गांड़) होने पर वह आस-पास की नसों पर दबाव डालता है, जिससे उस हिस्से में लकवा मार सकता है।
संक्रमण (Infections): मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी में गंभीर संक्रमण (जैसे मेनिनजाइटिस या पोलियो) भी नसों को नुकसान पहुँचाकर पैरालिसिस का कारण बन सकता है।
हैंड रिहैबिलिटेशन रोबोटिक ग्लव (Hand Rehabilitation Robotic Glove) मशीन के पैरालिसिस (लकवा) के मरीजों के लिए 5 मुख्य लाभ दिए गए हैं:
1. न्यूरोप्लास्टिसिटी और ब्रेन रीमॉडलिंग (Neuroplasticity)
यह मशीन लकवाग्रस्त हाथ से बार-बार एक ही मूवमेंट (जैसे मुट्ठी बंद करना और खोलना) करवाती है। इससे दिमाग के बंद हिस्से दोबारा सक्रिय होते हैं और नए न्यूरल पाथवे बनते हैं, जिससे हाथ की मूवमेंट वापस आने में मदद मिलती है।
2. मिरर थेरेपी (Mirror Therapy)
इस मशीन में 'मिरर थेरेपी' का बेहतरीन फीचर है। मरीज जब अपने स्वस्थ हाथ में सेंसर ग्लव पहनकर कोई मूवमेंट करता है, तो यह रोबोटिक ग्लव लकवाग्रस्त हाथ से भी हुबहू वैसी ही मूवमेंट कराता है। इससे दिमाग को लगता है कि दोनों हाथ ठीक से काम कर रहे हैं, जिससे रिकवरी बहुत तेजी से होती है।
3. जकड़न (Spasticity) और मांसपेशियों को सुकटने से बचाना
पैरालिसिस के कारण अक्सर उंगलियां और कलाई कड़क (जाम) हो जाती हैं। यह मशीन उंगलियों को धीरे-धीरे स्ट्रेच (खिंचाव) देती है, जिससे जोड़ों की जकड़न दूर होती है और नसें व मांसपेशियां हमेशा लचीली बनी रहती हैं।
4. सिंगल-फिंगर टारगेटेड थेरेपी (Single-Finger Training)
इस मशीन के कंट्रोल पैनल की मदद से किसी भी एक या दो उंगलियों को अलग से थेरेपी दी जा सकती है। अगर मरीज की कोई खास उंगली (जैसे अंगूठा या इंडेक्स फिंगर) ज्यादा कमजोर है, तो उसे टारगेट करके उसकी विशेष एक्सरसाइज कराई जा सकती है।
5. ब्लड सर्कुलेशन में सुधार और सूजन कम करना
लकवाग्रस्त हाथ में मूवमेंट न होने के कारण खून का दौरा धीमा पड़ जाता है, जिससे हाथ में भारीपन या सूजन (Edema) आ जाती है। इस ग्लव की लगातार होने वाली मूवमेंट से हाथ में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और सूजन दूर होती है।
इलाज और परामर्श के लिए:
डॉ. दीपिका
अंगिरा गुरुकुल मल्टी थेरेपी सेंटर
#1828, सेक्टर 6, करनाल, हरियाणा