Manish vashist

Manish vashist Treatment with nature and Ayurveda

22/03/2026

22/03/2026

बरगद् से रोग़ ठीक क़रे और like करके अपने भाईं क़ा साथ दे

We all miss u Nana g
29/07/2023

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20/07/2023

🚩‼️ ओ३म् ‼️🚩

🔥प्राण किसे कहते है ?
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हमारा शरीर जिस तत्व के कारण जीवित है उसका नाम प्राण है। प्राण जड वस्तु है।शरीर के सभी अंग प्राण से ही शक्ति पाकर अपने काम करते है। प्राण से ही भोजन का पाचन रस,रक्त ,मांस,मेद आदि धातु ओ का निर्माण , व्यर्थ पदार्थों का बाहर निकलना,उठना ,बैठना ,चलना ,बोलना ,चिन्तन ,मनन ,ध्यान आदि सब स्थूल व सूक्ष्म क्रिया होती है।प्राण यदि बलवान है तो शरीर के सभी अंग ठीक से कार्य करते है और यदि निर्बल है तो शरीर रोगी हो जाताहै। इसलिए शरीर को स्वस्थ रखने के लिए प्राण को शुद्ध खानपान ,प्रगाढ निद्रा ,ब्रह्मचर्य व प्राणायाम के द्वारा बलवान बनाना चाहिये ।
प्राण दश होते है।

१-प्राण- इसका स्थान नासिका से हृदय तक है। आंख ,नाक,कान मुख आदि इसी की सहायता से काम करते है।

२- अपान- इसका स्थान नाभि से पैर तक होता है। मल,मूत्र , प्रजनन आदि क्रिया इसकी सहायता से होती है।

३- समान- इसका स्थान हृदय से नाभि तक होता है।यह खाये अन्न को पचाने तथा उससे रस ,रक्त आदि धातु बनाने का कार्य करता है।

४- उदान- यह कण्ठ से सिर तक रहता है। बोलना,उल्टियाँ करना इसी के कारण होता है।

५- व्यान- यह सारे शरीर मे रहता है। हृदय से मुख्यत:१०१ नाडिया निकलती है उनकी अनेक शाखा है।सारे शरीर मे रक्त संचार का कार्य यही करता है।

६- नाग- यह कण्ठ से मुख तक रहता है।डकार ,हिचकी इसी से होती है।

७- कूर्म- इसका स्थान नेत्र गोलक है।गोलको को उपर नीचे दांये बांये यही घुमाता है।आंसू भी इसी से आते है।

८- कृकल- यह मुख से हृदय तक रहता है।भूख ,प्यास ,जंभाई इसी से उत्पन्न होती है।

९- देवदत्त- यह नासिका से कण्ठ तक होता है।इससे छींक , आलस्य , निद्रा आदि आती है।

१०- धनञ्जय- यह सारे शरीर मे व्यापक रहता है।इसका कार्य शरीर के अवयवों को खींचे रखना ,मांसपेशियो को सुंदर बनाना है।

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🕉️🚩 आज का वेद मंत्र 🚩🕉️

🔥ओ३म् योगे योगे तवस्तरम् वाजे वाजे हवामहे । सखाय इंद्र मूतये।। (सामवेद १६३)

💐 अर्थ: प्रत्येक सुख व दुख में परमेश्वर का सखा भाव से स्मरण करें, जिससे जिससे संपत्ति में हम अभिमत होकर आत्महानि न कर सकें और विपत्ति पर निराश होकर आत्मग्लानि ना कर सके

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19/07/2023
13/07/2023

नपुंशकता या नामर्दी के इलाज के लिए दवा निर्माण विधि
निम्न जड़ी-बूटियों का चूर्ण दिये गये परिमाण में इकठ्ठा कर लें-
1. जावित्री का चूर्ण-10 ग्राम
2. जायफल का चूर्ण-10 ग्राम
3. अकरकरा का चूर्ण-10 ग्राम
4. पिपरामूल का चूर्ण-10 ग्राम
5. पिप्पली का चूर्ण-10 ग्राम
6. आक (मदार) का दूध-30 ग्राम
उपरोक्त सभी काष्ठ औषधियों के चूर्ण को आपस में अच्छी तरह मिला लें। मिलाने के बाद आपके पास कुल 50 ग्राम चूर्ण का मिश्रण हो जाएगा। इस चूर्ण में 30 ग्राम आक (मदार) के दूध को डालकर अच्छी तरह मिलाएं जबतक कि मदार का दूध पूरी तरह चूर्ण में मिलकर एकजान न हो जाए। अब इस चूर्ण को गुड़ के साथ मिलाकर चने के आकार की गोलियां बना लें और सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करें।
याद रहे कि यह दवा खाली पेट ही लेना है तथा दवा लेने के कम से कम दो घंटे तक कुछ भी खाना या पीना नहीं है। दवा सेवन के साथ-साथ आपको लिंग पर प्रतिदिन सोते समय तेल की मालिश करनी है

लिंग पर मालिश करने के लिए तेल बनाने की विधि
ऊपर जो औषधियां बताई गयी हैं उन्हें 10-10 ग्राम की मात्रा में लेना है अर्थात् जावित्री का चूर्ण-10 ग्राम, जायफल का चूर्ण-10 ग्राम, अकरकरा का चूर्ण-10 ग्राम, पिपरामूल का चूर्ण-10 ग्राम, पिप्पली का चूर्ण-10 ग्राम और आक (मदार) का दूध-10 ग्राम। यदि आपको कही पीली ततैया का छत्ता मिल जाए तो 10 ग्राम की मात्र में उसे भी ले सकते हैं, यदि नहीं मिले तो छोड़ दें।
उपरोक्त सभी औषधियों को आपस में अच्छी तरह मिलाकर 200 ग्राम तिल के तेल में डालकर एकदम कम आंच पर धीरे-धीरे चला-चला कर पकाना है। जब तेल एक चौथाई रह जाए तो पूरी दवा को ठंडा होने के लिए एक घंटा के लिए ढ़क कर रख दें।
जब दवा ठंडा हो जाए तो तेल को कपड़े से अच्छी तरह छान कर अलग कर लें एवं इस तेल से प्रतिदिन सोने से पहले लिंग के ऊपरी हिस्से पर अच्छी तरह दो मिनट मालिश करें।
यदि संभव हो तो मालिश करने के बाद पान के पत्ते को गरम करके सूत के धागे से लिंग पर बांध दें। जब रात में या सुबह लिंग में तनाव आ जाए तो पत्ते को फेंक दें।
इस प्रकार कम से कम 40 से 60 दिन तक बताए गये विधि अनुसार दवा सेवन करते हुए तेल का भी स्तेमाल करने से नपुंसकता का इलाज या नामर्दी का इलाज पूर्ण होता है। और रोगी पुनः अपने आप में युवा जोश एवं ताकत का अनुभव करता है।

12/07/2023

सीमा हैदर
4 बच्चे,उम्र 27 साल
5वी पास होकर - फंराटेदार इंगलिश बोलना
कंप्यूटर चलाने की बहुत अच्छी नोलेज होना
पांच पांच पासपोर्ट होना
तीन तीन मोबाइल फोन का होना
सिमकार्ड का पाया जाना
पाकिस्तान से दुबई
दुबई से नेपाल
नेपाल से भारत
चुपके से गलत तरीके से नेपाल के रास्ते भारत मे दाख़िल होना!
आते ही तुरन्त साड़ी,नमस्ते,अभिवादन,सादगी व भारतीय परिवेश में ढल जाना, फर्राटेदार हिंदी व अँग्रेजी बोलना,उर्दू का एक लफ्ज़ भी जुबान पर नहीं आने देना...
"आप को मजाक लग रहा है "
ऐ बन्दी वो कर सकती है जो आप सोच भी नहीं सकते....
मीडिया इंटरव्यू कर रहा है, सोसलमिडिया अपनी पीट थपथपा रहा है! देश उत्सव मना रहा है,नो डाउट जिस भावुकता से स्वागत किया जा रहा जल्दी ही नागरिकता भी मिलने वाली हैं और हो सकता है सरकारी नोकरी भी मिल जाये! क्योकी एक वर्ग इसीलिए खुश हैं कि वो अब्दुल के पास नहीं सचिन हिंदू के पास भागकर आई है!
लेकिन! यह टोटली फेल्यर है, देश के लिए, सुरक्षा ऐजेंसियों के लिए, सरकार के लिए, NIA के लिए, सेना के लिए, RAW के लिए, CBI के लिए, आखिर भारत मे कोई ऐसे ही आ सकता है!

सोचिये जरुर! यह प्यार का सवाल नही! हमारे आप के घर,परिवार, गांव-शहर, देश, की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है!

19/05/2023

धनवंतरि मंत्र
भारतीय वैदिक परंपराओं में मनुष्य की हर समस्या का समाधान बताया गया है। इनमें मंत्रों को प्रमुख माना गया है। वेदों में ऐसे अनेक मंत्रों का उल्लेख है, जो व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रखते हैं। ऐसा ही एक मंत्र है धनवंतरि मंत्र। भगवान धनवंतरि को आयुर्वेद का जनक माना गया है। समुद्र मंथन के दौरान इनकी उत्पत्ति हाथों में अमृत कलश लेकर हुई थी। इसी अमृत ने देवताओं को अपराजेय और अक्षय बनाया। इन्हीं भगवान धनवंतरि को समर्पित है धनवंतरि मंत्र। वेदों में कहा गया है कि इस मंत्र के नियमित जाप से समस्त रोगों से मुक्ति मिलती है। आयुर्वेद पद्धति के डॉक्टर आज भी अपने मरीज का इलाज करने से पहले, मरीज को दवाई देने से पहले, मरीज को इंजेक्शन लगाने से पहले भगवान धनवंतरि का ध्यान करके ही दवाई आदि देते हैं। इससे रोगी के ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है।

ऊं नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये:
अमृतकलश हस्ताय सर्व भयविनाशाय सर्व रोगनिवारणाय
त्रैलोक्यपतये त्रैलोक्यनिधये
श्री महाविष्णुस्वरूप श्री धनवंतरी स्वरूप
श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय स्वाहा।
कैसे करें इस मंत्र का जाप
इस मंत्र का जाप प्रतिदिन सूर्योदय के समय किया जाता है। स्नानादि से निवृत्त होकर, स्वच्छ वस्त्र धारण कर, आसन बिछाकर पूर्वाभिमुख होकर बैठ जाएं। अपने सामने तांबे के एक कलश्ा में ताजा पानी भरकर उसमें कुछ पत्ते तुलसी के डालें। फिर धनवंतरि मंत्र की पांच या 11 माला जाप करें। यह पानी रोगी को बार-बार पिलाएं

19/05/2023

संपूर्ण महामृत्युंजय मंत्र

ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृ त्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ।

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